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CBSE Sample Papers for Class 11 Hindi Set 4 with Solutions

Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 11 Hindi with Solutions Set 4 are designed as per the revised syllabus.

CBSE Sample Papers for Class 11 Hindi Set 4 with Solutions

समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश:

  • इस प्रश्न-पत्र में खंड ‘अ’ में वस्तुपरक तथा खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं।
  • खंड ‘अ’ में 40 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं। सभी 40 प्रश्नों के उत्तर देने हैं।
  • खंड ‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नों के उचित आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
  • दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
  • यथासभव दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।

खंड ‘अ’
(वस्तुपरक प्रश्न)

अपठित बोध (अंक 15) – 

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए- 10 × 1 = 10

इस संसार में कुछ व्यक्ति भाग्यवादी होते हैं और कुछ केवल अपने पुरुषार्थ पर भरोसा रखते हैं। प्रायः ऐसा देखा जाता है कि भाग्यवादी व्यक्ति ईश्वरीय इच्छा को सर्वोपरि मानते हैं और अपने प्रयत्नों को गौण मान बैठते हैं। वे विधाता का ही दूसरा नाम भाग्य को मान लेते हैं। भाग्यवादी कभी-कभी अकर्मण्यता की स्थिति में भी आ जाते हैं। उनका कथन होता है कि वे कुछ नहीं कर सकते, सब कुछ ईश्वर के अधीन है। हमें उसी प्रकार परिणाम भुगतना पड़ेगा जैसा भगवान चाहेगा। भाग्योदय शब्द में भाग्य प्रधान है। एक अन्य शब्द है-सूर्योद्य। हम जानते हैं कि उदय सूरज का नहीं होता सूरज तो अपनी जगह पर रहता हैं, चलती, घूमती तो धरती ही है। फिर भी सूयोंदय हमें बहुत शुभ और सार्थक मालूम होता है।

भाग्य भी इसी प्रकार है। हमारा मुख सही भाग्य की तरफ़ हो जाए तो इसे भाग्योदय ही मानना चाहिए। पुरुषार्थी व्यक्ति अपने परिश्रम के बल पर कार्य सिद्ध कर लेना चाहता है। पुरुषार्थ वह है जो पुरुष को सप्रयास रखे। पुरुष का अर्थ पशु से भिन्न है। बल-विक्रम तो पशु में अधिक होता है, लेकिन पुरुषार्थ पशु चेष्टा के अर्थ से अधिक भिन्न और श्रेष्ठ है। वासना से पीड़ित होकर पशु में अधिक पराक्रम देखा जाता है, किन्तु यह पुरुष से ही संभव है कि वह आत्मविसर्जन में पराक्रम दिखाए। पुरुषार्थ व्यक्ति को क्रियाशील रखता है। जबकि अकर्मण्य व्यक्ति ही भाग्य के भरोसे वैठता है। हमें भाग्य और पुरुषार्थ का मेल साधना है। यदि सही दिशा में बढ़ेंगे तो सफ़लता अवश्य हमारे कदम चूमेगी।

1. ‘भाग्योदय’ शब्द में क्या प्रधान होता है?
(क) उदय
(ख) ईश्वर
(ग) भाग्य
(घ) किस्मत
उत्तर :
(ग) भाग्य

2. ईश्वरीय इच्छा को कौन सर्वोपरि मानता है?
(क) भाग्यवादी
(ख) कर्मणीय
(ग) आलसी
(घ) गरीब
उत्तर :
(क) भाग्यवादी

3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
कथन (i): भाग्य उदय न होकर अपनी जगह पर रहता है।
कथन (ii): धन उदय न होकर अपनी जगह पर रहता है।
कथन (iii): सूरज उदय न होकर अपनी जगह पर रहता है।
कथन (iv): किस्मत उदय न होकर अपनी जगह पर रहती है।
गद्यांश के अनुसार कौन-सा/से कथन सही है/हैं।
(क) कथन (i) और (ii) सही हैं।
(ख) केवल कथन (ii) सही हैं।
(ग) केवल कथन (iii) सही हैं।
(घ) केवल कथन (iv) सही हैं।
उत्तर :
(ग) केवल कथन (iii) सही हैं।
व्याख्या-सूर्य का उदय नहीं होता। सूर्य तो अपनी जगह पर रहता है। धरती चलती और घूमती है।

4. पुरुषार्थी व्यक्ति किस आधार पर अपना कार्य सिद्ध करता है?
(क) परिश्रम
(ख) शक्ति
(ग) झगड़े
(घ) डराकर
उत्तर :
(क) परिश्रम
व्याख्या-इस संसार में कुछ व्यक्ति भाग्यवादी होते हैं और कुछ केवल अपने पुरुषार्थ पर भरोसा रखते है। पुरुषार्थी व्यक्ति परिश्रम के आधार पर अपना कार्य सिद्ध करता है।

5. पुरुष को कब पराक्रम दिखाना चाहिए?
(क) कार्य के समय
(ख) पढ़ाई में
(ग) आत्मविसर्जन में
(घ) खेल में
उत्तर :
(ग) आत्मविसर्जन में

6. पुरुषार्थ व्यक्ति को कैसे रखता है?
(क) नम्र
(ख) समान
(ग) आलसी
(घ) क्रियाशील
उत्तर :
(घ) क्रियाशील

7. भाग्य के भरोसे कौन बैठता है?
(क) अकर्मणीय
(ख) निकम्मा
(ग) मेहनती
(घ) श्रमिक
उत्तर :
(क) अकर्मणीय

8. सही दिशा में बढ़ने के लिए किस की आवश्यकता है?
(क) साधना की
(ख) अराधना की
(ग) कामना की
(घ) निर्देश की
उत्तर :
(क) साधना की
व्याख्या-सही दिशा में बढ़ने के लिए साधना की अवश्यकता होती है। यदि सही दिशा में बढेंगे तो सफ़लता अवश्य मिलेगी।

9. पुरुषार्थ का संधि-विच्छेद कीजिए-
(क) पुरुषा + अर्थ
(ख) पुरुष + आर्थ
(ग) पुरुष + अर्थ
(घ) सभी
उत्तर :
(ग) पुरुष + अर्थ

10. सफ़लता में प्रत्यय लगाइए-
(क) फलता
(ख) स
(ग) फ़ल
(घ) ता
उत्तर :
(घ) ता

प्रश्न 2.
दिए गए पद्यांश पर आधारित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए- 5 × 1 = 5

कुछ लिख के सो, कुछ पढ़के सो
तू जिस जगह जागे सवेरे उस जगह से बढ़ के सो।
जैसा उठा वैसा गिरा जाकर बिछाने पर,
बिना समझे, बिना बूझे खेलते जाना,
गलत है बेसुध है,
कुछ रचके सो, कुछ गढ़के सो

