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CBSE Class 10 Hindi A Question Paper 2020 (Series: JBB/2) with Solutions

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CBSE Class 10 Hindi A Question Paper 2020 (Series: JBB/2) with Solutions

निर्धारित समय : 3 घण्टे
अधिकतम अंक : 80

सामान्य निर्देश :

  • प्रश्न-पत्र चार खंडों में विभाजित किया है – क, ख, ग एवं घ। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।
  • खंड- क में प्रश्न अपठित गद्याश पर आधारित हैं।
  • खंड-ख में प्रश्न संख्या 2 से 5 तक प्रश्न व्याकरण के हैं ।
  • खंड-ग में प्रश्न संख्या 6 से 10 तक प्रश्न पाठ्यपुस्तकों से हैं ।
  • खंड-घ में प्रश्न संख्या 11 से 13 तक प्रश्न रचनात्मक लेखन के हैं ।
  • यथासंभव प्रत्येक खंड के प्रश्नों के उत्तर क्रम से लिखिए ।
  • उत्तर संक्षिप्त तथा क्रमिक होने चाहिएं और साथ ही दी गई शब्द सीमा का यथासंभव अनुपालन कीजिए ।
  • प्रश्न-पत्र में समग्र पर कोई विकल्प नहीं है । तथापि एक-एक अंक वाले 1 प्रश्न में, दो-दो अंकों वाले 2 प्रश्नों में, तीन अंकों वाले 1 प्रश्न में, पाँच-पाँच अंकों वाले 2 प्रश्नों में और दस अंक वाले 1 प्रश्न में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं। पूछे गए प्रश्न का उत्तर लिखने के लिए सही विकल्प का ध्यान रखिए ।
  • इनके अतिरिक्त, आवश्यकतानुसार, प्रत्येक खंड और प्रश्न के साथ यथोचित निर्देश दिए गए हैं।

खण्ड ‘क’

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पड़ोस सामाजिक जीवन के ताने-बाने का महत्त्वपूर्ण आधार है । दरअसल पड़ोस जितना स्वाभाविक है, हमारी सामाजिक सुरक्षा के लिए तथा सामाजिक जीवन की समस्त आनंदपूर्ण गतिविधियों के लिए वह उतना ही आवश्यक भी है । यह सच है कि पड़ोसी का चुनाव हमारे हाथ में नहीं होता, इसलिए पड़ोसी के साथ कुछ-न-कुछ सामंजस्य तो बिठाना ही पड़ता है । हमारा पड़ोसी अमीर हो या गरीब, उसके साथ संबंध रखना सदैव हमारे हित में होता है। पड़ोसी से परहेज करना अथवा उससे कटे-कटे रहने में अपनी ही हानि है, क्योंकि किसी भी आकस्मिक आपदा अथवा आवश्यकता के समय अपने रिश्तेदारों तथा परिवार वालों को बुलाने में समय लगता है। ऐसे में पड़ोसी ही सबसे अधिक विश्वस्त सहायक हो सकता है। पड़ोसी चाहे कैसा भी हो, उससे अच्छे संबंध रखने चाहिएं। जो अपने पड़ोसी से प्यार नहीं कर सकता, उससे सहानुभूति नहीं रख सकता, उसके साथ सुख-दुख का आदान-प्रदान नहीं कर सकता तथा उसके शोक और आनंद के क्षणों में शामिल नहीं हो सकता, वह भला अपने समाज अथवा देश के साथ भावनात्मक रूप से कैसे जुड़ेगा । विश्व बंधुत्व की बात भी तभी मायने रखती है, जब हम अपने पड़ोसी से निभाना सीखें ।
(क) सामाजिक जीवन में पड़ोस का क्या महत्त्व है ?
(ख) पड़ोसी के साथ संबंध रखना हमारे हित में किस तरह से है ?
(ग) हमें पड़ोसी से निभाने के लिए क्या-क्या करना चाहिए ?
(घ) ‘विश्वस्त सहायक’ से क्या अभिप्राय है ? पड़ोसी को विश्वस्त सहायक क्यों कहा गया है ?
(ङ) लेखक ने विश्व-बंधुत्व की बात किस संदर्भ में की है ?
(च) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए ।
उत्तर:
(क) सामाजिक जीवन का महत्त्वपूर्ण आधार पड़ोस है । हमारी सामाजिक सुरक्षा तथा सामाजिक जीवन की समस्त आनंदपूर्ण गतिविधियों में पड़ोस का महत्त्वपूर्ण स्थान है ।

