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CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 12 with Solutions

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CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 12 with Solutions

समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश:

  • इस प्रश्न-पत्र में खंड ‘अ’ में वस्तुपरक तथा खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं।
  • खंड ‘अ’ में 40 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी 40 प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
  • खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों के उचित आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
  • दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
  • यथासभव दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।

खंड ‘अ’
(वस्तुपरक प्रश्न)

खंड ‘अ’ में अपठित बोध, अभिव्यक्ति और माध्यम, पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग- 2 व पूरक पाठ्य पुस्तक वितान भाग-2 से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।

अपठित बोध –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 10 = 10)
शिक्षा के क्षेत्र में पुनर्विचार की आवश्यकता इतनी गहन है कि अब तक बजट, कक्षा, आकार, शिक्षक-वेतन और पाठ्यक्रम आदि के परंपरागत मतभेद आदि प्रश्नों से इतनी दूर निकल गई है कि इनको यहाँ पर विवेचित नहीं किया जा सकता। द्वितीय तरंग दूरदर्शन तंत्र की तरह (उदाहरण के लिए, धूम्र भंडार उद्योग) हमारी जनशिक्षा प्रणालियाँ बड़े पैमाने पर प्राय: लुप्त हैं। बिल्कुल मीडिया की तरह शिक्षा में भी कार्यक्रम विविधता के व्यापक विस्तार और नए मार्गों की बहुतायत आवश्यकता है। केवल आर्थिक रूप से उत्पादक भूमिकाओं के लिए ही निम्न विकल्प पद्धति की जगह उच्च विकल्प पद्धति को अपनाना होगा।
शिक्षा और नई संचार प्रणाली के छ: सिद्धांतों-पारस्परिक क्रियाशीलता, गतिशीलता, परिवर्तनीयता, संयोजकता, सर्वव्यापकता और सार्वभौमिकता के बीच बहुत ही कम संबंध खोजे गए हैं। अब भी भविष्य की शिक्षा पद्धति और संचार प्रणाली के बीच संबंधों की उपेक्षा करना उन शिक्षार्थियों को धोखा देना है, जिनका निर्माण इन दोनों से होना है।
सार्थक रूप से शिक्षा की प्राथमिकता अब मात्र माता-पिता, शिक्षकों एवं मुट्ठी भर शिक्षा सुधारकों के लिए ही नहीं है, बल्कि व्यापार के उस आधुनिक क्षेत्र के लिए भी है, जहाँ से सार्वभौम प्रतियोगिता और शिक्षा के बीच संबंध को स्वीकारने वाले नेताओं की संख्या बढ़ रही है।

दूसरी प्राथमिकता कंप्यूटर वृद्धि, सूचना तकनीक और विकसित मीडिया के त्वरित सार्वभौमिकरण की है। कोई भी राष्ट्र 21 वीं सदी की इलेक्ट्रॉनिक आधारित संरचना, एंब्रेसिंग कंप्यूटर्स, डाटा संचार और अन्य नवीन मीडिया के बिना 21 वीं सदी की अर्थव्यवस्था का संचालन नहीं कर सकता। इसके लिए ऐसी जनसंख्या की आवश्यकता है, जो इस सूचनात्मक आधारित संरचना से परिचित हो, ठीक उसी प्रकार जैसे कि समय के परिवहन तंत्र-कारों, सड़को, राजमार्गों, रेलों से सुपरिचित हैं।

वस्तुत: सभी के टेलीकॉम इंजीनियर अथवा कंप्यूटर विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है, जैसा कि सभी के कार मैकेनिक होने की आवश्यकता नहीं है, परंतु संचार प्रणाली का ज्ञान कंप्यूटर, फैक्स और विकसित दूर संचार को सम्मिलित करते हुए उसी प्रकार आसान और मुफ्त होना चाहिए जैसा कि आज परिवहन प्रणाली के साथ है। अत: विकसित अर्थव्यवस्था चाहने वाले लोगों का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए कि सर्वव्यापकता के नियम की क्रियाशीलता को बढ़ाया जाए, वह है-यह निश्चित करना कि गरीब अथवा अमीर सभी नागरिकों को मीडिया की व्यापक संभावित पहुँच से अवश्य परिचित कराया जाए।
अंततः यदि नई अर्थव्यवस्था का मूल ज्ञान है, तब सतही बातों की अपेक्षा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का लोकतांत्रिक आदर्श सर्वोपरि राजनतिक प्राथमिकता बन जाता है।

(क) गद्यांश के अनुसार संचार प्रणाली का ज्ञान कैसा होना चाहिए?
(i) आसान और मुप्त
(ii) जटिल और कीमती
(iii) विशेषज्ञ केंद्रित
(iv) अर्थव्यवस्था के अनुकूल
उत्तर :
(i) आसान और मुफ्त

(ख) ‘पुनर्विचार’ शब्द से तात्पर्य है
(i) चिंतन
(ii) समीक्षा
(iii) निर्णय
(iv) निष्कर्ष
उत्तर :
(i) चिंतन

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(ग) गद्यांश के आधार पर बताइए कि शिक्षा के लिए किसकी आवश्यकता महसूस की जा रही है?
(i) कार्यक्रम विविधता के व्यापक विस्तार की
(ii) परंपरागत मतभेद् की
(iii) उत्पादक की भूमिका की
(iv) शिष्ट जीवन की कल्पना की
उत्तर :
(i) कार्यक्रम विविधता के व्यापक विस्तार की

(घ) आर्थिक रूप से उत्पादक भूमिकाओं हेतु क्या किया जाना चाहिए?
(i) केवल नवीन सिद्धांतों को अपनाना
(ii) उच्च विकल्प पद्धति को अपनाना
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) निम्न विकल्प पद्धति को अपनाना
उत्तर :
(ii) उच्च विकल्प पद्धति को अपनाना

(ङ) भविष्य की शिक्षा पद्धति और भविष्य की संचार प्रणाली के बीच संबंधों की उपेक्षा करना किनके लिए उपयुक्त नहीं है?
(i) जिन शिक्षार्थियों ने पुरानी पद्धति से शिक्षण कार्य संपन्न किया है
(ii) जिन शिक्षार्थियों का निर्माण इन दोनों से होना है
(iii) जिन शिक्षार्थियों का निर्माण हो चुका है
(iv) जिन शिक्षार्थियों ने नईं शिक्षा प्रणाली की अवहेलना की है
उत्तर :
(ii) जिन शिक्षार्थियों का निर्माण इन दोनों से होना है