तू जिस जगह जागा सवेरे उस जगह से बढ़ के सो
दिन भर इबारत पेड्, पत्ती और पानी की
बंद घर की, खुले फैले खेत धानी की
हवा की, बरसात की हर खुश्क की, तर की
गुज़रती दिनभर जो रही जो आपकी, पर की
उस इबारत को सुनहरे वर्क से मन मढ़के सो।

1. कवि ने किसे बेसुध कहा है?
(क) जो केवल विदेश में रहना चाहता है।
(ख) जो बिना कुछ कार्य किए समय बिताता है।
(ग) जो कार्य करके समय बिताता है।
(घ) जो कहीं भी जाना नहीं चाहता है।
उत्तर :
(ख) जो बिना कुछ कार्य किए समय बिताता है।
व्याख्या-कवि ने उस व्यक्ति को बेसुध कहा है जो बिना कुछ कार्य किए समय बिताता है या बिन सोचे-समझे निरर्थक कार्य करता है।

2. ‘मन मढ़के सो’ में निहित अलंकार है-
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) रूपक अलंकार
(ग) यमक अलंकार
(घ) श्लेष अलंकार
उत्तर :
(क) अनुप्रास अलंकार

3. इबारत को किससे मढ़ना है?
(क) लकड़ी से
(ख) शीशे से
(ग) सुनहरी वर्क से
(घ) ताँबे से
उत्तर :
(ग) सुनहरी वर्क से

4. ‘जैसा उठा वैसा गिरा’ का अर्थ क्या है?
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
कथन (i): व्यक्ति दिन भर प्रयास करता रहता है।
कथन (ii): व्यक्ति सदैव सोता रहता है।
कथन (iii): व्यक्ति सदैव जागता रहता है।
कथन (iv): अकर्मण्य व्यक्ति जैसे निष्क्रिय भाव से जागता है वैसे ही दिनभर कोई प्रयास किए बिना शाम को सो जाता है।
निम्नलिखित विकल्पों पर विचार कीजिए सही विकल्प चुनकर लिखिए-
विकल्प-
(क) केवल कथन (i) सही है।
(ख) केवल कथन (ii) सही है।
(ग) केवल कथन (iii) सही है।
(घ) केवल कथन (iv) सही है।
उत्तर :
(घ) केवल कथन (iv) सही है।
व्याख्या-‘जैसा उठा वैसा गिरा’ का अर्थ है-अकर्मव्य व्यक्ति निष्क्रिय भाव से जागता है वैसे ही दिनभर कोई प्रयास किए बिना शाम को सो जाता है।

5. कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए-

कॉलम 1 कॉलम 2
1. कुछ लिख के सो (i) कुछ पढ़के सो
2. जिस जगह जागा सवेरे (ii) उस जगह से बढ़ के सो
3. जैसा उठा (iii) वैसा गिरा

(क) 1 – (iii), 2 – (ii), 3 – (i)
(ख) 1 – (i), 2 – (iii), 3 – (ii)
(ग) 1 – (i), 2 – (ii), 3 – (iii)
(घ) 1 – (ii), 2 – (iii), 3 – (i)
उत्तर :
(ग) 1 – (i), 2 – (ii), 3 – (iii)

अभिव्यक्ति और माध्यम (अंक 5)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए- 5 × 1 = 5

1. निम्नलिखित में से फ़ीचर लेखन किस शैली के
(क) माध्यमों को
(ख) लेखक को निकट है?
(ग) जनता को
(घ) बाज़ार को
उत्तर :
(ख) लेखक को निकट है?
व्याख्या-फ़ीचरे लेखन किसी घटना का सजीव चित्रण करता है। वह अतीत में बीती घटना को कथात्मक रूप में प्रस्तुत करता है।

2. आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम है-
(क) काव्यात्मक
(ख) कथात्मक
(ग) वक्तव्यात्मक
(घ) रूपात्मक
उत्तर :
(क) काव्यात्मक

3. किसी भी माध्यमों के लेखन के लिए किसे ध्यान
(क) अख़बार
(ख) रेडियो
(ग) टेलीविज़न
(घ) सिनेमा में रखना होता है?
उत्तर :
(क) अख़बार

4. नेट साउंड किस माध्यम से सम्बन्धित है?
(क) भास्कर
(ख) टेलीविजन
(ग) रेडियो
(घ) सिनेमा
उत्तर :
(ख) टेलीविजन
व्याख्या-नेट साउंड टेलीविजन से सम्बन्धित हैं।

5. हिन्दी में नेट पत्रकारिता का आरम्भ………. से
(क) इंटरनेट
(ख) जागरण
(ग) वेब दुनिया
(घ) प्रभा साक्षी हुआ।
उत्तर :
(ग) वेब दुनिया

पाठ्यपुस्तक आरोह भाग-1 (अंक 10)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित काव्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखित- 5 × 1 = 5

घर कि घर में चार भाई,
मायके में बहिन आई,
बहिन आई बाप के घर,
हाय रे परिताप के घर!
घर कि घर में सब जुड़े हैं,
चार भाई चार बहिनें,
भुजा भाई प्यार बहिनें,

1. इस कविता के कवि कौन हैं?
(क) कबीर
(ख) जायसी
(ग) भवानी प्रसाद
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर :
(ग) भवानी प्रसाद

2. निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए पद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए।
(क) परिताप का अर्थ है खुश रहना।
(ख) परिताप का अर्थ है प्रेम करना।
(ग) परिताप का अर्थ है तपस्या करना।
(घ) परिताप का अर्थ है-दुःख, संताप और कष्ट।
उत्तर :
(घ) परिताप का अर्थ है-दुःख, संताप और कष्ट।
व्याख्या-‘ परिताप का घर’ अर्थात् कष्ट का घर।

3. कवि के अभाव में किसको पिता का घर ‘ परिताप का घर’ लगा?
(क) माता
(ख) पिता
(ग) बहन
(घ) भाई
उत्तर :
(क) माता

4. निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A): भाई के लिए कवि ने उपमा दी है।
कारण (R): भाई के लिए भुजा की उपमा दी है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
(ग) कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) सही नहीं है, कारण (R) सही है।
उत्तर :
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
व्याख्या-नेट साउंड टेलीविजन से सम्बन्धित हैं।

5. कवि के घर में कितने भाई हैं?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर :
(ग) चार

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांश के प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उपयुक्त उत्तर वाले विकल्य को चुनकर लिखिए- 5 × 1 = 5

