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Netaji ka Chashma Question Answers Class 10 Hindi A Kshitij Book Chapter 7

 

 

NCERT Solutions for Class 10 Hindi A Kshitij Bhag 2 Book Chapter 7 नेताजी का चश्मा Question Answers

 
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Class 10 Hindi Netaji ka Chashma Lesson 7– Extract Based Questions (पठित काव्यांश) 

 

1 – 

हालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था। कस्बा बहुत बड़ा नहीं था। जिसे पक्का मकान कहा जा सके वैसे कुछ ही मकान और जिसे बाजार कहा जा सके वैसा एक ही बाजार था।  कस्बे में एक लड़कों का स्कूल , एक लड़कियों का स्कूल , एक सीमेंट का छोटा – सा कारखाना , दो ओपन एयर सिनेमाघर और एक ठो नगरपालिका भी थी। नगरपालिका थी तो कुछ – न – कुछ करती भी रहती थी। कभी कोई सड़क पक्की करवा दी , कभी कुछ पेशाबघर बनवा दिए , कभी कबूतरों की छतरी बनवा दी तो कभी कवि सम्मेलन करवा दिया। इसी नगरपालिका के किसी उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने एक बार ‘ शहर ’ के मुख्य बाजार के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी। यह कहानी उसी प्रतिमा के बारे में है , बल्कि उसके भी एक छोटे – से हिस्से के बारे में। पूरी बात तो अब पता नहीं , लेकिन लगता है कि देश के अच्छे मूर्तिकारों की जानकारी नहीं होने और अच्छी मूर्ति की लागत अनुमान और उपलब्ध बजट से कहीं बहुत ज्यादा होने के कारण काफी समय उफहापोह और चिठ्ठी – पत्री में बरबाद हुआ होगा और बोर्ड की शासनावधि समाप्त होने की घड़ियों में किसी स्थानीय कलाकार को ही अवसर देने का निर्णय किया गया होगा, और अंत में कस्बे के इकलौते हाई स्कूल के इकलौते ड्राइंग मास्टर – मान लीजिए मोतीलाल जी – को ही यह काम सौंप दिया गया होगा , जो महीने – भर में मूर्ति बनाकर ‘ पटक देने ’ का विश्वास दिला रहे थे।

 

प्रश्न 1 – हालदार साहब को कितने दिनों बाद कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरना पड़ता था?

(क) हर चौदवें दिन

(ख) हर अठारवें दिन

(ग) हर पंद्रहवें दिन

(घ) हर बारवें दिन

उत्तर – (ग) हर पंद्रहवें दिन

 

प्रश्न 2 – “नेताजी का चश्मा” पाठ के आधार पर बताइये कि उस कस्बे में क्या-क्या था? 

(क) एक छोटी सा बाजार , लड़कों और लड़कियों का एक -एक स्कूल

(ख) एक सीमेंट का छोटा सा कारखाना 

(ग) दो ओपन सिनेमा घर और एक नगरपालिका 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 3 – नगरपालिका कस्बे में क्या काम करती रहती थी? 

(क) कभी कोई सड़क पक्की करवा दी , कभी कुछ पेशाबघर बनवा दिए 

(ख) कभी कबूतरों की छतरी बनवा दी तो कभी कवि सम्मेलन करवा दिया

(ग) इसी नगरपालिका के किसी उत्साही बोर्ड या प्रशासनिक अधिकारी ने एक बार ‘ शहर ’ के मुख्य बाजार के मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की एक संगमरमर की प्रतिमा लगवा दी

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 4 – प्रश्तुत गद्यांश से क्या पता चलता है कि यह कहानी किसके बारे में है? 

(क) किसी प्रतिमा के बारे में

(ख) सुभाष चंद्र बोस  जी की प्रतिमा में उनके चश्मे के बारे में  

(ग) सुभाष चंद्र बोस  जी के बारे में 

(घ) लेखक के निजी अनुभवों के बारे में 

उत्तर – (ख) सुभाष चंद्र बोस  जी की प्रतिमा में उनके चश्मे के बारे में  

 

प्रश्न 5 – सुभाष चंद्र बोस जी की प्रतिमा को बनाने का जिम्मा किसे दिया गया?