(ख) किसी भी आकस्मिक आपदा अथवा आवश्यकता के समय अपने रिश्तेदारों तथा परिवार वालों को बुलाने में समय लगता है। ऐसे में पड़ोसी ही हमारे काम आते हैं। इसलिए पड़ोसी से अच्छे संबंध रखना हमारे हित में है ।

(ग) हमें अपने पड़ोसी से निभाने के लिए उससे अच्छे संबंध रखने चाहिएं, प्यार से रहना चाहिए, सहानुभूति रखना चाहिए तथा उसके सुख-दुख में साथ रहना चाहिए ।

(घ) विश्वस्त सहायक से अभिप्राय है – वह सहायक जिस पर विश्वास किया जा सके । पड़ोसी के साथ रहने के कारण हम उनकी अच्छाई और बुराई को जानते हैं । विपत्ति में हम अपने अच्छे पड़ोसी से मदद ले सकते हैं। इसलिए पड़ोसी को विश्वस्त सहायक कहा गया है।

(ङ) लेखक ने पड़ोसी के साथ अच्छे संबंध को विश्व-बंधुत्व के संदर्भ में जोड़ा है।

(च) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है- पड़ोसी के साथ हमारा संबंध |

खंड ‘ख’

प्रश्न 2.
निर्देशानुसार उत्तर लिखिए: 1 × 4 = 4
(क) उसके एक इशारे पर लड़कियाँ कक्षा से बाहर निकलकर नारे लगाने लगीं। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
(ख) उन्होंने जेब से चाकू निकाला और खीरा काटने लगे । (सरल वाक्य में बदलिए)
(ग) हालदार साहब को उधर से गुज़रते समय मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
(घ) बालगोबिन भगत जानते थे कि अब बुढ़ापा आ गया है। (आश्रित उपवाक्य छाँटकर उसका भेद लिखिए )
उत्तर:
(क) उसने एक इशारा किया और लड़कियाँ कक्षा से बाहर निकलकर नारे लगाने लगीं।
(ख) वह जेब से चाकू निकालकर खीरा काटने लगे ।
(ग) हालदार साहब उधर से गुज़रे तो उन्हें मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया ।
(घ) आश्रित उपवाक्य – अब बुढ़ापा आ गया है। भेद – संज्ञा आश्रित उपवाक्य ।

