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CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 2 with Solutions

Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B with Solutions Set 2 are designed as per the revised syllabus.

CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 2 with Solutions

निर्धारित समय :3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश :
(i) इस प्रश्नपत्र में दो खंड हैं- खंड ‘अ’ और ‘ब’। खंड ‘अ’ में वस्तुपरक / बहुविकल्पीय और खंड ‘ब’ में वस्तुनिष्ठ वर्णनात्मक प्रश्न दिए गए हैं।
(ii) प्रश्नपत्र के दोनों खंडों में प्रश्नों की संख्या 19 है और सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
(iii) यथासंभव सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखिए।
(iv) खंड ‘अ’ में कुल 12 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 45 हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए 40 उपप्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य हैं।
(v) खंड ‘ब’ में कुल 7 प्रश्न हैं, सभी प्रश्नों के साथ उनके विकल्प भी दिए गए हैं। निर्देशानुसार विकल्प का ध्यान रखते हुए सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

खण्ड ‘अ’
(वस्तुपरक प्रश्न)

‘I’ : अपठित गद्यांश

1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)

आज से प्रायः सौ-सवा सौ साल पहले वाले किसान संघर्षों एवं आन्दोलनों का वर्णन मिलता है। इसमें सबसे पुराना मालाबार के मोपला किसानों का विद्रोह है, जो 1936 में शुरू हुआ था। कहने वाले कहते हैं कि ये मोपले कट्टर मुसलमान होने के नाते अपना आन्दोलन धार्मिक कारणों से ही करते रहे हैं। असहयोग-युग के उनके विद्रोह के बारे में तो स्पष्ट ही यही बात कही गई है। मगर ऐसा कहने-मानने वाले अधिकारियों एवं ज़मींदारों – मालदारों के लेखों तथा बयानों से ही यह बात सिद्ध हो जाती है कि दरअसल आर्थिक एवं सामाजिक उत्पीड़न ही इस विद्रोह के असली कारण रहे हैं और धार्मिक रंग अगर उन पर चढ़ा है तो कार्य-कारणवश ही प्रसंगवश ही। 1920 और 1921 वाले विद्रोह को तो सभी ने, यहाँ तक कि महात्मा गांधी ने भी धार्मिक ही माना है। असहयोग युग के बाद जो भी किसान आन्दोलन हुए हैं उन्हें संगठित रूप मिला है, यह बात सही है । संगठित से हमारा आशय सदस्यता के आधार पर बनी किसान सभा और किसानों की पंचायत से है, जिसका कार्यालय नियमित रूप से काम करता रहता है और समय पर सभी समितियाँ होती रहती हैं। कागज़ी घुड़दौड़ भी चालू रहती है। यह बात पहले न थी । इस से पूर्ववर्ती आन्दोलन असंगठित था तथा विद्रोहों को तत्काल सफ़ल होने के लिए उनका किसी-न-किसी रूप में संगठित होना अनिवार्य था । ‘पतिया’ जारी करने का रिवाज़ अत्यन्त प्राचीन है। मालूम होता है, पहले दो-चार अक्षरों या संकेतों के द्वारा ही संगठन का मंत्र फूँका जाता था । यातायात के साधनों के अभाव में उसे वर्तमानकालीन सफ़लता एवं विस्तार प्राप्त नहीं होते थे।

(1) सबसे पुराना किसान आन्दोलन कब शुरू हुआ ?
(क) 1934
(ख) 1935
(ग) 1936
(घ) 1937
उत्तर:
(ग) 1936

व्याख्या – सबसे पुराना किसान विद्रोह मालाबार के मोपला किसानों का विद्रोह है जो 1936 में शुरू हुआ ।

(2) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन (A) : मोपला किसानों के विद्रोह का मुख्य कारण आर्थिक उत्पीड़न था ।
कारण (R) : मोपला किसानों के विद्रोह का मुख्य कारण सामाजिक उत्पीड़न भी था ।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) सही है तथा कारण (R) गलत है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
(घ) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है ।
उत्तर:
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।

व्याख्या- मोपला किसानों के विद्रोह का मुख्य कारण आर्थिक एवं सामाजिक उत्पीड़न था ।

(3) संगठित किसान आन्दोलन की क्या विशेषताएँ थीं ?
(क) सदस्यता के आधार पर बनी किसान सभा ।
(ख) सदस्यता के आधार पर बनी किसान पंचायत ।
(ग) नियमित रूप से काम करना ।
(घ) सभी
उत्तर:
(घ) सभी

व्याख्या – संगठित किसान आंदोलन सदस्यता के आधार पर बनी किसान सभा और किसानों की पंचायत से है। जिनका कार्यालय नियमित रूप से काम करता है।

(4) असहयोग युग के बाद किसान आन्दोलन में क्या बदलाव आए?
(क) किसान संगठित हो गए।
(ख) किसान असंगठित हो गए।
(ग) विकल्प (क) और (ख)।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(क) किसान संगठित हो गए।

व्याख्या- असहयोग युग के बाद हुए किसान आंदोलन संगठित हो गए जिन्हें तत्काल नहीं दबाया जा सका।

(5) पूर्ववर्ती किसान आन्दोलन की असफ़लता के क्या कारण थे ?
(क) असंगठित होने के कारण
(ख) संगठित होने के कारण
(ग) विकल्प (क) और (ख)।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(क) असंगठित होने के कारण

व्याख्या- पूर्ववर्ती किसान आंदोलन असंगठित होने के कारण असफ़ल हो गए। जो आन्दोलन (या विद्रोह) असंगठित किसानों द्वारा किए गए वे तत्काल दबा दिए गए।

2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)

