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CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 7 with Solutions

Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi with Solutions Set 7 are designed as per the revised syllabus.

CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 7 with Solutions

समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश:

  • इस प्रश्न-पत्र में खंड ‘अ’ में वस्तुपरक तथा खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं।
  • खंड ‘अ’ में 40 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी 40 प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
  • खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों के उचित आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
  • दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
  • यथासभव दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।

खंड ‘अ’
(वस्तुपरक प्रश्न)

खंड ‘अ’ में अपठित बोध, अभिव्यक्ति और माध्यम, पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग-2 व पूरक पाठ्य पुस्तक वितान भाग-2 से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए हैं। जिनमें प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।

अपठित बोध –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 10 = 10)

साहित्य में मानवीय समाज के सुख-दु:ख, आशा-निराशा, साहस-भय और उत्थान-पतन का स्पष्ट चित्रण रहता है। साहित्य की इन्हीं खूबियों के कारण इसे ‘समाज का दर्पण’ कहा जाता है। वास्तव में, देखा जाए तो साहित्य एक स्वायत्त आत्मा है और उसकी सृष्टि करने वाला भी ठीक से यह नहीं बता सकता कि उसके रचे साहित्य की गूँज कब और कहाँ तक जाएगी? कहने का तात्पर्य यह है कि यदि साहित्य समाज में नैतिक सत्य की चिंता है, तो यह समाज की दूरगामी वृत्तियों का रक्षक तत्व भी है। तभी तो प्रेमचंद ने साहित्यकारों को सावधान करते हुए साहित्य के लक्ष्य को बड़ी मार्मिकता से रेखांकित करते हुए कहा था-“”जिस साहित्य से हमारी सुरुचि न जागे, आध्यात्मिकं और मानसिक तृप्ति न मिले, हममें शक्ति और गति न पैदा हो, हमारा सौंदर्य-प्रेम न जागे, जो हममें सच्चा संकल्प और कठिनाइयों पर विजय पाने की सच्ची दृदता न उत्पन्न करे, वह आज हमारे लिए बेकार है, वह साहित्य कहलाने का अधिकारी नहीं।”

कहा जा सकता है कि साहित्य में सत्य की साधना है, शिवत्व की कामना है और सौंदर्य की अभिव्यंजना है। शुद्ध जीवंत एवं उत्कृष्ट साहित्य मानव एवं समाज की संवेदना और उसकी सहज वृत्तियों को, युगों-युगों तक जन-जन के मानस को रसासिक्त करता रहता है। तभी तो शेक्सपियर हों या कालिदास उनकी कृतियाँ आज भी अपनी रससुधा से लोगों के हुदय को आप्लावित कर रही हैं। एक बात और राजनीतिक दृष्टि से विश्व चाहे कितने ही गुटों में क्यों न बँट गया हो, चाहे उसके मतभेद की खाई कितनी ही गहरी क्यों न हो गई हो, कितु साहित्य के प्रांगण में सब एक ही हैं, क्योंकि दुनिया का मानव एक है तथा उसकी वृत्तियाँ भी सब जगह और सब कालों में एकसमान हैं। प्राचीन ग्रीक साहित्य क्यों प्रिय लगता है, जबकि वह ग्रीक समाज की दास-प्रथा, स्त्रियों की दुर्दशा तथा श्रम से घृणा जैसी विकृतियों से पीडित था।

वस्तुत: वह आज भी त्रिय एवं आकर्षक इसलिए लगता है, क्योंकि इसमें मनुष्यता का एक युग चित्रित हुआ है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मनुष्य के सहज स्वभाव के अनुसार, साहित्य भी परिवर्तित होता रहता है। कारण यह है कि साहित्यकार समय की विचारधारा से अछूता नहीं रह सकता। जीवन की तरह साहित्य में भी संघर्ष और निरंतरता चलती रहती है, इसीलिए तो साहित्य समाज का दर्पण कहलाता है, क्योंकि समय और परिस्थिति का प्रभाव साहित्य पर अनिवार्य रूप से पड़ता है। साहित्य ही वर्तमान को सामने रखकर भविष्य की रूपरेखा तय करता है। समाज की सुषुप्त विवेकशक्ति को जागृत करना साहित्य का बुनियादी लक्ष्य है। अपने समय के सच को उजागर करने के साथ ही गुणात्मक साहित्य सदैव प्रासंगिक बना रहता है तथा जनमानस को आलोक स्तंभ के समान एक दिशा और प्रकाश देता है। कहने की आवश्यकता नहीं कि श्रेष्ठ साहित्य वही होता है, जो अपने भीतर-बाहर सार्वभौमिक मूल्यों, संदेशों एवं उद्देश्यों को समाए रहता है।

(क) साहित्य की किस खूबी के कारण इसे समाज का दर्पण कहा जाता है?
(i) मानव समाज का चित्रण करने के कारण
(ii) साहित्यकारों को सम्मान देने के कारण
(iii) समाज के एक पक्ष का चित्रण करने के कारण
(iv) इतिहास का चित्रण करने के कारण
उत्तर :
(i) मानव समाज का चित्रण करने के कारण

(ख) साहित्य में किस गुण का होना आवश्यक है?
(i) सत्य की साधना
(ii) शिवत्व की कामना
(iii) सौंदर्य की अभिव्यंजना
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

(ग) प्रेमचंद किस प्रकार के साहित्य को साहित्य कहलाने का अधिकारी नहीं मानते हैं?
(i) जो हमारी सुरुचि को जगाए
(ii) जिससे आध्यात्मिक और मानसिक शांति मिले
(iii) जो मनुष्य में शक्ति और गति पैदा करे
(iv) जो कठिनाइयों पर विजय पाने की सच्ची दृढ़ता न उत्पन्न करे
उत्तर :
(iv) जो कठिनाइयों पर विजय पाने की सच्यी दृढ़ता न उत्पन्न करे

(घ) शेक्सपियर या कालिदास की कृतियों का आज भी लोकप्रिय होने का क्या कारण है?
(i) मानव समाज की संवेदना एवं सहज वृत्तियों के कारण
(ii) अपने समय के महान साहित्यकार होने के कारण
(iii) प्रेम पक्ष का वर्णन करने के कारण
(iv) इतिहास के परिंग्रेक्य के कारण
उत्तर :
(i) मानव समाज की संवेदना एवं सहज वृत्तियों के कारण

