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Balgobin Bhagat Question Answers Class 10 Hindi A Kshitij Book Chapter 8

 

 

NCERT Solutions for Class 10 Hindi A Kshitij Bhag 2 Book Chapter 8 बालगोबिन भगत Question Answers

 

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Class 10 Hindi Balgobin Bhagat Lesson 8– Extract Based Questions (पठित काव्यांश) 

 

1 –

बालगोबिन भगत मँझोले कद के गोरेचिट्टे आदमी थे। साठ से ऊपर के ही होंगे। बाल पक गए थे। लंबी दाढ़ी या जटाजूट तो नहीं रखते थे , किन्तु हमेशा उनका चेहरा सफ़ेद बालों से ही जगमग किए रहता। कपड़े बिलकुल कम पहनते। कमर में एक लंगोटीमात्र और सिर में कबीरपंथियों कीसी कनफटी टोपी। जब जाड़ा आता , एक काली कमली ऊपर से ओढ़े रहते। मस्तक पर हमेशा चमकता हुआ रामानंदी चंदन , जो नाक के एक छोर से ही , औरतों के टीके की तरह , शुरू होता। गले में तुलसी की जड़ों की एक बेडौल माला बाँधे रहते।

ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे। नहीं , बिलकुल गृहस्थ ! उनकी गृहिणी की तो मुझे याद नहीं , उनके बेटे और पतोहू को तो मैंने देखा था। थोड़ी खेतीबारी भी थी , एक अच्छा साफ़सुथरा मकान भी था।

किन्तु , खेतीबारी करते , परिवार रखते भी , बालगोबिन भगत साधु थेसाधु की सब परिभाषाओं में खरे उतरनेवाले। कबीर कोसाहबमानते थे , उन्हीं के गीतों को गाते , उन्हीं के आदेशों पर चलते। कभी झूठ नहीं बोलते , खरा व्यवहार रखते। किसी से भी दोटूक बात करने में संकोच नहीं करते , किसी से खामखाह झगड़ा मोल लेते। किसी की चीज़ नहीं छूते , बिना पूछे व्यवहार में लाते। इस नियम को कभीकभी इतनी बारीकी तक ले जाते कि लोगों को कुतूहल होता ! – कभी वह दूसरे के खेत में शौच के लिए भी नहीं बैठते ! वह गृहस्थ थे ; लेकिन उनकी सब चीज़साहबकी थी।

 

 

प्रश्न 1 – बालगोबिन भगत देखने में किस तरह के व्यक्ति थे?

() मँझोले कद के गोरेचिट्टे

() उनका चेहरा सफ़ेद बालों से ही जगमग किए रहता

(कमर में एक लंगोटीमात्र और सिर में कबीरपंथियों कीसी कनफटी टोपी पहनते

() उपरोक्त सभी

उत्तर – () उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 2 – गद्यांश में दी गई जानकारी के अनुसार बालगोबिन भगत को साधु क्यों नहीं कहा जा सकता था?

() क्योंकि वे लंबी दाढ़ी या जटाजूट नहीं रखते थे

() क्योंकि वे गृहस्थ व्यक्ति थे

() क्योंकि वे मस्तक पर हमेशा चमकता हुआ रामानंदी चंदन लगाते थे

() क्योंकि उनको खेतीबारी में कोई दिलचस्पी नहीं थी

उत्तर – () क्योंकि वे गृहस्थ व्यक्ति थे

 

प्रश्न 3 – बालगोविंद भगत किसकोसाहबमानते थे?

() रहीम

() तुलसीदास

() कबीर

() अपने गुरु को

उत्तर – () कबीर

 

प्रश्न 4 – बालगोविंद भगत कबीर जी के किन आदेशों को मानते थे?

() कभी झूठ नहीं बोलते , खरा व्यवहार रखते

() किसी से भी दोटूक बात करने में संकोच नहीं करते , किसी से खामखाह झगड़ा मोल लेते

() किसी की चीज़ नहीं छूते , बिना पूछे व्यवहार में लाते

() उपरोक्त सभी

उत्तर () उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 5 – बालगोविंद भगत की किन बातों का लोगों को कुतूहल होता?

