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CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 11 with Solutions

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CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Set 11 with Solutions

समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश:

  • इस प्रश्न-पत्र में खंड ‘अ’ में वस्तुपरक तथा खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं।
  • खंड ‘अ’ में 40 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी 40 प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
  • खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों के उचित आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
  • दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
  • यथासभव दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।

खंड ‘अ’
(वस्तुपरक प्रश्न)

खंड ‘अ’ में अपठित बोध, अभिव्यक्ति और माध्यम, पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग- 2 व पूरक पाठ्य पुस्तक वितान भाग- 2 से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।

अपठित बोध –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 10 = 10)

भाषा का एक प्रमुख गुण है-सुजनशीलता। हिंदी में सृजनशीलता का अद्भुत गुण है, अद्भुत क्षमता है, जिससे वह निरतर प्रवाहमान है। हिंदी ही ऐसी भाषा है, जिसमें समायोजन की पर्याप्त और जादुई शक्ति है। अन्य भाषाओं और संस्कृतियों के शब्दों को हिंदी जिस अधिकार और सहजता से ग्रहण करती है, उससे हिंदी की संभावनाएँ प्रशस्त होती हैं। हिंदी के लचीलेपन ने अनेक भाषाओं के शब्दों को ही नहीं, उनके सांस्कृतिक तेवरों को भी अपने में समेट लिया है। यही कारण है कि हिंदी सामाजिक संस्कृति तथा विविध भाषा-भाषियों और धर्मावलंबियों की प्रमुख पहचान बन गई है। अरबी, फ़ारसी, तुर्की, अंग्रेज़ी आदि के शब्द हिंदी की शब्द-संपदा में ऐसे मिल गए हैं, जैसे वे जन्म से ही इसी भाषा परिवार के सदस्य हों। यह समाहार उसकी जीवंतता का प्रमाण है। आज हम परहेज़ी होकर, शुद्धतावाद की जड़ मानसिकता में क्रैद होकर नहीं रह सकते।

सूचना-क्रांति, तकनीकी-विकास और वैज्ञानिक आविष्कारों के दबाव ने हमें सबसे संवाद करने के अवसर दिए हैं। विश्व-ग्राम की संकल्पना से हिंदी को निरंतर चलना होगा। इसके लिए आवश्यक है-आधुनिक प्रयोजनों के अनुरूप विकास और भाषा एवं लिपि से संबंधित यांत्रिक साधनों का विकास। इंटरनेट से लेकर बाजार तक, राजकाज से लेकर शिक्षा और न्याय के मंदिरों तक हिंदी को उपयोगी और कार्यक्षम बनाने के लिए उसका सरल-सहज होना आवश्यक है और उसकी ध्वनि; लिपि, शब्द-वर्तनी, वाक्य-रचना आदि का मानकीकृत होना भी आवश्यक है। यदि सरकार की तत्परता के साथ हम जनता की दृढ़ इच्छाशक्ति, सजगता और सचेष्टता को जोड़ दें, तो वह दिन दूर नहीं, जब हिंदी अंतर्राष्ट्रीय सरहदों में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।

(क) हिदी की संभावनाएँ कैसे प्रशस्त होती गई हैं?
(i) अन्य भाषाओं के शब्दों को सहजता से ग्रहण करने से
(ii) अपने सांस्कृतिक स्वरूप से
(iii) अपनी तटस्थता से
(iv) अन्य भाषाओं को तुच्छ समझकर
उत्तर :
(i) अन्य भाषाओं के शब्दों को सहजता से प्रहण करने से

(ख) हिदी ने लचीलेपन के कारण क्या किया?
(i) केवल अन्य भाषा के शब्दों को ग्रहण किया
(ii) अन्य भाषाओं के शब्दों व सांस्कृतिक तेवरों को अपने में समेट लिया
(iii) अपनी सामाजिक पहचान को बनाए रखा
(iv) दूसरी भाषाओं को अधिक महत्त्व दिया
उत्तर :
(ii) अन्य भाषाओं के शब्दों व सांस्कृतिक तेवरों को अपने में समेट लिया

(ग) ‘संकल्पना’ शब्द का तात्पर्य है
(i) समता
(ii) सहजता
(iii) अवधारणा
(iv) संभावना
उत्तर :
(iii) अवधारणा

(घ) हिंदी भाषा के संदर्भ में शुद्धतावादी होने से क्या तात्पर्य है?
(i) गैर-हिंदी भाषाओं के शब्दों को श्रहण करना
(ii) हिंदी की बोलियों और उनके शब्दों को प्रधानता देकर हिंदी का विकास करना
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) केवल हिंदी को महत्त्व देना
उत्तर :
(i) गैर-हिंदी भाषाओं के शब्दों को ग्रहण करना

(ङ) आधुनिक प्रयोजनों के अनुरूप विकास तथा भाषा एवं लिपि से संबंधित यांत्रिक साधनों का विकास करने से क्या लाभ होगा?
(i) विश्व ग्राम की संकल्पना साकार हो जाएगी
(ii) हिंदी की उन्नति अवरुद्ध हो जाएगी
(iii) मनुष्य यंत्रवत प्राणी बनकर रह जाएगा
(iv) तकनीकी उन्नति होगी
उत्तर :
(i) विश्व ग्राम की सकल्पना साकार हो जाएगी

(च) हिंदी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं में भारत का प्रतिनिधित्व कब करेगी?
(i) जब सरकार की तत्परता होगी
(ii) जब जनता की इच्छाशक्ति होगी
(iii) जब सरकार की तत्परता के साथ जनता की दृढ इच्छाशक्ति को हिंदी से जोड देंगे
(iv) जब हिंदी को अधिक महत्व मिलने लगेगा
उत्तर :
(iii) जब सरकार की तत्परता के साथ जनता की दृद इच्छाशक्ति को हिंदी से जोड़ देंगे

(छ) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. हिंदी भाषा एवं लिपि से संबंधित साधनों का विकास आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
2. केवल सरकार की तत्परता व सजगता ही हिंदी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व प्रदान करवा सकती है।
3. सभी क्षेत्रों में हिंदी की उपयोगिता तथा महत्त्व स्थापित करने हेतु हिंदी भाषा का सरल व सहज होना आवश्यक है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1 और 2
(iv) 1 और 3
उत्तर :
(iv) 1 और 3

(ज) हिंदी ने अन्य भाषाओं के शब्दों को स्वयं में समाहित करते हुए अपना स्वरूप निर्मित करके क्या किया?
(i) भारत की भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन किया
(ii) भारत की सामाजिक संस्कृति की पहचान बन गई
(iii) हिंदी के स्वरूपों को आच्छादित किया
(iv) हिंदी के विकास को रोक दिया
उत्तर :
(ii) भारत की सामाजिक संस्कृति की पहचान बन गई