(ङ) विश्व का गुटों में बँटने से साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(i) साहित्य सब मनुष्यों के लिए समान रहेगा
(ii) साहित्य में मतभेद की खाई आ जाएगी
(iii) साहित्य भी गुटों में बँट जाएगा
(iv) साहित्य का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा
उत्तर :
(i) साहित्य सब मनुष्यों के लिए समान रहेगा

(च) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मनुष्य के स्वभाव के अनुसार साहित्य भी परिवर्तित होता है।
2. साहित्य वर्तमान के आधार पर भविष्य की रूपरेखा तैयार करता है।
3. साहित्य का रचनाकार साहित्य के वर्तमान, भूत व भविष्य को भली-भाँति जानता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1 और 2
(iv) 1 और 3
उत्तर :
(iii) 1 और 2

(छ) साहित्य का बुनियादी लक्ष्य क्या है?
(i) समाज की अच्छाई का वर्णन करना
(ii) समाज की सोई हुई विवेकशक्ति को जगाना
(iii) समाज के ज्वलंतशील मुद्दों का वर्णन करना
(iv) समाज के निम्न वर्ग का चित्रण करना
उत्तर :
(ii) समाज की सोई हुई विवेकशक्ति को जगाना

(ज) साहित्य को समाज का दर्पण क्यों कहा जाता है?
(i) जीवन की परिवर्तनशीलता के कारण
(ii) समय और परिस्थिति का प्रभाव साहित्य पर पड़ने के कारण
(iii) साहित्यकार का समाज से जुड़े रहने के कारण
(iv) भविष्य में पथ-प्रदर्शन करने के कारण
उत्तर :
(ii) समय और परिस्थिति का प्रभाव साहित्य पर पड़ने के कारण

(झ) ‘साहित्य सत्य की साधना है’ लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि साहित्य
(i) समाज में नैतिक सत्य को उजागर करता है
(ii) समाज की दूरगामी वृत्तियों का भक्षक है
(iii) समाज को सुंदरता से अवगत कराता है
(iv) मानव को निराशा से दूर करने में सहायक है
उत्तर :
(i) समाज में नैतिक सत्य को उजागर करता है

(ञ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) ग्रीक साहित्य वर्तमान में भी सबको प्रिय लगता है।
कारण (R) ग्रीक साहित्य में दास-प्रथा, स्त्रियों की दुर्दशा तथा श्रम से घृणा जैसी विकृतियों का वर्णन नहीं है। कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
उत्तर :
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।

प्रश्न 2.
दिए गए पद्यांश पर आधारित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

ॠषि-मुनियों, साधु-संतों को
नमन, उन्हे मेरा अभिनंदन।
जिनके तप से पूत हुई है
भारत देश की स्वर्णिम माटी
जिनके श्रम से चली आ रही
युग-युग से अविरल परिपाटी।
जिनके संयम से शोभित है

जन-जन के माथे पर चंदन।
कठिन आत्म-मंथन के हित
जो असि-धारा पर चलते हैं
पर-प्रकाश हित पिघल-पिघल कर
मोम-दीप-सा जलते हैं।
जिनके उपदेशों को सुनकर
सँवर जाए जन-जन का जीवन।

सत्य-अहिंसा जिनके भूषण
करुणामय है जिनकी वाणी
जिनके चरणों से है पावन
भारत की यह अमिट कहानी।
उनके ही आशीष, शुभेच्छा,
पाने को करता पद-वंदन।

(क) ऋषि-मुनि, साधु-संत नमन करने योग्य क्यों हैं?
(i) धार्मिक विश्वास के कारण
(ii) तप, श्रम और संयम का आदर्श प्रस्तुत करने के कारण
(iii) उच्च शिक्षा का पालन करने के कारण
(iv) देश में धर्म-संस्कृति का प्रचार करने के कारण
उत्तर :
(ii) तप, श्रम और संयम का आदर्श प्रस्तुत करने के कारण

(ख) ऋषि-मुनि अपनी किस विशेषता के कारण वंदनीय हैं?
(i) सत्य
(ii) अहिंसा
(iii) मधुर वाणी
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

(ग) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. ॠषि-मुनियों के तप से भारत की मिट्टी पवित्र हो गई है।
2. प्रत्येक मनुष्य ऋषि-मुनियों का बंदन कर अपने माथे पर तिलक लगवाता है।
3. ॠषि-मुनियों के आभूषण सोने-चाँदी के नहीं वरन् सत्य-अहिंसा ही हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1 और 2
(iv) 1 और 3
उत्तर :
(iv) 1 और 3

(घ) ‘असि-धारा पर चलते हैं’ पंक्ति से क्या आशय है?
(i) लोकहित में स्वयं कष्ट झेलना
(ii) युद्ध के लिए तैयार रहना
(iii) तलबार को सदैव अपने पास रखना
(iv) हथियारों की धार पर चलना
उत्तर :
(i) लोकहित मे स्वर्य कष्ट झेलना

(ङ) कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए

कॉलम- 1 कॉलम- 2
A. ऋषि-मुनियों के आभूषण 1. ऋषि-मुनियों के उपदेशों को सुनकर
B. जन-धन का जीवन सँवर जाता है। 2. सत्य अहिंसा है।
C. ऋषि-मुनियों की वाणी 3. करुणामय है।

A B C
(i) 2 1 3
(ii) 3 2 1
(iii) 1 3 2
(iv) 3 1 2
उत्तर :
(i) 2 1 3

अभिव्यक्ति और माध्यम –

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

(क) पत्रकार की बैसाखियाँ किसे कहा जाता है?
(i) सत्यता
(ii) संतुलन
(iii) निष्यक्षता
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

(ख) सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए

सूची I सूची II
A. क्रिकेट मैच का प्रसारण 1. गुटेनबर्ग
B. वर्तमान छापेखाने का आविष्कार 2. लाइव
C. मुद्रण का प्रारंभ 3. रेडियो
D. श्रव्य समाचार माध्यम 4. चीन

कूट
A B C D
(i) 3 2 1 4
(ii) 2 1 4 3
(iii) 1 4 3 2
(iv) l4 1 2 3
उत्तर :
(ii) 2 1 4 3

(ग) एशिया की सबसे बड़ी समाचार समिति कौन-सी है?
(i) पीटीई
(ii) यूएनआई
(iii) पीटीआई
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(iii) पीटीआई