(क) शहर के प्रसिद्ध पेंटर-मोतीलाल जी

(ख) शहर के प्रसिद्ध ड्राइंग मास्टर-मोतीलाल जी

(ग) हाई स्कूल के इकलौते ड्राइंग मास्टर-मोतीलाल जी

(घ) शहर के प्रसिद्ध मूर्तिकार-मोतीलाल जी

उत्तर – (ग) हाई स्कूल के इकलौते ड्राइंग मास्टर-मोतीलाल जी

 

2 – 

जैसा कि कहा जा चुका है , मूर्ति संगमरमर की थी। टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक कोई दो फुट ऊँची। जिसे कहते हैं बस्ट। और सुंदर थी। नेताजी सुंदर लग रहे थे। कुछ – कुछ मासूम और कमसिन। फ़ौजी वर्दी में। मूर्ति को देखते ही ‘ दिल्ली चलो ’ और ‘ तुम मुझे खून दो … ’  वगैरह याद आने लगते थे। इस दृष्टि से यह सफल और सराहनीय प्रयास था। केवल एक चीज़ की कसर थी जो देखते ही खटकती थी। नेताजी की आँखों पर चश्मा नहीं था। यानी चश्मा तो था , लेकिन संगमरमर का नहीं था। एक सामान्य और सचमुच के चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम मूर्ति को पहना दिया गया था। हालदार साहब जब पहली बार इस कस्बे से गुज़रे और चौराहे पर पान खाने रुके तभी उन्होंने इसे लक्षित किया और उनके चेहरे पर एक कौतुकभरी मुसकान फैल गई। वाह भई ! यह आइडिया भी ठीक है। मूर्ति पत्थर की , लेकिन चश्मा रियल ! जीप कस्बा छोड़कर आगे बढ़ गई तब भी हालदार साहब इस मूर्ति के बारे में ही सोचते रहे , और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि कुल मिलाकर कस्बे के नागरिकों का यह प्रयास सराहनीय ही कहा जाना चाहिए। महत्त्व मूर्ति के रंग – रूप या कद का नहीं , उस भावना का है वरना तो देश – भक्ति भी आजकल मजाक की चीज़ होती जा रही है। 

 

प्रश्न 1 – टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक कोई दो फुट ऊँची मूर्ति क्या कहलाती है?  

(क) बस्ट

(ख) बेस्ट 

(ग) बीस्ट 

(घ) बायस्ट 

उत्तर – (क) बस्ट

 

प्रश्न 2 – मूर्ति में नेताजी कैसे लग रहे थे?। फ़ौजी वर्दी में।

(क) सुंदर

(ख) कुछ-कुछ मासूम 

(ग) कुछ-कुछ कमसिन

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 3 – नेता जी की मूर्ति में किस चीज़ की कसर थी जो देखते ही खटकती थी? 

(क) नेताजी फौजी बर्दी में थे 

(ख) नेताजी की आँखों पर चश्मा नहीं था

(ग) नेताजी मासूम और कमसिन लग रहे थे 

(घ) नेताजी क्रांतिकारी नहीं दिखाई देते थे 

उत्तर – (ख) नेताजी की आँखों पर चश्मा नहीं था

 

प्रश्न 4 – मूर्ति पत्थर की, लेकिन चश्मा रियल ! कस्बे के नागरिकों के इस प्रयास को हालदार साहब क्या समझते है?

(क) बेकार 

(ख) बेमतलब 

(ग) सराहनीय

(घ) दंडनीय 

उत्तर – (ग) सराहनीय

 

प्रश्न 5 – हालदार साहब जब पहली बार इस कस्बे से गुज़रे और चौराहे पर पान खाने रुके तभी उन्होंने क्या लक्षित किया? 