प्रश्न 3.
निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिए :
(क) माँ द्वारा भिखारी को भोजन दिया गया । ( कर्तृवाच्य में बदलिए)
(ख) वह कालीन बुनता है । (कर्मवाच्य में बदलिए)
(ग) आओ, अब चलते हैं । (भाववाच्य में बदलिए)
(घ) पुलिस के द्वारा चेतावनी दी गई। ( कर्तृवाच्य में बदलिए)
उत्तर:
(क) माँ ने भिखारी को भोजन दिया ।
(ग) आओ, अब चला जाए।
(ख) उसके द्वारा कालीन बुना जाता है ।
(घ) पुलिस ने चेतावनी दी।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों का पद परिचय लिखिए : 1 × 4 = 4
(क) वीरों की सदा जीत होती है ।
(ख) बच्चे की मुस्कान मनमोहक होती है।
(ग) प्रत्येक का अपना महत्त्व होता है ।
(घ) चलते-चलते लड़खड़ाने पर सहयोगी उसे सँभालते हैं ।
उत्तर:
(क) सदा – कालवाचक क्रिया विशेषण, ‘होती है’ क्रिया का विशेषण ।
(ख) मुस्कान – भाववाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, कर्म कारक ।
(ग) अपना – निजवाचक सर्वनाम, एकवचन, पुल्लिंग ।
(घ) चलते-चलते – रीतिवाचक क्रिया विशेषण, ‘लड़खड़ाने’ क्रिया का विशेषण ।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में अलंकार पहचान कर लिखिए- 1 × 4 = 4
(क) हेम कुंभ ले उषा सवेरे भरती बुलकाती सुख मेरे
मंदिर ऊंघते रहते जब जगकर रजनी भर तारा ।
(ख) फूले फिरते हों फूल स्वयं उड़ उड़ वृत्तों से वृत्तों पर ।
(ग) श्लेष अलंकार का एक उदाहरण लिखिए।
(घ) अतिश्योक्ति अलंकार का एक उदाहरण लिखिए ।
उत्तर:
(क) मानवीकरण अलंकार
(ख) उत्प्रेक्षा अलंकार
(ग) जे रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय ।
बारे उजियारो करै, बढ़े अंधेरो होय ||
(घ) कढ़त साथ ही म्यान तें असि रिपु तन ते प्रान ।

खण्ड ‘ग’

प्रश्न 6.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 1 × 4 = 4
मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फूँकार रही थी । आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं। दूर तो जाना नहीं था । भीड़ से बचकर, एकांत में नयी कहानी के संबंध में सोच सकने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख सकने के लिए टिकट सेकंड क्लास का ही ले लिया ।
गाड़ी छूट रही थी । सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर ज़रा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था । एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताज़े – चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे । डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे – जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों ।
(क) लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा ?
(ख) लेखक ने जिस अनुमान के लिए सेकंड क्लास का टिकट खरीदा था, वह गलत कैसे निकला ?
(ग) डिब्बे में बैठे सज्जन ने लेखक के आने पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की और लेखक ने उनके व्यवहार से क्या अनुमान लगाया ?
उत्तर:
(क) लेखक के सेकंड क्लास के टिकट खरीदने के कई कारण थे, मसलन उन्हें दूर नहीं जाना था, दाम भी बचाना था और खिड़की के निकट बैठकर प्राकृतिक दृश्य देखते हुए एकांत में नई कहानी के संबंध में सोचना था ।

(ख) लेखक ने यह अनुमान करके सेकंड क्लास का टिकट खरीदा था कि डिब्बा निर्जन होगा और वे एकांत में बैठकर नई कहानी के बारे में चिंतन करेंगे। लेकिन उस डिब्बे में एक बर्थ पर लखनऊ के नवाब बैठे थे । इस प्रकार लेखक का अनुमान गलत निकला ।

(ग) लेखक के आने पर डिब्बे में बैठे सज्जन के एकांत चिंतन में जैसे विघ्न उपस्थित हुआ हो, ऐसा लेखक ने महसूस किया। इसके बाद लेखक ने सोचा कि हो सकता है कि ये सज्जन भी उन्हीं की तरह कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे जैसी अपदार्थ वस्तु का शौकीन जान संकोच में पड़ गए हों ।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में लिखिए : 2 × 4 = 8
(क) ‘पानवाला एक हँसमुख स्वभाव वाला व्यक्ति है, परंतु उसके हृदय में संवेदना भी है।’ इस कथन पर अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
(ख) गर्मियों की उमस भरी शाम को भी बालगोबिन भुगत किस प्रकार शीतल और मनमोहक बना देते थे ?
(ग) मनीषियों से मिलने वाला ज्ञान किसका परिचालक है?
(घ) मन्नू भंडारी के पिता ने अपनी आर्थिक विवशताएँ कभी बच्चों को क्यों नहीं बताई होंगी ?
(ङ) बिस्मिल्ला खाँ जीवन भर ईश्वर से क्या माँगते रहे और क्यों ? इससे उनकी किस विशेषता का पता चलता है ?
उत्तर:
(क) पानवाला एक हँसमुख स्वभाव का व्यक्ति था । उसकी बातों में हँसी तथा व्यंग्य का पुट होता था । जब चश्मेवाले (कैप्टन) के बारे में लेखक ने पूछा कि क्या वह फौज में था तो पानवाला मज़ाक उड़ाता हुआ कहता है “ वह लँगड़ा क्या जाएगा. फौज में । पागल है पागल ।” लेकिन जब चश्मेवाले की मृत्यु हो जाती है तब वह उसकी मृत्यु से दुखी हो जाता है । इससे पता चलता है कि उसके हृदय में संवेदना भी है ।