() कभी झूठ नहीं बोलना , खरा व्यवहार रखना

() किसी से भी दोटूक बात करने में संकोच नहीं करना

() किसी से खामखाह झगड़ा मोल लेना

() कबीर जी के नियमों को बारीकी से अपने जीवन में अपनाना

उत्तर () कबीर जी के नियमों को बारीकी से अपने जीवन में अपनाना

 

2 –

आसाढ़ की रिमझिम है। समूचा गाँव खेतों में उतर पड़ा है। कहीं हल चल रहे हैं ; कहीं रोपनी हो रही है। धान के पानीभरे खेतों में बच्चे उछल रहे हैं। औरतें कलेवा लेकर मेंड पर बैठी हैं। आसमान बादल से घिरा ; धूप का नाम नहीं। ठंडी पुरवाई चल रही। ऐसे ही समय आपके कानों में एक स्वरतरंग झंकारसी कर उठी। यह क्या हैयह कौन है ! यह पूछना पड़ेगा। बालगोबिन भगत समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़े , अपने खेत में रोपनी कर रहे हैं। उनकी अँगुली एकएक धान के पौधे को , पंक्तिबद्ध , खेत में बिठा रही है। उनका कंठ एकएक शब्द को संगीत के जीने पर चढ़ाकर कुछ को ऊपर , स्वर्ग की ओर भेज रहा है और कुछ को इस पृथ्वी की मिट्टी पर खड़े लोगों के कानों की ओर ! बच्चे खेलते हुए झूम उठते हैं  ; मेंड़ पर खड़ी औरतों के होंठ काँप उठते हैं , वे गुनगुनाने लगती हैं ; हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते हैं ; रोपनी करने वालों की अँगुलियाँ एक अजीब क्रम से चलने लगती हैं ! बालगोबिन भगत का यह संगीत है या जादू ! भादो की वह अंधेरी अधरतिया। अभी, थोड़ी ही देर पहले मुसलधार वर्षा खत्म हुई है। बादलों की गरज , बिजली की तड़प में आपने कुछ नहीं सुना हो , किन्तु अब झिल्ली की झंकार या दादुरों की टर्रटर्र बालगोबिन भगत के संगीत को अपने कोलाहल में डुबो नहीं सकतीं।

 

प्रश्न 1 – गद्यांश में किस महीने का सुंदर वर्णन किया गया है?

() माघ

() आषाढ़

() अश्विन

() पोष

उत्तर () आषाढ़

 

प्रश्न 2 – बालगोबिन भगत किस तरह धान की रुपाई कर रहे हैं?

() समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़े , जल्दीजल्दी रुपए कर रहे हैं

() बारिश आने के डर से जल्दीजल्दी हाथ चला रहे हैं

() समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़े, उनकी अँगुली एकएक धान के पौधे को, पंक्तिबद्ध, खेत में बिठा रही है

() गाना गाते हुए मस्ती में लोगों के साथ मिल कर धान के पौधे की रुपए कर रहे हैं

उत्तर () समूचा शरीर कीचड़ में लिथड़े, उनकी अँगुली एकएक धान के पौधे को, पंक्तिबद्ध, खेत में बिठा रही है

 

प्रश्न 3 – गद्यांश में बालगोबिन भगत के गाने को क्यों कहा है कियह संगीत है या जादू‘?

() बच्चे खेलते हुए झूम उठते हैं

() मेंड़ पर खड़ी औरतों के होंठ काँप उठते हैं , वे गुनगुनाने लगती हैं

() हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते हैं ; रोपनी करने वालों की अँगुलियाँ एक अजीब क्रम से चलने लगती हैं

() उपरोक्त सभी

उत्तर – () उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 4 – बालगोबिन भगत के संगीत को कौन अपने कोलाहल में डुबो नहीं सकतीं?

() भादो की अंधेरी अधरतिया

() मुसलधार वर्षा , बादलों की गरज , बिजली की तड़प

() झिल्ली की झंकार या दादुरों की टर्रटर्र

() उपरोक्त सभी

उत्तर – () झिल्ली की झंकार या दादुरों की टर्रटर्र

 

प्रश्न 5 – गद्यांश से बालगोविंद के बारे में क्या पता चलता है?