उस सीन के बाकी अंश की शूटिंग हमने उसके अगले साल शरद ऋतु में, जब फिर से वह मैदान काशफूलों से भर गया, तब की। उसी समय रेलगाड़ी के भी शॉट्स लिए। लेकिन रेलगाड़ी के इतने शॉट्स थे कि एक रेलगाड़ी से काम नहीं चला। एक के बाद एक तीन रेलगाड़ियों को हमने शूटिंग के लिए इस्तेमाल किया। सुबह से लेकर दोपहर तक कितनी रेलगाड़ियाँ उस लाइन पर से जाती हैं-यह पहले ही टाइम-टेबल देखकर जान लिया था। हर एक ट्रेन एक ही दिशा से आने वाली थी। जिस स्टेशन से वे रेलगाड़ियाँ आने वाली थीं, उस स्टेशन पर हमारी टीम के अनिल बाबू थे। रेलगाड़ी स्टेशन से निकलते समय अनिल बाबू भी इंजिन-ड्राइवर की केबिन में चढ़ते थे क्योंकि गाड़ी के शूटिंग की जगह के पास आते ही बॉयलर में कोयला डालना ज़ूरी था, ताकि काला धुआँ निकले। सफेद काशफूलों की पृष्ठभूमि पर अगर काला धुआँ नहीं आया, तो दृश्य कैसे अच्छ लगेगा ?
‘पथेर पांचाली’ फिल्म में जब यह सीन दिखाई देता है, तब दर्शक पहचान नहीं पाते कि उस सीन में हमने तीन अलग-अलग रेलगाड़ियों का इस्तेमाल किया है।

1. बाकी अंश की शूटिंग किस ॠतु में अगले साल की?
(क) वसंत
(ख) ग्रीष्म
(ग) वर्षा
(घ) शरद
उत्तर :
(घ) शरद
व्याख्या-बाकी अंश की शूटिंग अगले साल शरद ऋतु में की, जब फिर से वह मैदान काशफलों से भर गया।

2. उसी समय किसके शॉट्स लिए?
(क) अपू
(ख) दुर्गा
(ग) रेलगाड़ी
(घ) सभी
उत्तर :
(ग) रेलगाड़ी

3. निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए-
(क) दो रेलगाड़ियों को शूटिंग के दौरान इस्तेमाल किया गया ।
(ख) तीन रेलगाड़ियों को शूटिंग के दौरान इस्तेमाल किया गया।
(ग) चार रेलगाड़ियों को शूटिंग के दौरान इस्तेमाल किया गया।
(घ) पाँच रेलगाड़ियों को शूटिंग के दैरान इस्तेमाल किया गया।
उत्तर :
(ख) तीन रेलगाड़ियों को शूटिंग के दौरान इस्तेमाल किया गया।

4. कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए-

कॉलम 1 कॉलम 2
1. बाकी अंश की शूटिंग (i) अगले साल शरद ऋतु में
2. काशफूलों से भर गया (ii) वह मैदान
3. रेलगाड़ी के इतने शॉट्स थे (iii) एक रेलगाड़ी काम नहीं चला

(क) 1 – (iii), 2 – (ii), 3 – (i)
(ख) 1 – (i), 2 – (iii), 3 – (ii)
(ग) 1 – (i), 2 – (ii), 3 – (iii)
(घ) 1 – (ii), 2 – (iii), 3 – (i)
उत्तर :
(ग) 1 – (i), 2 – (ii), 3 – (iii)

5. किस फ़िल्म में दर्शक पहचान नहीं पाते कि तीन
(क) पथेर पांचाली
(ख) अस्तित्व अलग रेलगाड़ियों का इस्तेमाल किया है?
(ग) पुकार
(घ) हे राम
उत्तर :
(क) पथेर पांचाली
व्याख्या-पथेर पाँचाली फ़िल्म में दर्शक पहचान नहीं पाते कि तीन अलग रेलगाडियों का इस्तेमाल किया है।

पूरक पाठ्यपुस्तक वितान भाग-1

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए-

1. कुओं का पानी प्राय: कैसा होता है?
(क) नमकीन
(ख) खारा
(ग) मीठा
(घ) खट्टा
उत्तर :
(ख) खारा

2. यह पट्टी किसको मिलने से रोकती है?
(क) वर्षा के पानी
(ख) गहरे खारे भूजल
(ग) विकल्प (क) और (ख)
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) विकल्प (क) और (ख)
व्याख्या-वर्षा का पानी और गहरे भूजल को पट्टी मिलने से रोकती है।

3. कुंई की चिनाई किससे की जाती है?
(क) इंट
(ख) रस्से
(ग) विकल्प (क) और (ख)
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) विकल्प (क) और (ख)

4. निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए-
कथन (A) : कुंई खोदने के साथ मोटा रस्सा तैयार किया जाता है।
कारण (R): कुंई खोदने के साथ खींप नामक घास का मोटा रस्सा तैयार किया जाता है।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ग) कथन (A) सही नहीं है, कारण (R) सही है।
(घ) कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है।
उत्तर :
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
कथन (i): भूल का अर्थ गलती है।
कथन (ii): भूल का अर्थ गिरना है।
कथन (iii): भूल का अर्थ नष्ट है।
कथन (iv): भूल का अर्थ राहत है।
सही कथनध्कथनों वाले विकल्य को चयनित कर लिखिए-
(क) कथन (i) सही है।
(ख) कथन (ii) सही है।
(ग) कथन (iii) सही है।
(घ) कणन (iv) सही है।
उत्तर :
(क) कथन (i) सही है।

6. कुमार गंधर्व के संगीत में किसका सुन्दर सामंजस्य है?
(क) मालवा लोकधुनों
(ख) हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत
(ग) विकल्प (क) और (ख)
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) विकल्प (क) और (ख)
व्याख्या-कुमार गंधर्व के संगीत में मालवा लोकधुनों और हिन्दस्तानी शास्त्रीय संगीत का सुन्दर सामजंस्य है।

7. कुमार गंधर्व को किस स्तर पर पहचान प्राप्त हुई?
(क) दिवस राष्ट्रीय स्तर
(ख) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर
(ग) केवल सामाजिक स्तर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर

8. कुमार गंधर्व ने किन संगीतों को एक धरातल पर लाने का साहस किया ?
(क) शास्त्रीय संगीत
(ख) फ़ल्मी संगीत
(ग) विकल्प (क) और (ख)
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) विकल्प (क) और (ख)

9. मकान मालिक ने किस काम के लिए लेखिका को अपने घर में रखा?
(क) घर की सफाई
(ख) खाना
(ग) विकल्प (क) और (ख)
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ग) विकल्प (क) और (ख)
व्याख्या-मकान मालिक ने बेवी हालदार को घर की सफ़ाई और खाना बनाने के काम के लिए अपने घर में रखा।

10. लेखिका को किसकी चिंता थी?
(क) बच्चों की पढ़ाई की
(ख) घर के किराए की
(ग) लोगों की बातों की
(घ) ये सभी
उत्तर :
(घ) ये सभी

खण्ड ‘ब’ :
वर्णनात्मक प्रश्न

सृजनात्मक लेखन और व्यावहारिक लेखन। (अंक 17)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित दिए गए तीन अप्रत्याशित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए – 5 × 1 = 5