(ख) भगत जी गरमियों की उमस भरी संध्या में अपने घर के आँगन में आसन जमा कर बैठ जाते थे। गाँव के कुछ प्रेमी लोग भी वहाँ आ जुटते। एक पंक्ति भगत जी गाते तथा प्रेमी मंडली उसे दोहराती | धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होने लगता । भगत जी का गायन सुनकर प्रेमीजन अपनी सुध-बुध खो बैठते । कुछ देर में भगत जी खँजड़ी बजाते हुए भक्तों के बीच नाचने लगते और वातावरण में मस्ती छा जाती ।

(ग) मनीषियों से मिलने वाला ज्ञान उनकी सहज संस्कृति के कारण ही हमें प्राप्त होता है। मनीषी सदैव ज्ञान की खोज में लगे रहते हैं। वे कभी भी संतुष्ट होकर नहीं बैठते ।

(घ) मन्नू भंडारी के पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटियाँ भटियारखाने में ही कैद होकर रह जाएं। उनकी इच्छा थी कि बेटियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर जीवन में ख्याति प्राप्त करें। इन्हीं सब कारणों से मन्नू भंडारी के पिता बच्चों को अपनी आर्थिक विवशता नहीं बताना चाहते थे ।

(ङ) बिस्मिल्ला खाँ जीवन भर ईश्वर से ‘सच्चा सुर’ माँगते रहे क्योंकि उनके लिए सुर ही सबसे बड़ी निधि थी। वे सच्चे कलाकार थे और सुर की साधना में ही उनका पूरा जीवन व्यतीत हुआ था। इससे उनकी इस विशेषता का पता चलता है कि वह विनम्र ईश्वर के भक्त तथा संगीत के सच्चे साधक थे।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: 2 × 3 = 6
बादल, गरजो!
घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ !
ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के-से पाले,
विद्युत छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले !
वज्र छिपा, नूतन कविता
फिर भर दो-
बादल, गरजो!
(क) कवि बादलों से क्या आग्रह कर रहा है और क्यों ?
(ख) बादलों का सौंदर्य स्पष्ट करते हुए बताइए कि उनकी तुलना किससे की गई है ?
(ग) कवि के अनुसार नूतन कविता कैसी होनी चाहिए ?
उत्तर:
(क) कवि बादलों से गरजने का आग्रह कर रहा है क्योंकि क्रांतिवीर बादल अपनी गरज और दहाड़ से समाज में क्रांति की चेतना भर देंगे। क्रांति से परिवर्तन आएगा तथा परिवर्तन से समाज का विकास होगा ।

(ख) प्रस्तुत कविता में बादलों का नाद सौंदर्य स्पष्ट हुआ है । जैसे- घेर – घे घोर गगन, धाराधर ओ, ललित ललित, काले घुँघराले । कवि ने बादल की तुलना बच्चों के काले घुँघराले बालों से की है।

(ग) कवि के अनुसार नूतन कविता ऐसी होनी चाहिए, जो हृदय में बिजली – रूपी क्रांति का आह्वान करे, बज्र की तरह कठोर बनाए और नवजीवन का संचार करे |

