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Hard Chrome Plating in Hindi ( हार्ड क्रोमियम प्लेटिंग) – Mechanical Magraj



Hard Chrome Plating in Hindi ( हार्ड क्रोमियम प्लेटिंग)

क्रोमियम इलेक्ट्रोप्लेटिंग को आम बोलचाल की भाषा में क्रोम प्लेटिंग (Chrome-Plating) ही अधिक कहा जाता है । क्रोमियम धातु भी टिन और निकेल के समान ही अत्यधिक मजबूत, घर्षण निरोधी क्षमता से युक्त, धवल श्वेत और चमकदार धातु है। वास्तविकता तो यह कि क्रोमियम धातु की घर्षण विरोधी क्षमता और मजबूती शायद सभी धातुओं में अधिकतम है और यह निकेल के मुकाबले तो कई गुनी अधिक मजबूत होती है। 

निकेल व टिन के समान ही क्रोमियम धातु भी हमारे देश में विदेशों से आयात की जाती है और यह एक अत्यधिक मूल्यवान धातु है। यद्यपि यह निकेल के समान अत्यन्त चमकदार धवल श्वेत और उससे बहुत अधिक मजबूत धातु है परन्तु अत्यन्त महंगी होने के कारण ही क्रोम प्लेटिंग कुछ खास वस्तुओं पर ही की जाती है निकेल के समान लगभग प्रत्येक वस्तु पर नहीं।

क्रोम इलेक्ट्रोप्लाटिंग उपयोगिता, विशेषताएं व पहचान (Chrome plating Utility, Features and Identity)

क्रोमियम प्लेटिंग की गई वस्तुएं भी देखने में निकेल प्लेटेड वस्तुओं के समान ही दिखलाई देती है और उनमें प्रायः कोई अन्तर दृष्टिगोचर नहीं होता। परन्तु तीव्र प्रकाश में रखी हुई क्रोम प्लेटेड वस्तु को देखने पर उसकी सफेद चमक के मध्य, बीच-बीच में हल्के नीले रंग की आभायुक्त, कुछ धब्बे से नजर आते हैं। 

वास्तव में क्रोम धातु की सतह से जब प्रकाश का परावर्तन होता है तब एक विशेष कोण से पड़ने वाले प्रकाश का रंग श्वेत और हल्के नीले रंग की किरणों में विभक्त हो जाता है। कम प्रकाश में यह नीलाभ आभा दिखलाई नहीं देती बल्कि निकेल प्लेटेड के समान ही वस्तु सफेद दिखलाई पड़ती है। यह नीली झलक क्रोम प्लेटिंग का दोष नहीं इसकी प्रमुख पहचान है।

Hard Chrome Plating Process हार्ड क्रोम प्लाटिंग प्रोसेस

निकेल के मुकाबले बहुत अधिक मजबूत होना और क्रोम की बहुत ही बारीक सतह का भी तीव्र घर्षण को सहन करने की क्षमता से युक्त होना ही इसकी प्रमुख विशेषता व उपयोगिता है। मशीनों के ऐसे हिस्से पुजों पर, जो बहुत तीव्र गति से चलते हैं अथवा जिन पर तीव्र रगड़ लगती रहती है, अधिक मजबूत बनाने के लिए बहुधा क्रोम प्लेटिंग की जाती है। 

स्टील फर्नीचर और कारों आदि के बम्पर्स व आउट फिटिंग की डेकोरेटिव वस्तुओं पर भी कभी-कभी क्रोम प्लेटिंग की जाती है। इन पर क्रोम प्लेटिंग दो कारणों से की जाती है उन्हें अधिक घर्षण अवरोधी व मजबूत बनाना और आभा में नीलिमा लाकर सामान्य निकेल प्लेटेड वस्तुओं से विशिष्ट बनाना।

क्रोमियम इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्रक्रिया (Chrome electroplating Process)

क्रोमियम एक अत्यधिक कड़ी और महंगी धातु होने के कारण इसकी बहुत ही पतली सतह वस्तुओं पर जमाई जाती है। आमतौर पर आधे माइक्रोन से तीन चौथाई माइक्रोन (.5 to .8 microns) अर्थात् एक इंच के पांच हजारवें भाग से लेकर तीन हजारवें भाग तक मोटी क्रोमियम की पर्त ही किसी भी वस्तु की सतह पर चढ़ाई जाती है। 

