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CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 1 with Solutions

Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B with Solutions Set 1 are designed as per the revised syllabus.

CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 1 with Solutions

निर्धारित समय :3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश :
(i) इस प्रश्नपत्र में दो खंड हैं- खंड ‘अ’ और ‘ब’। खंड ‘अ’ में वस्तुपरक / बहुविकल्पीय और खंड ‘ब’ में वस्तुनिष्ठ वर्णनात्मक प्रश्न दिए गए हैं।
(ii) प्रश्नपत्र के दोनों खंडों में प्रश्नों की संख्या 19 है और सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
(iii) यथासंभव सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखिए।
(iv) खंड ‘अ’ में कुल 12 प्रश्न हैं, जिनमें उपप्रश्नों की संख्या 45 हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए 40 उपप्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य हैं।
(v) खंड ‘ब’ में कुल 7 प्रश्न हैं, सभी प्रश्नों के साथ उनके विकल्प भी दिए गए हैं। निर्देशानुसार विकल्प का ध्यान रखते हुए सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

खण्ड ‘अ’
(वस्तुपरक प्रश्न)

‘I’ : अपठित गद्यांश

1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)

एक संन्यासी जीवन के रहस्यों को खोजने के लिए कई दिनों तक तपस्या और कठोर साधना में लगे रहे, पर आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई । थक-हारकर उन्होंने तपस्या छोड़कर घर लौटने का निश्चय किया । दुःख और पराजय की भावना ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था। वे लड़खड़ाते क़दमों से वापस आ रहे थे। रास्ते में उन्हें प्यास लगी। पानी पीने के लिए जब वे एक नदी के किनारे गए, तो वहाँ उन्होंने एक अजीब नज़ारा देखा। एक नन्हीं-सी गिलहरी नदी के जल में अपनी पूँछ भिगोकर पानी बाहर छिड़क रही थी । गिलहरी बिना थके अविचल भाव से इस कार्य को करती जा रही थी। संन्यासी ने उत्सुकता से गिलहरी से पूछा, यह तुम क्या कर रही हो ?” गिलहरी ने उत्तर दिया, “इस नदी ने मेरे बच्चों को बहाकर मार डाला, मैं उसी का बदला ले रही हूँ। मैं नदी को सुखाकर ही रहूँगी।” संन्यासी ने कहा, “तुम्हारी छोटी-सी पूँछ में भला कितनी बूँदें आती होंगी। तुम्हारे इतने छोटे शरीर, थोड़े से बल और सीमित साधनों से यह नदी कैसे सूख सकेगी ? इतना बड़ा काम असंभव है। तुम इसे कभी खाली नहीं कर सकती हो।” इतना सुनकर गिलहरी बोली, “यह नदी कब खाली होगी, यह तो मैं नहीं जानती लेकिन मैं अपने काम में निरंतर लगी रहूँगी। मैं श्रम करने और कठिनाइयों से टकराने के लिए तैयार हूँ, फिर मुझे सफलता क्यों नहीं मिलेगी ?” संन्यासी सोचने लगा कि जब यह नन्हीं सी गिलहरी अपने थोड़े से साधनों से इतना बड़ा कार्य करने का स्वप्न देखती है, तब मैं भला उच्च मस्तिष्क तथा मज़बूत शरीर वाला विकसित मनुष्य अपनी मंजिल को क्यों नहीं पा सकता ? कठिनाइयों से लड़ने के संकल्प से ही मनुष्य में शक्ति का संचार होता है, जिससे उसे सफलता प्राप्त होती है। मुसीबतों से लोहा लेकर ही मनुष्य का चरित्र चमकता है और उसमें देवत्व का विकास होता है। यह सोचकर संन्यासी फिर साधना के लिए लौट गए।

(1) संन्यासी ने जीवन के रहस्यों को जानने के लिए क्या किया ?
(क) उन्होंने कठोर साधना की ।
(ख) उन्होंने ईश्वर को प्राप्त करने के लिए व्रत किए।
(ग) उन्होंने कठोर यज्ञ व हवन किए।
(घ) उन्होंने कठोर साधना व तप किए।
उत्तर:
(घ) उन्होंने कठोर साधना व तप किए।

व्याख्या- संन्यासी ने जीवन के रहस्यों को जानने के लिए कठोर साधना व तप किए ।

(2) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए |
कथन (A): संन्यासी नदी तट पर गए ।
कारण (R) : संन्यासी को अपनी प्यास बुझानी थी।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही हैं ।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
(घ) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
उत्तर:
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।

व्याख्या – संयासी नदी तट पर अपनी प्यास बुझाने के लिए गए।

(3) गिलहरी नदी का पानी क्यों सुखा रही थी ?
(क) पानी का स्तर बढ़ जाने से ।
(ख) घर में पानी भर जाने से ।
(ग) बच्चों के मर जाने पर बदले की भावना से ।
(घ) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ग) बच्चों के मर जाने पर बदले की भावना से ।

(4) संन्यासी पर गिलहरी की बात का क्या प्रभाव पड़ा ?
(क) उन्होंने दुराचारी लोगों का साथ छोड़ दिया।
(ख) उन्होंने भिक्षा माँगना छोड़ दिया ।
(ग) उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति के लिए साधना की ।
(घ) उन्होंने सत्य का मार्ग अपनाया ।
उत्तर:
(ग) उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति के लिए साधना की ।

(5) प्रस्तुत गद्यांश से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
(क) हमें दृढ़ निश्चयी होना चाहिए ।
(ख) हमें लक्ष्य प्राप्ति के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए।
(ग) हमें विषम परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।
(घ) उपर्युक्त सभी ।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी ।

व्याख्या- हमें दृढ़ निश्चयी होने के साथ-साथ लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए तथा विषम परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।

2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए – (1 × 5 = 5)

इलाहाबाद में जो जी. जी. सी. एल. का दफ्तर है, वह एक खूबसूरत इमारत है, तीन तरफ़ हरियाली से घिरी । सामने कुछ और खूबसूरत मकान हैं जिनके बरामदों में विशाल झूले लगे हैं। बगल में सेंट जेवियर्स स्कूल है। छुट्टी की घंटी पर नीली यूनीफॉर्म पहने छोटे-छोटे बच्चे स्कूल के फाटक के बाहर भीड़ लगाते हैं।