(झ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) हिंदी भाषा विविध भाषा बोलने वाले व्यक्तियों तथा विविध धर्मावलंबियों की प्रमुख पहचान बन गई है।
कारण (R) हिदी में भाषा में सृजनशीलता तथा समायोजनशीलता का अद्भुत गुण है। कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्यख्या करता है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
उत्तर :
(i) क्थन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

(अ) प्रस्तुत गद्यांश किस विषय-वस्तु पर आधारित है?
(i) हिंदी भाषा पर
(ii) हिंदी भाषा और अन्य भाषा पर
(iii) हिंदी भाषा और तकनीकी युग पर
(iv) हिंदी के विकास पर
उत्तर :
(iii) हिंदी भाषा और तकनीकी युग पर

प्रश्न 2.
दिए गए पद्यांश पर आधारित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

आज जीत की रात
पहरुए, सावधान रहना।
खुले देश के द्वारा
अचल दीपक समान रहना।
प्रथम चरण है नए स्वर्ग का
है मंजिल का छोर
इस जनमंथन से उठ आई
पहली रत्न हिलोर,
अभी शेष है पूरी होना
जीवन मुक्ता डोर
क्योकि नहीं मिट पाई दु:ख की
विगत साँवली कोर।
ले युग की पतवार
बने अंबुधि महान रहना
पहरुए, सावधान रहना।
विषम भृंखलाएँ टूटी है
खुली समस्त दिशाएँ
आज प्रभंजन बनकर चलतीं
युग बंदिनी हवाएँ,
प्रश्न चिह्न बन खड़ी हो गई
ये सिमटी सीमाएँ
आज पुराने सिंहासन की
टूट रहीं प्रतिमाएँ।
उठता है तूफ़ान, इंदु तम
दीप्तिमान रहना।
पहरुए, सावधान रहना!
ऊँची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से मृत है समाज
कमजोर हमारा घर है
किंतु, आ रही नई जिंदगी
यह विश्वास अमर है।
जनगंगा में ज्वार
लहर तुम प्रवाहमान रहना
पहरुए, सावधान रहना।

(क) प्रस्तुत पद्यांश किससे संबंधित है?
(i) देश की स्वाधीनता से
(ii) देशवासियों तथा सैनिकों से
(iii) स्वाधीनता के पश्चात् आने वाली कठिनाइयों से
(iv) देश के शत्रु व उसकी छाया से
उत्तर :
(iii) स्वाधीनता के पश्चात् आने वाली कठिनाइयों से

(ख) पद्यांश के अनुसार, अभी क्या पूरा होना शेष रह गया है?
(i) जीवन मुक्ता डोर
(ii) अंतिम अभिलाषा
(iii) स्वतंत्रता प्राप्त होना
(iv) सत्ता प्राप्त होना
उत्तर :
(i) जीवन मुक्ता डोर

(ग) निम्नांराखित कथनों पर विचार कीजिए
1. स्वतंत्रता की प्रथम रात्रि में देश के रक्षकों को निश्चित नहीं रहना चाहिए।
2. स्वतंत्रता के बाद का रास्ता कठिन है।
3. विदेशी शोषण के पश्चात् भी हम कमजोर नहीं हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही कथन है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1 और 2
(iv) 1 और 3
उत्तर :
(iii) 1 और 2

(घ) कवि को किसकी छायाओं का डर बना हुआ है?
(i) अंधकार की छायाओं का
(ii) शत्रुओं की छायाओं का
(iii) कुठित समाज की कुठठग्रस्त कुरीतियों की छायाओं का
(iv) स्वार्थी व्यक्ति के स्वार्थ की छायाओं का
उत्तर :
(ii) शत्रुओं की छायाओं का

(ङ) कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए

कॉलम – 1 कॉलम – 2
A. स्वतंत्रता प्राप्ति के कारण 1. रत्न से भरी जल तरंग
B. प्रगति के तूफान को 2. चन्द्रमा की तरह दीप्तिमान होकर आगे बढ़ाओ
C. जनता के आंदोलन से यह सुनहरा अवसर 3. देश के बंद द्रवाजे खुल गए

कूट
A B C
(i) 3 2 1
(ii) 1 3 2
(iii) 2 1 3
(iv) 1 2 3
उत्तर :
(i) 3 2 1

अभिव्यक्ति और माध्यम – 

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)
(क) जनमानस द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे प्राचीन माध्यम है
(i) मुद्रित माध्यम
(ii) रेडियो
(iii) टेलीविजन
(iv) इंटरनेट
उत्तर :
(i) मुद्रित माध्यम

(ख) निम्न में से कौन-सा गुण संवाददाताओं में पाया जाना अपेक्षित होता है?
(i) पैनी दृष्टि
(ii) निर्भीकता
(iii) सत्यनिष्ठा
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iv) ये सभी

(ग) किसी भी समाचार-पत्र के लेखन तथा संपादन से जुड़ा व्यक्ति क्या कहलाता है?
(i) संपादक
(ii) पत्रकार
(iii) उपसंपादक
(iv) मुख्य संवाददाता
उत्तर :
(ii) पत्रकार

(घ) सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए

सूची I सूची II
A. पाठक के विचार व समस्याएँ 1. साक्षात्कार
B. विशेष क्षेत्र से जुड़ी घटनाएँ व समस्याएँ 2. सहायक संपादक
C. पत्रकारीय लेखन के लिए कच्चा माल 3. संपादकीय पृष्ठ
D. संपादकीय लेखन 4. विशेषीकृत रिपोर्टिंग

उत्तर :
(iii) 3 4 1 2

(ङ) पाठकों की व्यापक रचचियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए मनोरंजन करने हेतु किया जाता है
(i) सामान्य लेखन
(ii) विशेष लेखन
(iii) समाचार लेखन
(iv) कहानी लेखन
उत्तर :
(ii) विशेष लेखन

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

तब प्रताप उर राखि प्रभु जैहऊँ नाथ तुरंत।
अस कहि आयसु पाई पद बंदि चलेउ हनुमंत।।
भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।
मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवन कुमार।।

(क) ‘मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवन कुमार’ पंक्ति में किसके प्रति भक्ति-भावना का भाव है?
(i) भरत के प्रति
(ii) राम के प्रति
(iii) लक्ष्मण के प्रति
(iv) शत्रुज्न के प्रति
उत्तर :
(i) भरत के प्रति

(ख) उपरोक्त प्यांश के अनुसार हनुमान जी भरत के किन गुणों से प्रभावित हुए?
(i) भरत की निक्क्रियता
(ii) भरत की राज्य के प्रति सेवा भावना
(iii) भरत के बाहु बल व शील गुण
(iv) ये सभी
उत्तर :
(iii) भरत के बाहु बल व शील गुण

