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Lakhnavi Andaz Question Answers Class 10 Hindi A Kshitij Book Chapter 9

 

 

NCERT Solutions for Class 10 Hindi A Kshitij Bhag 2 Book Chapter 9 लखनवी अंदाज़ Question Answers

 

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Class 10 Hindi Lakhnavi Andaz Lesson 9– Extract Based Questions (पठित काव्यांश)

 

1 –

ठाली बैठे , कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है , नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा हो कि शहर का कोई सफेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफर करता देखे।अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे और अब किसी सफेदपोश के सामने खीरा कैसे खाएँ?

हम कनखियों से नवाब साहब की ओर देख रहे थे। नवाब साहब कुछ देर गाड़ी की खिड़की से बाहर देखकर स्थिति पर गौर करते रहे।

ओह ’ , नवाब साहब ने सहसा हमें संबोधन किया ,  ‘ आदाबअर्ज़ ’ , जनाब , खीरे का शौक फरमाएँगे ?

नवाब साहब का सहसा भावपरिवर्तन अच्छा नहीं लगा। भाँप लिया , आप शराफत का गुमान बनाए रखने के लिए हमें भी मामूली लोगों की हरकत में लथेड़ लेना चाहते हैं। जवाब दिया ,  ‘ शुक्रिया , किबला शौक फरमाएँ।नवाब साहब ने फिर एक पल खिड़की से बाहर देखकर गौर किया और दृढ़ निश्चय से खीरों के नीचे रखा तौलिया झाड़कर सामने बिछा लिया। सीट के नीचे से लोटा उठाकर दोनों खीरों को खिड़की से बाहर धोया और तौलिए से पोंछ लिया। जेब से चाकू निकाला। दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला। फिर खीरों को बहुत एहतियात से छीलकर फाँकों को करीने से  तौलिए पर सजाते गए।

 

प्रश्न 1 – खाली बैठे रहने पर लेखक की क्या आदत है?

() दिन भर सोए रहने की

() कल्पना करते रहने की पुरानी आदत

() सभी को परेशान करने की

() कुछकुछ लिखते रहने की

उत्तर () कल्पना करते रहने की पुरानी आदत

 

प्रश्न 2 – लेखक नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का क्या अनुमान करने लगे?

() संभव है , नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो

() नवाब साहब को गवारा हो कि शहर का कोई सफेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफर करता देखे

() नवाब साहब ने अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे और अब किसी सफेदपोश के सामने खीरा कैसे खाएँ?

() उपरोक्त सभी

उत्तर () उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 3 – लेखक कैसे नवाब साहब की ओर देख रहे थे?

() कनखियों से

() गौर से

() बिलकुल सीधे

() ऊपर से निचे

उत्तर – () कनखियों से

 

प्रश्न 4 – नवाब साहब ने लेखक से क्या पूछा?

() जनाब , आप कहाँ से आए हैं 

() जनाब , आप किसे ढूंढ रहे हैं

() जनाब , खीरे का शौक फरमाएँगे

() जनाब , क्या आप गलत डिब्बे में गए हैं

उत्तर () जनाब , खीरे का शौक फरमाएँगे

 

प्रश्न 5 – नवाब साहब का खीरे को खाने के लिए काटने का तरीका कैसा था?

() नवाब साहब ने सीट के नीचे से लोटा उठाकर दोनों खीरों को खिड़की से बाहर धोया और तौलिए से पोंछ लिया

() नवाब साहब ने जेब से चाकू निकाला। दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला

() नवाब साहब ने खीरों को बहुत एहतियात से छीलकर फाँकों को करीने से  तौलिए पर सजाते गए

() उपरोक्त सभी

उत्तर – () उपरोक्त सभी

 

2 –

लखनऊ स्टेशन पर खीरा बेचने वाले खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानते हैं। ग्राहक के लिए जीरामिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया भी हाज़िर कर देते हैं। नवाब साहब ने बहुत करीने से खीरे की फाँकों पर जीरामिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरक दी। उनकी प्रत्येक भावभंगिमा और जबड़ों के स्फुरण से स्पष्ट था कि उस प्रक्रिया में उनका मुख खीरे के रसास्वादन की कल्पना से प्लावित हो रहा था।