अटैची में कपड़े, आँखों में सपने और अंतर में आकुलता लिए न जाने कहाँ-कहाँ से नौजवान लड़के नौकरी की खातिर इस शहर में आ पहुँचे हैं। बड़ी-बड़ी सर्विस इंडस्ट्री में कार्यरत ये नवयुवक सवेरे नौ बजे से रात नौ बजे तक अथक परिश्रम करते हैं। एक दफ़्तर के दो-तीन लड़के मिल कर तीन या चार हज़ार तक के किराए का एक फ्लैट ले लेते हैं। सभी बराबर का शेयर करते हैं- किराया, दूध का बिल, टॉयलेट का सामान, लॉन्ड्री का खर्च । इस अंजान शहर में रम जाना उनके आगे नौकरी में जम जाने जैसी ही चुनौती है, हर स्तर पर। कहाँ अपने घर में ये लड़के शहज़ादों की तरह रहते थे, कहाँ सारी सुख-सुविधाओं से वंचित, घर से इतनी दूर ये सब सफलता के संघर्ष में लगे हैं। न इन्हें भोजन की चिंता है, न आराम की। एक आँख कम्प्यूटर पर गड़ाए ये भोजन की रस्म अदा कर लेते हैं और फिर लग जाते हैं कंपनी के व्यापार लक्ष्य को सिद्ध करने में। ज़ाहिर है, व्यापार या लाभ लक्ष्य इतने ऊँचे होते हैं कि सिद्धि का सुख हर एक को हासिल नहीं होता । सिद्धि, इस दुनिया में, एक चार पहिया दौड़ है जिसकी स्टियरिंग आपके हाथ में है पर बाकी सारे कंट्रोल कंपनी के हाथ में । वही तय करती है कि आपको किस रफ़्तार से दौड़ना है और कब तक ?

(1) जी. जी. सी. एल. के दफ्तर के आस-पास की स्थिति बताइए –
(क) बनारस में, खूबसूरत इमारत और पहाड़ी के पास ।
(ख) खूबसूरत भवन, लखनऊ में और स्टेशन के पास ।
(ग) जयपुर में, खूबसूरत कोठी और किले के पास ।
(घ) इलाहाबाद में, खूबसूरत मकान और सेंट जेवियर्स स्कूल के पास ।
उत्तर:
(घ) इलाहाबाद में, खूबसूरत मकान और सेंट जेवियर्स स्कूल के पास ।

व्याख्या – जी. जी. सी. एल. दफ़्तर इलाहाबाद में खूबसूरत मकान और सेंट जेवियर्स स्कूल के पास था।

(2) नौजवान लड़के किस उद्देश्य से यहाँ आते हैं ?
(क) भ्रमण व सुख प्राप्ति के लिए ।
(ख) शिक्षा प्राप्त तथा सपनों को साकार करने के लिए ।
(ग) नौकरी की तलाश व मौजमस्ती के लिए।
(घ) नौकरी की तलाश में, अपने सपनों को साकार कर सिद्धि का सुख प्राप्त करने के लिए ।
उत्तर:
(घ) नौकरी की तलाश में, अपने सपनों को साकार कर सिद्धि का सुख प्राप्त करने के लिए ।

(3) किराए के फ्लैट में रहने वाले नवयुवक किन खर्चों की साझेदारी करते हैं?
(क) मकान का किराया देना ।
(ख) दूध का बिल देना ।
(ग) टॉयलेट का सामान व लॉण्ड्री का खर्च |
(घ) उपर्युक्त सभी ।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी ।

व्याख्या- किराए के फ्लैट में रहने वाले नवयुवक मकान का किराया, दूध का बिल, टॉयलेट का सामान व लॉण्ड्री के खर्च की साझेदारी करते हैं।

(4) नवयुवकों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है?
(क) न समय पर भोजन मिलता है।
(ख) न ही आराम मिलता है, सभी सुख-सुविधाओं का त्याग करना पड़ता है।
(ग) शिक्षा व नौकरी नहीं मिलती है।
(घ) (क) और (ख) वाक्य सही हैं।
उत्तर:
(घ) (क) और (ख) वाक्य सही हैं।

(5) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन (A) : ‘एक आँख कम्प्यूटर पर गढ़ाए’ मे भोजन की रस्म अदा कर लेते हैं।
कारण (R) : लड़के पूरे दिन काम में लगे रहते हैं परंतु उन्हें वहाँ का भोजन पसन्द नहीं आता है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही हैं ।
(ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
उत्तर:
(ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

‘II’: व्यावहारिक व्याकरण

3. निम्नलिखित ‘शब्द और पद’ पर आधारित दो बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 2 = 2)

(1) वर्णों का स्वतन्त्र व सार्थक समूह कहलाता है-
(क) वाक्य
(ख शब्द
(ग) स्वर
(घ) अनुच्छेद
उत्तर:
(ख शब्द

व्याख्या- वर्णों का स्वतन्त्र व सार्थक समूह ‘शब्द’ कहलाता है।

(2) अर्थ के आधार पर शब्द होते हैं-
(क) सार्थक
(ख) निरर्थक
(ग) तत्सम
(घ) (क) व (ख) दोनों।
उत्तर:
(घ) (क) व (ख) दोनों।

व्याख्या- अर्थ के आधार पर शब्द सार्थक व निरर्थक होते हैं ।

4. निम्नलिखित ‘अनुस्वार तथा अनुनासिक’ पर आधारित तीन बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) अनुस्वार चिह्न के उचित प्रयोग वाला शब्द है-
(क) जगंल
(ख) जँगल
(ग) जंगल
(घ) जगँल
उत्तर:
(ग) जंगल

(2) निम्नलिखित शब्दों में से उस शब्द को चुनिए, जिसमें अनुस्वार का प्रयोग होता है :
(क) गणतंत्र
(ख) ध्वनियाँ
(ग) आँख
(घ) गाँव
उत्तर:
(क) गणतंत्र

(3) अनुनासिक चिह्न के उचित प्रयोग वाला शब्द है-
(क) संभावना
(ख) सुंगधित
(ग) अंसभव
(घ) आँख
उत्तर:
(घ) आँख

व्याख्या- अनुनासिक चिह्न के उचित प्रयोग वाला शब्द आँख है । क्योंकि अनुनासिक में नासिका तथा मुख दोनों से साँस बाहर आती है।