(ग) हनुमान जी क्या हुदय में रखकर तुरंत स्वामी के पास जाने की बात कह रहे हैं?
(i) राम का यश
(ii) भरत का यश
(iii) स्वयं की वीरता
(iv) राम के प्रति भक्ति
उत्तर :
(ii) भरत का यश

(घ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) हनुमान जी आज्ञा पाकर भरत के चरणों की वंदना करके चले गए।
कारण (R) हनुमान जी को अत्यधिक थकावट लग रही थी। कूट
(i) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
उत्तर :
(i) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।

(ङ) कवि द्वारा भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार कहना प्रतिपादित करता है कि हनुमान
(i) भरत के गुणों व राम के प्रति उनकी अपार भक्ति की प्रशंसा कर रहे है
(ii) भरत के चरणों की वंदना कर रहे हैं
(iii) भरत के प्रातृ प्रेम की प्रशंसा कर रहे हैं
(iv) भरत की कर्त्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा कर रहे हैं
उत्तर :
(i) भरत के गुणों व राम के प्रति उनकी अपार भक्ति की प्रशंसा कर रहे है

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)

रात्रि की विभीषिका को केवल पहलवान की ढोलक ही ललकारकर चुनौती देती रहती थी। पहलवान संध्या से सुबह तक, चाहे जिस ख्याल से ढोलक बजाता हो, किंतु गाँव के अर्द्धमृत, औषधि-उपचार पथ्य-विहीन प्राणियों में यह संजीवनी शक्ति ही भरती थी। बूढ़, बच्चे, जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था। स्पंदन-शक्ति-शून्य, स्नायुओं में भी बिजली दौड़ जाती थी। अवश्य ही ढोलक की आवाज में न तो बुखार हटाने का कोई गुण था और न महामारी की सर्वनाश शक्ति को रोकने की शक्ति ही, पर इसमें संदेह नहीं कि मरते हुए प्राणियों को आँख मूँदते समय कोई तकलीफ नहीं होती थी, मृत्यु से वे डरते नहीं थे।

(क) गाँव के बच्चे, बूढ़े, जवानों को पहलवान की ढोलक की आवाज़ सुनते ही क्या याद आ जाता था?
(i) दंगल का दृश्य
(ii) मृत्यु का भय
(iii) राजा की दयालुता
(iv) रात्रि का अंधकार
उत्तर :
(i) दंगल का दृश्य

(ख) ढोलक की आवाज़ को सुनकर बिना किसी तकलीफ के अपने प्राण कौन त्याग देता था?
(i) लुद्टन सिंह
(ii) चाँद सिंह
(iii) मरता हुआ व्यक्ति
(iv) स्वस्ध व्यक्ति
उत्तर :
(iii) मरता हुआ व्यक्ति

(ग) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) पहलवान की ढोलक की आवाज सुनकर महामारी से तइपते हुए लोगों को मृत्यु का भय नहीं लगता था।
कारण (R) पहलवान की ढोलक में संजीवनी शक्ति थी। कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है
(ii) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है
उत्तर :
(ii) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।

(घ) कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए

कॉलम 1 कॉलम 2
A. सब डर कर अपने घरों में छिप जाते 1. पहलवान की ढोलक
B. तेज आवाज में चुनौती देती 2. रात्रि का भय
C. बिजली की सी तेजी दौड़ने लगती 3. चेतना शून्य शरीर की नसों

कूट
A B C
(i) 2 3 1
(ii) 3 2 1
(iii) 2 1 3
(iv) 1 2 3
उत्तर :
(iii) 2 1 3

(ङ) गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. पहलवान की ढोलक की आवाज सुनकर गाँव के पीड़ित लोगों के सामने दंगल का दृश्य आ जाता था।
2. पहलवान की ढोलक रात्रि की भयावहता को कम कर देती थी।
3. पहलवान की ढोलक की आवाज पीड़ितों का उपचार करती थी। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 2
(iii) 1 और 2
(iv) 1 और 3
उत्तर :
(iii) 1 और 2

पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग 2 –

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए। (1 × 10 = 10)

(क) ‘यशोधर बाबू’ द्वारा प्रयुक्त ‘समहाउ इंप्रॉपर’ वाक्यांश से उनके व्यक्तित्व के संबंध में क्या पता चलता है?
(i) वे आधुनिक विचारों के पक्ष में हैं
(ii) वे आधुनिक विचारों के पक्ष में नहीं हैं
(iii) वे रूढ़िवादी विचारों का निषेध करते है
(iv) वे परंपरा पालन को अपना कर्त्तव्य नहीं मानते हैं
उत्तर :
(ii) वे आयुनिक विचारों के पक्ष में नहीं हैं

(ख) ‘सिल्वर वैडिग’ कहानी में यशोधर बाबू विचारों के मतभेद का दंश भोगने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि
(i) पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी की तरह आधुनिक बनना चाहती है
(ii) नई पीढ़ी का पुरानी पीढ़ी से अटूट लगाव है
(iii) पीढ़ी का अंतराल बड़ी ही तीव्रता से बढ़ रहा है
(iv) दोनों पीढ़ियाँ एक-दूसरे को समझने लगी हैं
उत्तर :
(iii) पीढ़ी का अंतराल बड़ी ही तीव्रता से बढ़ रहा है

(ग) यशोधर बादू के परिवार के संदर्भ में सटीक विकल्प का चयन कीजिए।
(i) उनका परिवार पुराने विचारों का समर्थक था
(ii) उनका परिवार रूढ़िवादी विचारों का समर्थक था
(iii) उनका परिवार आधुनिक विचारों का समर्थक था
(iv) उनका परिवार भारतीय एवं पाश्चात्य दोनों विचारों का समर्थक था
उत्तर :
(iii) उनका परिवार आधुनिक विचारों का समर्थक था

(घ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) लेखक को पाँचवीं कक्षा में दोबारा बैठना पड़ा।
कारण (R) वसंत पाटिल नाम का होशियार लइका लेखक का मित्र था।
कूट
(i) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है
(ii) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याध्या करता है।
उत्तर :
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।

(ङ) आनंदा पर सौंदलगेकर जी का क्या प्रभाव पड़ा? ‘जूझ’ कहानी के आधार पर सटीक विकल्प चुनिए।
(i) वह गणित में रुचि लेने लगा
(ii) आनंदा की कविता में रुचि बढ़ गई
(iii) वह खेतों के काम में रुचि लेने लगा
(iv) वह अपने माता-पिता का आदर करने लगा
उत्तर :
(ii) आनंदा की कविता में रुचि बढ़ गई

(च) ‘जूझ’ कहानी में आनंदा की माँ के कथन “अब तू ही बता, मैं क्या करूँ” में किस भाव का चित्रण हुआ है?
(i) आनंदा को पढ़ाई करने से रोकने का
(ii) अपनी असमर्थता का बोध कराने का
(iii) अपनी अज्ञानता से परिचित कराने का
(iv) आनंदा को स्वयं उपाय खोजने देने का
उत्तर :
(ii) अपनी असमर्थता का बोध कराने का