(च) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. शिक्षा के क्षेत्र में कार्यक्रम विविधता के व्यापक विस्तार तथा नए मार्गों के अनुसरण की महती आवश्यकता है।
2. सार्थक रूप से शिक्षा की आवश्यकता केवल माता-पिता के लिए ही है।
3. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का लोकतांत्रिक आदर्श सर्वोपरि राजनीतिक प्राथमिकता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1 और 3
(iv) 1 और 2
उत्तर :
(iii) 1 और 3

(छ) 21 वीं सदी की इलेक्ट्रॉनिक आधारित संरचना, एंबेसिंग कंप्यूटर्स, डाटा संचार आदि का संचालन किसके माध्यम से संभव है?
(i) सूचनात्मक आधारित संरचना के ज्ञान के माध्यम से
(ii) व्यावहारिक संरचना के रूप के माध्यम से
(iii) पुस्तकीय ज्ञान के माध्यम से
(iv) केवल जनसंख्या विस्फोट के माध्यम से
उत्तर :
(i) सूचनात्मक आधारित संरचना के झान के माध्यम से

(ज) ‘शिक्षा के क्षेत्र में पुनर्विचार की गहन आवश्यकता है’ लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि
(i) शिक्षा प्रणाली के नवाचार की आवश्यकता है
(ii) जनशिक्षा प्रणाली बड़े पैमाने पर लुप्त हो चुकी है
(iii) शिक्षा पद्धति व संचार पद्धति अन्योन्याश्रित हैं
(iv) शिक्षा की प्राथमिक्ता केवल विद्यार्थियों के लिए ही है
उत्तर :
(i) शिक्षा प्रणाली में नवाचार की आवश्यक्ता है

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(झ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पदिए और सही विकत्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) विकसित अर्थव्यवस्था चाहने वालों का प्रमुख लक्ष्य सर्वव्यापकता के नियम की क्रियाशीलता को बढ़ाना होना चाहिए।
कारण (R) गरीब व अमीर सभी नागरिक मीडिया की व्यापक संभावित पहुँच से अवगत हों।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
उत्तर :
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(ञ) प्रस्तुत गद्यांश किस विषय-वस्तु पर आधारित है?
(i) शिक्षा, संचार माध्यम और सामाजिक न्याय पर
(ii) शिक्षा, सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता पर
(iii) शिक्षा, सूचना तकनीक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर
(iv) शिक्षा, सूचना तकनीक और सामाजिक न्याय पर
उत्तर :
(iii) शिक्षा, सूचना तक्नीक और अभिव्यक्ति की स्वरंत्रता पर

प्रश्न 2.
दिए गए पद्यांश पर आधारित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले। पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी, हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की जबानी, अनगिनत राही गए इस राह से, उनका पता क्या, पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी, यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है, खोल इसका अर्थ, पंथी, पंच का अनुमान कर ले, पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।

(क) कवि के अनुसार पुस्तकों में किसकी कहानी नहीं छपी है?
(i) नवीन जीवन की
(ii) जीवन-पथ के सरल या कठिन होने की
(iii) अनगिनत राहियों की
(iv) जीवन के नकारात्मक पक्ष की
उत्तर :
(ii) जीवन-पथ के सरल या कठिन होने की

(ख) मार्ग में अनगिनत राही कौन-सी निशानी छोड़ गए हैं?
(i) अपने दुःखमय जीवन गाथा की
(ii) भावी पीढ़ी को जीवन जीने में पथ-प्रदर्शक का कार्य कराने वाली
(iii) भावी पीढ़ी को जीवन के अभावों से परिंचित कराने वाली
(iv) जीवन को आनंददायक बनाने वाली
उत्तर :
(ii) भावी पीढ़ी को जीवन जीने में पथ-प्रदर्शक का कार्य कराने वाली

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(ग) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. नवीन राह पर चलने से पहले हमें उस राह को भली-भाँति परख लेना चाहिए।
2. अनगिनत राहगीर जिस रास्ते पर चलते हैं वही मार्ग हमें अपनाना चाहिए।
3. रास्ते को अच्छा मानकर, विश्वस्त होकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/है?
(i) केवल 1
(ii) केवल 2
(iii) केवल 3
यह बुरा है या अच्छा, व्यर्थ दिन इस पर बिताना, जब असंभव छोड़ यह पथ दूसरे पर पग बढ़ाना, तू इसे अच्छा समझ, यात्रा सरल इससे बनेगी, सोच मत केवल तुझे ही यह पड़ा मन में बिठाना, हर सफल पंथी यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है, तू इसी पर आज अपने चित्त का अवधान कर ले, पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले।
उत्तर :
(iv) 1 और 3

(घ) प्रत्येक सफल राहगीर क्या लेकर आगे बढ़ा है?
(i) निश्चित उद्देश्य
(ii) संकटों का सामना करने का विश्वास
(iii) सफलता प्राप्ति का लक्ष्य
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

(ङ) ‘हर सफल पंथी यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है’ में ‘पंथी’ शब्द का अर्थ है
(i) राहगीर
(ii) पक्षी
(iii) अनुयायी
(iv) समर्थक
उत्तर :
(i) राहगीर

अभिव्यक्ति और माध्यम –

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

(क) पत्रकार के लिए किस गुण का होना आवश्यक है?
(i) व्यंग्यात्मकता का
(ii) तुलनात्मकता का
(iii) आत्मनिर्भरता का
(iv) निष्पक्षता का
उत्तर :
(iv) निष्पक्षता का

(ख) मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
(i) लचीलापन
(ii) स्थायीपन
(iii) अस्थायीपन
(iv) ये सभी
उत्तर :
(ii) स्थायीपन

(ग) नाटक के मंच निर्देश सदैव किस काल में लिखे जाते हैं?
(i) भूतकाल में
(ii) वर्तमानकाल में
(iii) भविष्यकाल में
(iv) परिवर्तनशीलता
उत्तर :
(ii) वर्तमानकाल में

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(घ) सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए

सूची I सूची II
A. कहानी का प्रारंभिक नक्शा 1. चरमोत्कर्ष
B. नाटक का प्रभावशाली तत्त्व 2. आवाज
C. रेडियो नाटक में पात्र व उनके चरित्र का माध्यम 3. रंगमंचीयता
D. कौतूहल की पराकाष्ठा 4. कथानक

कूट
A B B D
(i) 1 4 3 2
(ii) 2 1 4 3
(iii) 3 2 1 4
(iv) 4 3 2 1
उत्तर :
(iv) 4 3 2 1

(ङ) आलेख के प्रस्तुतीकरण में किस प्रकार की जानकारी का उल्लेख नहीं करना चाहिए?
(i) श्रामक
(ii) संदिग्ध
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) तथ्यपरक
उत्तर :
(iii) (i) और (ii) दोनों

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग 2 – 

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

हरिष राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।
तुरत बैद तब कीन्हि उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
हुदयँ लाई प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
यह बृतांत दसानन सुनेऊ। अति बिषाद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।