हम कनखियों से देखकर सोच रहे थे , मियाँ रईस बनते हैं , लेकिन लोगों की नज़रों से बच सकने के खयाल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं।

नवाब साहब ने फिर एक बार हमारी ओर देख लिया ,  ‘ वल्लाह , शौक कीजिए , लखनऊ का बालम खीरा है ! ’

खीरे की एक फाँक उठाकर होंठों तक ले गए। फाँक को सूँघा। स्वाद के आनंद में पलकें मुँद गईं। मुँह में भर आए पानी का घूँट गले से उतर गया। तब नवाब साहब ने फाँक को खिड़की से बाहर छोड़ दिया। नवाब साहब खीरे की फाँकों को नाक के पास ले जाकर , वासना से रसास्वादन कर खिड़की के बाहर फेंकते गए। नवाब साहब ने खीरे की सब फाँकों को खिड़की के बाहर फेंककर तौलिए से हाथ और होंठ पोंछ लिए और गर्व से गुलाबी आँखों से हमारी ओर देख लिया , मानो कह रहे होंयह है खानदानी रईसों का तरीका। नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए। हमें तसलीम में सिर खम कर लेना पड़ायह है खानदानी तहज़ीब , नफ़ासत और नज़ाकत !

 

प्रश्न 1 – लखनऊ स्टेशन पर खीरा बेचने वाले के खीरे के इस्तेमाल का तरीका क्या है?

() ग्राहक के लिए जीरामिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया भी हाज़िर कर देते हैं

() ग्राहक के लिए नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया हाज़िर कर देते हैं

() ग्राहक के लिए जीरामिला नमक की पुड़िया हाज़िर कर देते हैं

() ग्राहक के लिए पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया हाज़िर कर देते हैं

उत्तर() ग्राहक के लिए जीरामिला नमक और पिसी हुई लाल मिर्च की पुड़िया भी हाज़िर कर देते हैं

 

प्रश्न 2 – लेखक कनखियों से देखकर नवाब साहब के बारे में क्या सोच रहे थे?

() मियाँ रईस बनते हैं , लेकिन शौक खीरा खाने का रखते हैं

() मियाँ रईस बनते हैं , लेकिन लोगों से बात करने का कोई सलीका नहीं

() मियाँ रईस बनते हैं , लेकिन लोगों की नज़रों से बच सकने के खयाल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं

() मियाँ रईस बनते हैं , लेकिन लोगों की नज़रों से बच कर सेकण्ड क्लास में सफ़र कर रहे हैं

उत्तर () मियाँ रईस बनते हैं , लेकिन लोगों की नज़रों से बच सकने के खयाल में अपनी असलियत पर उतर आए हैं

 

प्रश्न 3 – नवाब साहन खीरे की एक फाँक को उठाकर होंठों तक लेने, फाँक को सूँघने, स्वाद के आनंद में मुँह में भर आने पर खीरे की फाँक के साथ क्या करते थे?

() तब नवाब साहब ने फाँक को खा दिया

() तब नवाब साहब ने फाँक को खिड़की से बाहर छोड़ दिया

() तब नवाब साहब ने फाँक को लेखक को दे दिया

() तब नवाब साहब ने फाँक को वापिस तौलिए में रख दिया

उत्तर () तब नवाब साहब ने फाँक को खिड़की से बाहर छोड़ दिया

 

प्रश्न 4 – नवाब साहब ने खीरे की सब फाँकों को खिड़की के बाहर फेंककर तौलिए से हाथ और होंठ पोंछ लिए और गर्व से गुलाबी आँखों से लेखक की ओर देख लिया , ऐसा कर वे क्या कहना चाह रहे थे

() यह है खानदानी रईसों का तरीका

() यह है रईसों द्वारा खाने का तरीका

() यह है खानदानी लोगों का दिखावा करने का तरीका

() यह है रईसों के दिखावे का तरीका

उत्तर () यह है खानदानी रईसों का तरीका

 

प्रश्न 5 – नवाब साहब क्यों थककर लेट गए?

() लेखक को समझासमझा  कर

() सफ़र की तैयारी और इस्तेमाल से

() लेखक से बात करतेकरते 

() खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से

उत्तर – () खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से