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में लिखिए : 2 × 4 = 8
(क) परशुराम विश्वामित्र से लक्ष्मण की शिकायत किन शब्दों में करते हैं ?
(ख) गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?
(ग) ‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता में ‘बाँस और बबूल’ किसके प्रतीक हैं ?
(घ) बादलों के लिए ‘नवजीवन’ विशेषण का प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है।
(ङ) संगतकार की आवाज़ में हिचक क्यों सुनाई देती है ?
उत्तर:
(क) परशुराम विश्वामित्र से लक्ष्मण की शिकायत करते हुए कहते हैं कि वह बालक बड़ा कुबुद्धि और कुटिल है । काल के वश में होकर यह अपने कुल का घातक बन रहा है । क्षण भर में ही वह काल का ग्रास बन जाएगा । इसे बचाना चाहते हो तो हमारे प्रताप और क्रोध के बारे में इसे बता दो ।

(ख) गोपियों ने उद्धव से कहा है कि वे योग की शिक्षा ऐसे लोगों को दें जिनके मन स्थिर नहीं हैं। जिनके हृदयों में श्रीकृष्ण के प्रति सच्चा प्रेम नहीं है। जिनके मन में भटकाव है, दुविधा है, भ्रम है तथा चक्कर है।

(ग) ‘यह दंतुरित मुस्कान’ कविता में ‘बाँस और बबूल’ काँटेदार पेड़ों के प्रतीक हैं ।

(घ) कवि ने बादलों के लिए ‘नवजीवन’ विशेषण का प्रयोग किया है। यहाँ बादल कवि का प्रतीक हैं तथा नवजीवन का भाव नवीन भाव और नवीन प्रेरणादायी विचारों से है ।

(ङ) संगतकार की आवाज़ में एक हिचक – सी प्रतीत होती है। संगतकार मुख्य गायक को सहयोग देता है। उसकी आवाज़ मुख्य गायक से कुछ धीमी होती है। अतः उसकी आवाज़ में एक हिचक – सी प्रतीत होती है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए: 3 × 2 = 6
(क) भोलानाथ संकट के समय में अपने पिता के पास न जाकर माता के पास क्यों जाता है ? ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
(ख) हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ और किस तरह हो रहा है?
(ग) ‘सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉल’ को देख लेखिका ने अपनी भावनाओं को कैसे अभिव्यक्त किया है ? ‘साना-साना हाथ जोड़ि … ‘ पाठ के आधार पर लिखिए ।
उत्तर:
(क) पाठ के अनुसार बच्चे का अपने पिता से अत्यधिक जुड़ाव था परंतु विपदा आने पर वह पिता के पास न जाकर अपनी माँ के पास जाता है। बच्चा माँ की शरण में अपने आप को अधिक सुरक्षित पाता है तथा माँ की गोद में ही शांति का अनुभव करता है। भोलानाथ वैसे तो अपने पिता के साथ ही सोता था, खाना भी पिता के हाथ से ही खाता था परंतु जब उस पर विपदा पड़ी और उसने भय महसूस किया तो माँ की गोद से बेहतर उसे और कुछ नहीं लगा क्योंकि माँ से बच्चों का भावनात्मक लगाव ही नहीं होता बल्कि माँ से वात्सल्य एवं स्नेह की प्राप्ति भी अधिक होती है। इसीलिए बच्चा प्रायः अति भय और प्रेम की स्थिति में माँ की ही शरण लेता है।

(ख) हिरोशिमा पर अण बम का प्रयोग किया गया था। विज्ञान के इस दुरुपयोग से मानव जाति क्रन्दन कर उठी थी। लाखों लोग क्षणभर में शव के रूप में परिवर्तित हो गए थे तथा रेडियोधर्मी किरणों से आक्रान्त असंख्य लोग असाध्य रोगी हो गए थे। मेरी दृष्टि में परमाणु बम, रसायनिक बम, लेज़र बम, हाइड्रोजन बम आदि संहारक अस्त्र बनाना विज्ञान का भयानक दुरुपयोग है। विश्व के अधिकांश देश शस्त्रों की दौड़ में मानव जाति का विनाश करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। आतंकवादी भी विज्ञान का दुरुपयोग करने में पीछे नहीं हैं। वे विज्ञान की सहायता से अपनी अनुचित माँगें मनवाने का प्रयास करते हैं। मनोरंजन के क्षेत्र में भी कई लोगों द्वारा विज्ञान का दुरुपयोग दृष्टिगोचर है। क्लोनिंग और कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया विज्ञान के दुरुपयोग का सशक्त प्रमाण है। इसके कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने लगा है। इसके अतिरिक्त कन्याभ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला है जिससे विश्व का लिंग अनुपात बिगड़ गया है। विज्ञान जहाँ वरदान है वहाँ अभिशाप भी है।