(क) हनुमान को देखकर राम के हुदय में क्या भाव आया? (1)
(i) राम का हुदय कृतकृत्य हो गया
(ii) उनकी आँखों में हनुमान के प्रति अत्यंत कृतज़ता आ गई
(iii) हनुमान को गले लगाने का
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

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(ख) पद्यांश के आथार पर बताइए कि लक्ष्मण की मूर्च्छ कैसे टूटी?
(i) हनुमान के आगमन से
(ii) वैद्य द्वारा उपचार करने से
(iii) राम की शक्ति से
(iv) ईश्वर के आशीर्वाद से
उत्तर :
(ii) वैद्य द्वारा उपचार करने से

(ग) लक्ष्मण के जागने पर राम और वानर दल में क्या प्रतिक्रिया हुई?
(i) राम ने अपने भाई को हददय से लगा लिया
(ii) पूरा वानर दल खुशी से हुम उठा
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) राम तथा वानर दल सोच में डूब गए
उत्तर :
(iii) (i) और (ii) दोनों

(घ) अलंकार की दृष्टि से कौन-सा विकल्प सही है?
(i) हरिष राम – उपमा अलंकार
(ii) परम सुजाना – यमक अलंकार
(iii) पुनि पुनि – पुनरक्ति प्रकाश अलंकार
(iv) विविध जतन करि – अन्योक्ति अलंकार
उत्तर :
(iii) पुनि पुनि – पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

(ङ) रावण को लक्ष्मण की मूच्चा समाप्त होने की सूचना मिलने पर उसकी मानसिक दशा कैसी हो गई?
(i) जड़वत एवं गंभीर
(ii) व्याकुल एवं विर्चलित
(iii) सहज एवं संतोषजनक
(iv) निराशापूर्ण
उत्तर :
(ii) व्याकुल एवं विचलित

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

यह विडंबना की ही बात है कि इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है। इसके पोषक कई आधारों पर इसका समर्थन करते हैं। समर्थन का एक आधार यह कहा जाता है कि आधुनिक सभ्य समाज ‘कार्य-कुशलता’ के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है, चूँकि जाति-प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है, इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है। इस तर्क के संबंध में पहली बात तो यही आपत्तिजनक है कि जाति-प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का भी रूप लिए हुए है। श्रम विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की आवश्यकता है, परंतु किसी भी सभ्य समाज में श्रम विभाजन की व्यवस्था श्रमिकों का विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक विभाजन नहीं करती।
भारत की जाति-प्रथा की एक और विशेषता यह है कि यह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन ही नहीं करती, बल्कि विभाजित विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे की अपेक्षा ऊँच-नीच भी करार देती है, जोकि विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता है।

(क) जाति-प्रथा को किस रूप में बुराई नहीं माना गया है?
(i) श्रम-विभाजन के रूप में
(ii) श्रमिक विभाजन के रूप में
(iii) ऊँच-नीच के रूप में
(iv) श्रमिकों के अस्वाभाविक विभाजन के रूप में
उत्तर :
(i) श्रम-विभाजन के रूप में

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(ख) लेखक ने किस बात को विडंबना कहा है?
(i) समाज की कार्य-कुशलता को
(ii) जातिवाद के पोषकों की कमी न होने को
(iii) श्रम का विभाजन होने को
(iv) कर्म को अधिक महत्व प्रदान करने को
उत्तर :
(ii) जातिवाद के पोषकों की कमी न होने को

(ग) आधुनिक सभ्य समाज कार्य-कुशलता के लिए …….. को आवश्यक मानता है।
(i) जाति-प्रथा
(ii) श्रम-विभाजन
(iii) उच्च वर्ग
(iv) निम्न वर्ग
उत्तर :
(ii) श्रम-विभाजन

(घ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) जाति-प्रथा एक बुराई है।
कारण (R) जाति-प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिकों का विभाजन भी करती है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
उत्तर :
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण

(ङ) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जन्म के आधार पर व्यवसाय तय करने की व्यवस्था केवल भारत में ही है।
2. जाति-प्रथा श्रम विभाजन करती है, श्रमिक विभाजन नहीं।
3. विभिन्न वर्गों में ऊँच-नीच करार देने की व्यवस्था भारत के अतिरिक्त किसी भी देश में नहीं है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1 और 2
(iv) 1 और 3
उत्तर :
(ii) केवल 3

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पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग 2

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 10 = 10)
(क) ‘सिल्वर वैडिग’ कहानी में यशोधर बाबू द्वारा पुराने विचारों का समर्थन करने का उनके पारिवारिक जीवन पर क्या प्रभाव पड्डता है?
(i) उनका पारिवारिक जीवन सुखमय हो जाता है
(ii) उनकी अपनी पत्नी और बच्चों के प्रति विरोध की भावना बनी रहती है
(iii) उनके बच्चे अपने पिता के सिद्धांतों का पालन करते हैं
(iv) उनका परिवार परंपरावादी मूल्यों को महत्त्व देता है
उत्तर :
(ii) उनकी अपनी पत्नी और बच्चों के प्रति विरोध की भावना बनी रहती है

(ख) नई पीढ़ी पुराने विचारों को अपनाने के पक्ष में क्यों नहीं दिखाई देती है? ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर सही विकल्प चुनिए
(i) क्योंकि नई पीढ़ी के विचार अधिक सार्थक है
(ii) क्योकि पुरानी पीढ़ी के विचारों से नई पीढ़ी परिचित नहीं है
(iii) क्योंकि नई पीढ़ पुराने विचारों को निरर्थक और दकियानूसी मानती है
(iv) क्योकि पुरानी पीढ़ी अपने विचारों की सार्थकता सिद्ध नहीं कर पाती है
उत्तर :
(iii) क्योंकि नई पीढ़ी पुराने विचारों को निरर्थक और दकियानूसी मानती है

(ग) ‘जिन लोगों के बाल-बच्चे नहीं होते, घर परिवार नहीं होता, उनके रिटायर होने के बाद जो हुआ होगा से भी मौत हो जाती है’ कथन के आधार पर बताइए कि ‘जो हुआ होगा’ का क्या तात्पर्य है?
(i) उनकी मृत्यु के कारण का पता नहीं चलता है
(ii) उनकी मृत्यु आकस्मिक होती है
(iii) उनकी स्थिति अन्य की तुलना में अच्छी होती है
(iv) उनकी किसी भी बात पर समाज ऐतराज नहीं करता है
उत्तर :
(i) उनकी मृत्यु के कारण का पता नहीं चलता है।