5. निम्नलिखित ‘ उपसर्ग तथा प्रत्यय’ पर आधारित पाँच बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(1) ‘परिवर्तन’ में उचित उपसर्ग है-
(क) परी
(ख) परि
(ग) पर
(घ) पर्
उत्तर:
(ख) परि

व्याख्या-परिवर्तन में उचित उपसर्ग परि है।

(2) ‘अधखुला’ में उचित उपसर्ग है-
(क) अ
(ख) अधि
(ग) अध्
(घ) अध
उत्तर:
(घ) अध

(3) ‘सामाजिक’ शब्द में प्रयुक्त सही मूल शब्द व प्रत्यय है-
(क) समाज + इक
(ख) सभा + जक
(ग) समाजि + क
(घ) साम + जिक
उत्तर:
(क) समाज + इक

व्याख्या- सहायक शब्द में मूल शब्द सहाय तथा प्रत्यय अंक है जैसे- समाय + अक = सहायक ।

(4) ‘रसीला’ शब्द में प्रयुक्त उचित मूल शब्द व प्रत्यय है-
(क) रस + इला
(ख) रसी + ला
(ग) रसील + आ
(घ) रस + ईला
उत्तर:
(घ) रस + ईला

(5) ‘आऊ’ प्रत्यय किस शब्द में है ?
(क) गरमाहट
(ख) भलाई
(ग) उपजाऊ
(घ) अभिनेता
उत्तर:
(ग) उपजाऊ

6. निर्देशानुसार ‘स्वर सन्धि’ पर आधारित चार बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 3 = 3)

(1) ‘लघूर्मि’ में कौन-सी सन्धि है ?
(क) यण सन्धि
(ख) गुण सन्धि
(ग) दीर्घ सन्धि
(घ) वृद्धि सन्धि
उत्तर:
(ग) दीर्घ सन्धि

(2) निम्नलिखित यण सन्धि का उदाहरण नहीं है।
(क) स्वागत
(ख) स्वांग
(ग) स्वच्छ
(घ) स्वला
उत्तर:
(ख) स्वांग

(3) ‘सदैव’ शब्द में कौन-सी सन्धि है?
(क) अयादि सन्धि
(ख) वृद्धि सन्धि
(ग) गुण सन्धि
(घ) दीर्घ सन्धि
उत्तर:
(ख) वृद्धि सन्धि

(4) प्रत्येक का सन्धि विच्छेद है-
(क) प्रत्य + एक
(ख) प्रति + ऐक
(ग) प्रत्येक
(घ) प्रति + एक
उत्तर:
(घ) प्रति + एक

व्याख्या – सदैव शब्द में वृद्धि संधि है क्योंकि वृद्धि संधि में (घ) आ + ए = ऐ हो जाता है।

7. निर्देशानुसार ‘विरामचिह्न’ पर आधारित चार बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 3 = 3)

(1) ‘दिन-रात ‘ इन दोनों शब्दों के बीच लगा चिह्न क्या कहलाता है ?
(क) अल्पविराम-चिह्न
(ख) योजक- चिह्न
(ग) लाघव चिह्न
(घ) अर्द्धविराम-चिह्न
उत्तर:
(ख) योजक- चिह्न

(2) विराम चिह्न (;) का क्या नाम है?
(क) अर्द्ध विराम चिह्न
(ख) पूर्ण विराम चिह्न
(ग) निर्देशक चिह्न
(घ) उपविराम चिह्न
उत्तर:
(क) अर्द्ध विराम चिह्न

(3) किसी के कथन को उद्धृत करने हेतु किस विराम चिह्न का प्रयोग करते हैं?
(क) प्रश्नवाचक – चिह्न
(ख) निर्देशक – चिह्न
(ग) अवतरण / उद्धरण
(घ) योजक – चिह्न
उत्तर:
(ग) अवतरण / उद्धरण

व्याख्या- किसी के कथन को उद्धृत करने के लिए उद्धृत अथवा अवतरण चिह्न का प्रयोग करते हैं।

(4) किसी कठिन शब्द को स्पष्ट करने हेतु किस विराम चिह्न का प्रयोग करते हैं?
(क) कोष्ठक
(ख) अर्द्धविराम-चिह्न
(ग) योजक – चिह्न
(घ) पूर्ण विराम चिह्न
उत्तर:
(क) कोष्ठक

व्याख्या- किसी कठिन शब्द को स्पष्ट करने के लिए कोष्ठक चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

8. निर्देशानुसार ‘अर्थ की दृष्टि से वाक्य – -भेद’ पर आधारित तीन बहुविकल्पीय प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) शायद आज वर्षा हो ।
(क) विधानवाचक
(ख) इच्छावाचक
(ग) संदेहवाचक
(घ) प्रश्नवाचक
उत्तर:
(ग) संदेहवाचक

(2) आज तुम्हारे साथ कौन था ? यह वाक्य है-
(क) नकारात्मक
(ख) प्रश्नवाचक
(ग) आज्ञावाचक
(घ) विस्मयवाचक
उत्तर:
(ग) संदेहवाचक

व्याख्या- ‘आज तुम्हारे साथ कौन था ? में कौन प्रश्न का बोध करा रहा है अतः यहाँ विकल्प (ख) सही है।

(3) कॉलम – 1 को कॉलम-2 के साथ सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए-
CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 1 with Solutions 1
उत्तर:
(क) 1- (iii), 2- (i), 3- (ii)

‘III’ : पाठ्य पुस्तक स्पर्श भाग-1 (14 अंक)

9. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए- (1 × 5 = 5)

‘अब कैसे छूटै’ राम नाम रट लागी ।
प्रभु जी, तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी ।।
प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चन्द चकोरा ।
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती ।।
प्रभु जी, तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सुहागा।
प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै रैदासा ।।

(1) ‘जैसे चितवत चन्द चकोरा’ पंक्ति का आशय है-
(क) चाँद आसमान की ओर टकटकी लगा देखता रहता है
(ख) आसमान में चारों दिशाओं में चकोर दिखाई देता है
(ग) चकोर पक्षी चन्द्रमा की ओर टकटकी लगाए देखता रहता है
(घ) मोर – चकोर दोनों बादलों की ओर देखते हैं
उत्तर:
(ग) चकोर पक्षी चन्द्रमा की ओर टकटकी लगाए देखता रहता है