(i) त्योहार हमें उमंग और उल्लास से भरकर अपनी संस्कृति से जोड़े रखते हैं। आजकल लोगों में त्योहारों को मनाने के प्रति उत्साह एवं आस्था का अभाव देखा जाता है। लोगों की इस मानसिकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक लेख लिखिए।
उत्तर :
श्रम से थके-हारे मनुष्य ने जीवन में आई नीरसता को दूर करने के लिए त्योहारों का सहारा लिया। त्योहार अपने प्रारंभिक काल से ही सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक तथा जनजागृति के प्रेरणा स्रोत हैं। भारत एक विशाल देश है। यहाँ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग परम्पराओं तथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबन्धन, दीपावली, दशहरा, होली, ईद, ओणम, गरबा, बैसाखी आदि त्योहार मनाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त यहाँ अनेक राष्ट्रीय पर्व जैसे स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, गाँधी जयन्ती आदि भी मनाए जाते हैं।
इस तरह त्योहार जहाँ उमंग और उत्साह भरकर हमारे अन्दर स्फूर्ति जगाते हैं, वहीं महापुरुषों की जयंतियाँ हमारे अन्दर मानवीय मूल्य को प्रगाढ़ बनाती हैं। हमारे यहाँ त्योहार की कमी नहीं है।
लेकिन समय की गति और समाज में आए परिवर्तन के परिणामस्वरूप इन त्योहारों, उत्सवों के स्वरूप में काफ़ी परिवर्तन आया है। इन परिवर्तनों को विकृति कहना अतिशयोक्ति नहीं है। आज लोगों में त्योहारों के प्रति उत्साह व आस्था का अभाव देखा जाता है। आज धन व समय के अभाव, दिखावे की प्रवृत्ति, स्वार्थपरता आदि त्योहारों पर हावी हो गए हैं। दशहरा व दीपावली पर करोड़ों रुपये आतिशबाजी में नष्ट हो जाते हैं।

इन त्योहारों को शालीनता पूर्वक मनाने से इस धन को किसी रचनात्मक कार्यो में लगाया जा सकता है जिससे त्योहार का स्वरूप सुखद व कल्याणकारी हो जायेगा। हमारे जीवन में त्योहारों, उत्सवों व पर्वों का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। एक ओर ये त्योहार भाई-चारा, प्रेम, सद्भाव, धार्मिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाते हैं तो दूसरी ओर धर्म व कर्म तथा आरोग्य बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। इनके माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूल्य एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आसानी से पहुँच जाते हैं। हमारे त्योहारों में व्यक्त कतिपय दोषों को छोड़ दिया जाए या उनका निवारण कर दिया जाए तो त्योहार मानव के लिए बहुमूल्य हैं। ये एकता, भाईचारा, प्रेम, सद्भाव बढ़ाने के साथ सामाजिक समरसता बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।

(ii) वर्तमान युग में इंटरनेट अपनी उपयोगिता के कारण एक आवश्यकता बनता जा रहा है, इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए और बताइए कि इंटरनेट जीवन में सुविधा के साथ-साथ मुसीबत किस प्रकार बन जाता है?
उत्तर :
आधुनिक युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है। आज का विश्व विज्ञान के दृढ़ स्तंभ पर टिका है। विज्ञान ने मनुष्य को अनेक शक्तियाँ, सुख-सुविधा तथा क्रांतिकारी उपकरण दिए हैं, जिनमें इंटरनेट एक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण, बलशाली एवं गतिशील सूचना का माध्यम है। यह अनेक कम्प्यूटरों का एक जाल है, जिसके सहयोग से आज का मनुष्य विश्व के किसी भी भाग से किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त कर सकता है। आधुनिक युग में कोई भी व्यक्ति, देश या समाज सूचना प्रौद्योगिकी की इस अनोखी प्रणाली से अछूता नहीं, अतः सभी इस पर आश्रित होते जा रहे हैं। सन् 1986 में इंटरनेट का आरम्भ हुआ था।

इंटरनेट के कारण सारी दुनिया आज मुठ्ठी में है। बस, एक बटन दबाइए सब कुछ क्षण भर में आँखों के सामने उपस्थित हो जाता है। इसने दुनिया के सभी लोगों को जोड़ दिया है। ज्ञान के क्षेत्र में अद्भुत क्रांति आ गई है। ज्ञान, विज्ञान, खेल, शिक्षा, संगीत, कला, फ़िल्म, चिकित्सा आदि सबकी जानकारी उपलब्ध है। इससे देश-विदेश के समाचार, मौसम, खेल संबंधी ताजा जानकारी प्राप्त होती है। आजकल इंटरनेट के कार्यक्रमों की बहत अधिक माँग है। अनेक भारतीय नर-नारियाँ विदेशों में इंटरनेट की कम्पनियों के लिए सॉफ्टवेयर तथा अन्य उपयोगी कार्यक्रम बनाने में जुटे हैं। इंटरनेट से विज्ञान, व्यवसाय व शिक्षा के क्षेत्र में अनेक कार्य होने लगे हैं, जिससे समाज में बेरोज़गारी समाप्त हो सकती है। भारत और अमेरिका जैसे बड़े देशों में इंटरनेट के अनेक उपयोग हैं।

इससे उद्योग, प्रौद्योगिकी, शिक्षा राजनीति, व्यापार, खेल-कूद, स्वास्थ्य, धर्म, योग, वास्तुकला, प्रबन्धन, सूचना प्रौद्योगिकी आदि अनेक विषयों के बारे में सूचनाएँ और आँकड़े प्राप्त होते हैं। इससे मौसम विज्ञान और भूकम्प-विज्ञान से संबंधित पूर्वानुमान लगाने, तेल एवं प्राकृ. तिक गैस के भण्डारों का पता लगाने, दूर-संवेदी आकलन करने में सहायता मिलती है। साथ ही साथ अस्पतालों एवं चिकित्सा से संबंधित नवीनतम जानकारी और भौगोलिक सूचनाओं से सम्बन्धित जानकारी भी मिलती है। इंटरनेट से इतने लाभ हैं कि उँगलियों पर गिनना असंभव लगता है।

पर इससे हानियाँ भी होती हैं, जब इसका दुरुपयोग किया जाता है। इस पर अधिक देर कार्य करने से आँखें खराब हो जाती हैं। इंटरनेट में कई कार्यक्रम ऐसे हैं, जिन्हें देखकर बच्चों के अपरिपक्व मन-मस्तिष्क पर गलत प्रभाव पड़ता है। बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन को अवरुद्ध किया जा सकता है। प्रमुख शहरों और रेलवे यातायात प्रणाली के कम्प्यूटर-तन्त्र को ध्वस्त किया जा सकता है। विमानों के उड़ान-पथ में भटकाव पैदा कर दुर्घटनाएँ करवाई जा सकती हैं। गुप्त जानकारी प्राप्त करना, अफवाहें फैलाना, धमकियाँ देना, अश्लीलता, स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव तथा पुस्तकों से दूरी आदि इसके दुष्परिणाम हैं अतः हमें इंटरनेट का प्रयोग सोच-समझ कर नियंत्रित करना होगा, तब अवश्य ही इससे लाभ होगा।