(घ) ‘जूझ’ कहानी के नायक आनंदा द्वारा पढ़ाई के साथ-साथ खेती का काम करने का क्या प्रभाव पड़ा?
(i) उसकी पढ़ाई के प्रति रुचि कम होती चली गई
(ii) उसका मन निराशा और खीझ से भर गया
(iii) वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा
(iv) प्रतिकूल परिस्थितियों ने उसके दृढ़ निश्चय को तोड़ दिया
उत्तर :
(iii) वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा

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(ङ) ‘जूझ’ कहानी में कविता पाठ करने के साथ अध्यापक ने आनंदा को क्या बताया?
(i) कवि की भाषा कैसी होनी चाहिए
(ii) छंद की जाति की पहचान कैसे करें
(iii) कवि को शुद्ध लेखन करना क्यों जरूरी होता है
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

(च) ‘जूझ’ कहानी में मराठी अध्यापक सौँदलगेकर कविता पाठ करते हुए क्या करते थे?
(i) कविता की लय भूल जाते थे
(ii) कविता के बीच-बीच में संस्मरण सुनाते थे
(iii) कविता के सिद्धांतों पर चर्चा करते थे
(iv) कविता के साथ उसका भाव भी समझाते थे
उत्तर :
(ii) कविता के बीच-बीच में संस्मरण सुनाते थे

(छ) ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में मुअनजो-दड़ो की किसी खुदाई में नहर होने के प्रमाण न मिलने पर क्या अनुमान लगाया गया है?
(i) उस काल में काफी बारिश होती होगी
(ii) उस काल में पानी का प्रयोग कम होता होगा
(iii) उस काल में खेतीबाड़ी इतनी अधिक नहीं होती होगी
(iv) उस काल में लोगों को नहरों के विषय में कोई जानकारी नहीं होगी
उत्तर :
(i) उस काल में काफी बारिश होती होगी

(ज) सिंधु घाटी की सभ्यता में नगर योजना, वास्तुकला, पानी या साफ-सफाई जैसी सामाजिक व्यवस्थाओं में एकरूपता को कायम रखने का आधार क्या हो सकता है?
(i) यहाँ का राजा कठोर अनुशासन रखता था
(ii) यहाँ जनता ही कर्ता-धर्ता थी
(iii) यहाँ कोई अनुशासन जरुर था
(iv) यहाँ सब कुछ प्रकृति प्रदत्त था
उत्तर :
(iii) यहाँ कोई अनुशासन जरूर था

(झ) सिंधु घाटी की सभ्यता के विषय में कौन-सा कथन असत्य है?
(i) ये अन्न उपजाते नहीं थे, उसका आयात करते थे
(ii) स्वास्थ्य के प्रति मुअनजो-दड्रो के निवासी सचेत थे
(iii) यहाँ का अजायबघर कस्बाई स्कूल की इमारत की तरह था
(iv) यहाँ कर के रूप में प्राप्त अनाज का भंडारण विशाल कोठार में किया जाता था, जो कुंड के दूसरी ओर था
उत्तर :
(i) ये अन्न उपजाते नहीं थे, उसका आयात करते थे

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(ञ) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. ‘जूझ’ कहानी के लेखक आनंदा का मन शहर घूमने के लिए तड़पता था।
2. आनंदा घर के कार्यों में अत्यधिक व्यस्तता के कारण पाठशाला नहीं जा पाता था।
3. आनंदा खेती के कार्य को तुच्छ समझता था।
4. आनंदा को दिवाली बीत जाने पर ईख पेरने का कोल्हू चलाना पड़ता था। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1, 2 और 3
(iv) 2, 3 और 4
उत्तर :
(iv) 2, 3 और 4

खंड ‘ब’
(वर्णनात्मक प्रश्न)

खंड ‘ब’ में जनसंचार और सृजनात्मक लेखन, पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग- 2 व पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग- 2 से संबंधित वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।

जनसंचार और सृजनात्मक लेखन –

प्रश्न 7.
निम्नलिखित दिए गए 3 विषयों में से किसी 1 विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 × 1 = 6)

(क) कंप्यूटर तथा मोबाइल मनोरंजन के साथ-साथ हमारी जरूरत के साधन
उत्तर :
विज्ञान ने मनुष्य को सुख-सुविधा के अनेक साधन प्रदान किए हैं, जिनमें कंप्यूटर तथा मोबाइल सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। विज्ञान द्वारा विकसित यह यंत्र मनुष्य के मस्तिष्क की तरह काम करता है। इन यंत्रों ने हमारे जीवन को अनेक सुख-सुविधाओं से भर दिया है। इन्हीं के कारण सूचनाओं की प्राप्ति और इनके संवहन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई है। पहले कंप्यूटर और इसके पश्चात् मोबाइल ने मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में क्रांति ला दी है। जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं, जहाँ इसके महत्त्व को रेखांकित न किया जा सके।
कंप्यूटर एवं मोबाइल झान के भंडार के साथ-साथ मनोरजन के भी साधन हैं। इन यंत्रों पर विभिन्न भाषाओं के सिनेमा देखे जा सकते हैं। इस पर वयस्क लोगों के लिए समाचार, तो बच्चों के लिए सैंकड़ों खेल उपलब्ध हैं। ये यंत्र विश्व को एक परिवार बनाने का कार्य करते हैं। विदेश में बैठे लोगों से वीडियो कॉलिंग, मैसेज आदि की सुविधा भी कंप्यूटर एवं मोबाइल पर उपलब्ध है। इस प्रकार, कहा जा सकता है कि कंप्यूटर एवं मोबाइल की उपलब्धियाँ अनगिनत हैं।
भारत में शुरूआती दौर में कंप्यूटरों का प्रयोग बहुत सीमित था, लेकिन वर्तमान में अस्पताल, बैंक, अनुसंधान केंद्र, प्रयोगशाला, विद्यालय, दफ़्तर आदि सहित कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहाँ कप्यूटर का उपयोग न किया जाता हो। वर्तमान समय में मोबाइल ने स्वयं को मिनी कंप्यूटर’ के रूप में स्थापित किया है। कंप्यूटर तथा मोबाइल के आगमन से शिक्षा का स्वरूप बदल गया है। आज कंप्यूटर एवं मोबाइल के माध्यम से विद्यार्थियों द्वारा अध्ययन संभव है। कंप्यूटर एवं मोबाइल को ज्ञान-भंडार का एक साधन कहा जा सकता है।
कंप्यूटर हो या मोबाइल दोनों ही घर बैठे हमारे अनेक कार्य शीघ्रता के साथ कर देते हैं। रेलवे, जहाज आदि के टिकट से लेकर सिनेमा आदि के टिकट का प्रबंध घर बैठे हो जाता है। कंप्यूटर व मोबाइल के द्वारा मनुष्य बड़ी-से-बड़ी गणना कुछ सेकंड में ही कर सकता है। इनके द्वारा वीडियो कॉल, सोशल नेटवर्किंग जैसी सुविधाओं से जुड़ा जा सकता है। बैंकिंग जैसी सुविधाओं के माध्यम से घर बैठे किती को भी पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं। शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में भी यह विशेष उपयोगी है। अब पुस्तकालय जाने के बजाय गूगल पर सभी जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं। इन उपकरणों द्वारा समाचार, चुटकुले, संगीत आदि का आनंद लिया जा सकता है।
कंप्यूटर तथा मोबाइल मनोरंजन के साथ-साथ हमारी जरूरत का साधन अधिक बन गए हैं। साथ ही यदि इसका सही दिशा में प्रयोग न किया गया, तो यह मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है।