(घ) कहानी में पात्रों का चरित्र-चित्रण करने के लिए पात्रों के गुणों का बखान किसके माध्यम से किया जा सकता है?
(i) कहानीकार द्वारा
(ii) दूसरे पात्रों के संवाद द्वारा
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) स्वयं पात्र द्वारा
उत्तर :
(iii) (i) और (ii) दोनों

(ङ) नाटक लिखित रूप में एक आयामी होता है, तो उसमें संपूर्णता कब आती है?
(i) पढ़ने के बाद
(ii) देखने के बाद
(iii) मंचन के बाद
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग 2

4. निम्नलिखित पद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

दिवाली की शाम घर पुते और सजे
चीनी के खिलौने जगमगाते लावे
वो रूपवती मुखड़े पै इक नर्म दमक
बच्चे के घरौंदे में जलाती है दीये
आँगन में ठुनक रहा है ज़िदयाया है 
बालक तो हई चाँद पै ललचाया है
दर्पण उसे दे के कह रही है माँ
देख आईने में चाँद उतर आया है

(क) दिवाली के दिन घर की साज-सज्जा कैसी होती है? (1)
(i) अस्त-व्यस्त
(ii) साफ-सुंदर पुते हुए घर
(iii) बच्चों के खिलौने घर में फैले हुए
(iv) अस्वच्छ व गंदी
उत्तर :
(ii) सांफ-सुंदर पुते हुए घर

(ख) दिवाली के दिन माता बच्चों को क्या लाकर देती है?
(i) नए व सुंदर कपड़े
(ii) मनपसंद मिठाई
(iii) चीनी मिट्टी के खिलौने
(iv) मिट्टी के दीये
उत्तर :
(iii) धीनी मिट्टी के खिलौने

(ग) दीये जलाते समय बच्चे के लिए माता के चेहरे पर कैसा भाव आता है? (1)
(i) कोमलता का
(ii) शिथिलता का
(iii) स्तब्यता का
(iv) असामंजस्यता का
उत्तर :
(i) कोमलता का

(घ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1)
कथन (A) माँ बच्चे को दर्पण चाँद दिखाकर कहती है देख चाँद दर्पण में आ गया है।
कारण (R) बच्चा माँ से चाँद लाने की जिद कर रहा है।
कूट
(i) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्यख्या नहीं करता है
(iv) कथन (A) और (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर :
(iv) क्थन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(ङ) अलंकार की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सही है?
(i) चीनी के खिलौने जगमगाते लावे-रूपक अलंकार
(ii) बच्चे के घरौंदे में जलाती है दीये-अनुप्रास अलंकार
(iii) आँगन में ठुनक रहा है जिदयाया है-स्वभावोक्ति अलंकार
(iv) देख आईने में चाँद उतर आया है-उपमा अलंकार
उत्तर :
(iii) औँगन में ठुनक रहा है जिदयाया है-स्वभावोक्ति अलंकार

5. निम्नलिखित गद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। ( 1 × 5 = 5)

मैं असल में था तो इन्हीं मेंढक-मंडली वालों की उमर का, पर कुछ तो बचपन के आर्यसमाजी संस्कार थे और एक कुमार-सुधार सभा कायम हुई थी उसका उपमंत्री बना दिया गया था-सो समाज-सुधार का जोश कुछ ज्यादा ही था। अंधविश्वासों के खिलाफ तो तरकस में तीर रखकर घूमता रहता था। मगर मुश्किल यह थी कि मुझे अपने बचपन में जिससे सबसे ज्यादा प्यार मिला वे थीं जीजी। यूँ मेरी रिश्ते में कोई नहीं थीं। उम्र में मेरी माँ से भी बड़ी थीं, पर अपने लड़के-बहू सबकों छोड़कर उनके प्राण मुझी में बसते थे और वे थीं उन तमाम रीति-रिवाजों, तीज-त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों की खान, जिन्हें कुमार-सुधार सभा का यह उपमंत्री अंधविश्वास कहता था और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता था।

(क) कुमार-सुधार सभा क्या थी?
(i) समाज में व्याप्त अंधविश्वासों के खिलाफ संघर्ष करने वाली सभा
(ii) समाज के युवावर्ग को सुधारने वाली सभा
(iii) समाज से गंदगी को साफ करने वाली सभा
(iv) समाज से अलग विचारधारा लेकर चलने वाली सभा
उत्तर :
(i) समाज में व्याप्त अधविश्वासों के खिलाफ संघर्ष करने वाली सभा

(ख) लेखक को कुमार-सुधार सभा में कौन-सा पद मिला था?
(i) सचिव
(ii) उपसचिव
(iii) मंत्री
(iv) उपमंत्री
उत्तर :
(iv) उपमंत्री

(ग) लेखक ……… में विश्वास नहीं रखता था।
(i) अंधविश्वास
(ii) मूर्तिपूजा
(iii) तीज-त्योहार
उत्तर :
(i) अंधविश्वास

(घ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) लेखक को समाज-सुधार का जोश कुछ ज्यादा ही था।
कारण (R) लेखक में बचपन से ही आर्यसमाजी संस्कार थे। कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ii) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
उत्तर :
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।

(ङ) कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए

कॉलम- 1 कॉलम – 2
A. लेखक से सबसे ज्यादा प्यार करती थी 1. आर्यसमाजी
B. बचपन के संस्कार थे 2. लेखक
C. कुमार सुधार सभा का उपमंत्री है 3. जीजी

कूट
A B C
(i) 2 3 1
(ii) 3 2 1
(iii) 3 1 2
(iv) 3 1 2
उत्तर :
(iii) 3 1 2

पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग 2

6. निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनक़र लिखिए। (1 × 10 = 10)

(क) यशोधर बाबू ने नौकरी के अतिरिक्त अन्य तरीकों से धन कमाने की कभी नहीं सोची। क्यों? ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर सही विकल्प चुनिए।
(i) नौकरी चली न जाए इस डर के कारण
(ii) अपने दृढ़ जीवन मूल्यों के आधार पर चलने के कारण
(iii) दूसरों की नजरों में अच्छा बनने के कारण
(iv) अपने मित्र की संगति के कारण
उत्तर :
(ii) अपने दृढ़ जीवन मूल्यों के आधार पर चलने के कारण