(क) कि मूर्ति पत्थर की , लेकिन चश्मा रियल का है 

(ख) कि मूर्ति संगमरमर के पत्थर की है 

(ग)  कि मूर्ति पत्थर पर चश्मा रियल का है

(घ) कि कस्बे के लोग लापरवाह है 

उत्तर – (क) कि मूर्ति पत्थर की , लेकिन चश्मा रियल का है 

 

3 – 

हालदार साहब को यह सब कुछ बड़ा विचित्र और कौतुकभरा लग रहा था। इन्हीं खयालों में खोए – खोए पान के पैसे चुकाकर , चश्मेवाले की देश – भक्ति के समक्ष नतमस्तक होते हुए वह जीप की तरफ चले , फिर रुके , पीछे मुडे़ और पानवाले के पास जाकर पूछा , क्या कैप्टन चश्मेवाला नेताजी का साथी है ? या आजाद हिन्द फौज का भूतपूर्व सिपाही ? पानवाला नया पान खा रहा था। पान पकड़े अपने हाथ को मुँह से डेढ़ इंच दूर रोककर उसने हालदार साहब को ध्यान से देखा , फिर अपनी लाल – काली बत्तीसी दिखाई और मुसकराकर बोला – नहीं साब ! वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल ! वो देखो , वो आ रहा है। आप उसी से बात कर लो। फोटो – वोटो छपवा दो उसका कहीं।

हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक देशभक्त का इस तरह मजाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा। मुड़कर देखा तो अवाक रह गए। एक बेहद बूढ़ा मरियल – सा लँगड़ा आदमी सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा लगाए एक हाथ में एक छोटी – सी संदूकची और दूसरे हाथ में एक बाँस पर टँगे बहुत – से चश्मे लिए अभी – अभी एक गली से निकला था और अब एक बंद दुकान के सहारे अपना बाँस टिका रहा था। तो इस बेचारे की दुकान भी नहीं!  फेरी लगाता है ! हालदार साहब चक्कर में पड़ गए। पूछना चाहते थे , इसे कैप्टन क्यों कहते हैं ? क्या यही इसका वास्तविक नाम है ? लेकिन पानवाले ने साफ बता दिया था कि अब वह इस बारे में और बात करने को तैयार नहीं।

 

प्रश्न 1 – हालदार साहब किसके समक्ष नतमस्तक थे?

(क) पानवाले की देश-भक्ति के समक्ष 

(ख) चश्मेवाले के समक्ष 

(ग) चश्मेवाले की देश-भक्ति के समक्ष 

(घ) कस्बे के लोगों की देश-भक्ति के समक्ष 

उत्तर – (ग) चश्मेवाले की देश-भक्ति के समक्ष 

 

प्रश्न 2 – चश्मेवाले के बारे में पानवाले के पास जाकर हालदार साहब ने क्या पूछा? 

(क) क्या कैप्टन चश्मेवाला नेताजी का साथी है 

(ख) क्या कैप्टन चश्मेवाला आजाद हिन्द फौज का भूतपूर्व सिपाही 

(ग) क्या कैप्टन चश्मेवाला नेताजी का साथी है ? या आजाद हिन्द फौज का भूतपूर्व सिपाही 

(घ) केवल (ख)

उत्तर – (ग) क्या कैप्टन चश्मेवाला नेताजी का साथी है ? या आजाद हिन्द फौज का भूतपूर्व सिपाही 

 

प्रश्न 3 – ‘वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल’ किसका कथन है?

(क) पानवाले का 

(ख) कैप्टन चश्मेवाले का  

(ग) हालदार साहब का 

(घ) नेता जी का 

उत्तर – (क) पानवाले का 

 

प्रश्न 4 – कैप्टन चश्मेवाले का हुलिया कैसा था?

(क) एक लँगड़ा आदमी सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा लगाए था 

(ख) एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा था 

(ग) एक हाथ में एक छोटी-सी संदूकची और दूसरे हाथ में एक बाँस पर टँगे बहुत-से चश्मे लिए था 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 5 – हालदार साहब सब कुछ जान कर क्या पूछना चाहते थे? 