(छ) ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में मुअनजो-दड़ो के बारे में क्या धारणा थी?
(i) अपने दौर में यह घाटी की सभ्यता का केंद्र रहा होगा
(ii) अपने दौर में यह सबसे कम प्रसिद्ध क्षेत्र रहा होगा
(iii) अपने दौर में यह सीमित जनसंख्या वाला क्षेत्र रहा होगा
(iv) अपने दौर में यह केवल मुर्दों का टीला रहा होगा
उत्तर :
(i) अपने दौर में यह घाटी की सभ्यता का केंद्र रहा होगा

(ज) ‘पूरब की बस्ती रईसों की बस्ती है’ ‘अतीत के दबे पाँव’ पाठ की पंकित के संदर्भ में बताइए कि आज के युग में पूरब की बस्ती किसे माना जाता है?
(i) आज के युग में पूरब की बस्ती गरीबों की बस्ती मानी जाती है
(ii) आज के युग में पूरब की बस्ती उच्च शासनाधिकारी की बस्ती मानी जाती है
(iii) आज के युग में पूरब की बस्ती समृद्ध बस्ती मानी जाती है
(iv) आज के युग में पूरब की बस्ती पश्चिमी देशों को माना जाता है
उत्तर :
(i) आज के युग में पूरब की बस्ती गरीबों की बस्ती मानी जाती है

(झ) ‘जूझ’ कहानी के संदर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(i) ‘जूझ’ कहानी आनंदा के जीवन के संघर्ष की कहानी है
(ii) आनंदा का मन शहर जाने के लिए तड़पता था
(iii) आनंदा के पिता को उसका पाठशाला जाना अच्छा नहीं लगता था
(iv) आनंदा ने अपनी माँ को अपनी पढ़ाई के बारे में दत्ता जी राव की सहायता लेने को कहा
उत्तर :
(ii) आनंदा का मन शहर जाने के लिए तड़पता था

(अ) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मुअनजो-दड़ो तथा हड़प्पा शहर पाकिस्तान में स्थित हैं।
2. मुअनजो-दड़ो सिंधु घाटी की सभ्यता का केंद्र नहीं था। यह एक साधारण शहर था।
3. मुअनजो-दड्रो पूर्णतः नियोजित शहर था।
4. भारत की सिंधु घाटी सभ्यता सबसे प्राचीन सभ्यता है।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(i) केवल 1
(ii) केवल 3
(iii) 1, 2 और 3
(iv) 1, 3 और 4
उत्तर :
(iv) 1, 3 और 4

खंड ‘ब’
(वर्णनात्मक प्रश्न)

खंड ‘ब’ में जनसंचार और सृजनात्मक लेखन, पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग-2 व पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग-2 से संबंधित वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।

जनसंचार और सृजनात्मक लेखन –

प्रश्न 7.
निम्नलिखित दिए गए 3 विषयों में से किसी 1 विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (6 × 1 = 6)

(क) काश! में प्रधानमंत्री होता
उत्तर :
भारत में प्रधानमंत्री का पद अति महत्त्वपूर्ण है। प्रधानमत्री के पद पर सुशोभित होना निश्वय ही गौरव का विषय है। यह पद जितना महत्त्वपूर्ण है, उतना ही अधिक ज़िम्मेदारीपूर्ण भी है। मेरा मन भी इस पद के लिए लालायित रहता है।
यदि में भारत का प्रधानमंत्री होता, तो भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मेरी प्राथमिकताएँ निम्न होतीं
– शिक्षा का प्रसार सर्वस्मयम मैं शिक्षा के उचित प्रसार पर ध्यान देता तथा इस बात का भी ध्यान रखता कि शिक्षा में विज्ञान, म्रौद्योगिकी. व्यावसायिक्ता आदि के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का भी समावेश हो, जिससे सही अर्थों में शिक्षित नागरिक तैयार हो सकें।
– आतंकवाद की समाप्ति आतंकवाद से जहाँ एक ओर नागरिकों में असुरक्षा की भावना जन्म लेती है, वहीं दूसरी ओर इसका देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आतंकवाद को समूल नष्ट करने हेतु में जल, थल और वायु तीनों सेनाओं की सामरिक शक्ति में बढ़ोतरी करता, जिससे कोई भी हमारे देश की ओर ऑँख उठाकर देखने की चेष्टा न कर सके।
– भ्रष्टाचार उन्मूलन भ्रष्टाचार से राष्ट्र को आर्थिक क्षति के साथ-साथ, नैतिक तथा चारित्रिक आघात भी सहना पड़ता है, इसलिए में अपने चरित्र को भी शुद्ध रखता तथा दूसरों के चरित्र को भी शुद्ध करने के लिए कठोर नियमों को लागू करता।
– आर्थिक चुनौतियों का समाधान वर्तमान समय में आर्थिक विषमता, महँगाई, गरीबी, बेरोज़गारी, औद्योगीकरण की मंद प्रक्रिया आदि भारत के आर्थिक विकास की कुछ मुख्य चुनौतियाँ हैं। प्रधानमंत्री के रूष में में इन चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश करता।
अत: में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में भारत को खुशहाल देश बनाने का प्रयत्न करता।

(ख) वर्तमान युग में रिश्ते-नातों की कम होती अहमियत
उत्तर :
मानव जीवन में रिश्ते-नातों का बहुत महत्व है। इसके अभाव में तो जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्राचीनकाल से संयुक्त परिवारों का चलन रहा है, जिससे इंसान में अपनापन, प्रेम, त्याग, भ्रातृत्व, सहयोग की भावना विध्यमान रहती थी। इन रिश्तों के द्वारा ही इसान सामाजिक जीवन जी पाता है तथा यही मानव जीवन में महत्वपूर्ण भी हैं।
समय के साथ संयुक्त परिवार की परंपरा समाप्त होती जा रही है। आज के युवाओं में यह मानसिकता पनपती जा रही है कि यदि आप अलग रहोगे, तो अपनी जिंदगी अपने ढंग से जी सकते हो। वे अपनी ही दुनिया में मस्त रहना चाहते हैं, किसी प्रकार की रोक-टोक उन्हें पसंद नहीं होती। आज के समय में स्वार्थ और धन-लालसा इतनी बढ़ गई है कि इनके वशीभूत होकर व्यक्ति रिश्ते-नातों का गला घोंटने से भी पीछे नहीं हटता। परस्पर बढ़ती ईष्प्या की भावना के कारण भी रिश्ते-नाते समाप्त होते जा रहे हैं।
रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए व्यक्ति को कुछ समय रिश्तेदारों के लिए निकालना ही होगा। एक कहावत भी है कि “रिक्ते-नातों के विकास के लिए मेल-जोल, अपनापन आवश्यक है। बिना पानी के तो पौथे तक सूख जाते हैं। ” इसान को अपने अहंकार को त्यागकर, प्रेम तथा मेल-जोल की भावना का विकास करना होगा, तभी ये रिश्ते-नाते बच पाएँगे।
अतः अपने मानसिक सुख के लिए व्यक्ति को रिश्तों को निभाना अत्यंत आवश्यक है। रिश्ते-नातों को निभाते हुए हम भारतीयों को संपूर्ण विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबक्म्’ का संदेश देना चाहिए।