(ख) यशोधर बाबू के बच्चे अपने पिता की किस बात पर खिन्न रहते हैं?
(i) सिद्धांत के कारण अपने कोटे का फ्लैट न लेने की बात पर
(ii) उनके सामाजिक न होने की बात पर
(iii) केवल अपने विषय में सोचने की बात पर
(iv) परिवार का ध्यान न रखने की बात पर
उत्तर :
(i) सिद्धांत के कारण अपने कोटे का फ्लैट न लेने की बात पर

(ग) यशोधर बाबू की पत्नी अपने पति से नाराज क्यों रहती है?
(i) उनका आधुनिक होने के कारण
(ii) उनका समय के अनुरूप न बदलने के कारण
(iii) उनका किशनदा से अधिक आर्मीय संबंध होने के कारण
(iv) उनका अपने बच्चों को सदैव डाँटने के कारण
उत्तर :
(ii) उनका समय के अनुरूप न बदलने के कारण

(घ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) आनंदा अपने पिता से अपने पढ़ने की बात नहीं कर पाया।
कारण (R) आनंदा के पिता बुरे आचरण के थे तथा गुस्से वाले भी थे। कूट
(i) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर :
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(ङ) लेखक को न चाहते हुए भी खेती का काम क्यों करना पड़ता है? ‘जूझ’ कहानी के आधार पर सही विकल्प चुनिए।
(i) खेती करना उनका खानदानी पेशा है
(ii) उनके जीवन में आर्थिक समस्या है
(iii) उनके माता-पिता चाहते हैं कि वह खेती करे
(iv) खेती के बिना उन्हें समाज में सम्मान नहीं मिलेगा
उत्तर :
(ii) उनके जीवन में आर्थिक समस्या है

(च) ‘जूझ’ कहानी में पिता द्वारा स्वयं खेती न करके अपने बेटे से खेती का काम करवाना किस ओर संकेत करता है?
(i) पित्ता अपने बेटे को परिश्रमी बनाना चाहता है
(ii) पिता चाहता है कि उसका बेटा आर्थिक रूप से संपन्न बने
(iii) पिता के आलसी और कामचोर रूप को दर्शांता है
(iv) पिता चाहता है कि उसका बेटा उससे भी अधिक प्रगति करे
उत्तर :
(iii) पिता के आलसी और कामचोर रूप को दर्शाता है

(छ) सिंधु घाटी की सभ्यता के बारे में पहले क्या भ्रम था?
(i) ये अन्न उपजाते नहीं थे, उसका आयात करते थे
(ii) यह साधनविहीन सभ्यता थी
(iii) ये दूसरों पर निर्भर लोग थे
(iv) ये अन्न का निर्यात करते थे
उत्तर :
(i) ये अन्न उपजाते नहीं थे, उसका आयात करते थे

(ज) ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में लेखक ने सभ्यता के नष्ट होने का कारण किसे माना है?
(i) वहाँ के लोगों को
(ii) प्रगति के पथ पर निरंतर बढ़ने को
(iii) उत्बनन कार्य को
(iv) सही समय पर सही निर्णय न लेने को
उत्तर :
(ii) प्रगति के पथ पर निरंतर बढ़ने को

(झ) ‘पूरब की बस्ती रईसों की बस्ती है’ ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ की पंक्ति के संदर्भ में बताइए कि आज के युग में पूरब की बस्ती किसे माना जाता है? इस संबंध में कौन-सा कथन सही है?
(i) आज के युग में पूरब की बस्ती गरीबों की बस्ती को माना जाता है
(ii) आज के युग में पूरब की बस्ती उच्च शासनाधिकारी की बस्ती को माना जाता है
(iii) आज के युग में पूरब की बस्ती समृद्ध बस्ती मानी जाती है
(iv) आज के युग में पूरब की बस्ती पश्चिमी देशों को माना जाता है
उत्तर :
(i) आज के युग में पूरब की बस्ती गरीबों की बस्ती को माना जाता है

(ज) सिंधु घाटी की सभ्यता के अजायबधर के विषय में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. सिंधु घाटी की सभ्यता का अजायबघर बहुत विशाल और सुंदर है।
2. अजायबघर में सभी प्रकार की वस्तुएँ संप्रहित हैं।
3. अजायबघर में औजार तो हैं, परंतु हथियार नहीं हैं।
4. इसमें उत्कृष्ट कलात्मकता दिखाई देती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1,2 और 3
(iv) 1,2 और 4
उत्तर :
(ii) केवल 3

खंड ‘ब’
(वर्णनात्मक प्रश्न)

खंड ‘ब’ में जनसंचार और सृजनात्मक लेखन, पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग- 2 व पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग-2 से संबंधित वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।

जनसंचार और सृजनात्मक लेखन –

प्रश्न 7.
निम्नलिखित दिए गए 3 विषयों में से किसी 1 विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 × 1 = 6)

(क) अपने जीवन की मधुर स्मृतियों का वर्णन
उत्तर :
मेरे जीवन की मधुर समृतियाँ मेरे बचपन से जुड़ी हैं, जो मेरे हुदय को रोमांचित करती हैं। बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते है। बचपन में सभी व्यक्ति चिंतामुक्त जीवन जीते हैं। बचपन के दिनों में खेलने, उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता है। उन दिनों में माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों का प्यार और दुलार बड़ा अच्छा लगता है। एक बार हम सभी छुट्टियों में कश्मीर गए थे। वहाँ के नजारे बहुत सुहावने थे और जब हम बर्फ की पहाड़ियों पर चल रहे थे, तभी मेरा पैर फिसल गया और मैं फिसलकर नीचे आ गया, लेकिन मुझे कोई चोट नहीं आई थी। थोड़ी देर बाद मेरी बुआ का लड़का भी फिसलकर नीचे आ गया। यह देखकर हम सभी को हँसी आ गई और धीरे-धीरे करके सभी फिस्सकर नीचे आने लगे। इस प्रकार उस समय हमने बहुत मजे किए।