(ग) ‘सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉल’ की कल-कल करती आवाज़ और ठंडक ने लेखिका के मन की सारी तामसिक भावनाओं को धो डाला । लेखिका सत्य की अनुभूति से सराबोर हो उठी। जीवन की अनंतता का प्रतीक उस झरने को देखकर लेखिका में जीवन की शक्ति का अहसास हो रहा था । यह इस कदर प्रतीत हुआ कि जैसे लेखिका स्वयं भी देश और काल की सरहदों से दूर बहती धारा बन बहने लगी है ।

खण्ड ‘घ’

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबंध लिखिए: [10]
(क) प्लास्टिक मुक्त भारत
• हानियाँ
• विकल्प क्या हो
• किए जा रहे प्रयास

(ख) आत्मविश्वास और सफलता
• आत्मविश्वास से तात्पर्य
• आत्मविश्वास सफलता के लिए क्यों आवश्यक
• अहंकार और आत्मविश्वास में अंतर

(ग) मातृभाषा के प्रति अभिरुचि
• मातृभाषा से तात्पर्य
• घटती रुचि के कारण
• रुचि कैसे बढ़े
उत्तर:
(क) प्लास्टिक मुक्त भारत
प्लास्टिक हमारे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचा रहा है। प्लास्टिक पदार्थों से उत्पन्न कचरे का निस्तारण काफी कठिन होता है और पृथ्वी पर प्रदूषण में भी इसका बहुत अधिक योगदान है, जिससे यह एक वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। प्लास्टिक बैगों, बर्तनों और फर्नीचर के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से प्लास्टिक के कचरे में काफी वृद्धि हुई है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण जैसी भीषण समस्या उत्पन्न हो गई है। भारत ही नहीं बल्कि यह वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। अपने दैनिक जीवन में हम कुछ उपायों को अपनाकर प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक के सस्ते उत्पाद होने के कारण इसके उपभोग के हम इतने अभ्यस्त हो चुके हैं, कि इसके उपयोग को पूरी तरह से बंद नहीं कर सकते हैं। हालांकि हम प्लास्टिक उत्पादों के ऐसे उपयोग को आसानी से बंद कर सकते हैं, जिनके इकोफ्रेंडली विकल्प उपलब्ध हैं ।

बाजार से सामान खरीदते समय हम प्लास्टिक बैग की जगह जूट, कपड़े या पेपर से बने बैगों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ठीक इसी तरह पार्टियों और उत्सवों के दौरान हम प्लास्टिक के बर्तन के स्थान पर स्टील, कागज़, थर्माकोल या अन्य उत्पादों से बने वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं। जिसका आसानी से पुन: उपयोग और निस्तारण किया जा सके। प्लास्टिक मुक्त भारत की स्थापना के लिए भारत सरकार ने 2 अक्टूबर 2019 से वर्ष 2022 तक देश भर में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करने की योजना तैयार की है । इस योजना की शुरुआत देश के ऐसे शहरों और गाँवों से की जा रही है जो विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों और गाँवों की श्रेणी में आते हैं ।