(ग) लइका-लइकी एकसमान
उत्तर :
लड़का व लड़की एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। नर-नारी का जीवन एक-दूसरे के बिना अधूरा है। सृष्टि के अस्तित्व के लिए दोनों की महत्ता अनिवार्य है। नर व नारी के अपने-अपने कार्यक्षेत्र, कर्तव्य व दायित्व हैं, जहाँ पुरुष धन अर्जन करता है, वहीं नारी घर-परिवार के दायित्व को सँमालती है, यहाँ तक कि आज नारी भी पुरुषों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपना योगदान दे रही है, परंतु फिर भी लड़का व लड़की को समान नहीं समझा जाता, नारियों पर अत्याचार होता है। ग्रामीण स्त्रियाँ इस शोषण का अधिक शिकार होती हैं। आज मी लड़के की चाहत में भ्रूण-हत्या जैसी समस्याएँ हमारे समाज में व्याप्त हैं।
गर व नारी दोनों समाज के आधारभूत स्तंभ हैं। समाज के विकास, उन्नति, प्रगति में दोनों की समान भूमिका है। लड़का ब लड़की में भेदभाव करने का कारण अनेक सामाजिक रूढ़ियों हैं; जैसे- यह मान लेना कि पुत्र ही वंश को चलाता है, दहेज-प्रथा आदि। ये रूढ़ियाँ ही लड़की के आकाशरूपी जीवन में धूमकेतु बनकर छा जाती हैं। यद्यपि शिक्षा के द्वारा नारी की स्थिति में सुधार हुआ है। लोगों में जागरूकता आई है तथा लोगों की मानसिकता में परिवर्तन हुआ है।
प्राचीनकाल से ही इस देश की धरती पर सीता, गार्गी, भारती जैसी नारियों को पूजनीय माना जाता रहा है। आज के युग में नारी भी अंतरिक्ष तक पहुँच गई है, इसलिए नारी की उपेक्षा न कर उसको समान महत्त्व दिया जाना चाहिए। संविधान में लड़का-लड़की को समान माना गया है, दोनों के समान अधिकार हैं, इसलिए समाज के विकास के लिए जीवनरूपी दोनों पहियों (लड़का व लड़की) को समान महत्व देकर विश्व को विकास के पथ पर ले जाना चाहिए। समानता एक अवधारणा नहीं है, यह एक आवश्यकता है।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 40 शब्दों में निर्देशानुसार उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) “नाटक का प्रथम अंग समय का बंधन है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
अथवा
चरमोत्कर्ष किसे कहते हैं? कहानी में चरमोत्कर्ष का चित्रण किस प्रकार करना चाहिए और क्यों?
उत्तर :
नाटक का प्रथम अंग समय का बंघन है अर्थात् नाटक की समय-सीमा निर्धारित होती है। इसे सीमा से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।
नाटक को निर्धारित समय-सीमा के अंदर ही पूरा करना होता है। समय का यह बंधन नाटक की रचना पर अपना पूरा प्रभाव डालता है। नाटक का विषय भूतकाल हो या भविष्यकाल इन दोनों ही स्थितियों में यह वर्तमानकाल में संयोजित होता है। यही कारण है कि नाटक के मंच निर्देश सदैव वर्तमानकाल में लिखे जाते हैं। चाहे काल कोई भी हो उसे एक समय में, एक स्थान विशेष पर वर्तमानकाल में ही धटित होना होता है। समय को लेकर एक और महत्तपूर्ण तथ्य यह है कि साहित्य की अन्य विधाओं; जैसे-उपन्यास, कहानी, कविता को हम वाचन या श्रवण करते हुए बीच में रोक भी सकते हैं और कुछ समय बाद पुनः वहीं से पढ़ और सुन सकते हैं, जबकि नाटक के साथ ऐसा कर पाना संभव नहीं है।
अथवा
जब कहानी पद्ते-पढ़ते पाठक कौतूहल (जिज्ञासा) की पराकाष्ठा पर पहुँच जाए, तब उसे कहानी का चरमोत्कर्ष या चरम स्थिति कहते हैं। किसी भी साहित्यिक रचना का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व चरमोत्कर्ष है। किसी भी स्थिति में कहानी के पाठक के लिए चरमोत्कर्ष सदैव एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उसी को जानने की लालसा में वह प्रारंभ से अंत तक जुड़ा रहता है।
कथानक के अनुसार, कहानी चरमोत्कर्ष (क्लाइमेक्स) की ओर बढ़ती है। कहानी का धरमोत्कर्ष पाठक को स्वयं सोचने और लेखकीय पक्षधर की ओर आने के लिए प्रेरित करने वाला होना धाहिए। पाठक को यह भी लगना चाहिए कि उसे स्वतंत्रता दी गई है और उसने जो निष्कर्ष निकाले हैं, वह उसके अपने हैं।
कहानीकार को कहानी के चरमोत्कर्ष का चित्रण अत्यंत सावधानीपूर्वक करना चाहिए, क्योंकि भावों या पात्रों के अतिरिक्त अभिव्यक्ति चरम उत्कर्व के प्रभाव को कम कर सकती है।

(ख) मौलिक प्रयास एवं अभ्यास से ही व्यक्ति के अंदर लिखित अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है। इस कथन के संदर्भ में अप्रत्याशित लेखन के चरणों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
रेडियो के सन्दर्भ में श्रव्य माध्यमों की दो सीमाएँ बताइए? किसी एक सीमा से पार पाने का उपाय भी बताइए।
उत्तर :