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(ख) भारतीय तथा पाश्वात्य संस्कृति का वर्णन
उत्तर :
भारतीय संस्कृति अध्यात्म एवं दर्शन से ओत-प्रोत है। हमारे देश की संस्कृति अद्वितीय है। पावन भारतभूमि से ही मानव-मंगल की कामना का स्वर संपूर्ण विश्व में गूँजा है। भारतीय संस्कृति का ध्येय मानव-मूल्यों को प्रतिष्ठित करना है। भारतीय संस्कृति, भारतीय वेद ऋचाएँ (श्लोक) तथा पुराण अत्यंत प्राचीन हैं। इनमें कुछ ऐसी विशेषताएँ हैं, जो आज भी इन्हें महत्वपूर्ण बनाए हुए हैं।
इस वैज्ञानिक युग में भी हम भारतीय आस्थावादी हैं और धर्म हमारे जीवन का आधार है। हमारी संस्कृति में भौतिक सुख को नहीं वरन् आत्मिक संतुष्टि को महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति में आत्मा को परमात्मा का अंश मानकर आत्मिक जान पर बल दिया जाता है। वास्तविक सुख-शांति तो संतोष, परोपकार, दया, अहिंसा आदि गुणों को अपनाने पर प्राप्त होती है। आत्मा के सुख के सम्मुख सभी सुख नगण्य हैं। इन्हीं सिद्धांतों को जन्म देने के कारण ही भारत को विश्वगुरु कहा गया हैं।

पाश्चात्य सभ्यता उपभोगवाद को जन्म देती है। वहाँ की संस्कृति में स्वतंत्रता के नाम पर स्वच्छंदता देखी जाती है। वहाँ की संस्कृति हमारी संस्कृति से मेल नहीं खाती और दोनों संस्कृतियों में काफी विरोधाभास है, परंतु इन सबके बाद भी कुछ महत्वपूर्ण आविष्कार; जैसे-एक्स-रे, कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल फोन, टेलीविजन आदि पाश्चात्य संस्कृति की ही देन हैं। ये वस्तुएँ हमारे जीवन के लिए उपयोगी हैं।
पाश्चात्य देशों के लोग साफ-सफाई के प्रति अधिक जागरूक होते हैं। वे अपने आस-पास बहुत सफाई रखते हैं और सड़क, पार्क या सार्वजनिक स्थानों पर कागज का एक टुकड़ा तक नहीं फेंकते। अतः हमें साफ-सफाई, व्यावसायिकता, समयबद्धता आदि पाश्चात्य संर्कृति से अपनाने चाहिए।
वर्तमान में भारतीय संस्कृति पर पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और भारत वैज्ञानिक युग में भौतिक सिद्धांतों की प्राप्ति के लिए उसी दृष्टिकोण से सोचने लगा है। यह पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति का भारतीय सभ्यता-संस्कृति पर एक अच्छा प्रभाव समझा जा सकता है, परंतु भौतिकता के साथ आध्यात्मिकता का समन्वय करते हुए जीवन को भोगपरक नहीं, बल्कि त्यागपरक होना चाहिए।

(ग) वर्तमान युग में खेलों में फैला भ्रष्टाचार
उत्तर :
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम की आवश्यकता होती है और खेल व्यायाम का एक ऐसा रूप है, जिसमें व्यक्ति का शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक विकास भी होता है। खेलकूद व्यक्ति के बहुमुखी विकास के लिए आवश्यक है। जीवन में खेलों का अति महत्त्व है। खेलों से व्यक्ति के जीवन में संयम, दृढता, गंभीरता, एकाग्रता, सहयोग एवं अनुशासन की भावना का विकास होता है। खेलकूद में होने वाली हार-जीत भी विद्यार्थियों को जीवन में सफलता-असफलता के समय संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। खेल खेलने से शरीर हुष्ट-पुष्ट होता है, मासपेशियों स्वस्थ होती हैं व आलस्य दूर भागता है। खेलों के द्वारा मनुष्य में अपनत्व तथा एकता की भावना भी जन्म लेती है। वर्तमान समय में खेल रोजगार की दृष्टि से भी एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने आया है और एक खिलाड़ी के अतिरिक्त कोच, सहायक, चिक्तिक्सक आदि के रूप में व्यक्ति इसमें अपनी सेवाएँ दे सकता है।

खोलों के क्षेत्र में आए इस बदलाव के कारण ही अब लोगों की मानसिक्ता में भी परिवर्तन दिखाई दिया है, तभी जहौं पहले कहा जाता था, ‘खोलोगे-कूदोगे होगे खराब’, अब कहा जाता है, ‘ खेलोगे-कूदोगे बनोगे मवाब’। अतः खेल व्यक्ति के जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खेलों में भी यही भ्रष्टाचार व्याप्त है। सक्षम अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके अयोग्य लोगों का चयन करते हैं। आज समाचार-पत्र हाथ में लेते ही खेल पृष्ठ पर कॉमनवेल्थ घोटाले या मैच फिक्रिंग के मामले प्रकाश में आते रहते हैं, जो अति निंदनीय कृत्य हैं। मैच फिक्सिग में तो खिलाड़ियों तक के हाथ होने की सूचनाएँ मिलती हैं, जिससे खेल प्रेमियों को गहरा आघात लगता है, वहीं विश्वस्तरीय मंच पर खेल एवं देश की छवि भी धूमिल होती है।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 40 शब्दों में निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) नाटक रंगमंच प्रतिरोध का सशक्त माध्यम है। इस कथन के परिप्रेक्ष्य में नाटक में स्वीकार एवं अस्वीकार की धारणा पर विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर :
नाटक एक जीवंत माध्यम है। नाटक में कोई भी दो चरित्र जब आपस में मिलते हैं, तो विचारों के आदान-प्रदान में टकराहट होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि रंगमंध प्रतिरोध का सबसे सशक्त माध्यम है। वह कभी भी यथास्थिति को स्वीकार नहीं करता। इस कारण उसमें अर्यीकार की स्थिति भी बराबर बनी रहती है। जिस नाटक में असंतुष्टि, छट-पटाहट, प्रतिरोध और अस्वीकार जैसे नकारात्मक तत्वों की जितनी ज्यादा उपस्थिति होगी, वह उतना ही सशक्त नाटक साबित होगा।