व्याख्या – जिस प्रकार चकोर पक्षी अपने प्रियतम चाँद को एकटक निहारता रहता है, उसी प्रकार कवि भी अपने प्रभु की ओर टकटकी लगाए हुए निहारता रहता है।

(2) कवि को किसकी लगन लग गई है ?
(क) ईश्वर की
(ख) संतान की
(ग) पढ़ाई की
(घ) संसार की
उत्तर:
(क) ईश्वर की

(3) यदि प्रभु चन्दन है, तो कवि है-
(क) घना वन
(ख) पानी
(ग) वर्षा
(घ) चकोर
उत्तर:
(ख) पानी

व्याख्या- जैसे चन्दन की लकड़ी को पानी में डालने पर पूरा पानी सुगन्धित हो जाता है उसी तरह भगवान भी कवि के रोम-रोम समाए हुए हैं।

(4) कवि की भक्ति किस प्रकार की है ?
(क) दास्य भाव
(ख) साख्य भाव
(ग) दैन्य भाव
(घ) विरह भावना से प्रेरित
उत्तर:
(क) दास्य भाव

(5) कवि ने ‘जोति’ किसे कहा है?
(क) जल
(ख) ज़माना
(ग) ‘ज्योति’
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) ‘ज्योति’

10. निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए- (1 × 2 = 2)

(1) ‘प्रभु जी, तुम चन्दन हम पानी’ पंक्ति किसकी है?
(क) रहीम
(ख) रैदास
(ग) कबीर
(घ) तुलसीदास
उत्तर:
(ख) रैदासा

(2) रैदास ने अपने पदों में किस भाषा का प्रयोग किया है।
(क) ब्रजभाषा
(ख) अवधि
(ग) राजस्थानी
(घ) फ़ारसी
उत्तर:
(क) ब्रजभाषा

व्याख्या- रैदास ने अपने पदों में ब्रज भाषा का प्रयोग किया है।

11. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए- (1 × 5 = 5)

परचून की दुकान पर बैठे लालाजी ने कहा, “अरे भाई, उनके लिए मरे जिए का कोई मतलब न हो, पर दूसरे के धर्म – ईमान का तो ख्याल करना चाहिए। जवान बेटे के मरने पर तेरह दिन का सूतक होता है और वह यहाँ सड़क पर बाज़ार में आकर खरबूजे बेचने बैठ गई। हजार आदमी आते-जाते हैं। कोई क्या जानता है कि इसके घर में सूतक है । कोई इसके खरबूजे खा ले तो उसका ईमान-धर्म कैसे रहेगा ? क्या अँधेर है ?”

(1) सूतक कितने दिन का होता है?
(क) बारह दिन का
(ख) ग्यारह दिन का
(ग) तेरह दिन का
(घ) दस दिन का
उत्तर:
(क) बारह दिन का

व्याख्या- हमारी सामाजिक मान्यता के अनुसार घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर तेरह दिन का शोक मनाया जाता है। इन दिनों को सूतक माना जाता है।

(2) बुढ़िया के खरबूजे खा लेने पर लालाजी के अनुसार क्या हो सकता है?
(i) पेट खराब हो सकता है।
(ii) रोगी हो सकता है।
(iii) ईमान-धर्म भ्रष्ट हो सकता है।
(iv) धर्म पर प्रभाव पड़ सकता है।
(क) (i) और (ii)
(ख) केवल (ii)
(ग) केवल (iii)
(घ) (iii) और (iv)
उत्तर:
(ग) केवल (iii)

(3) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन (A): कोई मरे – जिए इन्हें मतलब नहीं है।
कारण (R): दूसरे के धर्म-ईमान का ख़्याल नहीं है।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है ।
(ग) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
उत्तर:
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।

(4) ‘जवान’ शब्द का विलोम है-
(क) वयस्क
(ख) अधेड़
(ग) बूढ़ा
(घ) नौजवान
उत्तर:
(ग) बूढ़ा

(5) ‘आदमी’ शब्द का स्त्रीलिंग है-
(क) लड़की
(ख) बालिका
(ग) पुत्री
(घ) औरत
उत्तर:
(घ) औरत

व्याख्या- चूँकि लड़का का स्त्रीलिंग लड़की, बालक का स्त्रीलिंग बालिका व पुत्र का स्त्रीलिंग पुत्री है। अतः विकल्प (घ) सही है।

12. निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए । (1 × 2 = 2)

(1) लेखक किसके रोने का कारण नहीं जान सका ? उचित विकल्व का चयन कीजिए-
(i) बच्चे के रोने का कारण
(iii) लाला जी के रोने का कारण
(ii) बुढ़िया के रोने का कारण
(iv) इनमें से कोई नहीं
(क) केवल (i)
(ख) केवल (ii)
(ग) केवल (iii)
(घ) केवल (iv)
उत्तर:
(ख) केवल (ii)

(2) ‘दुःख का अधिकार’ कहानी में किसका यथार्थ चित्रण है?
(क) निर्धन परिवार का
(ख) सम्पन्न परिवार का
(ग) लोकमत का
(घ) गाँव का
उत्तर:
(क) निर्धन परिवार का

व्याख्या- ‘दुःख का अधिकार’ कहानी में यशपाल जी ने निर्धन परिवार की करुणापूर्ण वेदना का वर्णन किया है।

खण्ड ‘ब’ (40)
(वर्णनात्मक प्रश्न)

स्पर्श भाग-1 (12 अंक)

13. निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 × 2 = 6)

(1) यशपाल जी की कहानी ‘दुःख का अधिकार’ में दुःख मनाने का अधिकार सबको क्यों नहीं है ?
उत्तर:
दुःख मनाने का अधिकार केवल अमीर व्यक्तियों को है। गरीब आदमी दुःखी होकर भी दुःख मनाने का अवसर नहीं पाता है क्योंकि उसे विवशत: मज़दूरी करनी पड़ती है। दुःखों को सहन करना पड़ जाता है।