(iii) ‘विश्वासपात्र मित्र जीवन की एक औषधि है।’ कथन के आधार पर बताइए कि मानव जीवन में मित्रों का क्या महत्त्व है ? वे किस प्रकार व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं? आप अपने मित्र का चुनाव करते समय किन गुणों का होना आवश्यक समझेंगे? अपने विचार स्पष्ट लिखिए।
उत्तर :
मित्रता का तात्पर्य है-किसी के सुख-दु:ख का सच्चा साथी होना। सच्चे मित्रों में कोई दुराव-छिपाव नहीं होता। वे निश्चल भाव से अपना सुख-दु ःख दूसरे से कह सकते हैं। विश्वास के कारण ही वे अपना हुदय दूसरे के सामने खोल पाते हैं।
सच्चे मित्र का साथ हमारे जीवन को बहुत प्रभावित करता है। सच्चा मित्र हमारे अवगुणों को सामने लाकर उन्हें दूर कर हमारे स्वभाव को निर्मल बनाने में सहायक सिद्ध होता है। उसके कारण मनुष्य को हिम्मत मिलती है जिससे वह जीवन मार्ग में स्वयं को अकेला महसूस नहीं करता। मित्रता शक्तिवर्द्धक औषधि के समान है। मित्रता में नीरस काम भी आसानी से हो जाते हैं। दो मित्र मिलकर दो से ग्यारह हो जाते हैं। सच्चा मित्र वही होता है, जो हमें कुमार्ग से बचाए और गलत रास्ते पर जाते समय सचेत करे। सच्चा मित्र हमारे जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है। मित्रता मनुष्य का जीवनरूपी संग्राम में महत्त्वपूर्ण सहारा होता है। एडीसन महोदय के अनुसार- “मित्रता खुशी को दूना करके और दुःख को बाँटकर प्रसन्नता बढ़ाती है तथा मुसीबत कम करती है।”
मित्र की आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति को होती है, किन्तु हमें मित्र का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। सुकरात के कथनानुसार ” मित्रता करने में शीघ्रता मत करो, परन्तु करो तो अंत तक निभाओ।” चापलूसी और झूठी प्रशंसा करने वाला सच्चा मित्र नहीं होता।
कई व्यक्ति अपना स्वार्थ साधने के लिए ही मित्रता का ढोंग करते हैं हमें उनसे सावधान रहना है। कई बार हम ऊपरी दिखावे के वशीभूत होकर भी मित्र बना बैठते हैं और बाद में पछताते हैं। मित्र बनाने से पहले उसके आचरण पर ध्यान देना चाहिए।
मित्र गुरीब भले हो, पर लालची नहीं होना चाहिए। श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता का आदर्श हमारे सम्मुख है। मित्र का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। दुष्ट मित्र पैरों में बँधी चक्की के समान होता है जो हमें विनाश के गर्त में धकेल देता है, वहीं एक उत्तम आचरण युक्त सच्चा मित्र हमें सदैव उन्नति के मार्ग पर ले जाता है। उसका मार्गदर्शन कल्याणकारी होता है। कुछ व्यक्तियों का मानना है कि मित्रता के लिए स्वभाव और आचरण की समानता आवश्यक है, परन्तु दो भिन्न प्रकृति के मनुष्यों में भी बराबर प्रीति और मित्रता सफ़ल रही है। सच्चा मित्र मिलना सौभाग्य की बात है।

प्रश्न 8.
गुवाहटी नगर के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर उनसे अपने मोहल्ले/अपने क्षेत्र की सफ़ाई कराने का अनुरोध कीजिए।
अथवा
अपने मोहल्ले में वर्षा के कारण उत्पन्न हुई जल-भराव की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराने के लिए नगरपालिका के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
उत्तर :
सेवा में,
गुवाहटी नगर निगम,
गुवाहटी।
विषय: क्षेत्र की सफ़ाई हेतु पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम अपने क्षेत्र की सफ़ाई की समस्या की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं। हमारे मोहल्ले में सफ़ाई व्यवस्था अत्यन्त खराब है। सफ़ाई-कर्मचारी कई-कई दिन तक काम पर नहीं आते। मोहल्ले में मच्छरों की भरमार है। चारों ओर कड़ा बिखरा हुआ दिखाई देता है, नालियों में गंदगी भरी रहती है जिससे क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप फैलने की संभावना है। कूड़े में भोजन की खोज के लिए अनेक सुअर घूमते रहते हैं।
महोदय! आपसे प्रार्थना है कि मुहल्ले की सफ़ाई-व्यवस्था को सन्तोषजनक बनाने की ओर ध्यान दें तथा सम्बन्धित अधिकारियों को उचित निर्देश दें, जिससे हमारे क्षेत्र की गंदगी की समस्या को सुलझाकर इस क्षेत्र के निवासियों को मलेरिया के प्रकोप से बचाया जा सके।
भवदीय
आर.के. मेहरोत्रा एवं अन्य क्षेत्रीय निवासी
गुवाहाटी नगर
दिनांक: 20.3.20….
अथवा
सेवा, में,
स्वास्थ्य अधिकारी
नगरपालिका
आगरा
विषय: जल-भराव की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराने हेतु पत्र
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम सब विद्युत नगर क्षेत्र के निवासी हैं। भयंकर वर्षा के कारण इस क्षेत्र में जगह-जगह पानी भर गया है। नालियों और सीवरों के बंद होने के कारण सड़कों की बिगड़ी हुई दशा के कारण जल पाइप कहीं-कहीं कट-फट गए हैं। आपके विभाग के संबंधित कर्मचारी बिल्कुल ही ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में चारों और जल भराव दिखाई दे रहा है। अतएव आपसे अनुरोध है कि आप इस दिशा में यथाशीघ्र उचित कदम उठाकर हमें कृतार्थ करें।
भवदीय
विद्युत नगर क्षेत्र के निवासी
दिनांक : 6 मार्च 20XX

प्रश्न 9.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (लगभग 40 शब्दों में) दीजिए- 2 × 2 = 4

(i) डायरी शैली में रचित हिन्दी उपन्यासों के नाम लिखिए।
उत्तर :
डायरी एक सरल विधा मानी जाती है, क्योंकि उसे जिस बर्तन में डालिए उसी का आकार ग्रहण कर लेती है। कई उपन्यासों में इस विधा का रचनात्मक प्रयोग दिखाई पड़ता है। आत्मकथा और यात्रावृत्तान्त में भी इसका उपयोग हुआ है।
डायरी शैली में रचित प्रमुख उपन्यास निम्नलिखित हैंअजेय – नदी के द्वीप, 1951 ई., अपने-अपने अजनबी, 1961 ई.