(ख) आत्मविश्वास और सफलता
जीवन में सफलता के लिए आत्मविश्वास उतना ही आवश्यक है जितना मानव के लिए ऑक्सीजन तथा मछली के लिए पानी । बिना आत्मविश्वास के व्यक्ति सफलता की डगर पर कदम बढ़ा ही नहीं सकता।
आत्मविश्वास वह ऊर्जा है, जो सफलता की राह में आने वाली अड़चनों, कठिनाइयों एवं परेशानियों से मुकाबला करने के लिए व्यक्ति को साहस प्रदान करता है ।
वर्तमान समय में अगर हमें कुछ पाना है, किसी भी क्षेत्र में कुछ करके दिखाना है, जीवन को खुशी से जीना है, तो इन सबके लिए आत्मविश्वास का होना परम आवश्यक है 1 आत्मविश्वास में वह शक्ति है जिसके माध्यम से हम कुछ भी कर सकते हैं। आत्मविश्वास से हमारी संकल्प शक्ति बढ़ती है और संकल्प शक्ति से हमारी आत्मिक शक्ति बढ़ती है।

इमर्सन का कथन है, “संसार के सारे युद्धों में इतने लोग नहीं हारते, जितने कि सिर्फ घबराहट से ।” अतः अपने ऊपर विश्वास रखकर ही आप दुनिया में बड़े से बड़ा काम सहज ही कर सकते हैं । मधुमक्खी कण-कण से ही शहद इकट्ठा करती है। उसके छत्तों में भरा शहद उसके आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम का ही परिणाम है । दुनिया में ईश्वर ने सभी को अनंत शक्तियाँ प्रदान की हैं। हर किसी में कोई न कोई खास बात होती है। बस, ज़रूरत है अपने अंदर की उस खास शक्ति को पहचानने की, उसे निखारने की। जो काम दूसरे लोग कर सकते हैं, वो काम हम क्यों नहीं कर सकते! अपने आप पर भरोसा करने से ही दुनिया हम पर भरोसा करेगी।

(ग) मातृभाषा के प्रति अभिरुचि
जन्म लेने के बाद मानव जो प्रथम भाषा सीखता है उसे उसकी मातृभाषा कहते हैं । मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं भाषाई पहचान होती है । मातृभाषा यानी जिस भाषा में माँ सपने देखती है या विचार करती है वही भाषा उस बच्चे की मातृभाषा होती है । हमारी मातृभाषा हिंदी है।
गाँधीजी देश की एकता के लिए यह आवश्यक मानते थे कि अंग्रेजी का प्रभुत्व शीघ्र समाप्त होना चाहिए। वह अंग्रेजी के प्रयोग से देश में एकता के तर्क को नहीं मानते थे। उन्होंने कहा था, “यदि स्वराज अंग्रेजी बोलने वाले भारतीयों का और उन्हीं के लिए होनेवाला हो तो निःसंदेह अंग्रेजी ही राष्ट्रभाषा होगी। लेकिन अगर स्वराज करोड़ों भूखे मरने वालों का, करोड़ों निरक्षरों का, पिछड़ों व अंत्यजों का हो तो हिंदी ही एकमात्र राष्ट्रभाषा हो सकती है ।

” मातृभाषा के प्रति रुचि इसलिए घट रही है क्योंकि आज के समय में हर व्यक्ति नई-नई तरह की भाषाओं में रुचि ले रहा है। हर कोई अन्य भाषा सीखने के लिए उत्साहित रहता है । अपनी मातृभाषा में किसी को रुचि ही नहीं है । ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लोगों में दूसरी भाषा सीखने की रुचि बहुत बढ़ रही है जैसे कि भारतवर्ष में युवा पीढ़ी अंग्रेजी भाषा सीखने में ज़्यादा रुचि लेती हैं और अपनी मातृभाषा हिंदी को हीन भाषा समझती हैं । इसी प्रकार जिस व्यक्ति को अन्य भाषा नहीं आती वह भी दूसरे व्यक्ति की होड़ में अपनी भाषा को छोड़कर दूसरी भाषा के पीछे भाग रहा है। अगर हम अपनी मातृभाषा को नहीं अपनाएँगे तो यह मर जाएगी। हमें अपनी मातृभाषा में रुचि बढ़ाने के लिए लेख, कहानियाँ, कविताएँ, पुस्तकें आदि मातृभाषा में प्रकाशित करवानी चाहिएं। इससे हमारी मातृभाषा समृद्ध होगी ।