() वे खेती अपनी मर्जी से करते थे

() उन्हें संगीत से बहुत प्यार था

() वे कहीं भी गाना गा सकते थे

() उपरोक्त सभी

उत्तर() उन्हें संगीत से बहुत प्यार था

 

3 –

बालगोबिन भगत की संगीतसाधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह ! कुछ सुस्त और बोदासा था , किन्तु  इसी कारण बालगोबिन भगत उसे और भी मानते। उनकी समझ में ऐसे आदमियों पर ही ज्यादा नज़र रखनी चाहिए या प्यार करना चाहिए , क्योंकि ये निगरानी और मुहब्बत के ज्यादा हकदार होते हैं। बड़ी साध से उसकी शादी कराई थी , पतोहू बड़ी ही सुभग और सुशील मिली थी। घर की पूरी प्रबंधिका बनकर भगत को बहुत कुछ दुनियादारी से निवृत्त कर दिया था उसने। उनका बेटा बीमार है , इसकी खबर रखने की लोगों को कहाँ फुरसत ! किन्तु मौत तो अपनी ओर सबका ध्यान खींचकर ही रहती है। हमने सुना , बालगोबिन भगत का बेटा मर गया। कुतूहलवश उनके घर गया। देखकर दंग रह गया। बेटे को आँगन में एक चटाई पर लिटाकर एक सफेद कपड़े से ढाँक रखा है। वह कुछ फूल तो हमेशा ही रोपते रहते , उन फूलों में से कुछ तोड़कर उस पर बिखरा दिए हैं ; फूल और तुलसीदल भी। सिरहाने एक चिराग जला रखा है। और , उसके सामने ज़मीन पर ही आसन जमाए गीत गाए चले जा रहे हैं ! वही पुराना स्वर , वही पुरानी तल्लीनता। घर में पतोहू रो रही है जिसे गाँव की स्त्रिायाँ चुप कराने की कोशिश कर रही हैं। किन्तु , बालगोबिन भगत गाए जा रहे हैं ! हाँ , गातेगाते कभीकभी पतोहू के नज़दीक भी जाते और उसे रोने के बदले उत्सव मनाने को कहते। आत्मा परमात्मा के पास चली गई , विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली , भला इससे बढ़कर आनंद की कौन बात ? मैं कभीकभी सोचता , यह पागल तो नहीं हो गए। किन्तु  नहीं , वह जो कुछ कह रहे थे उसमें उनका विश्वास बोल रहा थावह चरम विश्वास जो हमेशा ही मृत्यु पर विजयी होता आया है।

 

 

प्रश्न 1 – बालगोबिन भगत की संगीतसाधना का चरम उत्कर्ष किस दिन देखा गया?

() आषाढ़ मास में

() जिस दिन उनके बेटे की मृत्यु हुई

() जिस दिन वे ठण्ड में भी गाना गाए जा रहे थे

() जिस दिन वे लगातार सुबह से साम तक गाना गा रहे थे

उत्तर – () जिस दिन उनके बेटे की मृत्यु हुई

 

प्रश्न 2 – कौन अपनी ओर सबका ध्यान खींचकर ही रहती है?

() ठण्ड

() साधना

() संगीत

() मौत

उत्तर () मौत

 

प्रश्न 3 – बालगोविंद भगत किसके सामने ज़मीन पर ही आसन जमाए गीत गाए चले जा रहे थे?

() अपने पड़ोसियों की सभा के सामने

() अपने बेटे की लाश के सिरहाने बैठ कर

() अपने परिवार के सामने

() बरगद के पेड़ के सामने

उत्तर () अपने बेटे की लाश के सिरहाने बैठ कर

 

प्रश्न 4 – बालगोविंद भगत गातेगाते कभीकभी  किसके नज़दीक जा कर उसे रोने के बदले उत्सव मनाने को कह रहे थे?

() अपनी पत्नी

() गाँव की स्त्रियों

() अपनी बेटी

() पतोहू

उत्तर – () पतोहू

 

प्रश्न 5 – बालगोविंद भगत अपनी पतोहू को क्या कह कर तसल्ली दे रहे थे?