मौलिक प्रयास एवं अभ्यास से ही व्यक्ति के अंदर अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है और उसमें रचनात्मकता आती है। वह किसी भी नए तथा अप्रत्याशित विषय पर लिखने में तथा अपने विचार अभिव्यक्त करने में समर्थ होता है। इसके लिए सर्वप्रथम हमें अप्रत्याशित विषय पर लिखने से पूर्व दो-तीन मिनट तक सोच-विचार करना चाहिए। मन में यह निश्चित करना चाहिए कि विषय से संबंधित किन बिंदुओं पर हमें विस्तार देना चाहिए तथा किन बिंदुओं पर संक्षेप में लिखना चाहिए। जब हमारे मस्तिष्क में विषय से संबंधित तथ्यों की रूपरेखा होगी, तब हम अपने विचारों को सुसंबद्ध व सुसंगत रूप से अभिव्यक्त कर पाएँगे।
अथवा
रेडियो संचार का एक तरफा माध्यम है, इसलिए संदेशों के सम्बन्ध में कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं की जा सकती है, चूँकि भोता का ध्यान केवल ध्वनि पर होता है, इसलिए रेडियों के माध्यम से संचारित सन्देश केवल उन लोगों तक पहुँच सकते है, जो ध्यानपूर्वक और बुद्धिमानी से सुनते हैं। रेडियो से सन्देश प्राप्त करने के लिए बहुत चौकस रहना पड़ता है अन्यथा सन्देश का कुछ एक हिस्सा ही याद रहता है।

रेडियो में टेलीविजन द्वारा प्रदान की गई चित्रात्मक गुणवत्ता का अभाव है। प्रतिक्रिया तंत्र की कमी को निम्नलिखित तरीके से दूर किया जा सकता है-नेटवर्किंग में रेडियो के उपयोग को मजबूत करने के लिए संस्थागत और सामुदायिक स्तर पर श्रोता मंच स्थापित किए जा सकते हैं, जो लोगों की विभिन्न कार्यक्रमों पर प्रतिक्रियाएं लेकर श्रोताओं पर अनुसंधान के लिए डाटा प्रदान कर सकते हैं और प्रोग्रामिंग को और अधिक सार्थक बना सकते हैं। प्रतिक्रिज्याओं का दिश्लेषण करने और क्षेत्र-आधारित विकास कार्यक्रमों के उत्पादन में सहायता करने के लिए विशेषज्ञों को रेडियो स्टेशनों से संबद्ध किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) ‘कोरोना वायरस महामारी’ विषय पर एक आलेख लिखिए।
उत्तर :
कोरोना वायरस को ‘कोयिड 19’ नाम से भी जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 11 मार्च, 2020 को कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया था। कोरोना वायरस बहुत सूक्षम, लेकिन प्रभावी वायरस है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर, 2019 में चीन के वुहान शहर में शुरू हुआ था। इसके पश्चात् यह वायरस सपूर्ण विश्व में फैल गया। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। कोरोना वायरस के गंभीर मामलों में निमोनिया, साँस लेने में ज्यादा परेशानी आदि बीमारियाँ आती हैं और यहाँ तक कि मरीज की मौत भी हो सकती है। यह भयावह कोरोना वायरस किली कोरोना संक्रमित व्यक्ति को छूने या उसके आस-पास रहने से फैलता है। यदि कोरोना संक्रमित व्यक्ति ने किसी चीज को छुआ और उसके बाद उसी चीज को किसी दूसरे व्यक्ति ने छू लिया, हो वह भी संक्रमित हो जाता है। कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए बहुत सावधानी अपनानी चाहिए। बार-बार अपने हाथ को साबुन से धोना चाहिए, खाँसते व छींकते समय टिशु पेपर का उपयोग करना चाहिए और प्रयोग के बाद उसे कूड़ेदान में फेंक्कर हाथ को साबुन से धो लेना चाहिए, इसके अतिरिक्त मास्क का प्रयोग भी करना चाहिए। कोरोना वायरस को महामारी घोषित करने के बाद पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों द्वारा इस पर शोध करके वैक्सीन बनाई गई। भारत द्वारा वैक्सीन का निर्माण किया गया। कोविशील्ड वैक्सीन, जिसका उत्पादन भारत में सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा किया जा रहा है तथा दूसरी कोवैक्सीन, जिसका उत्पादन भारत बायोटेक द्वारा किया जा रहा है। भारत में सभी युवावर्ग व बूढ़े लोगों को वैक्सीन की दो डोज लग चुकी हैं तथा बूस्टर डोज भी लगाई जा चुकी है। वर्तमान में भी इस बीमारी पर शोध जारी है, परंतु भारत में अब इसकी भयानकता कम हो गई है।

(ख) उल्टा पिरामिड शैली में समाचार लेखन की प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
समाधार लेखन की उल्टी पिरामिड्ड शैली के अंतर्गत लिखे गए समाचारों को सुविधा की दृष्टि से निम्न तीन भागों में विभाजित किया जाता है
(i) इंट्रो या मुखड़ा समाचार अथवा खबरें एक विशेष शैली में लिखी जाती हैं, जिसके अंतर्गत सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्यों, सूचनाओं एवं जानकारी को सबसे पहले अर्थात् प्रारंभ के अनुच्छेद में लिखा जाता है। इस प्रकार, प्रथम पैराग्राफ़ में दी जा रही जानकारी को इंट्रो या मुखड़ा कहा जाता है। इंट्रो में समाचार के सबंध में क्या, कहाँ, कब और कौन चार प्रश्नों के उत्तर देना आवश्यक होता है।
(ii) बॉड़ी या कलेवर समाचार के बाद दूसरे पैरात्राफ़ में कम महत्त्वपूर्ण जानकारी, सूचना या तथ्यों को बताया जाता है। इसे बॉडी या समाचार का कलेवर (Body of the Story) कहा जाता है। समाधार के इस भाग में छ: ककारों में से दो ककारों-क्यों औँ कैसे का जवाब देने का प्रयास किया जाता है।
(iii) समापन समाचार का समापन करते समय न केवल यह ध्यान रखना चाहिए कि उस समाचार के प्रमुख तथ्य आ गए हैं या नहीं, बल्कि समाचार के मुखड़े और समापन के बीच एक तारतम्यता भी होनी चाहिए। समाधार में तथ्यों तथा उसके विभिन्न पहलुओं को इस प्रकार पेश करना चाहिए कि उससे पाठक को किसी निर्णय या निष्कर्ष पर पहुँचने में सहायता मिले।

(ग) पत्रकारिता विशेषजता में आपका अनुभव ही महत्त्वपूर्ण है। पत्रकारीय विशेषजता कैसी होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पत्रकारीय विशेषश्कता से तात्पर्य यह है कि किसी भी विषय में व्यावसायिक अर्थात् प्रोफेशनल रूप से प्रशिक्षण प्राप्त न करने के बावजूद भी उस विषय या क्षेत्र के बारे में इतनी जानकारी व अनुभव एकत्र करना, जिससे उस विषय या क्षेत्र से संबंधित होने वाली घटनाओं या खबरों को आम जनता या पाठकों को बड़ी सहजता व सरलता से समझाया जा सके कहने का अर्थ यह है कि पत्रकारिता में आपको यह आवश्यक नहीं है कि आपके पास रिपोर्टिंग करने वाले विषय से संबंधित कोई प्रोफेशनल दस्तावेज हों, उसके लिए केवल आपका अनुभव व जानकारी ही आपका उस विषय में विशेष्त्र होना प्रमाणित करता है।