वे पल आज भी मुझे बहुत याद आते हैं। इसी प्रकार बचपन की एक अन्य घटना मुझे अभी तक याद है। उन दिनों में तीसरी कक्षा में पढ़ता था। मेरी अर्द्धवार्षिक परीक्षा चल रही थी। हिंदी की परीक्षा में हाथी पर निबंध लिखने का प्रश्न आया था। निबंध लिखने के क्रम में मैने ‘चल-चल मेरे हाथी’ वाली फिल्म गीत की चार पंक्तियाँ लिख दी। इसकी चर्चा पूरे विद्यालय में फैल गई। शिक्षकगण एवं माता-पिता सभी ने हैंसते हुए मेरी प्रशंसा की। परंतु उस समय मेरी समझ में नहीं आया कि मैंने अच्छा किया या बुरा। इस तरह बचपन की कई यादें ऐसी हैं जो भुलाए नहीं भूलतीं। इन मधुर स्मृतियों के कारण ही फिर से पाँच-सात वर्ष का बालक बनने की इच्छा होती है, परंतु बचपन में किसी को पता ही कहाँ चलता है कि ये उसके जीवन के सुनहरे दिन हैं।

(ख) मेरी प्रिय ऋतु
उत्तर :
हमें भारत में हर वर्ष मुख्य रूप से चार ऋतुओं का आनंद लेने का सुनहरा अवसर मिलता है। सबको अपनी-अपनी पसंद की ऋतु अधिक प्रिय होती है। मेरी प्रिय ऋतु वसंत ऋतु है। भारत में सर्दियों के बाद फरवरी से अप्रैल तक के महीने में वसंत ऋतु का मौसम होता है। हिंदी कैलेण्डर के अनुसार, वसंत ऋतु माघ महीने से चैत्र महीने तक रहती है। सर्दियों के मौसम के बाद वसंत ॠतु में हल्की-सी गर्माहट के साथ मौसम बहुत ही सुहावना हो जाता है। इन दिनों प्रकृति के मौसम में अद्भुत सी सुंदरता और अनोखी महक चारों ओर फैली होती है। पेड़ों की हरियाली, रंग-बिरंगे फूल, चिड़ियों का चहचहाना और हवाओं में एक सोंधी सी महक होती है।

पौधों में नए फूलों और नई टहनियों का आगमन होता है तथा पशु-पक्षियों का नया संबार होता है एवं भैवरे कलियों के रस से शहद का निर्माण कार्य करने में व्यस्त हो जाते हैं। मुझे वसंत का मौसम इसलिए प्रिय लगता है, क्योंकि इस समय मौसम का तापमान बेहदद सुखद हो जाता है। प्रकृति का मौसम देख मेरा जीवन उमंगों से भर जाता है। चारों ओर फैली प्राकृतिक बहार मुझे इस मौसम में नए जीवन का एहसास कराती है। यह मौसम मेरे लिए सबसे मोहक और रोमांचित करने वाला मौसम होता है।
अत: मैं तो ईश्वर से हमेशा प्रार्थना करता हूँ कि वसंत का यह मौसम हमेशा ही ऐसा बना रहे, जिससे मेरे साथ-साथ सभी का जीवन आनंदमयी और सुख्यों से भरा रहे।

(ग) आवश्यक सुविधाओं से वंचित भारत के गाँव
उत्तर :
पुरानी कहावत है कि भारत गाँवों में बसता है, लेकिन फिर भी यहीं रहने वाले लोगों के लिए साधारण सुविधाऍँ उपलब्ध नहीं हैं। यह बात उन गाँवों पर लागू नहीं होती, जो नगरों या महानगरों के आस-पास बसे हैं, यहाँ तो शहरों जैसी सभी सुविधाएँ हैं, लेकिन दूरदराज में बसे भारत के अनेक गाँवों में अभी तक बिजली की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और न ही इन गाँवों में पीने का शुद्ध पानी है। वहाँ चिकित्सा एवं शिक्षा का समुचित अभाव है। छत्तीसगढ़ तथा झारखंड जैसे राज्यों के गाँवों में तो कई बार रोगियों को चिकित्सा हेतु 20-25 किमी की दूरी तय करती पड़ती है। ऐसे में कई रोगियों को समय से प्राथमिक चिक्तिसा नहीं मिल पाती, जिस कारण उन्हें अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ता है।

भारतीय गाँवों में रोजगार की भी कमी होती है तथा कृषि के लिए तकनीकी साधनों की कमी होती है, जिससे वह कृषि कार्यों में भी कुशल नहीं होते हैं। इन गाँवों में पक्की सड़कों का अभाव होता है। सड़कों के नाम पर कच्ची धूल भरी पगडंडियाँ ही आवागमन का एकमात्र साधन हैं। बरसात के समय में तो कीचड़ तथा गड्ढों से भरे इन रास्तों से गुजरना अत्यंत कष्टकर एवं असुरक्षित होता है। वहाँ आज भी लोग बैलगाड़ियों से यात्रा करते हैं। यदि सरकार द्वारा गाँबों के उत्थान के लिए पैसा भी दिया जाता है, तो वह भी कुछ गाँव के बड़े मुखिया लोगों या सरपंच की जेब में चला जाता है और गाँव की दशा जैसी थी वैसी ही रह जाती है। इस प्रकार भारत के कुछ गाँव आज भी अपनी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 40 शब्दों में निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) कहानी को रोचक और प्रामाणिक बनाने में देशकाल और वातावरण का चित्रण अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
अभिनेयता का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि अभिनेयता न होने से नाटकों में क्या दोष आता है?
उत्तर :
कहानी को रोचक और प्रामाणिक बनाने में देशकाल और वातावरण का चित्रण अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि प्रत्येक घटना, पात्र, समस्या का अपना देशकाल और वातावरण होता है। कहानी में वास्तविकता का पुट लाने के लिए देशकाल और वातावरण का प्रयोग किया जाता है। कहानी को प्रामाणिक और रोचक बनाने के लिए इनका प्रयोग अत्यंत आवश्यक है।
अथवा
अभिनेयता वह कला है, जिसके द्वारा अभिनेता चलचित्र या नाटक में किसी चरित्र का अभिनय करता है। अभिनेता परिकल्पना एवं दर्शक के बीच माध्यम का कार्य करता है। अभिनय की कला का ज्ञान एवं अभिनेता के भाव प्रस्तुतीकरण को सार्थक बनाता है।
नाटकों में अभिनेयता न होने पर दर्शकों के हृदय में भाव या अर्थ अभिभूत नहीं हो पाएगा। अतः नाटक नीरस हो जाएगा।