(ख) कथानक कहानी का केंद्रीय बिंदु माना जाता है। इसके अभाव में कहानी की रचना की कल्पना करना भी असंभव है, कैसे?
उत्तर :
कथानक कहानी का केंद्रीय बिंदु होता है, जिसमें प्रारंभ से अंत तक कहानी की सभी घटनाओं और पात्रों का उल्लेख होता है। सरल शब्दों में कहानी के ढाँचे को कथानक कहा जाता है। प्रत्येक कहानी के लिए कथावस्तु का होना अनिवार्य है, क्योंकि इसके अभाव में किसी कहानी की रचना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कथानक को कहानी का प्रारंभिक नक्शा भी माना जा सकता है।

(ग) ‘फीचर एक विशेष पत्रकारीय लेखन होता है। इसके विषय किसी भी प्रकार की सीमाओं से मुक्त होते हैं।फीचर लेखन के कितने प्रकार हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
फीचर लेखन के विषय अनंत एवं किसी भी प्रकार की सीमाओं से मुक्त हैं। इसके बावजूद फीचर लेखन के विषयों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है
– सामाजिक-सांस्कृतिक फीचर इसमें व्यक्ति-विशेष, सामाजिक रीति-रिवाज, रहन-सहन, मेलों, त्योहारों, कला आदि से संबंधित विषय सम्भिलित किए जाते हैं।
– घटनापरक फीचर इसमें आंदोलन, युद्ध, अकाल, दुर्घटना, दंगा, धरना आदि से संबंधित विषय शामिल किए जाते हैं।
– प्राकृतिक फीचर इसमें विभिन्न प्राकृतिक अवयवों, अंतरिक्ष, खगोल, पृथ्वी आदि से संबंधित फीचरों के अतिरिक्त लोगों के बीच प्राकृतिक या नैसर्गिक रूप से विद्यमान रुचिपूर्ण विषयों से संबंधित विषयों को शामिल किया जाता है।
– साहित्यिक फीचर इसमें साहित्यिक गतिविधियाँ, साहित्यकारों या रचनाकारों, लोक साहित्य आदि से जुड़े विषय शामिल किए जाते हैं।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) आपने अपने सहपाठियों के साथ कुछ गाँवों की प्राथमिक पाठशालाओं को देखा। शिक्षा का अधिकार कानून के रहते हुए भी उन विद्यालयों में उसका अनुपालन कितना हो पा रहा है और उसकी सीमाएँ क्या हैं? इस विषय पर एक आलेख लिखिए। (3)
उत्तर :
भारत के कुछ गाँवों में प्राथमिक पाठशालाओं की स्रिथि अल्यंत शोचनीय है। वहीं विद्यार्थियों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। किसी कमरे में दरी बिछी है तो किसी कमरे में वह भी नहीं है। कक्षा में श्यामपट्ट की व्यवस्था नहीं है, बिजली एवं पीने के पानी की भो कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय में अध्यापकों की संख्या कम है। भारत में ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून है, जिसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य, गुणवत्तायुक्त शिक्षा को सुनिश्चित करना है, परंतु विद्यालयों का अधिक दूरी पर होने के कारण तथा उनमें उचित सुविधाओं का अभाव होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजना चाहते। अतः शिक्षा का अधिकार कानून के रहते हुए गाँवों की प्राथमिक पाठशालाओं में उसका अनुपालन न होने के कारण इसकी उपयोगिता पर प्रश्नचिह लग गया है। किसी भी देश का भविष्य शिक्षित नागरिकों पर निर्भर करता है। अतः शिक्षा के अधिकार कानून का उचित रूप से पालन किय्या जाना चाहिए।

(ख) ‘समाचार’ शब्द का अर्थ बताते हुए इसकी परिभाषा लिखिए। (3)
उत्तर :
हिंदी में प्रचलित ‘समाचार’ शब्द अंग्रेज़ी के NEWS का पर्याय है। NEWS (न्यूज) शब्द चारों दिशाओं (North, East, West, South) के नामों का संक्षिप्त रूप है। इस प्रकार, समाचार का संबंध चारों दिशाओं से हो जाता है। सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य अपने आस-पास के समाज एवं देश-दुनिया की घटनाओं के बारे में जानने को उत्सुक रहता है, यह जानकारी हमें ‘समाचार’ के अंतर्गत प्राप्त होती है। समाचार को परिभाषित करते हुए कहा जाता है कि वह सब कुछ, जिससे हम कल तक अनभिज्ञ थे, जिसके बारे में हमें नहीं पता था, हमारे लिए समाचार है। तात्कालिकता एवं नवीनता समाचार का महत्त्वपूर्ण गुण है। वास्तव में, महत्त्वपूर्ण घटनाओं एवं गतिविधियों का सही एवं पक्षपात रहित विवरण प्रस्तुत करना ही समाधार है।

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(ग) पत्र-पत्रिकाओं में खेल के महत्त्व की क्या भूमिका है? स्पष्ट कीजिए। (3)
उत्तर :
पत्र-पत्रिकाओं में पाठकों की रुचि के अनुसार खेलों को बहुत महत्त्व दिया जाता है। खेल मनुष्य के उत्साह व नवीन ऊर्जा का संचार करता है। प्रत्येक मनुष्य की किसी-न-किसी खेल में रुचि अवरश्य होती है। अतः समाचार-पत्रों में खेल से संबंधित एक या दो पृष्ठ अवश्य होते हैं। वर्तमान में समाचार माध्यमों में खेलों का महत्त्व लगातार बढ़ता जा रहा है। पत्र-पत्रिकाओं में खेलों पर विशेष लेखन, खेल विशेषांक, खेल परिशिष्ट, स्पोट्स प्वॉईंट आदि प्रकाशित होते रहते हैं। टी.वी. व रेडियो पर भी खेलों से संबंधित विशेष कार्यक्रम दैनिक या साप्ताहिक रूप से प्रसारित होते रहते हैं।