व्याख्यात्मक हल :
दुःख की अनुभूति तो समाज का प्रत्येक वर्ग करता है परन्तु दुःख मनाने का अधिकार सबको एक समान नहीं है। वह केवल संपन्न वर्ग को ही प्राप्त है क्योंकि उसके पास शोक मनाने के लिए सहूलियत भी है और समय भी । इसलिए संपन्न वर्ग दुःख मनाने का दिखावा भी कर पाता है और इसे अपना अधिकार भी समझता है। गरीब वर्ग की विवशता न तो उन्हें दुःख मनाने की सुविधा प्रदान करती है, न अधिकार । वे तो अपने परिवार के पालन पोषण के लिए रोज़ी-रोटी की उलझन में ही उलझे रहते हैं। अत: रोज़ी-रोटी की चिन्ता उन्हें दुःख मनाने का भी अधिकार नहीं देती ।

(2) ‘एवरेस्ट : मेरी शिखर यात्रा’ पाठ में उपनेता प्रेमचंद ने किन परिस्थितियों से अवगत कराया ?
उत्तर:
अभियान दल के उपनेता प्रेमचन्द अग्रिम दल का नेतृत्व कर रहे थे । वे 26 मार्च को पैरिच लौट आए और आकर उन्होंने पहली बड़ी बाधा खुंभु हिमपात की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैम्प – एक 6000 मीटर ऊपर है, जो हिमपात के ठीक ऊपर ही है । वहाँ तक जाने का रास्ता साफ़ कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुल बनाकर, रस्सियाँ बाँधकर तथा झाड़ियों से रास्ता चिह्नित कर सभी बड़ी बाधाओं का जायज़ा ले लिया गया है और यह भी बताया कि ग्लेशियर बर्फ़ की नदी है और अभी बर्फ़ का गिरना जारी है। हिमपात के कारण सारा काम व्यर्थ भी हो सकता है तथा हमें रास्ता खोलने का काम दोबारा भी करना पड़ सकता है।

(3) ‘अतिथि देवो भवः’ उक्ति की व्याख्या पर आधुनिक युग के सन्दर्भ में इसका आंकलन प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर:
अतिथि देवता के समान होता है। यह कथन पहले के समय में सार्थक था, किन्तु आधुनिक युग में यह चरितार्थ नहीं होता है। आज लोगों के पास अपने लिए ही समय नहीं है। वे अतिथियों को कैसे समय दें ? आज के लोग कमाने में, अपना भविष्य बनाने में, पढ़ने-पढ़ाने में अधिक ध्यान देने लगे हैं । अतः अब अतिथि के आने पर उनकी खुशी बढ़ती नहीं, बल्कि कम होती है। अतिथि के आने की खबर सुनकर ही चैन उड़ जाता है क्योंकि उसके आने की खबर के साथ ही ज़ेहन में सवाल उठने लगते हैं कि कहाँ उन्हें ठहराया जाएगा ? खाने में क्या-क्या बनाना होगा ? आदि सवाल अतिथि के आने के पहले ही परेशान करने लगते हैं।

14. निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 × 2 = 6)

(1) रहीम के अनुसार कौन-सा जल स्रोत या साधन उपयोगी होता है ?
उत्तर:
रहीम के अनुसार, वही जल स्रोत या साधन मनुष्य के लिए उपयोगी होता है जो उसके काम आता है। सागर कितना भी बड़ा हो किंतु वह किसी की प्यास नहीं बुझा पाता, इसलिए अनुपयोगी होता है। इसके विपरीत पंक का जल भी लघु जीवों के काम आने के कारण उपयोगी कहलाता है। इसलिए महत्त्व उपयोग में आने का है, विस्तार का नहीं।

व्याख्यात्मक हल-
रहीम के अनुसार किसी भी व्यक्ति या वस्तु की महत्ता उसके छोटे या बड़े होने के आधार पर तय नहीं होती बल्कि उसकी उपयोगिता के आधार पर होती है। जो हमारे लिए जितना अधिक उपयोगी होगा वह उतना ही महत्त्वपूर्ण माना जाएगा। जिस प्रकार सागर बहुत विशाल होता है लेकिन उसका पानी खारा होने के कारण किसी की प्यास नहीं बुझा सकता इसलिए वह हमारे लिए अनुपयोगी होता है। इसके विपरीत कीचड़ से युक्त जल पीकर छोटे-छोटे जीव अपनी प्यास बुझा सकते हैं। इसलिए सागर की अपेक्षा कीचड़ से युक्त जल श्रेष्ठ है।

(2) प्रथम छंद में वर्णित प्रकृति-चित्रण को लिखिए । [NCERT]उत्तर:
प्रथम छंद में प्रकृति का चित्रण करते हुए कवि बताता है कि वन के सूने शांत वातावरण में नदी तीव्र गति से बहती चली जा रही है। लगता है कि वह अपने तटों से अपना दुःख कह रही है और अपना दिल हल्का कर रही है। तट पर एक गुलाब का पौधा है। उस पर लगा गुलाब किसी सोच-विचार में मग्न दिखाई देता है। पास ही नदी बह रही है। उसके किनारे पर गुलाब चुपचाप खड़ा हुआ है।

(3) ‘अग्निपथ’ कविता में ‘अग्निपथ’ किसे कहा गया है और क्यों ? लिखिए ।
उत्तर:

  • संघर्षरत जीवन को ।
  • जीवन में अनुकूल एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
  • सुविधारूपी प्रलोभन राह में बाधा उत्पन्न करते हैं।
  • सुखों में डूबकर, परिश्रम न करने से हम अपनी मंजिल से दूर हो जाते हैं।

व्याख्यात्मक हल-
‘अग्निपथ’ से कवि का आशय कठिन संघर्षमय जीवन से है। जीवन किसी आग रूपी मार्ग अर्थात् ‘अग्निपथ’ से कम नहीं है। जीवनरूपी मार्ग में आई तरह-तरह की बाधाएँ और रुकावटें मनुष्य को रोकने का प्रयास करती हैं। लेकिन मनुष्य को बाधाओं से हार मानकर न तो थकना है और न ही सुविधा रूपी प्रलोभनों के माया जाल में फँस कर रुकना है, उसे बिना थके और बिना रुके सतत् रूप से परिश्रम करते रहना है, तभी वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएगा।

15. निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए- (3 × 2 = 6)

(1) गिल्लू को जाली के पास बैठकर अपनेपन से बाहर झाँकते देखकर लेखिका ने इसे मुक्त करना आवश्यक क्यों माना ? तीन कारणों सहित स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:

  • गिल्लू की भावनाओं को समझने के कारण,
  • बंधन से मुक्ति,
  • जीवों के प्रति दया तथा उनकी इच्छा का सम्मान।

व्याख्यात्मक हल –
जब गिल्लू के जीवन का पहला वसंत आया तब बाहर की गिलहरियाँ खिड़की की जाली के पास आकर चिक-चिक की आवाज़ करके मानो कुछ कहने लगीं। गिल्लू भी जाली के पास बैठकर अपनेपन से बाहर झाँकता रहता। तब लेखिका को लगा कि इसे मुक्त करना आवश्यक है । इसलिए उन्होंने कीलें निकालकर जाली का एक कोना खोल दिया। ऐसा लगा कि गिल्लू ने इससे बाहर जाकर जैसे मुक्ति की साँस ली।

लेखिका के हृदय में जीवों के प्रति दया का भाव था । वह उनकी इच्छाओं का सम्मान करती थी । वह पशु-पक्षियों को किसी बंधन या कैद में नहीं रखना चाहती थी। जब उन्हें महसूस हुआ कि गिल्लू बाहर जाना चाहता है तो उन्होंने उसे बाहर जाने के लिए स्वयं रास्ता दे दिया।

(2) ‘स्मृति’ कहानी बाल मनोविज्ञान को किस प्रकार प्रकट करती है ? बच्चों के स्वभाव, उनके विचारों के विषय में हमें इससे क्या जानकारी मिलती है ?
उत्तर:

  • बच्चे मार से, डाँट से बहुत डरते हैं।
  • शरारतें करना उनका स्वभाव है।
  • खतरे उठाना, जोखिम लेना उन्हें अच्छा लगता है।
  • बच्चे अपनी माँ को मुसीबत में बहुत याद करते हैं।
  • अधिकतर बच्चे ईमानदार व ज़िम्मेदार होते हैं।

व्याख्यात्मक हल-

बाल मस्तिष्क हर समय सूझ-बूझ से कार्य करने में सक्षम नहीं होता। बच्चे शरारतों का ध्यान आते ही अपने चंचल मन को रोक नहीं पाते । खतरे उठाने, जोखिम लेने, साहस का प्रदर्शन करने में उन्हें आनन्द आता है, वे अपनी जान को खतरे में डालने से भी नहीं चूकते, लेकिन बच्चों का हृदय बहुत कोमल होता है। बच्चे मार व डाँट से बहुत डरते हैं। जिस तरह लेखक बड़े भाई की डाँट व मार के डर से तथा चिट्टियों को समय पर पहुँचाने की ज़िम्मेदारी की भावना के कारण ज़हरीले साँप तक से भिड़ गया। बच्चे अधिकतर ईमानदार होते हैं, वे बड़ों की भाँति न होकर छल व कपट से दूर होते हैं । मुसीबत के समय बच्चों को सबसे अधिक अपनी माँ की याद आती है। माँ के आँचल में वे स्वयं को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं ।

(3) ‘कल्लू कुम्हार की उनाकोटी’ पाठ में त्रिपुरा के बारे में व्यक्त किए गए लेखक के विचारों पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
लेखक का मानना है कि भारत के छोटे राज्यों में से एक त्रिपुरा की जनसंख्या वृद्धि दर बहुत अधिक है। यह पहाड़ी इलाका तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है, जबकि शेष भारत से संपर्क मिजोरम एवं असम द्वारा होता है । यहाँ बांग्लादेशी बड़ी संख्या में अवैध रूप से आते हैं।

लेखक का कहना है कि यहाँ उज्जयंत महल है। पहले माणिक्य वंश त्रिपुरा पर शासन करता था । प्रसिद्ध संगीतकार आर. डी. वर्मन त्रिपुरा के ही रहने वाले थे। इसके अतिरिक्त, यहाँ अनेक प्रसिद्ध लोकगायक हैं। त्रिपुरा में अनेक धर्मों के लोग रहते हैं और इसके कई क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएँ होती रहती हैं, जिससे निपटने के लिए सी. आर. पी. एफ. तैनात रहती है । त्रिपुरा के लोग अगरबत्तियों के लिए बाँस की सीकें तैयार करते हैं । यहाँ टी. पी. एस. (टरू पोटेटो सीड्स) की सफलतापूर्वक खेती होती है जिसका निर्यात भी किया जाता है। उत्तरी त्रिपुरा जिले के उनाकोटी का शिव मंदिर बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ एक करोड़ से एक कम ‘शव मूर्तियाँ हैं । चट्टानों पर चित्रित शिव की मूर्तियों के अंतर्गत गंगा की अवतरण संबंधी पौराणिक कथा को भी देखा जा सकता है ।

16. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत – बिन्दुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए- (6 × 1 = 6)

1. स्कूल इमारत की आत्मकथा :

  • निर्माण कथा
  • बच्चों का साथ
  • मेरा सपना

उत्तर:

स्कूल इमारत की आत्मकथा

शिक्षा प्राप्त करना हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन आज भी भारत में कई गाँव शिक्षा से वंचित हैं। ऐसे ही एक गाँव में शिक्षा के महत्त्व को देखते हुए मेरे निर्माण का निर्णय लिया गया। गाँव के प्रधान ने मेरे निर्माण के लिए भूखंड दान में देकर नींव रखीं। कई मज़दूर दिन-रात कार्य में लगाए गए क्योंकि अप्रैल माह से प्रारम्भ होने वाले सत्र से पहले मेरे निर्माण का लक्ष्य हासिल कर लेना था। धन व समय की कमी के कारण कई गाँव वाले भी श्रमदान करने को आगे आए।

निःस्वार्थ भाव से मेरे निर्माण में बहाए उनके पसीने से मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करने लगी। मेरा निर्माण एक महान् उद्देश्य की पूर्ति के लिए हो रहा था। धीरे-धीरे मैं आकार लेने लगी। छोटी-बड़ी कई कक्षाएँ, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, शौचालय आदि का निर्माण होने लगा। एक बगीचे के द्वारा मेरे आँचल को हरा-भरा बनाया गया। तरह-तरह के फर्नीचर, श्यामपट्ट, पुस्तकों, खेल के सामान आदि साधनों से मुझे सजाया गया।