() जो होता है अच्छे के लिए होता है. परमात्मा किसी का बुरा नहीं करते

() आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली, भला इससे बढ़कर आनंद की कौन बात ?

() आत्मा को एक एक दिन परमात्मा के पास जाना ही होता है, दुःख की कोई बात नहीं

() उपरोक्त सभी

उत्तर – () आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली, भला इससे बढ़कर आनंद की कौन बात ?

 

4 –

बेटे के क्रियाकर्म में तूल नहीं किया ; पतोहू से ही आग दिलाई उसकी। किन्तु ज्योंही श्राद्ध की अवधि पूरी हो गई , पतोहू के भाई को बुलाकर उसके साथ कर दिया , यह आदेश देते हुए कि इसकी दूसरी शादी कर देना। इधर पतोहू रोरोकर कहतीमैं चली जाऊँगी तो बुढ़ापे में कौन आपके लिए भोजन बनाएगा , बीमार पड़े , तो कौन एक चुल्लू पानी भी देगा ? मैं पैर पड़ती हूँ , मुझे अपने चरणों से अलग नहीं कीजिए ! लेकिन भगत का निर्णय अटल था। तू जा , नहीं तो मैं ही इस घर को छोड़कर चल दूँगायह थी उनकी आखिरी दलील और इस दलील के आगे बेचारी की क्या चलती ?

बालगोबिन भगत की मौत उन्हीं के अनुरूप हुई। वह हर वर्ष गंगास्नान करने जाते। स्नान पर उतनी आस्था नहीं रखते , जितना संतसमागम और लोकदर्शन पर। पैदल ही जाते। करीब तीस कोस पर गंगा थी। साधु को संबल लेने का क्या हक ? और , गृहस्थ किसी से भिक्षा क्यों माँगे ? अतः , घर से खाकर चलते , तो फिर घर पर ही लौटकर खाते। रास्ते भर खँजड़ी बजाते , गाते जहाँ प्यास लगती , पानी पी लेते। चारपाँच दिन आनेजाने में लगते ; किन्तु इस लंबे उपवास में भी वही मस्ती ! अब बुढ़ापा गया था , किन्तु टेक वही जवानी वाली।

 

 

प्रश्न 1 – बालगोविंद भगत के बेटे को अग्नि किसने दी?

() बालगोविंद भगत ने

() पतोहू ने

(बालगोविंद भगत के पोते ने

(बालगोविंद भगत की पत्नी ने

उत्तर () पतोहू ने

 

प्रश्न 2 – श्राद्ध की अवधि पूरी हो जाने पर बालगोविंद भगत ने पतोहू के भाई को क्यों बुलाया?

() ताकि पतोहू अपने भाई के साथ चली जाए

() ताकि पतोहू दूसरी शादी कर सके

() ताकि पतोहू अपनी जिंदगी की दूसरी शुरुआत कर सके

() उपरोक्त सभी

उत्तर – () उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 3 – पतोहू भगत के चरणों में ही क्यों रहना चाहती थी?

() भगत जी वृद्ध थे। पतोहू के सिवा उनके परिवार में उनकी देखभाल के लिए कोई और नहीं था

() पतोहू भगत जी की सेवा उनकी देखभाल करना चाहती थी

() वह पुत्र की विधवा के रूप में घर में रहकर भगत जी का सहारा बनना चाहती थी

() उपरोक्त सभी

उत्तर () उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 4 –  “संबलशब्द का क्या अर्थ है?

() सहारा

() संभव

() मजबूत 

() हैरान

उत्तर – () सहारा

 

प्रश्न 5 – ‘बुढ़ापा गया था किंतु टेक वही जवानी वालीसे क्या आशय है?

() बालगोबिन वृद्ध हो गए थे

() बालगोबिन वृद्ध हो गए थे, परंतु उनके नितनियम में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं आया था

() बालगोबिन नितनियम में थोड़ा सा परिवर्तन आया

() बालगोबिन वृद्ध तो थे, परंतु उनके नितनियम भी बदल गए

उत्तर() बालगोबिन वृद्ध हो गए थे, परंतु उनके नितनियम में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं आया था