यह काफ़ी पुरानी घटना है। तब तमिलनाडु राज्य का नाम मद्रास था । मद्रास प्रांत के एक स्टेशन के निकट एक प्वाईंटमैन अपना प्वाईंट (वह उपकरण जिससे गाड़ियों का ट्रैक बदला जाता है) पकड़े खड़ा था। दोनों ओर से दो गाड़ियाँ अपनी पूरी गति से दौड़ी चली आ रही थीं। उस दिन मौसम खराब था और वह आँधी-तूफान का संकेत दे रहा था। ऐसे भयावह मौसम में रोशनी के भी भरपूर साधन नहीं थे। प्वाईंटमैन अपने काम के लिए मुस्तैदी से तैयार था। तभी उसे अपने पैरों पर कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ। उसने देखा तो दंग रह गया। एक साँप उसके पैरों से लिपट रहा था । प्वाईंट उसके हाथ में था। डर के कारण उसकी घिग्घी बँध गई। किन्तु तभी उसने सोचा कि यदि वह प्वाईंट हाथ से छोड़ देगा तो ऐसे में दोनों गाड़ियाँ परस्पर भिड़ जाएँगी और असंख्य लोगों की मृत्यु हो जाएगी। साँप के काटने से तो अकेले सिर्फ उसकी ही जान जाएगी लेकिन, असंख्य लोगों की जान बच जाएगी। कम-से-कम मरते-मरते वह असंख्य लोगों की जान बचाने का पुण्य तो अर्जित कर ही लेगा। यह सोचकर वह बिना हिले-डुले प्वाईंट को पकड़े खड़ा रहा। कुछ ही देर में दोनों रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट तेज़ हुई और रेलगाड़ियाँ आराम से प्वाईंटमैन के द्वारा पकड़े गए प्वाईंट की सहायता से अलग-अलग ट्रैक पर निकल गईं। उधर साँप रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट सुनकर प्वाईंटमैन का पैर छोड़कर चला गया। रेलगाड़ियों के जाने के बाद जब प्वाईंटमैन का ध्यान अपने पैरों की ओर गया तो वह यह देखकर दंग रह गया कि वहाँ कुछ न था । यह देखकर उसके मन से स्वतः ही निकला, ‘सच ही है, जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं उनकी सहायता ईश्वर स्वयं करते हैं।’ बाद में जब इस घटना का पता अधिकारियों को चला तो उन्होंने न सिर्फ प्वाईंटमैन को शाबाशी दी अपितु उसे पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

(1) प्वाईंटमैन का क्या काम होता है?
(क) मशीनों को ठीक करना ।
(ख) उपकरण द्वारा गाड़ियों की मरम्मत करना ।
(ग) गाड़ियों का ट्रैक बदलना ।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ग) गाड़ियों का ट्रैक बदलना ।

(2) प्वाईंटमैन क्या देखकर दंग रह गया ?
(क) अपने पैरों में साँप को लिपटते देखकर ।
(ख) गाड़ी के सामने व्यक्ति को आता देखकर ।
(ग) भयानक शेर को सामने आता देखकर ।
(घ) भयानक आकृति को आता देखकर ।
उत्तर:
(क) अपने पैरों में साँप को लिपटते देखकर ।

(3) साँप कैसे भाग गया
(क) गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ सुनकर ।
(ख) आदमी के पैरों की आहट सुनकर ।
(ग) रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट सुनकर ।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ग) रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट सुनकर ।

(4) प्वाईंटमैन ने साँप के भागने पर क्या सोचा?
(क) जो इंसान परोपकार नहीं करते ईश्वर उनकी सहायता करते हैं ।
(ख) जो इंसान आस्तिक होते हैं ईश्वर उनकी मदद करते हैं।
(ग) जो इंसान दुराचारी होते हैं ईश्वर उनकी मदद करते हैं ।
(घ) जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं, ईश्वर उनकी सहायता स्वयं करते हैं ।
उत्तर:
(घ) जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं, ईश्वर उनकी सहायता स्वयं करते हैं ।

व्याख्या- जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं, ईश्वर उनकी सहायता स्वयं करते हैं

(5) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन (A): प्वंईटमैन को शाबाशी दी गई।
कारण (R): क्योंकि उसने अपनी जान पर खेलकर असंख्य लोगों की जान बचाई थी ।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
(ग) कथन (A) सही तथा कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
उत्तर:
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या- प्वाईंटमैन को शाबाशी इसलिए दी गई क्योंकि उसने अपनी जान पर खेलकर असंख्य लोगों की जान बचाई थी ।

‘II’. व्यावहारिक व्याकरण

3. निम्नलिखित ‘शब्द और पद ‘ पर आधारित दो बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 2 = 2)

(1) पद किसे कहते हैं ?
(क) व्याकरण के नियमों में बँधकर प्रयुक्त हुए शब्द को
(ख) वाक्य को
(ग) सार्थक समूह को
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) व्याकरण के नियमों में बँधकर प्रयुक्त हुए शब्द को

व्याख्या – व्याकरण के नियमों में बँधकर प्रयुक्त हुए शब्द को पद कहते हैं।

(2) सभी शब्द के मेल से बनते हैं ।
(क) भाषा
(ख) वर्गों
(ग) पद
(घ) वाक्य
उत्तर:
(ख) वर्गों

4. निम्नलिखित ‘अनुस्वार तथा अनुनासिक’ पर आधारित तीन बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) अनुस्वार का उचित प्रयोग नहीं है-
(क) दंड
(ख) अंधकार
(ग) सन्तुलन
(घ) संकलित
उत्तर:
(ग) सन्तुलन

व्याख्या- अनुस्वार का सही प्रयोग नहीं है। विकल्प (क), (ख), (घ) में अनुस्वार का उचित प्रयोग है।

(2) अनुनासिक का उचित प्रयोग किसमें है?
(क) अँगुली
(ख) नाँद
(ग) धुँआ
(घ) गंवार
उत्तर:
(क) अँगुली

(3) निम्नलिखित में से उस शब्द को चुनिए, जिसमें अनुनासिक का प्रयोग होता है-
(क) राम
(ख) श्याम
(ग) आँख
(घ) घर
उत्तर:
(ग) आँख

5. निम्नलिखित ‘ उपसर्ग और प्रत्यय’ पर आधारित पाँच बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 4 = 4)

(1) ‘परोपकार’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग व मूल शब्द है-
(क) पर + उपकार
(ख) परो + उपकार
(ग) परो + पकार
(घ)) पर् + रउपकार
उत्तर:
(क) पर + उपकार

(2) ‘अनुगमन’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है-
(क) अनू
(ख) अन्
(ग) अनु
(घ) अनुग
उत्तर:
(ग) अनु

व्याख्या – अनुगमन में सही उपसर्ग ‘अनु’ है क्योंकि यह शब्द गमन से पहले लगा है।

(3) ‘लुभावना’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है-
(क) भावना
(ख) आवना
(ग) वना
(घ) अवना
उत्तर:
(ख) आवना

(4) ‘स्वजिल’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय व मूल शब्द हैं-
(क) स्वप्न + अइल
(ख) स्व + इल
(ग) स्वप्न + इल
(घ) स्वप् + नइल
उत्तर:
(ग) स्वप्न + इल

