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7 Chakra Meditation in Hindi PDF | Download Free [2023]

दोस्तों यदि आप भी शरीर के सात चक्र के बारे में विस्तार से जानना चाहते है तो एकदम सही जगह पर आये है। आज की इस पोस्ट में हम आपको 7 Chakra Meditation in Hindi PDF मुफ्त में उपलब्ध करवाने वाले है, जिसे आप पोस्ट में दिए गए Download Link पर क्लिक करके आसानी से फ्री में Download कर सकते है।

हमारे शरीर में इन सात चक्रो की अहम भूमिका होती है। इन सात चक्रो को जागृत करने के लिए हमे रोजाना मैडिटेशन अवश्य करना चाहिए। इन सात चक्रो के जागृत होने से हमे अनोखी ऊर्जा प्राप्त होती है। यदि आप इस प्राप्त ऊर्जा का सही तरीके से अपने जीवन में उपयोग कर लेते है तो आप अवश्य ही सफलता प्राप्त करते है।

इस पोस्ट में हम आपको शरीर के 7 चक्र की Pdf उपलब्ध करवाने जा रहे है। यदि आप भी अपने जीवन में सफल होना चाहते है और मैडिटेशन करके अपने शरीर के सातों चक्रो को जागृत करना चाहते है तो इस पोस्ट को शुरू से लेकर अंत तक ध्यानपूर्वक जरूर पढ़े।

7 Chakra Meditation in Hindi PDF Details

7 Chakra Meditation in Hindi PDF
PDF Title 7 Chakra Meditation in Hindi PDF
Language Hindi
Category Book
Total Pages 288
PDF Size 11 MB
Download Link Available

7 Chakra in Body in Hindi

इस पुस्तक में शरीर के सातो चक्रो के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गयी है। हमारे शरीर सात चक्र निहित होते है, जो कि इस प्रकार है – मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूरक, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार चक्र। शरीर के इन सभी चक्रो को जागृत करने के लिए हमे मैडिटेशन करना अनिवार्य होता है।

अब हम शरीर के इन सभी चक्रो के बारे में विस्तृत रूप से एक-एक करके जान लेते है, जो कि इस प्रकर है –

1. मूलाधार चक्र

इसका स्थान मल-द्वार तथा अंडकोष के बीच में, मेरु दंड के बगल में सुषम्नाम से मिला हुआ है। यहा चार दाल का कमल है। उस पर ब्रह्माजी विराजमान है। इस चक्र के खुलने पर लेखन की सीधी प्राप्ति होती है। तिस दिन तक रोज तीस मिनट तक प्रकाश के साथ ध्यान करते रहने से यह चक्र खुल सकता है।

बिना प्रकाश की उपस्थिति में ध्यान करने से अनेक वर्षो तक का समय लग सकता है। यह साधक की साधना की क्षमता पर निर्भर करता है। इस चक्र के खिलने पर स्थूल शरीर की लगाव छूट जाता है।

2. स्वाधिष्ठान चक्र

यह चक्र पेडू के सामने मेरुदंड के बगल में सुषुम्णा से मिला हुआ है अर्थात पौरुष इन्द्रिय ओर नाभि के बीच भाग में यह चक्र स्थित होता है। इस चक्र में छह दाल का कमल है। उस पर गणेश जी विराजमान है। इस चक्र के खुलने से कवित्व शक्ति प्राप्त होती है अर्थात कविता करने की शक्ति प्राप्त होती है।

3. मणिपूरक चक्र

इस चक्र में 8 दल का कमल खिला हुआ है। उस पर वृद्ध रूद्र का स्वरुप अपनी शक्ति के साथ विराजमान है। इस चक्र के खुलने पर अर्थात सक्रीय होने पर शाप तथा वरदान देने की सीधी प्राप्त होती है। अर्थः मरे हुए जीव को जीवित कर देना तथा जीवित को शाप देकर शरीर रहित कर देना आदि।

यह चक्र नाभि के पास में मेरुदंड के पास सुषुम्णा से मिला हुआ है। इस चक्र के साथ कारण शरीर का लगाव रहता है। इस चक्र के खुलने पर कारण शरीर से लगाव छूट जाता है और महाकारण शरीर से लगाव हो जाता है।