सत्र के प्रारम्भ होते ही छोटे-बड़े कई बच्चे विद्यालयी गणवेश में सुसज्जित होकर मेरे आँगन में आए। उनकी किलकारियों व शरारतों से मेरा नीरस वातावरण गुंजायमान हो उठा। उनकी शिक्षा प्राप्ति में सहायक बन मैं स्वयं को धन्य मानने लगी। मेरा यही सपना है कि भविष्य में मेरा आकार समय-समय पर विस्तार लेता रहे ताकि अधिकाधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर एक आदर्श नागरिक बन सकें और जीवन में सफलता प्राप्त करें ।

2. हमारा शहर :

  • कौन सा
  • विशेषता
  • हमारा कर्त्तव्य

उत्तर:

हमारा शहर

हिसार शहर में रहता हूँ। यह हरियाणा राज्य में है। हरियाणवी में हिसार शब्द का अर्थ किला या दुर्ग होता है। कहा जाता है कि किसी समय दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान का यही एक किला था। उसकी पराजय और मृत्यु के बाद राज्य के साथ किला भी मुसलमान राजाओं के हाथों में चला गया। सन् 1356 में सम्राट फिरोज़शाह तुगलक ने इस किले को दोबारा बनवाकर हिसार नाम रखा। यह शहर चारों तरफ़ से ऊँची-ऊँची दीवारों से घिरा है।

शहर में आने-जाने के लिए चार मुख्य द्वार हैं। शहर के पूरब में एक नहर है। शहर की आबादी लगभग साठ हज़ार है। यहाँ के अधिकांश निवासी हिन्दू हैं। हमारे शहर में तीन हाईस्कूल हैं। तीनों ही स्कूलों की इमारतें बड़ी शानदार हैं। स्टेशन रोड पर मेमोरियल हॉल की शानदार इमारत हर गुज़रने वाले राहगीर का ध्यान आकर्षित करती है। शहर में एक नगरपालिका, दीवानी व फौजदारी अदालतें हैं तथा हिसार डिविजन का मुख्यालय भी यहीं पर है। शहर में नलों द्वारा पानी की व्यवस्था है तथा पूरे शहर में बिजली है।

शहर के आस-पास कई प्राचीन स्मारक हैं जिसमें 600 वर्ष पुराना ‘गुजरी’ महल प्रमुख है। यहाँ के गाय-बैल और सांड़ बड़े मशहूर हैं। यहाँ साल में दो बार बड़े पशु मेले लगते हैं, जो पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके के निकट होने के कारण यहाँ गर्मियों में भीषण गर्मी व सर्दियों में तेज़ ठंड पड़ती है। धीरे-धीरे यहाँ लघु और कुटीर उद्योगों के स्थापित होने से विकास के मार्ग खुलने लगे हैं। हरियाणा राज्य को हिसार पर गर्व है। हमारा कर्त्तव्य है कि हम एक आदर्श नागरिक बनकर शहर को साफ-सुथरा रखें और इसके विकास में योगदान दें। ताकि हमारा शहर हिसार प्रदूषण मुक्त होकर लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने और अपनी पहचान बनाए रखे।

3. बहुत कठिन है इंसान बनना :

  • इंसान से तात्पर्य
  • कठिन क्यों ?
  • क्या करें ?

उत्तर:

बहुत कठिन है इंसान बनना

इंसान से तात्पर्य है – जिसमें इंसानियत हो अर्थात् ऐसा प्राणी, जो दूसरे को पीड़ा में देखकर दुःखी होता है और उन्हें प्रसन्न देख सुख का अनुभव करता है। जो दया, स्नेह, क्षमा, परोपकार आदि गुणों से युक्त होता है, वही वास्तव में इंसान कहलाने योग्य होता है। इंसान बनना बहुत कठिन है, विशेषकर वर्तमान समय में। आज मनुष्य स्वार्थी होता जा रहा है। जहाँ एक ओर लोभ, घृणा, ईर्ष्या, अहंकार आदि दानवी प्रवृत्तियाँ अपना मोहजाल तेज़ी से फैला रही हैं वहीं मानवीय मूल्यों व नैतिक शिक्षा का ह्रास हो रहा है।

दूसरों से आगे निकलने की होड़ ने मनुष्य को अन्धा बना दिया है। वह दूसरों को हानि पहुँचाकर, उसे गिराकर स्वयं की तरक्की करने के हर सम्भव प्रयास में लगा रहता है। भौतिक सुख-सुविधाओं के अंधानुकरण में वह अपने मानव धर्म को भूलता जा रहा है। जिन आदर्शों का पालन करना उसका कर्तव्य होना चाहिए, उसे वह कोरी काल्पनिक बातें और बकवास समझता है।

सही मायनों में इंसान बनने के लिए हमें अपने मन को संयमित करना होगा। नेकी, ईमानदारी, संवेदनशीलता, करुणा आदि को जीवन में अपनाते हुए बचपन से ही इनका अभ्यास प्रारम्भ करना होगा। धर्म सदाचार का पालन करना होगा। एक सच्चा इंसान बनना कठिन अवश्य है पर असम्भव नहीं।

17. मकान नं. 12, गली फूलवाली, आदर्श नगर, दिल्ली में रहने वाली राधा की ओर से मकान मालिक को घर की मरम्मत करवाने का अनुरोध करते हुए लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए । (6 × 1 = 6)
उत्तर:
व्याख्यात्मक हल-

12, गली फूलवाली
आदर्श नगर, दिल्ली ।
दिनांक : 14 मई, 20…….
श्री राम अवतार जी,
सादर नमस्कार ।
महोदय,
मुझे यह सूचित करते हुए बहुत खेद हो रहा है, कि तेज़ वर्षा के कारण आपका मकान काफ़ी मात्रा में क्षतिग्रस्त हो गया है। यमुना का पानी मकान में काफ़ी भर गया था। सामने वाली दीवार तो कुछ दिन बाद ही गिर गई थी तथा दो कमरों की छतों से भी पानी टपकने लगा है। मुझे यह भय बना हुआ है कि मकान किसी हादसे का सबब न बन जाए।
मेरा काफ़ी सामान भी पानी से भीग जाने के कारण खराब हो गया है, अतः कमरों के बाहर ही सामान रखना पड़ रहा है। आपसे अनुरोध है कि मकान की स्थिति का निरीक्षण कर इसकी मरम्मत कराने का प्रबन्ध करें।
आशा है आप मेरी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही मकान की मरम्मत कराने की कृपा करेंगे।
धन्यवाद ।
भवदीय
राधा

18. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और चित्र को आधार बनाकर उसका परिचय देते हुए कोई लेख, घटना अथवा कहानी लिखिए, जिसका सीधा व स्पष्ट सम्बन्ध चित्र से होना चाहिए । (5 × 1 = 5)
CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 1 with Solutions 2
उत्तर:
प्रस्तुत चित्र ‘बाल श्रमिक’ की समस्या से सम्बन्धित है। चित्र में एक 13-14 साल का लड़का ईंटें बनाने के लिए फावड़े की सहायता से मिट्टी का गारा बना रहा है। लड़का यह कार्य पूरी तन्मयता और लगन के साथ कर रहा है। यह दृश्य शायद एक ईंट भट्टे का है जहाँ बच्चों से ईंट बनवाने का कार्य करवाया जा रहा है। कोई भी मनुष्य इस बाल-श्रम की बुराई के प्रति संवेदनशील दिखाई नहीं दे रहा है। आज भी हमारे देश में लाखों बच्चे इस बाल-श्रम की चपेट में हैं। उन्हें बचपन में किताबों से पढ़ने व खिलौनों से खेलने के स्थान पर मज़दूरी करनी पड़ रही है।

ऐसे बाल-श्रमिक घरों, कारखानों, दुकानों, होटलों, ढाबों पर मज़दूरी करते देखे जा सकते हैं। इन बाल-श्रमिकों को सुबह से लेकर रात तक कठोर परिश्रम करना पड़ता है। कई प्रकार की डाँट फटकार सहनी पड़ती है । विषम परिस्थितियों में काम करने से इनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, लेकिन इन्हें विवश होकर ये सब सहना पड़ता है। चित्र में भी बालक अपनी परिस्थितियों से समझौता कर कार्य करते हुए प्रसन्न है । वह इस बात से अनभिज्ञ है कि पढ़ने-लिखने के स्थान पर इस उम्र में यह कार्य करने से उसका पूरा जीवन अंधकारमय हो जाएगा।

एक लड़का था उसके कई भाई-बहन थे। पिता एक कारखाने में नौकरी करके किसी तरह परिवार का गुज़ारा करता था। एक दिन कारखाने में काम करते समय मशीन में उसके पैर आ गए और वह अपाहिज हो गया । कारखाने से भी उसे निकाल दिया गया। परिवार भूखे मरने की नौबत आ गई। माँ ने परिवार का पेट पालने के लिए घरों में चूल्हा-चौके का काम करना शुरू कर दिया। लेकिन वह पैसा परिवार के पालन-पोषण के लिए पूरा न पड़ता, तब उसके लड़के श्याम ने माँ का हाथ बँटाने के लिए ईंट के भट्टे पर काम करना शुरू किया ताकि किसी प्रकार अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके। श्याम की उम्र विद्यालय जाकर पढ़ने की है लेकिन इस मज़बूरी के कारण मज़दूरी करने से उसका पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा। सरकार को इस बाल-श्रम की समस्या को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर आवश्यक प्रयास करना चाहिए।

19. इस बार दीपावली पर दादा-दादी के घर पर न रहने पर नाराज़ बच्चे की दादी से बातचीत लगभग 100 शब्दों में लिखिए ।
अथवा
किसी सहपाठी की शिकायत कर रहे छात्र और कक्षा अध्यापिका का संवाद लगभग 100 शब्दों में लिखिए ।
उत्तर:
व्याख्यात्मक हल :
दादी – क्या बात है ? आज तुम इतने चुपचाप क्यों बैठे हो ?
बच्चा – मैं आपसे नाराज़ हूँ । आपसे बात भी नहीं करूँगा ।
दादी – आखिर नाराज़गी की वजह क्या है ? देखो, हम तुम्हारे लिए क्या लाए हैं ?
बच्चा – अरे वाह ! रिमोट कंट्रोल वाली कार । धन्यवाद। लेकिन आप लोग दीपावली पर दिल्ली क्यों चले गए थे ?
दादी – तुम्हारे दादाजी के घनिष्ठ मित्र शर्माजी की पत्नी सीढ़ियों से फिसलकर चोटिल हो गईं थीं और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था, इसलिए हमें तत्काल जाना पड़ा।
बच्चा – मुझे दीपावली पर आपकी बहुत याद आई । आपके बिना त्योहार का मज़ा भी नहीं आया ।
दादी – हमने भी तुम सबको बहुत याद किया।
बच्चा – त्योहार पर आपके हाथ के बेसन के लड्डू और गुझियाँ भी खाने को नहीं मिलीं।
दादी – बस इतनी सी बात! मैं आज ही तुम्हारी पसंद की ये दोनों चीजें बनाऊँगी और तुम्हें खिलाऊँगी ।

अथवा

व्याख्यात्मक हल :
अमित – गुरुजी प्रणाम !
अध्यापिका – अरे अमित ! क्या बात है ? तुम सब एक साथ यहाँ क्यों एकत्र हुए हो ?
अमित – श्रीमान् ! हमारी कक्षा का मोहित वर्मा और उसके दो मित्रों की हम शिकायत करना चाहते हैं ।
श्याम – मोहित अपने मित्रों के साथ मिलकर आए दिन हमें परेशान करता है ।
अन्य छात्र – वे सबका मज़ाक उड़ाते हैं, चिढ़ाते हैं और हम पर रौब जमाते हैं।
अमित – वे अपना गृहकार्य समय पर नहीं करते और बाद में जबरदस्ती हमारी कॉपी ले जाते हैं। मना करने पर धमकाते हैं।
अन्य छात्र – राहुल की हिंदी विषय की कॉपी उन्होंने गुम कर दी और आज उससे गणित विषय की कॉपी माँग रहे थे। मना करने पर उन्होंने राहुल के साथ मारपीट भी की।
अध्यापिका – मोहित के इस प्रकार के आचरण की शिकायत तुमने पहले क्यों नहीं की?
अमित – हमने उसे समझाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसकी शरारतों के लगातार बढ़ने पर हमें शिकायत के लिए विवश होना पड़ा।
अध्यापिका – खैर, मैं तुम्हारे कक्षाध्यापक से बात कर इस समस्या का शीघ्र ही कोई हल खोज लूँगा । अब तुम सब कक्षा में जाओ ।


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