(ख) फीचर का आकार शैलीगत विशेषताओं के कारण होता है। फीचर लेखन में किस शैली का प्रयोग होता है व क्यों?
अथवा
सिनेमा या मंच पर (अभिनीत नाटकों की तुलना में) रेडियो नाटक की अवधि सीमित क्यों रखी जाती है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर :
फीचर एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है। फीचर का उद्देश्य मुख्य रूप से पाठकों को सूचना देना, शिक्षित करना तथा उनका मनोरंजन करना होता है। फीचर में लेखक को अपनी राय, दृष्टिकोण और भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिलता है। फीचर लेखन की कोई सुनिश्चित शैली नहीं होती है, क्योंकि फीचर तथ्यों का ललित भाषा एवं वैयक्तिक शैली में भावनात्मक प्रस्तुति है।
अथवा
सिनेमा या मंच (अभिनीत नाटकों की तुलना में) रेडियो नाटक की अवधि छोटी इसलिए रखी जाती है, क्योंकि रेडियो पूरी तरह से श्रव्य माध्यम है। रेडियो नाटक का लेखन सिनेमा व रंगमंच के लेखन से थोड़ा मिन्न तथा मुश्किल भी होता है। इसमें संवादों को ध्वनि प्रभावों के माध्यम से संप्रेषित करना होता। यहाँ न तो मंथ सज्जा, वस्त्र सज्जा होती है और न ही अभिनेता के चेहरे की भाव मंगिमा। केवल आवाज के माध्यम से ही नाटक को प्रस्तुत किया जाता है। इसमें मनुष्य की एकाग्रता सीमित होती है। सामान्य रूप से रेडियो नाटक की अवधि 15-30 मिनट रखी जाती है, क्योकि मनुष्य की सुनने की एकग्रता अवधि 15 से 30 मिनट तक की ही होती है। अतः इन सभी कारणों से रेडियो नाटक की अवधि 15-30 मिनट रखी जाती है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) ‘भीड़ भरी बस के अनुभव’ विषय पर एक आलेख लिखिए।
उत्तर :
भीड़ से भरी बस में सफर करना अपने आप में एक अनुभव है। रविवार की सुबह थी। मुझे अपनी छुट्टियाँ बिताने के लिए अपने ननिहाल मथुरा जाना था। यह स्थान मेरे निवास स्थान से काफी दूर था। इसलिए मैंने एक डीटीसी बस में सवार होकर जाने का फैसला किया। जैसे ही मैं बस स्टोंप पर पहुँथा तो मैंने देखा कि वहाँ बहुत भीड़ थी। जब दहाँ खड़े लोगों ने एक बस को आते देखा तो सभी ने शोर मचा दिया। कडेकटर ने बस की क्षमता से अधिक लोगों को बस में बैठा रखा था, जिस कारण कुछ लोग गेट पर ही लटक रहे थे। निजी बसों ने हड़ताल कर रखी थी, इसलिए भीड़ नियंत्रण से बाहर थी। जैसे ही मैं बस में चढ़ा, तो साथी यात्रियों ने मुझे धक्का दे दिया। बस में केवल 40 सीटें थीं, लेकिन उसमें सौ से अधिक लोग यात्रा कर रहे थे। खड़े रहने वाले यात्रियों की संख्या भी बहुत अधिक थी। सभी लोग बहुत परेशान और पसीने से तर-बतर हो रहे थे। बच्चे भी रो रहे थे और महिलाएँ जोर-जोर से चिल्ला रही थीं। यात्रियों के बीच शोर-शराबा सुनाई दे रहा था। निकास द्वार पर पहुँचना आसान नहीं था। मेशा पड़ाव नजदीक आ रहा था और मैं स्वयं को दरवाजे की ओर धकेलने लगा। 15 मिनट तक संघर्ष करने के बाद में निकास द्वार पर पहुंच गया और अंत में बस से नीचे उतर गया। यह वास्तव में मेरे पूरे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव था।

(ख) समाचार लेखन में ‘नीतिगत ढाँचे’ का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
समाचार लेखन में विभिन्न घटनाओं, समस्याओं, प्रक्रियाओं पर अपने विचार तथा प्रतिक्रिया दी जाती है। किस्सी भी घटना, समस्या, विधार आदि का समाचार बनना तभी संभव होता है जब उसमें समाचार के तत्त्व सम्मिलित होते हैं। इन तत्त्वों में नीतिगत ढॉँचा भी सम्मिलित होता है, जिसमें समाधार का चयन करने व समाचार को प्रस्तुत करने के लिए एक नीति निर्धारित होती है। इसं नीति को ‘संपादकीय नीति’ कहा जाता है। संपादकीय- नीति को ध्यान में रखते हुए समाचारों का चयन किया जाता है। इसके द्वारा अनुकूल व प्रतिकूल दोनों प्रकार की खबरों को महत्त्व दिया जाता है।

(ग) स्तंभ लेखन के अंतर्गत लेखक को विषय के चुनाव की स्वतंत्रता प्रदान की जाती है। कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
स्तंभ लेखन के अन्तर्गत कुछ महत्त्वपूर्ण लेखक अपने विचारों के लिए जाने जाते हैं। इससे उन लेखकों की लेखन-शैली भी विकसित हो जाती है। लेखकों की लोकप्रियता को व उनकी लेखन-शैली को देखते हुए समाचार-पत्र में उन्हें स्तंभ लिखने के लिए कहा जाता है, जिसमें उन्हें विषय का चुनाव करने की स्वतंत्रता होती है।
कुछ लेखकों के स्तंभ इतने अधिक लोकप्रिय होते हैं कि उन्हें उनके स्तंभ द्वारा ही पहचाना जाता है। स्तभ लेखन में लेखक के स्वयं के विधार प्रमुख होते हैं। अपने विचारों को ही लेखक प्रस्तुत करता है, परंतु स्तम्भ लेखन लिखते समय लेखक तथ्यों को भी ध्यान में रखता है।

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग 2

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता हैं’ कविता में कवि ने स्वयं को जगत से किस प्रकार अलग बताया है?
उत्तर :
कवि कहता है कि इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है, जो मुझसे मिलने के लिए व्याकुल हो। कवि के हुदय में निराशा और उदासी की भावना भरने लगती है और वह सांसारिक भाव भरते हुए स्वयं को इस संसार में अकेला बताते हुए कहता है कि सबका कोई न कोई होता है, जिसके लिए व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तत्पर होता है, किंतु कवि का कोई नहीं है, जिसके हितार्थ वह कोई कार्य करें।