(5) ‘आधुनिक’ शब्द में प्रयुक्त सही मूल शब्द व प्रत्यय है-
(क) अधु + इक
(ख) आ + धुनिक
(ग) अधुना + इक
(घ) आधु + निक
उत्तर:
(ग) अधुना + इक

6. निर्देशानुसार ‘स्वर संधि’ पर आधारित चार बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 3 = 3)

(1) विद्यार्थी उदाहरण है-
(क) दीर्घ सन्धि
(ख) विसर्ग सन्धि
(ग) वृद्धि सन्धि
(घ) व्यंजन सन्धि
उत्तर:
(क) दीर्घ सन्धि

व्याख्या – विद्यार्थी शब्द दीर्घ संधि का उदाहरण है।

(2) अन्वेषण का सन्धि विच्छेद क्या होगा ?
(क) अनु + एषण
(ख) अनुऐ + षण
(ग) अन् + वेषण
(घ) अनुः + वेषण
उत्तर:
(क) अनु + एषण

व्याख्या- अन्वेषण में यण संधि है। यदि इ, ई, उ, ऊ और ऋ के बाद कोई असमान शब्द आए तो इ/ई का य, उ/ऊ का व् और ऋकार् हो जाता है।

(3) सूर्योदय में कौन-सी सन्धि है?
(क) दीर्घ सन्धि
(ख) गुण सन्धि
(ग) वृद्धि सन्धि
(घ) यण सन्धि
उत्तर:
(ख) गुण सन्धि

(4) दीर्घ सन्धि का उदाहरण है-
(क) अन्नाभाव
(ख) स्वच्छ
(ग) एकैक
(घ) लोकैश्वर्य
उत्तर:
(क) अन्नाभाव

7. निर्देशानुसार ‘विराम चिह्न’ पर आधारित चार बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 3 = 4)

(1) सही विराम चिन्हों वाला वाक्य कौन-सा है ?
(क) जो किताब आज आई, कहाँ है (?)
(ख) जो किताब आज आई; कहाँ है (?)
(ग) जो किताब आज आई, कहाँ है (?)
(घ) जो किताब आज आई; कहाँ है (?)
उत्तर:
(क) जो किताब आज आई, कहाँ है (?)

(2) ‘रामचरितमानस’ एक महाकाव्य है, में किन दो विराम
(क) पूर्णविराम और उपविराम
(ख) पूर्णविराम और योजक
(ग) उद्धरण और अल्पविराम
(घ) कोष्ठक और पूर्णविराम
उत्तर:
(ग) उद्धरण और अल्पविराम

(3) पूर्ण विराम (1) का प्रयोग कब किया जाता है ?
(क) वाक्य के बीच में
(ख) वाक्य के अन्त में
(ग) वाक्य के शुरू में
(घ) इनमें से कहीं नहीं
उत्तर:
(ख) वाक्य के अन्त में

व्याख्या- वाक्य के अंत में विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

(4) ‘जाना है तो जल्दी जाओ’ वाक्य में सही विराम चिन्ह का प्रयोग कीजिए-
(क) अर्द्धविराम
(ख) अल्पविराम
(ग) प्रश्नवाचक
(घ) उद्धरण
उत्तर:
(ख) अल्पविराम

8. निर्देशानुसार ‘अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद’ पर आधारित तीन बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) ‘अगर तुम आतीं तो हम बाज़ार चलते’ अर्थ के आधार पर वाक्य है-
(क) संकेतवाचक
(ख) विधानवाचक
(ग) इच्छावाचक
(घ) संदेहवाचक
उत्तर:
(क) संकेतवाचक

(2) ‘आज तुम्हारे साथ कौन था ?’ अर्थ के आधार पर वाक्य है-
(क) नकारात्मक ।
(ख) प्रश्नवाचक
(ग) आज्ञावाचक
(घ) विस्मयवाचक
उत्तर:
(ख) प्रश्नवाचक

(3) कॉलम – 1 को कॉलम-2 के साथ सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए-

विकल्प:-
(क) 1-(iii), 2-(i), 3- (ii)
(ख) 1- (ii), 2- (iii), 3- (i)
(ग) 1- (i), 2- (ii), 3- (iii)
(घ) 1-(iii), 2- (ii), 3- (i)
उत्तर:
(क) 1-(iii), 2-(i), 3- (ii)

व्याख्या- कल मैं नहीं आऊँगा – निषेधवाचक वाक्य, अगर आप मेहनत करोगे, तो सफलता अवश्य मिलेगी – संकेतवाचक वाक्य; ईश्वर करे, तम परीक्षा में सफल हो जाओ- इच्छा वाचक वाक्य है।

9. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ !
वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने, हों बड़े,
एक पत्र – छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत
तू न थकेगा कभी!
तू न थमेगा कभी!
तू न मुड़ेगा कभी ! कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ !
अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ !

(1) कविता में कवि ने कैसे जीवन का वर्णन किया है?
(क) सम्पन्न जीवन
(ख) उदारी जीवन
(ग) आडम्बरहीन जीवन
(घ) संघर्षपूर्ण जीवन
उत्तर:
(घ) संघर्षपूर्ण जीवन

(2) कविता में कवि किस प्रकार की शपथ लेने की कहता है ?
(क) अहिंसा की
(ख) ईमानदारी की
(ग) सत्य न बोलने की
(घ) कभी न थकने व लक्ष्य से न भटकने की
उत्तर:
(घ) कभी न थकने व लक्ष्य से न भटकने की

व्याख्या – कवि इस कविता में कभी न थकने व लक्ष्य से न भटकने की शपथ लेने की कहता है ।

(3) ‘एक पत्र छाँह भी माँग मत’ पंक्ति का आशय क्या है?
(क) दूसरों का सहारा लेना ।
(ख) दूसरों से किसी प्रकार सहायता की आशा न करना ।
(ग) पत्र देकर दूसरों से सहायता माँगना ।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ख) दूसरों से किसी प्रकार सहायता की आशा न करना ।

व्याख्या- दूसरों से किसी प्रकार की सहायता की आशा न रखना ही इस पंक्ति का आशय है।

(4) ‘अग्निपथ’ से कवि का क्या आशय है ?
(क) आग की शपथ
(ख) संघर्षमय जीवन
(ग) अग्नि से दूर रहना
(घ) अंगारों से युक्त पथ
उत्तर:
(ख) संघर्षमय जीवन