शैलेन्द्र कुमार – जयबर्द्धन, 1958 ई.
राजेन्द्र यादव – शह और मात, 1959 ई.
देवराज – अजय की डायरी, 1960 ई.
श्रीलाल शुक्ल – मकान, 1976 ई.

(ii) डायरी लेखन में व्यक्ति का व्यक्तित्व झलकता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
डायरी लेखन में व्यक्ति का व्यक्तित्व झलकता है, क्योंकि लेखक इसमें अपने मन की बातों का अंकन करता है। डायरी लेखक के मन का केन्द्र-बिन्दु होता है, जिसमें वह खुशी-गम, अच्छे-बुरे का लेखन करता है। डायरी लिखने से व्यक्ति के अन्दर अभिव्यक्त करने का हुनर भी आने लगता है। तनाव भी कम होता है और याद्दाश्त भी दुरुस्त होती है। लिखते-लिखते भाषा-शैली व शब्दावली भी निखरने लगती है। लिखने की आदत हमारे अन्दर धैर्य के गुण को जन्म देती है। जब हम लिखते हैं तो मन में विचार ठहरना सीखते हैं। यदि अन्दर कोई गुस्सा या कुंठा होती है, तो कागज़ तक आते-आते काफ़ी हद तक शान्त होने लगती है।

(iii) पटकथा दृश्य-श्रव्य और कथन-कला आदि को लक्ष्य करके लिखी जाने वाली विधा क्यों है ?
उत्तर :
किसी फ़िल्म की पटकथा को किसी भी पूर्ववर्ती उपन्यास, नाटक, कहानी या उस सिनेमा विधा के लिए लिखी गई मूल रचना से रूपान्तरित किया जाता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि पटकथा दृश्य-श्रव्य और कथन-कला आदि को लक्ष्य करके लिखी जाने वाली विधा होती है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित दो प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर (लगभग 60 शब्दों में) दीजिए- 3 × 1 = 3

(i) विश्व ज्ञान कोश की उपयोगिता सिद्ध कीजिए।
उत्तर :
विश्व कोश का उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व में विकीर्ण कला एवं विज्ञान के समस्त ज्ञान को संकलित कर उसे व्यवस्थित रूप में सामान्य जन के उपयोगार्थ उपस्थित करना तथा भविष्य के लिए सुरक्षित रखना है। इसमें समाविष्ट भूतकाल की ज्ञान-विज्ञान की उपलब्धियाँ मानव सभ्यता के विकास के लिए साधन प्रस्तुत करती हैं। यह ज्ञान राशि मनुष्य तथा समाज के कार्य व्यापार की संचित पूँजी होती है। आधुनिक शिक्षा के विश्व में फैले स्वरूप ने शिक्षार्थियों एवं ज्ञानार्थियों के लिए सन्दर्भ ग्रन्थों का व्यवहार अनिवार्य बना दिया गया है। विश्व कोश में संपूर्ण संदर्भों का सार निहित होता है। इसलिए आधुनिक युग में इसकी उपयोगिता असीमित हो गई है। इसकी सर्वाधिक उपादेयता की प्रथम अनिवार्यता इसकी बोधगम्यता है। इसमें संकलित जटिलतम विषय से संबंधित निबंध भी इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि वह सामान्य पाठक की क्षमता और उसके बौद्धिक स्तर के उपयुक्त तथा बिना किसी प्रकार की सहायता के बोधगम्य हो जाता है। उत्तम विश्व कोश ज्ञान के मानवीकरण का माध्यम है।

(ii) हिंदी-अंग्रेज़ी शब्दकोश पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
हिंदी-अंग्रेज़ी शब्द कोश को द्वि-भाषी कोश भी कहा जाता है। इसमें हिंदी शब्दों के अर्थ के साथ-साथ उच्चारण आदि को भी अंग्रेज़ी भाषा में प्रस्तुत किया जाता है। चूँकि इस प्रकार के कोशों में प्रविष्टियाँ हिंदी भाषा के शब्दों की होती हैं, इसलिए उन्हें हिंदी वर्णमाला के क्रमानुसार रखा जाता है। हिंदी शब्दों के साथ उनके उचित उच्चारण के लिए अंग्रेज़ी ध्वनि-चिन्हों, भाषा एवं व्याकरणिक रूपों का संकेत चिह्न आदि भी प्रस्तुत किया जाता है। इस तरह के कोशों में कोशकार का यह प्रयास रहता है कि हिंदी भाषा के शब्दों को अंग्रेजी भाषा में पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। हिंदी-अंग्रेज़ी शब्द कोश का निर्माण कार्य अठारहवीं शताब्दी में ही अहिंदी भाषी विद्वानों द्वारा शुरू किया गया था। फर्गुसन, पैट्रिरक, हैरिक, गिलक्राइस्ट के शब्दकोश इसी प्रकार के हैं। यद्यपि इन आरंभिक कोशों में कुछ न्यूनताएँ भी हैं जो आजकल के कोशों में सुधार ली गई हैं।

पाठ्य-पुस्तक आरोह भाग-1 एवं वितान भाग-1 (अंक 23)

प्रश्न 11.
काव्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (लगभग 60 शब्दों में) दीजिए- 3 × 2 = 6

(i) कबीर ने ईश्वर की व्यापकता को कैसे समझाया है ?
उत्तर :
कबीर ने एक ही ईश्वर की व्यापकता को निम्नलिखित तर्कों से समझाया है-
1. संसार में सब जगह एक ही पवन व जल है।
2. सभी में एक ही ईश्वरीय ज्योति है।
3. एक ही मिट्टी से सभी बर्तनों का निर्माण होता है।
4. एक ही परमात्मा का अस्तित्व सभी प्राणों में है।
5. प्रत्येक कण में ईश्वर है।
6. दुनिया के हर जीव में ईश्वर व्याप्त है।