(क) पानवाला चश्मेवाले को पागल क्यों कहता है 

(ख) चश्मेवाले को कैप्टन क्यों कहते हैं 

(ग) चश्मे वाले से कौन चश्मे खरीदता है 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (ख) चश्मेवाले को कैप्टन क्यों कहते हैं

 

4 – 

बार – बार सोचते , क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर – गृहस्थी – जवानी – ज़िदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुज़रे। कस्बे में घुसने से पहले ही खयाल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी , लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा। … क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। … और कैप्टन मर गया। सोचा , आज वहाँ रुकेंगे नहीं , पान भी नहीं खाएँगे , मूर्ति की तरफ देखेंगे भी नहीं , सीधे निकल जाएँगे। ड्राइवर से कह दिया , चौराहे पर रुकना नहीं , आज बहुत काम है , पान आगे कहीं खा लेंगे। लेकिन आदत से मजबूर आँखें चौराहा आते ही मूर्ति की तरफ उठ गईं। कुछ ऐसा देखा कि चीखे , रोको ! जीप स्पीड में थी , ड्राइवर ने जोर से ब्रेक मारे। रास्ता चलते लोग देखने लगे। जीप रुकते – न – रुकते हालदार साहब जीप से कूदकर तेज़ – तेज़ कदमों से मूर्ति की तरफ लपके और उसके ठीक सामने जाकर अटेंशन में खड़े हो गए।

मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा – सा चश्मा रखा हुआ था , जैसा बच्चे बना लेते हैं।

हालदार साहब भावुक हैं। इतनी – सी बात पर उनकी आँखें भर आईं। 

 

प्रश्न 1 –  हालदार साहब के दुखी होने का क्या कारण था?

(क) वह यह देख रहे थे कि आज लोगों के मन में देशभक्तों, शहीदों के प्रति सम्मान की भावना कम होती जा रही है

(ख)वह यह देख रहे थे कि लोग स्वार्थी एवं मौकापरस्त होते जा रहे हैं

(ग) वह यह देख रहे थे कि देशभक्ति की भावना प्रायः लुप्त होती जा रही है।

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 2 – कस्बे में घुसने से पहले ही हालदार साहब को क्या खयाल आया? 

(क) कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी 

(ख) सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा

(ग) कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा पर चश्मा नहीं होगा, क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया और कैप्टन मर गया

(घ) कि कैप्टन मर गया

उत्तर – (ग) कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा पर चश्मा नहीं होगा, क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया और कैप्टन मर गया

 

प्रश्न 3 – कैप्टन के मर जाने के बाद, नेता जी की प्रतिमा को बिना चश्मे के देखने से अच्छा लेखक ने क्या सोचा?

(क) वे कस्बे में रुकेंगे नहीं , पान भी नहीं खाएँगे 

(ख) वे मूर्ति की तरफ देखेंगे भी नहीं 

(ग) वे मूर्ति की तरफ देखें बिना सीधे निकल जाएँगे

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 4 – हालदार साहब ने ड्राइवर से क्या कहा?  

(क) चौराहे पर रुकना नहीं , आज बहुत काम है , पान आगे कहीं खा लेंगे

(ख) चौराहे पर बिना पान खाए आगे नहीं जाएंगे 

(ग) आज बहुत काम है जल्दी पान खा लेंगे

(घ) चौराहे पर रुके बिना पान ले कर खा लेंगे

उत्तर – (क) चौराहे पर रुकना नहीं , आज बहुत काम है , पान आगे कहीं खा लेंगे

 

प्रश्न 5 – मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। इसे देखकर हालदार साहब कैसा महसूस करने लगे?

(क) हालदार साहब की आँखें गुस्से से लाल हो गई 

(ख) हालदार साहब भावुक हो गए और उनकी आँखें भर आईं

(ग) हालदार साहब इस बात से चीड़ गए   

(घ) हालदार साहब क्रोधित हो गए 

उत्तर – (ख) हालदार साहब भावुक हो गए और उनकी आँखें भर आईं