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग 2 – 

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) ‘कविता के बहाने’ कविता के संदर्भ में चिड़िया एवं कविता के बीच के संबंध का आधार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘कविता के बहाने’ कविता में, कविता के लिए धिड़िया के बहाने उड़ान भरने जैसी विशेषता को रेखांकित किया गया है। इसका आधार यह है कि उड़ान मूल रूप में चिड़िया के द्वारा ही भरी जाती है। यह एक क्रिया है, जो चिड़िया के उन्मुक्त नैसर्गिक स्वभाव का परिचय देती है, परंतु कवि ने इसे कल्पना के रूप में मानसिक उड़ान मानकर कविता से जोड़ दिया है। चिड़िया की उड़ान का वर्णन कविता कर सकती है, लेकिन कविता की उड़ान को चिड़िया नहीं जान सकती। इस प्रकार, चिड़िया और कविता को एक-दूसरे से जोड़कर कविता की उड़ान को श्रेष्ठ सिद्ध किया गया है।

(ख) ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता का वास्तविक उद्देश्य अपने कार्यक्रम को सफल बनाना है। इस कविता में निहित व्यंग्य पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर :
‘कैम्मरे में बंद अपाहिज’ कविता के माध्यम से कवि कहता है कि मीडिया वाले समर्थ एवं सशक्त होते हैं। वे किसी की करुणा को भी खरीद-बेच सकते हैं। वे कमजोर एवं अशक्त व्यक्तियों को समाज के सामने लाकर लोगों की सहानुभूति एवं आर्थिक लाभ लेना चाहते हैं। इससे उनकी लोकप्रियता एवं आय दोनों में वृद्धि होती है। इस कविता के माध्यम से कवि ने मीडिया के व्यावसायिक दृष्टिकोण एवं समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के प्रति उनकी तुच्छ मनोवृत्ति पर व्यंग्य किया है।

(ग) ‘उषा’ कविता में कवि ने उषाकाल के दौरान होने वाले सूर्योदय का चित्रण किया है। इसमें प्रातःकाल के नभ के लिए किन प्रतीकों का उपयोग किया है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘कषा’ कवित्ता में कवि ने भोर के नभ की पवित्रता, निर्मलता तथा उज्ज्यलता को विविध बिबों एवं पतीकों के माध्यम से दर्शाया है। कवि ने प्रातःकाल के नभ के लिए ‘ राख से लीपा हुआ चौका’, ‘नीला शंख’, ‘बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से जैसे घुल गई हो ‘तथा ‘र्लेट पर लाल खड़िया चाक मल दी हो’ जैसे प्रतीकों का उपयोग किया है। इन बिंबो के माध्यम से अंधकार के समाप्त होते प्रकृति में पल-पल आ रहे परिवर्तनों को दृष्टिगत किया गया है। आकाश के लिए इन प्रतीकों में जल तथा रंग को महत्त्व दिया गया है। ये प्रतीक नवीन तथा मौलिक हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) ‘कवितावली’ में तुलसी की वाणी में लोगों के प्रति उलाहने और तिरस्कार का भाव है। इसका क्या कारण रहा होगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
तुलसी अपने समय के बहुत लोकप्रिय कवि थे। उन्होंने जाति-पांति और रक्त-गोत्र की शुद्धता को आधार बनाकर समाज में व्यक्ति का स्थान निर्धारित करने वाले घर्म के ठेकेदारों को समाज की प्रगति में सबसे बड़ा बाधक बताया। उनकी इस बात से तथा उनकी राम-भक्ति, क्था बाँचने की कुशलता और लोकप्रियता के कारण बहुत-से लोग उनसे ईर्ष्या करते थे। वे तुलसी के जन्म, धर्म और कर्म को लेकर बातें भी बनाते थे। ऐसे ही निंदकों से परेशान होकर तुलसी ने उनका तिरस्कार किया होगा।

(ख) बालक द्वारा चाँद माँगने की जिद पर माँ क्या करती है? ‘रुबाइयाँ’ शीर्षक के आधार पर अपने शब्दों में उत्तर दीजिए।
उत्तर :
बालक जिद करके अपनी माँ से चाँद के खिलौने की मॉंग करता है। वह मचल रहा है और ठुनक रहा है। मॉं उसे अन्य खिलौनों से बहलाने की कोशिश करती है, पर बालक चाँद का खिलौना ही चाहता है। माँ घर के अंदर से आइना ले आती है। वह आइने में बच्चे को उसका चेहरा दिखाती हुई कहती है कि लो, अब चाँद धरती पर उतर आया है।

(ग) दिन जल्दी-जल्दी ढलता है” कविता में बच्चों की प्रत्याशा को कवि ने किस प्रकार प्रस्तुत किया है?
उत्तर :
इस कविता में चिड़िया संध्या के समय अपने नीड़ में लौट जाना चाहती है। उसके पंख थक चुके हैं, मगर वह उड़ रही है। जैसे ही उसे यह ध्यान आता है कि उसके नन्हें बच्चे नीड़ों से झाँक रहे होंगे, तो चिड़िया के पंखों में थकान की जगह तेज़ी आ जाती है और वह और अधिक तीव गति से उड़ने लगती है। वह चाहती है कि अपने बच्चों की इच्छा को पूरा करूँ, उनके मुंह में दाना डालूँ, उन्हें स्नेह से अपने पंखों में छिपा लूँ अर्थात् कवि बच्चों की पत्याशा को जीवन की गति और आशा की किरण मानता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। (3 × 2 = 6)

(क) भक्तिन लेखिका का हर समय ध्यान रखती थी। वह लेखिका के कायों में किस प्रकार से सहायता करती थी? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
भक्तिन लेखिका के कार्यो में हर प्रकार से सहायता करती थी। वह लेखिका के खान-पान, रहन-सहन इत्यादि का ध्यान रखती थी। वह उसकी पुस्तकों का भी ध्यान रखती थी और कभी-कभी छात्रावास के बच्चों की भी देखभाल कर लिया करती थी। वह लेखिका के इधर-उधर रखे रुपयों को भी मटकी में सँमालकर रख देती थी। अतः वह लेखिका की सहायता के लिए छाया बनकर उसके साथ रहती थी।