(5) ‘अग्निपथ’ कविता के रचनाकार कौन हैं ?
(क) हरिवंशराय बच्चन
(ख) रामधारी सिंह दिनकर
(ग) सुमित्रानन्दन पन्त
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(क) हरिवंशराय बच्चन

10. निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) कवि के अनुसार मनुष्य की असली परीक्षा कब होती है ?
(क) कठिन समय में
(ख) परीक्षा भवन में
(ग) जीवन के अंत में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) कठिन समय में

(2) कवि ने कविता में वृक्ष शब्द किसके लिए प्रयोग किया है ?
(क) स्वार्थी मनुष्य के लिए
(ख) आलसी मनुष्य के लिए
(ग) कठिन समय में मदद करने वालों के लिए
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) कठिन समय में मदद करने वालों के लिए

व्याख्या- कठिन समय में मदद करने वालों के लिए वृक्ष शब्द प्रयोग किया गया है।

11. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए- (1 × 5 = 5)

उस दिन जब तुम आए थे, मेरा हृदय किसी अज्ञात आशंका से धड़क उठा था। अंदर-ही-अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया। उसके बावजूद एक स्नेह – भीगी मुस्कुराहट के साथ मैं तुमसे गले मिला था और मेरी पत्नी ने तुम्हें सादर नमस्ते की थी। तुम्हारे सम्मान में ओ अतिथि, हमने रात के भोजन को एकाएक उच्च-मध्यम वर्ग के डिनर में बदल दिया था। तुम्हें स्मरण होगा कि दो सब्ज़ियों और रायते के अलावा हमने मीठा भी बनाया था । इस सारे उत्साह और लगन के मूल में एक आशा थी । आशा थी कि दूसरे दिन किसी रेल से एक शानदार मेहमाननवाज़ी की छाप अपने हृदय में ले तुम चले जाओगे। हम तुमसे रुकने के लिए आग्रह करेंगे, मगर तुम नहीं मानोगे और एक अच्छे अतिथि की तरह चले जाओगे। पर ऐसा नहीं हुआ।

(1) लेखक का बटुआ अंदर ही अंदर क्यों काँपने लगा ?
(क) लेखक का बजट गड़बड़ा जाएगा, की आशंका से
(ख) लेखक के बटुए में वाइब्रेशन हो रही थी
(ग) लेखक के हाथ काँपने के कारण।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(क) लेखक का बजट गड़बड़ा जाएगा, की आशंका से

व्याख्या- अतिथि के स्वागत सत्कार में अधिक खर्च होने के कारण तथा आर्थिक स्थिति बिगड़ने के डर से लेखक का बटुआ काँप उठा।

(2) ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ में लेखक ने कैसे लोगों पर व्यंग्य किया है? विचार कीजिए और उचित विकल्प का चयन कीजिए-
(i) फ़िल्म निर्माताओं पर
(ii) शिक्षा व्यवस्था पर
(iii) राजनेताओं पर
(iv) ऐसे अतिथियों पर जो आकर जाने का नाम नहीं लेते।
विकल्प:-
(क) (i) और (ii)
(ख) केवल (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) केवल (iv)
उत्तर:
(घ) केवल (iv)

(3) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए ।
कथन (A): मेहमान के आते ही लेखक भयभीत हो गया ।
कारण (R): क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी ।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) कारण तथा (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ग) कथन (A) गलत तथा कारण (R) सही है ।
(घ) कथन (A) सही है तथा कारण (R) गलत है।
उत्तर:
(ख) कथन (A) कारण तथा (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

व्याख्या- लेखक मध्यम वर्गीय व्यक्ति है और उसकी आर्थिक स्थिति कमज़ोर है, इसलिए मेहमान के आते ही लेखक भयभीत हो गया।

(4) लेखक को अतिथि से क्या उम्मीद थी ?
(क) वह कुछ काम करेगा।
(ख) वह अगले ही दिन चला जाएगा।
(ग) वह लेखक की मदद करेगा।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ख) वह अगले ही दिन चला जाएगा।

(5) लेखक तथा उसकी पत्नी ने मेहमान का किस प्रकार स्वागत किया?
(क) आदर व स्नेहपूर्वक
(ख) मैत्रीपूर्ण व प्रसन्नतापूर्वक
(ग) आशंका पूर्वक
(घ) (क) व (ख) दोनों
उत्तर:
(घ) (क) व (ख) दोनों

12. निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) अतिथि को देवता कहा जाता है, पर देवता की क्या विशेषता होती है ? उचित विकल्प का चयन कीजिए-
(i) देवता दर्शन देकर चला जाता है।
(ii) देवता अतिथिवत् रहता है।
(iii) देवता किसी के घर नहीं आता ।
(iv) देवता घर पर ही ठहर जाता है ।
(क) केवल (i)
(ख) केवल (ii)
(ग) केवल (iii)
(घ) केवल (iv)
उत्तर:
(क) केवल (i)

व्याख्या – अतिथि को देवता कहा जाता है और देवता की विशेषता यह है कि अगर किसी मनुष्य की सेवा व आतिथ्य से प्रसन्न हों तो भी वे उसे दर्शन देकर अपने धाम को चले जाते हैं ।

(2) लेखक की आर्थिक स्थिति कैसी है?
(क) सम्पन्न
(ख) वैभवपूर्ण
(ग) सुदृढ़
(घ) कमज़ोर
उत्तर:
(घ) कमज़ोर

खण्ड ‘ब’ (40)
(वर्णनात्मक प्रश्न)

पाठ्य-पुस्तक (12 अंक)

13. निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 × 2 = 6)

(1) ‘दुःख का अधिकार’ कहानी से स्पष्ट होता है कि ‘पैसे की कमी और अभाव दुःख को मनाने का अवसर भी नहीं देते’- कैसे और क्यों ?
उत्तर:
कहानी में खरबूजे बेचने वाली के बेटे की मृत्यु हो जाती है । किन्तु पैसे की कमी, बच्चों का भूख से बिलबिलाना, बहू का तेज़ बुखार से पीड़ित होना देख बुढ़िया अपने शोक को भूलकर खरबूजे बेचने के लिए विवश हो जाती है।