4. अनाहत चक्र

इस चक्र में 12 दल का कमल खिला होता है। उस कमल पर आत्माराज विष्णु भगवान के स्वरुप हाथो में शंख, चक्र, गदा, पदम् लिए हुए, आपकी तरफ करके रुख करके अर्थात आपके मुँह की ओर मुँह करके विराजमान है। यहाँ पर आत्मदर्शन सुगमता से प्राप्त होता है।

इस चक्र के खुलने पर चार प्रकार के ज्ञान की प्राप्ति होती है। ज्ञान, विज्ञान, तत्वज्ञान और आत्मज्ञान। इस चक्र के खुलने पर अद्भुत और अनुपम अनुभूति की प्राप्ति होती है और सारी शंकाये समाप्त हो जाती है अर्थात कोई भी प्रश्न कल्पना में आते ही उसका उत्तर ह्रदय में स्वतः ही आ जाता है।

5. विशुद्धि चक्र

इस चक्र में सोलह दल का कमली खिला हुआ होता है। उस पैर असंख्य भुजा वाली महाशक्ति विराजमान रहती है। जो अत्यन्तं कोमल, नम्र तथा महादयालु स्ववभाव की है।

इस चक्र का स्थान कंठ के नीचे थोड़ा सा गड्डा है, उसके नीचे तथा ह्रदय के चार अंगुल ऊपर मेरुदंड के पास सुषुम्णा से मिला हुआ है।

6. आज्ञा चक्र

इस चक्र को गुरु चक्र भी कहते है। यह चक्र आपकी दोनों आँखों के बिच जहां आप टिका या तिलक लगाते है, वही है। इस चक्र में दो दल का कमल खिला होता है। उस पर सूक्ष्म रूप में सदा शिव विराजमान होते है।

इस चक्र के खुले पर आपको बहुत सी शक्तियों की अनुभूति होती है, जिसमे मुख्य दो शक्तियों के नाम लिखे जाते है। पहला – अणिमा, गरिमा, लघिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति तथा दूसरा स्वर्थीसाधन सिद्धि। जो आठ प्रकार की सिद्धिया परमात्मा से प्राप्त की जाती है, वे सभी आठों सिद्धियाँ यही रहती है।

7. सहस्रार चक्र

यह चक्र शरीर का सब अंतिम चक्र होता है। सहस्रार शब्द से तात्पर्य है हजार या अनंत। इस चक्र के प्रमुख देवता भगवान शिव है। इस चक्र में एक हजार दल का कमल खिला होता है। यह हमारे शरीर का सबसे शक्तिशाली चक्र होता है।

FAQs: 7 Chakra Meditation in Hindi PDF

7 Chakra Meditation in Hindi PDF Free Download कैसे करें?

यदि आप शरीर के सात चक्र की पुस्तक Pdf फॉर्मेट में डाउनलोड करना चाहते है तो पोस्ट में दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करके आसानी से फ्री में दोव्न्लोड कर सकते है।

7 चक्र जागृत होने पर क्या होता है?

यदि आप अपने शरीर में इन सातों चक्रों को जागृत कर लेते है तो आपको ऊर्जा के रूप में शक्ति प्राप्त होती है,, जिसके सहायता से आप अपने आप को अनुभव कर सकते है। तथा अपने शरीर में निहित ऊर्जा को जीवन की सही दिशा में लगाकर सफल बन सकते है।

सबसे पहले कौन सा चक्र जाग्रत होता है?

शरीर के सातों चक्रो में से मूलाधार चक्र सबसे पहले जागृत होता है।

Conclusion:-

इस पोस्ट में 7 Chakra Meditation in Hindi PDF मुफ्त में उपलब्ध करवाई गयी है। साथ ही शरीर के 7 चक्र के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है। उम्मीद करते है कि 7 Chakra Hindi Pdf Download करने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हुई होगी।

यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी। यदि आपको 7 Chakra Healing in Hindi Pdf Download करने में किसी भी प्रकार की समस्याआ रही हो तो कमेंट करके जरूर बताये। साथ ही इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

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