यही कारण है कि किसी भी वस्तु पर क्रोमियम इलेक्ट्रोप्लेटिंग करने से पूर्व उस वस्तु पर निकेल प्लेटिंग कर ली जाती है और फिर उस निकेल प्लेटिंग के ऊपर क्रोम प्लेटिंग कर दी जाती है। कुछ गिनी-चुनी वस्तुओं पर केवल क्रोमियम प्लेटिंग भी की जाती है । 

Hard Chrome plating thickness हार्ड क्रोम प्लाटिंग थिकनेस

ऐसी वस्तुओं पर, जिन पर पहले निकेल प्लेटिंग करने के बाद क्रोम प्लेटिंग करने के स्थान पर, केवल क्रोमियम प्लेटिंग ही की जाती है इसकी मोटाई 12 से 15 थाउ या लगभग एक तिहाई मिलीमीटर (12 to 15 thou.or 0.3 to 04 mm) रखी जाती है । प्योर ऋमियम प्लेटिंग या तो मशीनों के उन छोटे पुों पर की जाती है जो तीव्र गति से लगातार क्रियाशील रहते हैं या हवाई जहाज, रेल के विद्युत इंजनों या अन्य बड़ी व भारी-भरकम मशीनों के कुछ चुने हुए पुर्जों पर।

क्रोमियम प्लेटिंग हमेशा ऊंची करेण्ट डेन्सिटी पर और अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर की जाती है । इसके लिए माइल्ड स्टील की ऐसी टंकी. उचित रहती है जिसमें एण्टीमनी और सीसे धातु के मिश्रण की मोटी परत लगी हो तथा लोहे और सीसे की परत के मध्य पी०वी०सी (P.V.C) अथवा रेनफोर्ड कांच (Reinforced Glass) का भराव हो अर्थात् लोहे की टंकी में पहले पी०वी०सी या ग्लास का अस्तर लगा कर उसपर एण्टीमनी और सीसे की मिश्र धातु (Antimonial-lead) का मोटा अस्तर लगाया गया हो । 

टंकी में भरे हुए घोल को गर्म करने के लिए सीसा चढ़े हुए इमर्शन हीटर (Lead lined or Silica sheathed Immersion Heater) का प्रयोग किया जाता है । क्रोमियम प्लेटिंग बाथ्स में एनोड के रूप में टिन मिश्रित सीसे अथवा एण्टीमनी मिश्रित सीसे के एनोड्स का प्रयोग किया जाता है। क्रोमियम प्लेटिंग के बाथ में वस्तुएं डालने से पहले उन्हें दस प्रतिशत गंधक के तेजाब में धोना अनिवार्य है। दस भाग सल्फ्यूरिक एसिड और नव्वे भाग पानी मिला यह फाइनल बाथ धातु की सतह को हल्का सा एचिंग कर उसे अधिक सेन्सेटिव बना देता है।

1. अधिक सख्त व पतली प्लेटिंग के लिए क्रोमियम बाथ (Light Chromium Plating Bath)

क्रोमिक एसिड (Chromic Acid) – 250 ग्राम

सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric Acid) – 2.5 (ढाई) ग्राम

डिस्टिल्ड वाटर (Distiled Water) – एक लीटर

टारटरिक एसिड (Tartaric Acid) – नौ ग्राम

परिचालन स्थितियां (Required Terms)

बाथ का तापमान (Temp. of Bath)। 100° से 120° फारे० 

करेण्ट डैन्सिटी (Density of Current) – 1200 से 2000 एम्पीयर प्रति वर्ग मीटर अथवा 120 से 200 प्रति वर्ग फुट 

करेण्ट एफीशियेन्सी (Current Efficiency) – 12% से 15%

वोल्टेज (Voltage) – 4 से 5 वोल्ट

एनोड (Anodes) – 7% एण्टीमनी व 93% सीसे की मिश्र धातु के

प्रयोग विधि (How to Use)