दुःख का अधिकार कहानी में खरबूजे बेचने वाली के इकलौते जवान बेटे की साँप के डसने से मृत्यु हो जाती है। घर में जो थोडा बहुत था वह बेटे के क्रिया-कर्म में लग जाता है। पैसे की कमी भूख से बिलबिलाते बच्चों व तेज़ बुखार से पीड़ित बहू को देखकर बुढ़िया अपने दुःख को भूल जाती है और बाज़ार में जाकर खरबूजे बेचने के लिए विवश हो जाती है। वह बाज़ार में मुँह छिपाए, सिर को घुटनों पर रखे फफक-फफक कर रोती है। उधर बाज़ार के लाला लोग उसकी परिस्थितियों व विवशता को न समझकर उसके संबंध में घृणा से बातें करते हैं। इस तरह पुत्र शोक से पीड़ित माँ को अभावों ने दुःख मनाने की फुर्सत भी नहीं दी ।

(2) ‘एवरेस्ट जैसे महान् अभियान में खतरों को और कभी-कभी तो मृत्यु को भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करना
उत्तर:
शेरपा कुलियों में से एक की मृत्यु व चार के घायल होने की खबर सुन यह कथन कर्नल खुल्लर ने कहा । एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊँची चोटी है और इस पर चढ़ना कोई आसान काम नहीं है। इसलिए कर्नल खुल्लर ने अभियान दल के सभी सदस्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि महान् उद्देश्य की पूर्ति के लिए खतरों का सामना करना पड़ता है और मृत्यु को भी गले लगाना पड़ सकता है। इस तरह की परिस्थितियों का सहज भाव से सामना करना चाहिए । मृत्यु इस उद्देश्य के सामने छोटी है।

(3) ‘मेरे अतिथि, में जानता हूँ कि अतिथि देवता होता है, पर आखिर मैं भी मनुष्य हूँ। मैं कोई तुम्हारी तरह देवता नहीं। एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते। देवता दर्शन देकर लौट जाता है। तुम लौट जाओ अतिथि’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यदि अतिथि थोड़ी देर तक टिकता है तो वह देव रूप बनाए रखता है, फिर वह मनुष्य रूप में आ जाता है, और ज़्यादा देर तक टिकने पर वह राक्षस का रूप ले लेता है। तब वह राक्षस जैसा बुरा प्रतीत होता है। जब अतिथि तीसरे दिन भी नहीं गया और धोबी से कपड़े धुलाने की बात कहने लगा तो इससे मेहमान के कई दिन और रुकने की सम्भावना दिखने लगी। इसके बाद लेखक अतिथि को देवता न मानकर मानव तथा धीरे-धीरे राक्षस मानने लगा था । उसका अतिथि राक्षस का रूप लेता जा रहा था ।

भावनाएँ भी अपशब्दों का रूप धारण कर लेती हैं। मेज़बान को गेट आउट तक कहने को विवश होना पड़ा। अतिथि के जल्दी घर जाने में ही उसका देवत्व सुरक्षित है क्योंकि एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर तक साथ नहीं रह सकते। मनुष्य देवता-स्वरूप अतिथि का आदर सत्कार अधिक दिन तक नहीं कर सकता क्योंकि इस महँगाई के दौर में मनुष्य रूप में देवता का आदर-सत्कार करते-करते उसके घर का बजट बिगड़ जाता है। आज के समय में अपना परिवार पालना भी कठिन होता है, वहाँ अतिथि का खर्च उठाना पड़े तो मनुष्य का चैन उड़ना स्वाभाविक है।

14. निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 × 2 = 6)

1. विपत्ति में हमारा सहायक कौन बनता है ? रहीम के दोहों के आधार पर उत्तर दीजिए ।
उत्तर:
व्याख्यात्मक हल :
रहीम के अनुसार विपत्तियों में अपने ही साधन और संबंध काम आते हैं। उदाहरण के लिए सूखते हुए कमल को जल बचा सकता है। सूरज की ऊष्मा से नहीं, कमल जल में से जन्म लेता है इसलिए वही उसका जीवन रक्षक होता है। यदि वही सूख गया तो फिर सब कुछ नष्ट हो जाता है।

रहीम दास जी कहते हैं कि जिसके पास अपना कुछ नहीं, दूसरे भी उसकी सहायता नहीं कर सकते। संसार में अपनी सम्पत्ति अपनी योग्यता के बिना कुछ भी प्राप्त नहीं होता । अतः मुसीबत के समय अपने आत्मबल को बनाए रखना चाहिए। जिस तरह सूखते हुए कमल को जल ही बचा सकता है। जल ही जलज का जीवन है। सूरज की ऊष्मा नहीं । कमल जल में से जन्म लेता है। जल के न होने पर सूरज भी कमल को जीवन दान नहीं दे सकता है।

2. मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आदोंलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए ।
उत्तर:
मनुष्य को प्रकृति अनेक रूपों में आंदोलित करती है। प्रकृति का शांत वातावरण उसे लुभाता है। प्रकृति में सर्वत्र संगीत व्याप्त होता है। इसे सुनकर और अनुभव करके मनुष्य का हृदय खुश होता है। यह प्रकृति का सुन्दर रूप होता है। हमें प्रकृति अपने साथ रोती-हँसती जान पड़ती है। ऋतुएँ बदल-बदल कर अनेक सुख-सुविधाएँ देती हैं तथा उत्साह प्रदान करती हैं।

3. ‘अग्निपथ’ कविता में कवि ने मनुष्य को कौन-सी शपथ लेने को प्रेरित किया है और क्यों ? लिखिए ।
उत्तर:

  • वह जीवन-पथ पर संघर्षो से थकेगा नहीं ।
  • विश्राम के लिए रुकेगा नहीं ।
  • क्योंकि थकने का अर्थ है कि हार मान लेना, जो कवि नहीं चाहता। अधिकतर लोग कठिनाइयों से घबरा जाते हैं।
  • रुकने का अर्थ है सुविधाओं के प्रलोभन से अपने लक्ष्य को भुला देना । लक्ष्य पर पहुँचने से पहले रास्ता छोड़ देते हैं।

व्याख्यात्मक हल :
कवि कहता है कि जीवन रूपी संघर्षमई पथ पर चलते हुए मनुष्य को कठिनाइयों से घबराकर हार मानकर थकना नहीं है और न ही मार्ग की कठिनाइयों के बीच मिली सुविधाओं के मोहजाल में फँसकर अपने लक्ष्य को भुलाकर रुक जाना है। अपने लक्ष्य पर पहुँचने से पहले वह न तो विश्राम करेगा और न ही पीछे मुड़कर देखेगा । यही शपथ लेने के लिए कवि मनुष्य को प्रेरित करता है।

15. निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 × 2 = 6)

(1) ‘घायलों की सहायता के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है’- गिल्लू के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि किसी घायल के प्रति आपके व्यवहार में क्या विशेषता होगी ?
उत्तर:

  • गिल्लू के घायल होने पर लेखिका द्वारा सेवा,
  • धैर्य से सेवा करने पर सुखद परिणाम ।

व्याख्यात्मक हल-
लेखिका को गिल्लू निश्चेष्ट अवस्था में गमले की संधि में मिला था। उसके शरीर पर कौओं की चोंच के जख्म थे। लेखिका ने उसे उठाया और धैर्यपूर्वक उसके घावों को साफ़ किया और मरहम लगाया। उन्होंने रुई की बत्ती बनाकर उसे दूध भी पिलाने की कोशिश की, उन्होंने बड़े धैर्य के साथ रात-दिन उसकी सेवा की। उनकी इसी धैर्य पूर्ण सेवा के कारण गिल्लू एकदम स्वस्थ हो गया। इसी प्रकार घायलों की सहायता के लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है। घबराने या हड़बड़ी दिखाने से सुखद परिणाम की प्राप्ति नहीं होती ।

(2) लेखक कुएँ से चिट्ठी निकालने का काम टाल सकता था, परन्तु उसने ऐसा नहीं किया । ‘स्मृति’ कहानी से उसके चरित्र की कौन-सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं ?
उत्तर:

  • ईमानदारी,
  • कर्त्तव्यनिष्ठता,
  • साहस,
  • एकाग्रचितता,
  • सूझ-बूझ ।

व्याख्यात्मक हल-
लेखक के द्वारा कुएँ से चिट्ठी निकालने का काम टल सकता था। लेकिन बड़े भाई की डाँट के डर से उसने ऐसा नहीं किया। इसके साथ ही लेखक बहुत ईमानदार भी था। वह अपने भाई से झूठ बोलना अथवा बहाना लगाना नहीं चाहता था । चिट्ठियों को पहुँचाने की ज़िम्मेदारी, कर्त्तव्यनिष्ठता की भावना उसे कुएँ के पास से जाने नहीं दे रही थी । लेखक ने पूरे साहस व सूझ-बूझ के साथ कुएँ में नीचे उतरकर एकाग्रचित हो साँप की गतिविधियों को ध्यान में रखकर चिट्ठियाँ बाहर निकाल लीं। इस तरह हमें लेखक की ईमानदारी व कर्त्तव्यनिष्ठता के साथ उसके साहस, दृढ़ निश्चय, एकाग्रचित्ता व सूझ-बूझ की जानकारी भी मिलती है।

(3) बाहरी लोगों का लगातार आना त्रिपुरा के लिए लाभ कैसे साबित हुआ ?
उत्तर:
त्रिपुरा भारत के सबसे छोटे राज्यों में से है। तीन तरफ़ से यह बांग्लादेश से घिरा हुआ है और शेष भारत के साथ इसका जुड़ाव मिजोरम व असम द्वारा बनता है। त्रिपुरा के ज़्यादातर शहर बांग्लादेश की सीमा के करीब होने के कारण वहाँ के अवैध लोगों की आवक है। असम व पश्चिम बंगाल से भी लोग यहाँ आकर बसे हैं जिसके कारण काफ़ी समस्या है लेकिन लाभ भी है। इसके कारण यह राज्य बहुधार्मिक समाज का उदाहरण भी बना । त्रिपुरा में उन्नीस अनुसूचित जनजातियों और विश्व के चारों बड़े धर्मों का प्रतिनिधित्व मौजूद है। त्रिपुरा के उन्नीस कबीलों में से दो चकमा और मुध महायानी बौद्ध हैं, जो बर्मा से आए थे।

16. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर संकेत – बिन्दुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए- 6 ×1 = 6
(1) कम्प्यूटर – आज के युग की ज़रूरत

  • वर्तमान युग
  • सुव्यवस्था
  • सुविधा

उत्तर:

कंप्यूटर : आज के युग की ज़रूरत

वर्तमान युग – वर्तमान युग कंप्यूटर का युग है। आज जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का प्रवेश हो गया है । बैंक, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, डाकखाने, बड़े-बड़े उद्योग, कारखाने, व्यवसाय, हिसाब-किताब, रुपए गिनने की मशीनें तक कंप्यूटरीकृत हो गई हैं। आने वाला समय इनके विस्तृत फैलाव का संकेत दे रहा है।

सुव्यवस्था – आज मनुष्य-जीवन जटिल हो गया है। व्यक्ति के संपर्क बढ़ रहे हैं, व्यापार बढ़ रहे हैं, गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, आकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, साधन बढ़ रहे हैं, परिणामस्वरूप सब जगह भागदौड़ और आपाधापी चल रही है। इस ‘पागल गति’ को सुव्यवस्था देने की समस्या आज की प्रमुख समस्या है।

सुविधा – कंप्यूटर एक ऐसी स्वचालित प्रणाली है, जो कैसी भी अव्यवस्था को व्यवस्था में बदल सकती है। क्रिकेट के मैदान में अंपायर की निर्णायक भूमिका हो या लाखों-करोड़ों-अरबों की लंबी-लंबी गणनाएँ, कंप्यूटर पलक झपकते ही आपकी समस्या हल कर सकता है। कंप्यूटर ने फाइलों की आवश्यकता कम कर दी है। विश्व के किसी कोने में छपी पुस्तक, फ़िल्म, घटना की जानकारी इंटरनेट पर ही उपलब्ध हो जाती है। एक समय था, जब कहते थे कि विज्ञान ने संसार को कुटुंब बना दिया है। कंप्यूटर ने तो मानो उस कुटुम्ब को आपके कमरे में उपलब्ध करा दिया है। इस प्रकार कंप्यूटर ने मानव जीवन को सुविधा, सरलता सुव्यवस्था और सटीकता प्रदान की है।

(2) फ्लैट सिस्टम :

  • वर्तमान जीवन-शैली
  • सुविधाएँ – मकानों का अभाव
  • हानियाँ

उत्तर:

फ़्लैट सिस्टम

वर्तमान जीवन-शैली- आज जहाँ भी देखो ऊँची-ऊँची बहु-मंजिला इमारतें हैं । प्रत्येक मनुष्यों का सपना है कि वह इन इमारतों में सुखपूर्वक रहें। इन इमारतों के कारण धीरे-धीरे मनुष्य के रहन-सहन व जीवन-शैली में बदलाव आया है। इनमें रहना आधुनिकता का सूचक है। फ़्लैट सिस्टम के कारण पड़ोस कल्चर खत्म हो गया है। आज मनुष्य एकाकी जीवन जीने लगा है। छोटे-छोटे फ़्लैटों के कारण संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार ने ले ली है। मानव अपने में ही सिमट गया है। लोग दूसरों के घर-परिवार में दखलंदाजी नहीं करते। सब अपने काम में ही व्यस्त रहते हैं ।

सुविधाएँ – मकानों का अभाव – ये फ़्लैट सभी सुविधाओं से सम्पन्न होते हैं। ये जितने सुविधाजनक होते हैं उतने प्रतिष्ठा के सूचक भी। इन फ़्लैटों में रहने वाले लोग अमीर और इज़्ज़तदार माने जाते हैं। इसके साथ ही आज आवासीय ज़मीनों की कमी के कारण भी फ़्लैट सिस्टम को बढ़ा मिला है। फ़्लैट आज के समय की ज़रूरत है।

हानियाँ- बहुमंजिला इमारतें सुविधाजनक होने के साथ हानिकारक भी हैं। ये इमारतें ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाती हैं। इनमें होने वाली ऊर्जा की खपत, पृथ्वी का खनन सब हानियाँ हैं। इसके साथ फ़्लैट सिस्टम के कारण बच्चों को बुज़ुर्गों का प्यार व संस्कार भी नहीं मिल पाते हैं। परस्पर सहयोग व मिल-जुल कर रहने की भावना का विकास भी इस फ्लैट सिस्टम के कारण खत्म होता जा रहा है। असामाजिक गतिविधियों को भी फलने-फूलने का अवसर इस फ़्लैट सिस्टम में आसानी से मिल जाता है।

3. देश में बढ़ता भ्रष्टाचार :

  • भ्रष्टाचार व्यवस्था का अंग
  • भ्रष्टाचार का कारण और स्वरूप
  • समाधान व नागरिकों के कर्त्तव्य

उत्तर:

देश में बढ़ता भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार व्यवस्था का अंग – भ्रष्टाचार का तात्पर्य है – भ्रष्ट व्यवहार या अनैतिक व्यवहार । दुर्भाग्य से आज सारे भारतवर्ष में भ्रष्टाचार व्याप्त है। जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं रह गया है जिसमें ईमानदारी से कार्य होता है । आज विद्यालय में प्रवेश का मामला हो या नौकरी मिलने का, सब जगह भ्रष्टाचार व्याप्त है। सरकारी कार्यालयों में तो काम तभी हो पाता है जब उन्हें घूस मिल जाती है। पुलिस के भ्रष्टाचार का तो कहना ही क्या? जब अपराधी निकल जाता है, तब पुलिस हवा में डंडे चलाती हुई आती है और गरीब बेकसूरों को पकड़कर ले जाती है।

भ्रष्टाचार का कारण और स्वरूप – भारत में भ्रष्टाचार इसलिए पनपता है क्योंकि यहाँ का नेता स्वयं भ्रष्ट है इसलिए लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही नहीं करता । यहाँ की न्याय प्रणाली भी भ्रष्टाचार की लपेट में आ गयी है। यदि हम भ्रष्टाचार के मूल में जाएँ तो उसका मूल कारण मानव का स्वार्थ, उसकी लिप्सा तथा धन-लोलुपता दिखाई देती है । आज प्रत्येक व्यक्ति उचित तथा अनुचित साधनों द्वारा प्राप्त करने में लगा दिखाई देता है। मनुष्य की बढ़ती हुई आवश्यकता तथा उन्हें पूरा करने के लिए अपनाए जा रहे साधन, अनियंत्रित होती महँगाई तथा अमीर-गरीब के बीच बढ़ता अंतर ही भ्रष्टाचार को जन्म देता है।

समाधान व नागरिकों के कर्त्तव्य – यदि हम भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहते हैं तो हमें प्रत्येक व्यक्ति के मनोबल को ऊँचा उठाना होगा। शिक्षक, साहित्यकार, पत्रकार कवि, कलाकार एकजुट होकर नवयुवाओं में आचरण की शुद्धता के संस्कार भरें और भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई छेड़ दें और यदि भ्रष्ट राजनेता अपने आचरण को सुधार लें तो भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। साथ ही न्यायायिक व्यवस्था को मज़बूत बनाना होगा। नई तकनीक भी भ्रष्टाचार को समाप्त करने में अपना योगदान दे सकती है।

17. आपने-अपने पिताजी की आज्ञा के बिना अपने कुछ मित्रों के साथ विद्यालय से अनुपस्थित होकर आईपीएल मैच देखा जिसकी सूचना आपके पिताजी को किसी अन्य व्यक्ति से मिली है। अब आप अपने पिताजी से माफ़ी माँगते हुए लगभग 100 शब्दों में एक क्षमा-याचना का पत्र लिखिए। (6 × 1 = 6)
उत्तर:
श्रद्धानंद छात्रावास,
राजकीय उच्चतम माध्यमिक विद्यालय,
बसन्त विहार,
नई दिल्ली।
दिनांक – 22 अगस्त, 20XX
परम पूज्य पिताजी,
सादर प्रणाम ।
आशा है घर में सभी सकुशल होंगे। आपके पत्र से पता चला कि आपकी अनुमति के बिना अपने कुछ मित्रों के साथ विद्यालय से अनुपस्थित होकर मेरे आईपीएल मैच देखने से आप नाराज़ हैं।
मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूँ । लड़कों के कहने में आकर मैं उनके साथ मैच देखने चला गया था। मैंने पढ़ाई को भी गम्भीरता से नहीं लिया । समझ गया कि जब यह सूचना आपको अन्य व्यक्ति से मिली होगी तो आपको कैसा लगा होगा ?
पिताजी, अब आप कभी मेरी शिकायत नहीं सुनेंगे। मैं नियमित विद्यालय में उपस्थित रहूँगा तथा छात्रावास में रहकर अध्ययन में रुचि लूँगा । ऐसे गलत मित्रों की संगति भी छोड़ दूँगा ।
मैं पुनः आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं अब सही मार्ग पर चलूँगा। पिछली गलतियों के लिए मैं आपसे क्षमा माँगता हूँ । घर में माताजी को प्रणाम। सभी को यथोचित अभिवादन ।
आपका आज्ञाकारी पुत्र
विवेक