प्रश्न 12.
स्वरचित कविता प्रकाशित करवाने के लिए अनुरोध करते हुए किसी समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लगभग 80-100 शब्दों में लिखिए। [5]
उत्तर-
रोहिणी, दिल्ली
दिनांक : 1 मार्च, 20xx
श्रीयुत संपादक महोदय
हिंदुस्तान
नई दिल्ली।
विषय : स्वरचित कविता प्रकाशित करवाने के लिए पत्र ।
महोदय
निवेदन है कि आपके रविवारीय परिशिष्ट के लिए मैं अपनी लिखी एक कविता प्रकाशनार्थ भेज रहा हूँ । यह कविता आज की युवा पीढ़ी के भटकने की कविता है । इस कविता में मैंने पथभ्रष्ट युवा पीढ़ी की समस्याओं को उभारा है और इसका समाधान भी प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है। यह कविता आपको जरूर पसंद आएगी, ऐसा मेरा विश्वास है । कविता की अस्वीकृति की स्थिति में वापसी के लिए अपना पता लिखा लिफाफा भी भेज रहा हूँ ।
धन्यवाद
भवदीय
क० ख०ग०

अथवा

आपके मित्र के पिता सीमा पर शहीद हो गए। अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए मित्र को लगभग 80-100 शब्दों में पत्र लिखिए ।
उत्तर:
रोहिणी, दिल्ली
दिनांक : 2 मार्च, 20xx
प्रिय मित्र
नमस्कार !
मुझे अभी – अभी तुम्हारा दुख भरा पत्र प्राप्त हुआ। तुम्हारे पिता जी के सीमा पर शहीद होने के दुखद समाचार को पढ़कर मन वेदना से भर गया। दूसरी तरफ गर्व भी महसूस कर रहा हूँ कि अंकल अपने देश के लिए शहीद हो गए। ईश्वर की इच्छा के आगे किस का ज़ोर नहीं ।
पूज्य अंकल जी का मुझ पर विशेष स्नेह था। उनका मुस्कराता एवं खिला खिला चेहरा अब भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा है। जब पिछले दिनों मैं तुम्हारे घर आया था, तो वह देर रात तक मेरी पढ़ाई एवं भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते रहे थे । उनके द्वारा दिया गया मार्गदर्शन मेरे जीवन का प्रेरणा-स्रोत बन गया है।
मित्र ! अब तुम्हें हिम्मत से काम लेना होगा क्योंकि घर की ज़िम्मेदारियाँ तुम्हारे कंधों पर आ गई हैं। अपने को अकेला और निस्सहाय मत समझना । संकट के समय में मनोबल ही कार्य करता है ।
तुम्हारा अभिन्न मित्र
क० ख०ग०

प्रश्न 13.
टूथपेस्ट बनाने वाली कंपनी के लिए एक विज्ञापन 25-50 शब्दों में तैयार कीजिए । [5]
उत्तर:

बबूल टूथपेस्ट

  • कीमत कम फायदे अनेक
  • बूढ़े भी चने चबाएं ।
  • दाँतों से पायरिया हटाए ।
  • दाँतों तथा मसूड़ों को मज़बूत बनाए ।
  • मुँह की दुर्गन्ध दूर करें ।
  • कैविटी से बचाए ।

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अथवा

पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन 25-50 शब्दों में तैयार कीजिए ।

सुरक्षित पर्यावरण : सुरक्षित जीवन

  • अपने जीवन को बचाना है तो हमें एकजुट होकर पर्यावरण को सुरक्षित करना है ।
  • कल कभी नहीं आएगा, हम सबको मिल कर अभी से पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए सहयोग देना होगा ।
  • हमें पेड़ों को कटने से बचाना होगा और नए पेड़ लगाने होंगे ।

आइए मिलकर पर्यावरण को बचाएँ ।

 


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