एक लीटर डिस्टिल्ड वाटर में क्रोमिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड मिलाइए । याद रखिए इसमें क्रोमिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड (गंधक के तेजाब) का अनुपात हमेशा 100 और 1 (सौ और एक) का रखा जाता है। यदि इस घोल को तैयार करने के बाद 8-10 दिन के लिए रख दिया जाए और उसके बाद प्रयोग किया जाए तो टारटेरिक एसिड मिलाने की आवश्यकता नहीं रहती। यदि घोल तैयार करने के बाद उसी दिन प्रयोग करना हो तो इस घोल में प्रति लीटर नौ ग्राम एसिड मिलाकर घोल को अच्छी तरह उबाल लेना चाहिए । टारटेरिक के स्थान पर आप साढ़े बारह ग्राम (12.5 gram) आग्जेलिक एसिड का भी कर सकते हैं। इस बाथ द्वारा प्लेटिंग धीमी गति से होती है परन्तु उसकी सतह बहुत सख्त बनती है।

2. तेज गति का बाथ (High Speed Bath)

उपरोक्त बाथ में रसायनों की मात्रा लगभग दो गुनी तक करके आप अपेक्षाकृत तीव्र गति से प्लेटिंग करने वाला बाथ तैयार कर हैं। यद्यपि यह बाथ गति से कार्य करता है परन्तु प्लेटिंग की सतह अपेक्षाकृत कम कठोर बनती है । फार्मूला इस प्रकार है

कोमिक एसिड (Chromic Acid) – 450 ग्राम

सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric Acid) – 4.5 ग्राम  (साढ़े चार ग्राम)

साइट्रिक एसिड (Citric Acid) – 12.5 ग्राम

डिस्टिल्ड वाटर (Distiled Water) – एक लीटर

परिचालन स्थितियां और प्रयोग विधि (Method)

यदि यह घोल बनाकर तत्काल प्रयोग करना है तो आप सभी रचकों को मिलाकर अच्छी तरह उबाल लें। यदि घोल बनाने के दस-बारह दिन बाद प्रयोग करना हो तो साइट्रिक एसिड न डालें और न ही उबालें। इस घोल की सभी परिचालन स्थितियां अन्य आवश्यकताएं तथा प्रयोग विधि ऊपर बताए गए घोल के समान ही हैं।

ध्यान रखने योग्य कुछ तथ्य (Points of Remember):

1. उपरोक्त दोनों घोलों के मध्य विविध क्षमता के घोल आप रसायनों की मात्रा में परिवर्तन करके बना सकते हैं । परन्तु घोल बनाते समय सदैव क्रोमिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड में 100 और 1 का ही अनुपात रखें।

2. क्रोमिक एसिड बड़ी कठिनाई से धातु तत्वों को छोड़ता है अतः कुछ अधिक एनोड्स का प्रयोग कीजिए । बाथ की विविध गहराईयों पर इन्हें लटकाइए।

3. यदि प्लेटिंग करते समय करेण्ट की डैन्सिटी कुछ कम रह जाती है तो प्लेटिंग का रंग दूधिया (Milky) हो जाता है। यदि करेण्ट डेन्सिटी आवश्यकता से अधिक हो जाय तो प्लेटिंग कम चमकयुक्त हो पाती है।

4. अच्छी प्लेटिंग के लिए हल्का घोल अधिक अच्छा रहता है।

5, क्रोमिक एसिड में प्रायः सल्फेट की कुछ न कुछ अशुद्धि होती है । घोल तैयार करने के बाद उसे टेस्ट (test) अवश्य कर लीजिए और यदि उसमें सल्फेट (Sulphate) की मात्रा वांछित से अधिक हो तो उसे कम कर लीजिए। क्रोम प्लेटिंग में सल्फेट की यह मात्रा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

6. बाथ के तापमान और करेण्ट डैन्सिटी को एक बार सेट करने के बाद उसी स्तर पर बनाए रखिए । तापमान में मात्र दो अंश (2°F) का उतार-चढ़ाव भी प्लेटिंग खराब कर सकता है।