(ख) कवि प्रकृति के सौदर्य को रोककर रखना चाहता है, क्यों? ‘बगुलों के पंख’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘बगुलों के पंख’ एक सुंदर दृश्य कविता है। कविता से गुजरते हुए एक-एक दृश्य चित्र की भाँति उभर जाता है। कवि काले बादलों के नीचे से पक्ति बनाकर उड़ते बगुलों को देखता रह जाता है। ये उसे कजरारे बादलों के ऊपर तैरती साँझ की श्वेत काया के समान प्रतीत होते हैं। यह दृश्य इतना मोहक है कि कवि इसमें अटका-सा रह जाता है। कवि इसे माया कहता है। इस दृश्य में कवि प्रकृति साँदर्य से बँधने तथा बिंघने की चरम स्थिति को व्यक्त करता है। ऐसा प्रकृति के इस दृश्य का कवि के मन पर पड़ने वाले मोहक प्रभाव के कारण संभव हुआ है।

(ग) ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में कविता के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर :
‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता वास्तव में मीडिया द्वारा लोगों की पीड़ा बेचने की स्थिति को दर्शाती है। इसमें कवि बताना चाहता है कि मीडिया वाले समर्थ तथा सशक्त होते हैं। वे किसी की भी करुणा को खरीद-बेच सकते हैं। वे ऐसे व्यक्तियों को समाज के सामने लाकर सहानुभूति बटोरना चाहते हैं, जो क्मजोर और अशक्त है। एक अपाहिज की करुणा को पैसे एवं प्रसिद्धि के लिए टेलीविजन पर कुरेदना वास्तव में क्रूरता की चरम सीमा है। किसी की हीनता, अभाव, दु:ख और कष्ट सदा से करुणा के कारण अथवा उद्दीपन रहे है, किंतु इन कारणों को सार्वजनिक कार्यक्रम के रूप में प्रसारित करना और अपने चैनल की श्रेष्ठता साबित करने के लिए तमाशा बनाकर उसे फूहड ढंग से प्रदर्शित करना क्रूरता है। इससे कविता के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध होती है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) लक्ष्मण के बिना राम अपनी दशा की तुलना किससे करते हैं तथा कैसे?
उत्तर :
मूर्चित हुए लक्ष्मण को देखकर श्रीराम बहुत ज्यादा भाव-विह्लल हो रहे हैं। वे लक्ष्मण के प्रति अपना मोह और स्नेह प्रकट करते हुए कहते हैं कि है भाई लक्ष्मण, तुम्हारे बिना मेरी स्थिति इतनी दयनीय है कि में स्वयं को इस प्रकार शक्तिहीन महसूस कर रहा हैं, जिस प्रकार पक्षी अपने पंबों के बिना दीन-हीन हो जाते हैं तथा मणि के बिना साँप और सूँड़ के बिना हाथी लाचार हो जाता है। वह अपने महत्त्वपूर्ण कार्य नहीं कर पाते।

(ख) पृथ्वी का प्रत्येक कोना बच्चों के पास स्वतः आ जाता है, कैसे? ‘पतंग’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जब बच्चे पतंग उड़ते हैं, तो वे चाहते हैं कि उनकी पतंग सबसे ऊँची रहे, क्योंकि वे पतंग के माध्यम से सारे ब्रह्मांड में घूम लेना चाहते हैं। वे कल्पना की रंगीन दुनिया में खो जाते हैं, इसलिए उनके लिए पृथ्वी का प्रत्येक कोना अपने आप सिमटता चला जाता है अर्थात् पतंग उड़ाने के समय बच्चों के सामने पृथ्वी का कोना-कोना सिमट जाता है।

(ग) ‘उषा’ कविता में कवि ने भोर के नभ की पवित्रता, निर्मलता तथा उज्ज्वलता को किन रूपों में स्पष्ट किया है?
उत्तर :
‘उषा’ कविता में कवि ने भोर के नभ की पवित्रता, निर्मलता तथा उज्ज्यलता को विविध बिंबों एवं प्रतीकों के माध्यम से दर्शाया है। ‘राख से लीपा हुआ चौका’ पवित्रता का प्रतीक है। ‘नील जल में किसी की गौर झिलमिल देह’ में निर्मलता तथा ‘काली सिल जरा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो’ में उज्ज्वलता का प्रतिबिंब है। भोर के नभ के बदलते सौंदर्य को कवि ने जन-जीवन की गतिशीलता तथा मानवीय गतिविधियों में हो रहे परिवर्तनों के रूप में रखा है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) “भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं” लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर :
भक्तिन अच्छी है, पर उसके दुर्गुणों को तीन तकों के आधार पर बताया गया है, जैसे-वह सत्यवादी हरिश्चंद्र नहीं है। बह रुपयों-पैसों को मटकी में रख देती है और पूछने पर बताती है कि उसने उन्हें संभाल कर रखा हुआ है। वह लेखिका को प्रसन्न रखने के लिए बात को इधर-उधर घुमाकर कहती है। इसे आप झूठ कह सकते हैं। भक्तिन सभी बातों और कामों को अपनी सुविधा के अनुसार ढालने में निपुण है, जो कई बार दूसरों को नापसंद होता है।

(ख) ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर बताइए कि पैसे की पावर का रस किन दो रूपों में प्राप्त किया जाता है?
उत्तर :
पैसे की पावर का असली रस ‘पर्चेज़िंग पावर’ में है। पैसे की पावर से खरीदे गए मकान, संपत्ति दूर से ही दिखाई पड़ते हैं। दूसरे, संयमी लोग पैसे की बचत करके पैसे की पावर का रस प्राप्त करते हैं। पैसा इकट्ठा होने पर हम आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग भी कर सकते हैं और हमें किसी से मदद माँगने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती।