18. प्रस्तुत चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर कोई लेख अथवा कहानी लिखिए जिसका सीधा और स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए। (5 × 1 = 5)

उत्तर:
प्रस्तुत चित्र में दस-बारह वर्ष का एक लड़का किसी चाय की दुकान पर केतली से चाय छान रहा है। उसके आगे स्टोव जल रहा है। उसके पास एक व्यक्ति खड़ा है। वह शायद उसी व्यक्ति के लिए चाय बना रहा है। यह चित्र बालश्रम की समस्या को दर्शा रहा है, जिसमें पढ़ने-लिखने की उम्र में एक लड़का मज़दूरी कर रहा है। भारत जैसे देश में बाल-श्रम जैसी समस्या खेद का विषय है और हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है। यद्यपि सरकार इस प्रकार के बालश्रम को रोकने हेतु कई प्रयास कर रही है। सरकार ने 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के कारखानों आदि जैसी जगहों पर कार्य करने व करवाने पर पूर्णतयाः रोक लगाई हुई है लेकिन फिर भी इस समस्या को समाप्त नहीं किया जा सका है।

एक बार हमारे विद्यालय के बच्चों को पिकनिक के लिए शिमला ले जाने का कार्यक्रम बना । हम सब बच्चे और अध्यापक बस द्वारा शिमला के लिए रवाना हुए। रास्ते भर मस्ती करते जा रहे थे। शाम को हम जलपान के लिए एक ढाबे पर रुके। वहाँ ढाबे पर एक हमारा हम उम्र लड़का चाय बना रहा था। उस समय तेज़ ठंड में भी उसने पतली सी कमीज़ पहनी थी ।

मैं कुछ बच्चों के साथ घूमता हुआ उसके पास पहुँचा। कुछ ही देर में हम काफ़ी घुल-मिल गए। वह बच्चा बीच-बीच में ग्राहकों को चाय दे रहा था। उससे पता चला कि वह बहुत ग़रीब है और उसके पिता को नशे की लत है जिसके कारण उन्होंने उसे यहाँ काम पर रख दिया है। हमारे पूछने पर उसने बताया कि वह भी पढ़ना चाहता है लेकिन वह मज़बूर है। वह हमारे विद्यालय के बारे में भी जानने को बहुत उत्सुक था। थोड़ी देर बाद हम वहाँ से रवाना हो गए लेकिन पूरे रास्ते मैं उसके बारे में ही सोचता रहा कि काश, वह भी हमारी तरह पढ़ लिख पाता ।

19. बढ़ते जल प्रदूषण से परेशान दो नदियों के बीच होने वाले संवाद को लगभग 100 शब्दों में लिखिए। (5 × 1 = 5)
अथवा
समाचार-पत्र का महत्त्व बताते हुए पिता-पुत्र के बीच हुए संवाद को लगभग 100 शब्दों में लिखिए ।
उत्तर:

बढ़ते जल प्रदूषण से परेशान दो नदियों के बीच होने वाले संवाद-

पहली नदी – क्या बात है बहन ? आज बहुत दुःखी दिखाई दे रही हो ।
दूसरी नदी – क्या बताऊँ? आजकल मेरा पानी पहले से भी अधिक प्रदूषित होता जा रहा है।
पहली नदी – सच कहा तुमने, लोग अपना कचरा नदियों में बहा देते हैं। अपने जानवरों को भी हमारे पानी में नहलाकर पानी प्रदूषित कर रहे हैं।
दूसरी नदी – इतना ही नहीं, कारखानों से निकलने वाले रासायनिक पानी, नालों तथा सीवर का पानी भी सीधे हमारे पानी में मिलाया जा रहा है।
पहली नदी – हम ही नहीं, हमारे जल में रहने वाले जीव-जन्तु, मछलियाँ आदि भी इस प्रदूषण से परेशान हैं।
दूसरी नदी – मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है कि अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है।
पहली नदी – जल ही जीवन है। जब तक मनुष्य इस बात को नहीं समझेगा, इस जल प्रदूषण से मुक्ति असंभव है।

अथवा

समाचार पत्र का महत्त्व बताते हुए पिता-पुत्र के बीच संवाद –

पिता – बेटा नितिन, यह समाचार पत्र मैं तुम्हारे लिए मँगाता हूँ, किन्तु तुम तो इसे एक-दो मिनट देखकर रख देते हो।
नितिन – और क्या करूँ पिताजी, मुझे तो उसमें यही देखना होता है कि कौन-सी फ़िल्म चल रही है और ‘हैलो, दिल्ली’ में क्या-क्या दिखाया गया है। ये बातें पढ़ लीं और हो गया काम।
पिता – नहीं बेटा! समाचार पत्र हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। इसमें हमें और भी अनेक बातों की जानकारी मिलती है ।
नितिन – वे कौन-सी बातें हैं जिन्हें हमें समाचार पत्र में रोज़ाना पढ़नी चाहिए ?
पिता – हाँ, मैं बताता हूँ सुनो ! समाचार पत्रों में बड़े-बड़े विद्वानों के लेख आते हैं। हमें उनको पढ़ना चाहिए। कभी-कभी कहानियाँ और चुटकुले भी आते हैं, उन्हें भी पढ़ा करो।
नितिन – क्या समाचार पत्रों में खेल – कूद की बातें भी होती हैं ?
पिता – मैचों और खिलाड़ियों के बारे में तुम बहुत-सी बातें समाचार पत्रों से जान लोगे।
नितिन – पिताजी कुछ लोग समाचार पत्र पढ़कर ऐसा अनुमान लगा लेते हैं कि कल कैसा मौसम होगा ? क्या यह बात सही है ?
पिता – हाँ सही है! समाचार पत्रों में प्रतिदिन मौसम की सूचना छपती है । उसमें वर्षा, सर्दी, गर्मी और हवा के दबाव आदि की जानकारी मिलती है ।
नितिन – मैं समझ गया, पिताजी । कल से मैं समाचार पत्र लेकर आपके पास बैठा करूँगा, ताकि समाचार पत्र की समस्त आवश्यक जानकारियाँ प्राप्त कर सकूँ।


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