(ii) मीरा के पदों का प्रतिपाद्य लिखिए।
उत्तर :
पहले पद में मीरा ने कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति प्रकट की है, जबकि व्यर्थ के कार्यों में व्यस्त लोगों के प्रति दुःख प्रकट किया है। कृष्ण भक्ति में मीरा ने अपने कुल की मर्यादा व लोकलाज़ भी भुला दी है। वह गिरिधर कृष्ण को ही अपना स्वामी मानती हैं। उसने आँसुओं से सींचकर कृष्ण प्रेम रूपी बेल बोकर बढ़ाई है। इसमें अब आनंद रूपी फल लगने लगे हैं। इस तरह उसने दही से घी निकाल लिया है व छाछ छोड़ दी है। संसार की लोलुपता और विवेकहीनता को देखकर मीरा रो पड़ती हैं। वह कृष्ण से अपने उद्धार के लिए प्रार्थना भी करती हैं। दूसरे पद में, मीरा कृष्ण के प्रेम में डूब जाती हैं व सभी रीति-रिवाज़ों व बंधनों से मुक्त होना चाहती हैं। वह गिरिधर से स्नेह कर, अमर होना चाहती हैं। मीरा द्वारा पैरों में घुंघुरू बाँधकर कृष्ण के सामने नाचने के कारण लोग उसे बावरी कहते हैं। कुल के लोग कुलनाशिनी भी कहते हैं। राणा ने उन्हें विष का प्याला भी भेजा जिसे मीरा ने हैंसते हुए पी लिया। मीरा कहती हैं कि उसके प्रभु सहज भक्ति से ही भक्तों को मिल जाते हैं।

(iii) कविवर भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित ‘घर की याद’ कविता का भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
यह कविता सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के दौरान लिखी गई है। कवि कारावास में था। वहाँ उसे अपने घर के प्रिय सदस्यों की याद आई। कविता का भाव इस प्रकार है-कवि कारावास में है। बाहर बरसात हो रही है। इस कारण उसके प्राण और मन घर की यादों में घिर गए हैं। उसे सबसे अधिक याद अपने पिता की आ रही है। वह कल्पना करता है कि उसकी माँ ने उसके पिता को ढाँढ़स बाँधते हुए कहा होगा कि भवानी अपने पिता की इच्छा जानकर ही कारावास में गया है, तब पिता ने आँसू रोक लिए होंगे। कवि सावन से प्रार्थना करता है कि वह चाहे कितना भी बरस ले, परन्तु उसके पिता के मन को दु:खी न करे। वह पिता को जाकर बताए कि उनका बेटा जेल में मस्त है। कवि उसे सावधान करते हुए कहता कि कहीं वह गलती से यह न कह दे कि जेल में उनका बेटा बहुत उदास, मौन और बेचैन है।

प्रश्न 12.
काव्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (लगभग 40 शब्दों में) दीजिए -2 × 2 = 4

(i) कबीर ने ऐसा क्यों कहा कि संसार बौरा गया है ?
उत्तर :
कबीर के अनुसार, संसार बाँरा गया है। वह सच पर विश्वास नहीं करता और झूठे ढोंगों को मानता है। वह परमात्मा को जानने का प्रयत्न नहीं करता किन्तु व्रत, नियम, स्नान-ध्यान आदि का पालन करता है। वह कुरान पढ़ना, समाधि लगाना, पीपल-पत्थर पूजना, तीर्थ-व्रत करना, टोपी-माला, छापा-तिलक आदि का अनुगमन करता है। वह साखी गाना, शिष्य बनाना, हिन्दू- मुसलमान के भेद को मानना आदि ढोंगों को भी स्वीकार करता है। परन्तु सच्चे परमात्मा को नहीं जानता। कबीर की दृष्टि से यह सब पागलपन है।

(ii) घर की याद कविता में पिता के व्यक्तित्व की किन-किन विशेषताओं को उकेरा गया है ?
उत्तर :
इस कविता में पिता के व्यक्तित्व की अनेक विशेषताओं को उकेरा गया है। पिताजी की उम्र अधिक होने के बावजूद क्षण भर के लिए भी उन पर बुढ़ापे का असर नहीं था। उनमें इतनी अधिक चुस्ती-फुर्ती है कि वे अब भी दौड़ लगा लेते हैं। वे अब भी खिल-खिलाकर हैंस पड़ते हैं, उनमें युवकों जैसा उल्लास है। वे इतने निडर और साहसी हैं कि मौत के सामने भी विचलित नहीं होते। शेर के सामने भी वे आँधी-तूफ़ान की गति से काम करते हैं। वे धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और नित्य गीता का पाठ करते हैं। वह मन से भी विशाल हैं। उदार हैं। अत्यन्त सरल, भोले, सहुदय और भावुक हैं। वे अपने परिवारीजनों से लगाव रखते हैं। उनसे किसी का भी रंचमात्र कष्ट भी नहीं देखा जाता। वे पक्के देशभक्त और बहादुर हैं।

(iii) ‘लोग कहै, मीरा भई बावरी, न्यात कहें कुल नासी’ मीरा के बारे में लोग (समाज) और न्यात (कुटुम्ब) की ऐसी धारणाएँ क्यों हैं ?
उत्तर :
मीरा एक राजपरिवार से थी और विधवा थी। अतः कृष्ण के प्रेम में मस्त होकर सबके सामने नाचना व गाना राजकुल की मर्यादा का उल्लंघन माना जाता था। परिवारवालों का मानना था कि मीरा के इस प्रकार के आचरण से कुल की अन्य स्त्रियाँ भी पारिवारिक परम्पराओं का उल्लघंन करेंगी, जो कुल के नाश का कारण बनेगा। अतः वे मीरा को कुल-नाशी मानते थे, जबकि मीरा द्वारा राजमहल के सुख-सुविधाओं का त्याग कर संन्यासियों के समान कठिन जीवन का चुनाव करना व ईश्वरी भक्ति में लगे रहना समाज के लोगों को पागलपन लगता था। वे उसे बावरी समझते थे।

प्रश्न 13.
गद्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (लगभग 60 शब्दों में) दीजिए- 3 × 2 = 6

(i) ‘नमक का दारोगा’ कहानी के माध्यम से कहानीकार क्या संदेश देना चाहता है ?
उत्तर :
‘नमक का दारोगा’ कहानी के माध्यम से कहानीकार हमें यह संदेश देना चाहता है कि चाहे असत्य, अन्याय, भ्रष्टाचार आदि का कैसा ही अंधेरा क्यों न आच्छादित कर ले किंतु सत्य की चमक में वह शक्ति है कि वह इन दुराचारों को भेद सकता है। सत्य का स्थान बहुत ऊँचा है। यहाँ तक कि चोर भी ईमानदार कर्मचारी चाहता है। इससे बढ़कर सत्य और ईमानदारी जैसे सद्गुणों का सम्मान क्या हो सकता है? इस कहानी में लेखक पाठकों के हृदय में मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था जगाना चाहता है। यह कहानी सत्य और सदाचार के प्रति आस्था उत्पन्न करती है। इस कहानी का एक संदेश यह भी है कि यदि आज भ्रष्टाचार के पर्वत को चकनाचूर करना है तो युवकों को आगे आना होगा। उन्हें भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने में कभी नहीं चूकना चाहिए। यह एक आदर्शवादी कहानी है जिसका संदेश यह है कि सत्य की विजय होती है।