(ग) लुट्टन पहलवान का कुश्ती का स्कूल जल्दी ही खाली क्यों हो गया?
उत्तर :
राजा श्यामानंद की मृत्यु के पश्चात् जब उनके पुत्र ने लुट्टन पहलवान को राज दरबार से निकाल दिया, तो गाँव वालों ने उनके लिए एक झोंपड़ी डाल दी। लुट्टन पहलवान ने कुश्ती सिखाने के लिए गाँव के नौजवान बच्चों हेतु एक स्कूल खोल दिया। बच्चे उससे दाँव सीखते, परंतु गाँव की परिस्तिथि खराब होने के कारण धीरे-धीरे वे भी मजदूरी आदि में लग गए। इस तरह, कुश्ती सीखने के लिए उसके पास केवल उसके अपने दोनों पुत्र ही रह गए। वे भी दिनभर मज़दूरी करते और जो कुछ मिलता, उसी से अपना रहने-खाने का प्रब्ध आदि करते। इस प्रकार पहलवान का स्कूल अंत में खाली हो गया और वहाँ कोई भी शिष्य नहीं रह गया।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) बच्चों की टोली इंद्र भगवान से किस प्रकार बारिश करवाने के लिए प्रार्थना करती है? ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर :
जब इंदर सेना घर-घर जाकर पानी मौंगती थी, तब पानी की कमी के बाद भी लोग अपने घरों में रखा पानी उनके ऊपर डाल देते थे। उसके बाद वे भीगे बदन मिट्टी में लेटते हुए, पानी फेंकने से उत्पन्न कीचड़ को हाथ-पाँव, बदन, पेट सब पर मलकर ‘गंगा मैया की जय’ बोलते और काले बादलों से पानी बरसाने की प्रार्थना करते थे।

(ख) ‘शिरीष के फूल’ पाठ के आधार पर बताइए कि कवि ने आत्मबल पर देहबल के वर्चस्व की वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर किस प्रकार संकेत किया है?
उत्तर :
“हाय, वह अवधूत आज कहाँ है?” निर्ध की अंतिम पंक्ति है। इस पंक्ति के माध्यम से लेखक कहता है कि महात्मा गांधी शिरीष के फूल की भौंति थे। लेखक के अनुसार, प्रेरणादायी और आत्मविश्वास रखने वाले लोग अब रहे ही नहीं। अब केवल शरीर यानी भौतिकता को प्राथमिकता देने वाले लोग ही रह गए हैं। ऐसे लोगों में आत्मविश्वास बिलकुल नहीं होता। ऐसे लोग मन की सुंदरता पर ध्यान नहीं देते। लेखक ने शिरीष के फूल के माध्यम से वर्तमान सभ्यता के यथार्थ का चित्रण किया है।

(ग) ‘जाति-प्रथा और श्रम का विभाजन’ पाठ के आधार पर बताइए कि डॉ. आंबेडकर बौद्ध धर्म के अनुयायी क्यों बने?
उत्तर :
डॉ. आंबेडकर का जीवन तीन व्यक्तियों से अत्यधिक प्रभावित हुआ। ये तीन महान् व्यक्ति थे-महात्मा बुद्ध, कबीर तथा ज्योतिबा फुले।
डों. आंबेडकर के चितन और रचनात्मकता में इन तीनों महापुरुषों के विचारों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। चूँकि, हिंदू समाज में जातीय उत्पीड़न होता था, इसलिए आबेडकर का हिंदू समाज से मोह भंग हो गया था। उन्होंने 14 अकट्टूबर, 1956 को 5 लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध मत को ग्रहण किया।

पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग 2

प्रश्न 14.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 2 प्रश्नों में से किसी 1 प्रश्न का लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (4 × 1 = 4)
‘जूझ’ कहानी प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करने की प्रेरक कथा है। इस कथन की सोदाहरण समीक्षा कीजिए।
अथवा
‘अतीत में दबे पाँव’ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर :
‘जूझ’ कहानी के लेखक का जीवन-संघर्ष सभी के लिए एक आदर्श प्रेरणा स्रोत कहा जा सकता है। वह जटिल परित्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए कठिन प्रयास करता है। वह खेती का काम करने के साथ-साथ पढ़ाई करता है। उसके जीवन में आर्थिक समस्या भी है और उसे पैसों की कमी है। उसके सहपाठी उसके पहनावे को लेकर बिल्ली उड़ाते हैं। इन सब बाधाओं को वह अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर पार कर लेता है। कविता लिखने का शॉक अंततः उसके लिए बहुत बड़ा लक्ष्य बन जाता है, जिसे वह सफलतापूर्वक हासिल करता है। वस्तुतः कहानी के लेखक में समस्याओं से जूझने की प्रवृत्ति है। इसी जूझ्मे की प्रवृत्ति के कारण वह अपने जीवन-लक्ष्यों को एक के बाद एक प्राप्त करता जाता है। वह अपने आलसी एवं आवारा किस्म के पिता को भी संतुष्ट रखते हुए अपनी आगे की पढ़ाई करता है। विपरीत परिस्थितियों से जूझने की क्षमता के अतिरिक्त कहानी के लेखक में कठिन परिश्रम एवं दृढ़ संकल्प संबंधी चारित्रिक विशेषताएँ मौजूद हैं।
वह पढ़ने के लिए किसी भी स्तर का परिश्रम करने को सहर्ष तैयार रहता है। वह अपनी धुन में रमने की प्रवृत्ति यानी लगनशीलता के कारण ही उच्च स्तर का कवि बन सका। इस तरह, कहा जा सकता है कि ‘जूझ’ कहानी के लेखक का जीवन-संघर्ष हमारे लिए अत्यधिक प्रेरणादायक है।
अथवा
सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से सिंघु सभ्यता के सामाजिक वातावरण को बहुत अनुशासित होने का अनुमान लगाया गया है। वहाँ का अनुशासन ताकत के बल पर नहीं था। नगर योजना, वास्तुशिल्प, मुहर, पानी या साफ-सफाई जैसी सामाजिक व्यवस्था में एकर्रूपता से यह अनुशासन प्रकट होता है।
सिंधु सभ्यता में सुनियोजित नगर थे, पानी की निकासी की व्यवस्था अच्छी थी। सड़कें लंबी व चौड़ी थीं, कृषि भी की जाती थी, यातायात के साधन के रूप में बैलगाड़ी भी थी। हर नगर में मुद्रा, अनाज भंडार, स्नानगृह आदि थे तथा पक्की इटों का म्रयोग होता था। सिंघु सभ्यता में प्रदर्शन या दिखावे की प्रवृत्ति नहीं थी। यही विशेषता इसको अलग सास्कृतिक धरातल पर खड़ा करती है। यह धरातल संसार की दूसरी सभी सभ्यताओं से पृथक् है।


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