3. Black Chrome Plating (काली क्रोमियम प्लेटिंग)

जिस प्रकार कुछ सजावटी वस्तुओं पर काली निकेल प्लेटिंग की जाती है उसी प्रकार कुछ वस्तुओं पर काली क्रोम प्लेटिंग भी की जाती है। जैसा कि आप जानते हैं कि काली निकेल प्लेटिंग केवल देखने में सुन्दर लगती है सतह को घर्षणरोधी क्षमता या कठोरता नहीं देती अतः वस्तुओं की सतह की रक्षा के लिए पहले उन पर सामान्य निकेल प्लेटिंग करने के बाद काली क्रोमियम प्लेटिंग कर दी जाती है। 

Black Chrome plating bath formula (काली क्रोम प्लेटिंग के बाथ का फार्मूला) 

क्रोमिक एसिड (Chromic Acid) – 200 ग्राम 

अमोनियम मेटा वैनाडेट (Ammonium Meta Vonadate) – 20 ग्राम 

एसेटिक एसिड (Acetic Acid) – 6.5 मिलीलीटर

डिस्टिल्ड वाटर (Distiled Water) – एक लीटर 

Black Chrome electroplating Processing Method

बाथ का तापमान (Temp. of Bath) – 90° फारेनहाइट 

वोल्टेज (Voltage) – 12 से 15 वोल्ट

करेण्ट डेन्सिटी (Current Density) – 9000 एम्पीयर मीटर अर्थात् 900 एम्पीयर प्रति वर्ग फीट

टैंक, एनोड व विधि (Process) ऊपर की दोनों विधियों के समान

4. Heavy Duty Black Chrome Plating (हेवी ड्यूटी ब्लेक क्रोम प्लेटिंग)

यह काली क्रोम प्लेटिंग सतह की पूर्ण सुरक्षा करने में समर्थ है और इसकी मोटी सतह (thick layer) जमती है । प्रयोगशालाओं और इलेक्ट्रोनिक्स इण्डस्ट्री में काम आने वाले उपकरणों, नित्य उपयोगी फैंसी वस्तुओं तथा सजावटी वस्तुओं पर आजकल इस प्लेटिंग का अधिक प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसमें नीचे निकेल प्लेटिंग की लेयर नहीं जमानी पड़ती। यह प्लेटिंग जमती भी शीघ्र है और प्रयोग में आसान भी है । इस बाथ का एक टिपीकल फार्मूला नीचे दिया जा रहा है

क्रोमिक एसिड (Chromic Acid) – 250 ग्राम

एसेटिक एसिड (Acetic Acid) – 210 ग्राम

बेरियम एसिटेट (Barium Acetate) – आठ ग्राम

शुद्ध जल (Distiled Water) – एक लीटर

परिचालन स्थितियां व विधि (Method)

बाथ का तापमान (Temperature) – 90° से 120° फारेन०

करेण्ट डेन्सिटी (Current Density) –  400 से 800 एम्पी० प्रति वर्ग मीटर

काली क्रोमियम प्लेटिंग के इन दोनों ही बाथों को बनाने के तत्काल बाद ही प्रयोग किया जा सकता है इन्हें कोई भी रसायन डालकर उबालने की आवश्यकता नहीं है । टैंक, एनोड, आदि अन्य सभी वस्तुएं व उनकी सेटिंग और इलेक्ट्रोप्लेटिंग करने का ढंग व्हाइट क्रोम प्लेटिंग के समान ही है। 

प्लेटिंग से पहले 10 से 15 प्रतिशत तक सल्फ्यूरिक एसिड मिले पानी में वस्तुओं को अच्छी तरह धोकर फाइनल बाथ देने के बाद उन्हें प्लेटिंग टैंक में डालना चाहिए। कभी-कभी प्लेटिंग पर विशेष प्रभाव उत्पन्न करने के लिए लोहे, इस्पात या पीतल की वस्तुओं को फाइनल बाथ में थोड़ा एचिंग भी कर लिया जाता है। परन्तु यदि निकेल प्लेटिंग के ऊपर क्रोम प्लेटिंग करनी होती है तब फाइनल बाथ में एचिंग नहीं की जाती उन्हें केवल साफ कर इलेक्ट्रोप्लेटिंग कर ली जाती है।

कॉपर इलेक्ट्रोप्लेटिंग

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एल्युमीनियम एनोडाइजिंग 

क्रोमियम इलेक्ट्रोप्लेटिंग

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