(ii) नर सुल्तान नामक राजकुमार के गीत क्यों गाये जाते हैं?
उत्तर :
नर सुल्तान नाम का एक राजकुमार था। अपनी मुश्किल की घड़ी में कई साल सुल्तान ने नवरगढ़ नामक स्थान में काटे जहाँ उसने चौकीदारी से लेकर ऊँचे पद तक कार्य किया। नवरगढ़ से जाते समय उसने आँखों में आँसू भरकर जिस रीति से नगर और नगरवासियों का अभिवादन किया और आभार प्रकट किया उसे देखकर नवरगढ़ वासी मुग्ध हो गए और तभी से नर सुल्तान नामक राजकुमार के गीत गाए जाने लगे।

(iii) वंशीधर को धनराम के शब्द क्यों कचोटते रहे?
उत्तर :
वंशीधर का पुत्र मोहन बचपन से ही मेधावी था। वंशीधर चाहते थे कि मोहन पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बने लेकिन परिस्थितिवश ऐसा न हो सका। एक दिन उन्होंने कहा कि मोहन की सेक्रेटेरियट में नियुक्ति हो गई है और शीघ्र ही वह बड़े पद पर पहुँच जाएगा। मोहन के बारे में जान धनराम ने कहा कि मोहन लला बचपन से ही बड़े बुद्धिमान थे। धनराम के यही शब्द वंशीधर को कचोटते रहे, क्योंकि वे मोहन की वास्तविकता जान गये थे और लोगों से मोहन की प्रशंसा सुनकर उन्हें और दु:ख होता था।

प्रश्न 14.
गद्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (लगभग 40 शब्दों में) दीजिए- 2 × 2 = 4

(i) ‘नमक का दारोगा’ कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उसके आधार को भी स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
नमक का दरोगा कहानी के दो अन्य शीर्षक हो सकते हैं-
I. कर्त्तव्यपरायणता-इस कहानी का मुख्य पात्र वंशीधर पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्त्तव्य का पालन करता है। अलोपीदीन द्वारा दिए गए प्रलोभनों से भी विचलित नहीं होता और कर्त्तव्य का पूरी ईमानदारी से पालन करते हुए अलोपीदीन को जेल में भिजवा देता है। यद्यपि उसे नौकरी से भी हाथ धोना पड़ता है, लेकिन अंत में उसकी कर्त्तव्यपरायण की जीत होती है। अलोपीदीन स्वयं उसके घर आकर उसे अपनी ज़ायदाद का मैनेजर नियुक्त करते हैं। इस तरह ‘कर्त्तव्यपरायण’ शीर्षक सार्थक है।
II. सत्य की जीत-‘नमक का दरोगा’ कहानी का नायक वंशीधर सत्य के मार्ग को धर्म का मार्ग मानता है और इसी राह पर चलते हुए अनेक कठिनाइयों से जुझता है पर सत्यता के कारण अलोपीदीन जैसा भ्रष्ट व्यक्ति भी अपनी हार स्वीकार करता है। इस कहानी का केन्द्रीय भाव भी सत्य की जीत के मूल्य को स्थापित करना रहा है।

(ii) नमक विभाग के दरोगा पद के लिए बड़ों-बड़ों का जी ललचाता था। वर्तमान समाज में ऐसा कौन-सा पद होगा जिसे पाने के लिए लोग लालायित रहते होंगे और क्यों ?
उत्तर :
नमक विभाग में दरोगा के पद के लिए बड़ों-बड़ों का जी इसलिए ललचाता था क्योंकि इसमें ऊपर की आमदनी बहुत थी। वर्तमान में भी पटवारी, लेखाकार, आयकर, सीमाशुल्क आदि विभागों में रिश्वत की आमदनी अधिक होने के कारण लोग इन विभागों में पदासीन होने को लालायित रहते हैं।

(iii) मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातों ने प्रभावित किया ?
उत्तर :
मियाँ नसीरुद्दीन की अनेक बातों ने हमें प्रभावित किया है-वह अपने पेशे (कार्य) के प्रति अधिक समर्पित थे। वह अपने पेशे को कला समझकर रुचिपूर्वक मन लगाकर सीखते थे। उनके साथ जो भी व्यक्ति कार्य करते थे, वह उनका भी सम्मान करते थे। मियाँ नसीरुद्दीन लेखिका के प्रश्नों का जवाब बड़ी दुढ़ता के साथ देते थे।

प्रश्न 15.
वितान के पाठों पर आधारित निम्नलिखित दो प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर (लगभग 60 शब्दों में) दीजिए – 3 × 1 = 3

(i) रेत में पानी की तलाश और कुंई निर्माण की प्रक्रिया के विषय में बताइए।
उत्तर :
लेखक राजस्थान की रेतीली भूमि में पानी के स्रोत कुंई का वर्णन करता है। वह बताता है कि कुंई खोदने के लिए चेलवांजी बसौली से खुदाई कर रहा है। अंदर भयंकर गर्मी है और गर्मी कम करने के लिए बाहर खड़े लोग बीच-बीच में मुट्ठीभर रेत बहुत जोर से नीचे फेंकते हैं। इससे ताज़ी हवा अंदर आती है और गहराई में जमी दमघोंटू गर्म हवा बाहर निकलती है। चेलवांजी सिर पर काँसे, पीतल या अन्य किसी धातु का बर्तन टोप की तरह पहनते हैं, ताकि चोट न लगे। थोड़ी खुदाई होने पर इकट्ठा हुआ मलवा बाल्टी के जरिए बाहर निकाला जाता है।
चेलवांजी कुँए की खुदाई व चिनाई करने वाले प्रशिक्षित लोग होते हैं। कुंई, कुएँ से छोटी होती है, परंतु गहराई कम नहीं होती। कुई में न सतह पर बहने वाला पानी आता है और न भू-जल। मरुभूमि में रेत अत्यधिक है। यहाँ वर्षा का जल शीघ्र ही भूमि में समा जाता है।

(ii) लेखिका द्वारा लेखन कार्य प्रारम्भ किस प्रकार हुआ ?
उत्तर :
लेखिका को किताब, अख़बार पढ़ने व लेखन कार्य में आनंद आने लगा। तातुश के ज़ोर देने पर वह अपने जीवन की घटनाएँ लिखने लर्गी। तातुश के दोस्त उसका उत्साह बढ़ाते रहे। एक मित्र ने उसे आशापूर्णा देवी का उदाहरण दिया। इससे लेखिका का हौसला बढ़ा और उसने उन्हें जेटू कहकर संबोधित किया। एक दिन लेखिका के पिता उससे मिलने पहुँचे। उसने उसकी माँ का ख़्याल रखने के लिए समझाया। लेखिका पत्रों के माध्यम से कोलकाता और दिल्ली के मित्रों से संपर्क रखने लगी। उसे हैरानी थी कि लोग उसके लेखन को पसंद करते हैं। शर्मिला उससे तरह-तरह की बातें करती थी। लेखिका सोचती कि अगर तातुश उससे न मिलते, तो यह जीवन कहाँ मिलता।


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