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग 2 – 

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) ‘कविता के बहाने’ में कवि ने कविता को बच्चों के समान क्यों कहा है? तर्कसम्मत उत्तर दीजिए। (3)
उत्तर :
‘कविता के बहाने’ में कवि कविता एवं बालक में समानता व्यक्त करते हुए कहता है कि कविता एक खेल है और बच्चों के खेल में किसी प्रकार की कोई सीमा नहीं होती। जिस प्रकार बच्चा अपने-पराए का भेद किए बिना सब जगह अपने स्वाभाविक रूप में रहते हुए समानता की भावना को प्रसारित करता है, ठीक उसी तरह कविता भी सबके लिए समानता की भावना को प्रचारित करती है। वह सभान अर्थ एवं भाव रखते हुए सभी को एक ही सीख देती है। वह अपने-पराए का भेद नहीं करती है।

(ख) ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में ‘परदे पर वक्त की कीमत है कहकर कवि ने पूरे साक्षात्कार के प्रति अपना नज़रिया किस रूप में रखा है? (3)
उत्तर :
कवि कहना चाहता है कि मीडिया के लोग सहानुभूति अर्जित करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि अपंग व्यक्ति के साथ-साथ दर्शक भी रोने लगें, लेकिन वे इस रोने वाले दृश्य को ज्यादा देर तक नहीं दिखाना चाहते, क्योंकि ऐसा करने से उनका पैसा बर्बाद होगा तथा वे समय और पैसे की बर्बादी नहीं करना चाहते। परदे पर वक्त की कीमत है’ कहकर कवि परोक्ष रूप से यह कहना चाह रहा है कि परदे पर किसी की भावना, संवेदना, दुःख-दर्द, मान-अपमान अन्य किसी भी बात की कोई कीमत नहीं है। कवि मीडिया द्वारा किए जाने वाले इस तरह के कायों की निंदा करता है। वह चाहता है कि अपंग और अपाहिजों के साथ समाज उचित और संवेदनशील व्यवहार करे।

(ग) ‘लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप’ काव्यांश में लक्ष्मण के प्रति राम के प्रेम के कौन-कौन से पक्ष अभिव्यवत हुए हैं? (3)
उत्तर :
‘लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप’ कविता में लक्ष्मण के प्रति भ्रीराम के प्रेम की हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति हुई है। यहाँ भीराम का मानवीय रूप दृष्टिगोचर होता है। वे साधारण मानव की तरह अधीर होते हैं तथा कहते हैं कि उन्हें यदि ज्ञात होता कि वन में भाई का विछोह होगा, तो वे पिता को दिए गए वचन का भी पालन नहीं करते। वे कहते हैं कि संसार में पुत्र, स्त्री आदि तो एकाधिक बार मिल जाते हैं, परंतु सहोदर भाई पुनः नहीं मिलता। वे कहते हैं कि लक्ष्मण के बिना वे कौन-सा मुंह लेकर अयोध्या जाएँगे? इन पंक्तियों में श्रीराम की आंतरिक व्यथा का मर्मस्पर्शी चित्रण हुआ है।

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प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) ‘उषा’ कविता के आधार पर बताइए कि सूर्योदय के साथ कौन-सा जादू टूट जाता है?
उत्तर :
कवि उषा के जादू को चित्रित करते हुए स्पष्ट करता है कि सुबह नीला आसमान अत्यंत सुंदर दिखाई पड़ता है। वह नीले जल के समान प्रतीत होता है, जिसमें सूर्य किसी गोरी सुंदरी की भाँति झिलमिलाता जान पड़ता है एवं सूर्योदय होने के पश्चात् यह जादू दूट जाता है।

(ख) सावन की घटाओं और रक्षाबंधन के पर्व का ‘रुबाइयाँ’ शीर्षक के आधार पर वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सावन मास की पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहार में अटूट संबंध है। प्रत्येक वर्ष इसी पावन दिवस पर यह पावन त्योहार मनाया जाता है। इस समय आकाश में सब तरफ़ घटाएँ छाई रहती हैं। उधर भाई-बहन के हृदय में भी एक-दूसरे के प्रति प्रेम की घटाएँ उमड़ती हैं। दोनों ही अर्थात् भाई और बहन प्रेम रस से सरोबार रहते हैं।

(ग) चिड़िया की उड़ान में गति आने और कवि के कदम शिथिल होने का व्या कारण हो सकता है? ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर :
चिड़ियों की उड़ान में गति आने का कारण यह है कि वे अपने बच्चों के लिए अत्यंत चितित रहती हैं। वे दिन ढलने से पहले जल्दी-से-जल्दी अपने बच्चों के पास पहुँचकर उन्हें भोजन, स्नेह और सुरक्षा देना चाहती हैं, जबकि कवि अपने अकेलेपन को प्रकट करता है। कवि से मिलने वाला कोई नहीं है, कोई भी उसकी प्रतीक्षा नहीं कर रहा है। अतः उसके पैरों में चंचलता के स्थान पर शिथिलता आ जाती है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) भक्तिन का अतीत परिवार और समाज की किन समस्याओं से जूझते हुए बीता है? पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर :
भक्तिन का अतीत परिवार और समाज की अनेक समस्याओं से संघर्ष करते हुए बीता था। उसके पति की युवादस्था में ही मृत्यु हो चुकी थी। भक्तिन का जेठ चाहता था कि वह किसी से विवाह कर ले, जिससे उसकी जायदाद पर वह अधिकार कर सके, परंतु वह नहीं मानी। उसकी जेठानी अपने नजदीकी रिश्तेदार से भक्तिन की बेटी का विवाह करा देना चाहती थी, जिससे जायदाद पर उसका अधिकार बना रहे। गाँव का जमींदार भी लगान वसूल करने में बहुत कठोर था।
उसने एक बार भक्तिन को लगान अदा न करने पर दिन भर धूप में खड़ा रखा। इस अपमान से आहत होकर भक्तिन को शहर आना पड़ा। उसने शहर आकर महादेवी (लेखिका) के पास सेविका की नौकरी की।

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(ख) किशोर लड़कों द्वारा घर-घर जाकर पानी माँगना लोगों के किस विश्वास को बल देता है? ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
गाँवों में जब सूखे की स्थिति हो जाती है, तो बालकों की टोली कीचड़ में लथपथ होकर बादलों से बरसने के लिए विनती करती है। लेखक इसे अंधविश्वास मानता है। लेखक को यह गलत इसलिए लगता है क्योंकि एक ओर सूखे के कारण पानी के अभाव में लोग मर रहे हैं, दूसरी ओर ऐसी स्थिति में घर में रखे हुए कीमती पानी को इंदर सेना पर फेंकना उस संकट को और बढ़ाता है, लेकिन लोगों का अंधविश्वास हैं कि इंदर सेना में उपस्थित लड़कों की पुकार सुनकर इंद्र देवता प्रसन्न होकर धरती की प्यास बुझाकर सभी प्राणियों को नया जीवन प्रदान करेंगे।