(ख) दिनों-दिन गहराते पानी के संकट से निपटने के लिए क्या आज का युवावर्ग ‘काले मेघा पानी दे’ की इंदर सेना की तर्ज पर कोई सामूहिक आंदोलन प्रारंभ कर सकता है? अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
हाँ, पानी के गहराते संकट से निपटने के लिए आज का युवावर्ग बहुत कुछ कर सकता है। वह गाँब-गाँव में नए तालाब खुदवा सकता है। वर्षा के पानी को संरक्षित करने के नए-नए उपाय खोज सकता है एवं विद्यमान प्रणालियों को सही ढ़ग से क्रियान्चित करा सक्ता है। वह घर-घर जाकर पानी के महत्त्व को समझाकर पानी की एक-एक बूँद का सदुपयोग करना सिखा सकता है तथा जल संरक्षण के विभिन्न उपायों को सार्थक ढंग से लागू करवा सकता है।

(ग) ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि भूमंडलीकरण के इस दौर में भगत जी जैसे लोग क्या प्रेरणा देते हैं?
उत्तर :
भूमंडलीकरण के इस दीर में भगत जी जैसे लोग प्रेरणादायी हैं, जो मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते है। भगत जी का अपने मन पर पूर्ण नियंत्रण है। बाजार का जादू उनके मन पर प्रभाव नहीं डाल पाता। बाज़ार में उनकी औँखें खुली रहती थीं, पर मन भरा होने के कारण उनका मन अनावश्यक चीज़े खरीदने के लिए नहीं मचलता था। भगत जी जैसे व्यक्ति ही बाज़ार को सार्थकता प्रदान करते हैं। भगत जी के आचरण से प्रभावित होकर लोग अनावश्यक स्पर्द्ध में नहीं पड़ेंगे। वे व्यर्थ की वस्तुएँ खरीदने बाज़ार नहीं जाएँगे और इससे आपसी झगड़ों में कमी आएगी और समाज में शांति का वातावरण स्थापित हो जाएगा।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 3 प्रश्नों में से किन्हीं 2 प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए। (2 × 2 = 4)

(क) ढोलक की आवाज़ अपने गुण और शक्ति की दृष्टि से कहीं कम प्रभावकारी थी और कहीं अधिक, ऐसा क्यों?
उत्तर :
लुट्टन की ढोलक गाँववालों में असीमित उत्साह का संचार कर देती थी। इस असीम उत्साह के बल पर विषम-से-विषम परिस्थितियों से भी वे लड़ सकते थे, इस अर्थ में ढोलक की आवाज प्रभावकारी थी। परंतु मलेरिया या हैजे जैसी किसी भी महामारी को वोलक की थाप अपनी बुलंद आवाज़ से समाप्त नहीं कर सकती थी। वह इस महामारी को समाप्त न कर, केवल उससे लड़ने की शक्ति प्रदान करती थी। इस दृष्टि से ढोलक की आवाज बहुत कम प्रभावकारी थी।

(ख) भारत में अधिकार लिप्सा की भावना बहुत प्रबल है। लेखक ने शिरीष के फूलों से इसकी समानता कैसे व्यक्त की है?
उत्तर :
लेखक के अनुसार, भारत में अधिकाश लोग; जैसे-राजनीतिक नेता आदि अपनी सत्ता नहीं छोड़ना चाहते। वे नई पीढ़ी को आगे आने से रोकना चाहते हैं। उनमें अपने पद व कुर्सी का आकर्षण बहुत अधिक है। बीमार व अशक्त होने की स्थिति में भी वे अपने पद पर बने रहना चाहते हैं। इसी प्रकार शिरीष के फूल बहुत कठोर होते हैं। वे नए फूल आने पर भी अपना स्थान नहीं छोड़ते अत: शिरीष के फूल राजनीतिक लोगों के अधिकार लिप्सा के प्रतीक हैं।

(ग) सदस्यों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के लिए समाज को क्या करना चाहिए?
उत्तर :
समाज को प्रारंभ से ही सभी सदस्यों को समान अवसर और समान व्यवहार उपलब्ध कराना चाहिए, तभी समाज अपने सदस्यों की क्षमता का अधिकतम उपयोग कर सकता है। यदि सदस्यों को समाज में उनका उचित स्थान मिलेगा, तथी वे मन लगाकर काम कर पाएँगे, अपनी प्रतिभा व क्षमता का अधिकधिक उपयोग कर पाएँगे और समाज को भी भरपूर लाभ दे पाएँगे।

पूरक पाठ्य-पुस्तक वितान भाग 2

प्रश्न 14.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए 2 प्रश्नों में से किसी 1 प्रश्न का लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए। क्या आप ऐसा मानते हैं कि यशोधर पंत की आँखों में नमी आने का कारण उनके बड़े बेटे भूषण का व्यवहार था? (1 × 4 = 4)
अधवा
मुअनजो-दडो में किस प्रकार के घर बने हुए थें? उन घरों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
यशोधर बाबू यह चाहते थे कि अब उनके बच्चे घर-गृहस्थी की ज़िम्मेदारी ले लें, परंतु ऐसा होता नहीं है। उनके बड़े बेटे भूषण ने उन्हें उनकी शादी की पच्चीसरीं सालगिरह पर ड्रेसिंग ऊनी गाउन तो भैंट की, पर साथ-ही-साथ यह भी कहा कि सुबह दूध लेने जब जाएँ, तो इसे अवश्य पहनकर जाएँ। भूषण ने यह नहीं कहा कि दूध में ही ले आऊँगा, आप ठंड में बाहर नहीं जाना। इसी कारण यशोधर बाबू की औँखों में नमी आ गई। इसके साथ ही, उन्हें यह लग रहा था कि उनके अंगों में किशनदा उतर आए हैं, जिनकी मौत ‘जो हुआ होगा’ जैसी सोच से जुड़ी हुई थी। संभवतः वे यह सोच रहे हों कि उनका अतिम समय भी किशनदा जैसा हो सकता है।
अथवा
मुअनजो-दड़ो के घरों की पीठ सड़क की ओर होती थी अर्थात् किसी घर का दरवाजा सड़क की ओर नहीं खुलता था। घरों के अंदर से पानी या मैल की नालियाँ बाहर हौंदी तक आती थी और फिर नालियों के जाल से जुड़ जाती थीं। कहीं-कहीं वे खुली थीं, पर अधिकतर बंद थी। हर घर में एक स्नानघर था। बस्ती के भीतर छोटी सड़के थीं और उनसे छोटी गलियों भी बनी हुई थी। छोटी सड़कें नौ से बारह फुट तक चौड़ी थे। छन घरों की दीवारें ऊँची और मोटी धीं मोटी दीवार का अर्थ यह लगाया जाता है कि उस पर दूसरी मंजिल भी रही होगी। सभी घर इट के बने थे। एक ही आकार की इटें 1: 2: 4 के अनुपात की थी। इन घरों में एक दिलचस्प बात यह थी कि सामने की दीवार में केवल प्रवेश द्वार बना होता था, जिसमें कोई खिड़की नहीं होती थी। वर्तमान में सभी घर खंडहर हैं और दिखाई देने वाली चीज़ों से हम सिर्फ अनुमान लगा सकते है।


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