(ग) गाँववालों ने अपने राज-पहलवान की किस प्रकार सहायता की? क्या गाँव वाले अपने प्रयास में सफल हुए? ‘पहलवान की ढोलक’ i पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर :
गाँववालों को जब पता चला कि लुट्टन सिंह को राज-पहलवान की पदवी से हटा दिया गया है, तब उन्होंने लुट्टन सिंह और उसके दोनों लड़कों के लिए एक झोंपड़ी बना दी तथा उनके खाने-पीने का प्रबंध करने का दायित्व उठा लिया। पहलवान भी गाँव के नौजवान बच्चों को अपने पुत्रों के साथ कुश्ती के दाँव पेंच सिखाने लगा, परंतु बेचारे गरीब किसान क्या खाकर कुश्ती सीखते। धीरे-धीरे उसका स्कूल खाली हो गया और अब केवल उसके दोनों पुत्र ही स्कूल में बच गए। अब जो दिनभर की मज़दूरी से वे कमाकर लाते, उसे ही तीनों मिलकर खाते। इस प्रकार, गाँववाले इस प्रयास में सफल नहीं हुए।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) जाति-प्रथा बेरोज़गारी का एक प्रमुख कारण कैसे है? ‘जाति-प्रथा और श्रम विभाजन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जाति-प्रथा किसी भी व्यक्ति को उस व्यवसाय को चुनने की अनुमति नहीं देती, जो उसका पैतृक पेशा नहीं है, भले ही वह उसमें पारंगत हो। अतः जाति के आधार पर श्रम विभाजन की यह कुनीति व्यक्ति को अपनी क्षमता का सदुपयोग नहीं करने देती। पेशा परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति-प्रथा भारत में बेरोज़गारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।

(ख) ‘शिरीष के फूल’ पाठ के माध्यम से लेखक हमें जीवन में संघर्ष करते हुए भी प्रसन्न रहने की शिक्षा देता है, कैसे?
उत्तर :
‘शिरीष के फूल’ पाठ के माध्यम से लेखक हमें यह संदेश देना चाहता है कि जिस प्रकार शिरीष का फूल लू, गर्मी, आँधी और शुष्क मौसम में भी खिला हुआ रहता है तथा चारों ओर अपना सौंदर्य बिखेरता रहता है, ठीक उसी प्रकार हमें भी जीवन में आई विपत्तियों का सामना करते हुए सदैव प्रसन्न रहना चाहिए। हमारे अंदर जिजीविषा इतनी प्रबल होनी चाहिए कि जब हमें बाहरी वातावरण से पोषण न मिले, तो हमारे अंदर का आत्मबल हमारा पोषण कर सके, जिससे हम विकट परिरिथितिं में भी अपने जीवन को साँदर्यपूर्ण बनाने में सक्षम रह सकें।

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(ग) यदि हमारा मन लक्ष्य से भरा होगा, तो बाज़ार पर क्या प्रभाव पड़ेगा? ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
यदि हमारा मन लक्ष्य से भरा होगा, तो बाज़ार हमारे लिए सुखदायी सिद्ध होगा और बाज़ार आने का हमारा प्रयोजन भी सफल हो जाएगा। तब बाजार का भयानक रूप हमें घाव नहीं दे पाएगा। अतः हमें बाजार जाने से पहले ही मन में यह दृढ़-निश्चय कर लेना चाहिए कि हमें क्या खरीदना है। इस प्रकार हम अपनी आवश्यकता के अनुरूप ही वस्तु की खरीदारी करेंगे एवं बाजार के जादू में नहीं फैसेंगे।

पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग 2

प्रश्न 14.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 2 प्रश्नों में से किसी 1 प्रश्न का लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (4 × 1 = 4)
मुअनजो-दडो की नगर योजना आज की सेक्टर-मार्का कॉलोनियों के नीरस नियोजन की अपेक्षा ज्रादा रचनात्मक है-टिप्पणी कीजिए। (4)
अथवा
यशोधर बाबू एक मिलनसार व्यक्ति हैं। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मुअनजो-दड़ो की सड़कों और गलियों का विस्तार खंडहरों को देखकर किया जा सकता है। यहाँ हर सड़क सीधी है या फिर आड़ी है, जिसे वास्तुकार ‘ त्रिड प्लान’ कहते है। चबूतरे के पीछे ‘गढ़’ उच्च वर्ग की बस्ती, महाकुंड, स्नानागार, ढकी नालियों, अन्न का कोठार, सभा भवन, घरों की बनावट, भव्य राजप्रासाद, समाधियाँ आदि संरचनाएँ ऐसे सुव्यवस्थित हैं कि कहा जा सकता है कि शहर नियोजन से लेकर सामाजिक संबंधों तक में इसकी कोई तुलना नहीं है।
हम कह सकते हैं कि वर्तमान की सेक्टर-मार्का कॉलोनियों के नियोजन इनके सामने बिलकुल फीके हैं, जिसकी कॉलोनियों में आड़ा-सीथा ‘नियोजन’ अधिक देखने को मिलता है। पहले की अपेक्षा आज के शहरों के नियोजन के नाम पर भी हमें अराजकता अधिक दिखाई पड़ती है। इसी कारण सेक्टर-मार्का कॉलोनियों का रहन-सहन नीरस बना रहता है। अतः मुअनजो-दड़ो की साक्षर सभ्यता एक सुसंस्कृत समाज का प्रमाणित उदाहरण है।
अथवा
यशोधर बाबू का स्वभाव एक मिलनसार व्यक्ति का है। अपने इसी स्वभाव के कारण वे दिनभर काम में लगे रहने के उपरांत भी शाम को जाते समय हैंसी-मजाक किया करते थे। गाँव से अकेले दिल्ली आने के पश्चात् किशनदा के घर पर कई लोगों के मिलकर रहने का गुण भी उनकी इसी विशेषता को रेखांकित करता है। अपने मिलनसार व्यक्तित्व के कारण ही वे खुशी या गम हर मौके पर रिश्तेदारों के यहाँ जाना ज़रूरी समझते हैं।
वें चाहते हैं कि बच्चे भी परिवार की महत्ता को समझें और इस परंपरा को बनाए रखें। वे अपनी बुआ को भी कुछ पैसे आर्थिक-सहायता के रूप में भेज देते हैं। इसके साथ ही, वे कई सामाजिक आयोजनों में भी दिलचस्पी लेते हैं; जैसे-घर में होली गवाना, सब कुमाउँनियों को जनेऊ बदलने के लिए अपने घर आमंत्रित करना, रामलीला की तालीम के लिए क्वार्टर का एक कमरा दे देना आदि। इन सब बातों से यह पता चलता है कि यशोधर बाबू न केवल पारिवारिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी वे बेहद मिलनसार व्यक्ति हैं।


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