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लेजर डायोड क्या है ? कार्यविधि |

डायोड लेजर पर टिप्पणी लिखिए ?

LASER DIODE IN HINDI

लेजर डायोड एक Semiconductor device होता है जो P – n Junction के उपयोग से बनाया जाता है। लेजर डायोड को बनाते समय एक Crystal का उपयोग किया जाता है ओर इस Crystal को एक क्षेत्र बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें एक क्षेत्र जो धन आवेशित (+) रहता हैं। उसे P – type तथा जो ऋणआवेशित (-) रहता हैं उसे n – type क्षेत्र कहते हैं। तथा दोंनो P – type और n – type मिलाकर एक जंक्शन बनाते हैं जिसे P n जंक्शन कहते हैं।

लेजर डायोड इस P – n जंक्शन का उपयोग करके एक Coherent Light emit करता है। यह Coherent Light एक Process को Follow करके emit की जाती है। जिसे ” Light Amplification by Stimulated emission of Rotation ” के नाम से जाना हैं इसे Short में ” LASER ” कहते हैं। तथा क्योंकि इसमें P – n Junction का उपयोग किया जाता है LASER Produce करने के लिए इसलिए इसे लेजर डायोड कहते हैं।

Sunlight या फिर किसी अन्य Source से आने वाली लाईट की सभी waves की wavelength और उनका Phase एक समान नहीं होता है अतः उनका use करने के लिए wavelength और उनका Phase same होना चाहिए। लेजर डायोड इस लाईट से एक narrow beam produce करता हैं जिसमें सभी waves की wavelength एक समान होती है तथा सभी एक Phase में होती हैं। इस प्रकार वे सभी एक साथ travel करती है और जो beam Produce होता है वह भी bright होता है तथा उसको किसी भी Point पर Focus किया जा सकता है।

लेजर डायोड की कार्य विधि | Working Of laser diode

 लेजर डायोड की working तीन Process में होती है।

(1) absorption

(2)spontaneous emission

(3) stimulated emission

(1) Absorption :-

इस Process को समझने के लिए हम दो Energy level को assume करेंगे  Lower energy level (E1)  तथा Higher energy level (E2) .

अब हम assume करेंगे की atom Lower energy state में है अर्थात हम assume करेंगे की electronics E1 energy  state में है। अब अगर atom को Lower Energy state से Higher energy state में आना है तो उसे दोनों के बिम का Energy difference पार करना होगा जो E2 – E1 के बराबर होगा। E2 – E1 को पार करने के किसी बाहरी source से atom को energy Provide करते हैं।

इसके लिए एक electromagnetic wave जिसकी Frequency है से atom को excited किया जाता है जो electron को पर्याप्त energy देता है जिससे electron E2 – E1 gap को पार करके Higher Energy State E2 में चला जाता है इस Process को absorption Process कहते हैं। जिसमें atom energy absorb करके Lower energy state (E1) से Higher energy state (E2) में जाता है।

(2) Spontaneous emission :-

अब जो atom energy level E2 में है वह absorption के कारण है अब यह E2 से E1 में जायगा जब इसका Lifespan खतम हो जाएगा अब यह E2 से E1 में जाते time energy emit करेगा तथा यह emit energy E2 – E1 के बराबर होगी Means दोनों दे Energy difference के बराबर होती है। उत्सर्जित (emitted) energy Electromagnetic wave की form में होगी जो कि Photon generate करेगी इस पूरी Process को Spontaneous emission कहते हैं जिसमें electron E2 से E1 में अर्थात ground level पर वापस आता हैं।

(3) Stimulated emission :-

   जब absorption Process के बाद एटम Higher energy level अर्थात E2 पर होता है तथा इसके Life span के खत्म होने से पहले ही अगर इसे एक electromagnetic wave से energy Provide की जाए जिसकी Freguency , Spontaneously emitted atom की Freguency के बराबर हो तो यह wave atom को excited कर देगा तथा atom का transition E2 से E1 में होने लगेगा।

इस Process के दौरान atom एक ओर extra Photon Produce करेगा means two Photon Produce होंगे इस transition में। तथा इस Process में एक Partially reflecting mirror का उपयोग किया जाता है जो atom के movement में help करता है तथा ज्यादा Photon Produce करता है। इस प्रकार इस Process में emitted Photon तथा incident Photon एक ही Phase में होते हैं इसलिए इस प्रकार का emission एक monochromatic bright Light generate करता है।

लेजर डायोड की बनाबट | Construction of laser diode

एक लेजर डायोड P – type मटेरियल , N – type मटेरियल तथा मेटल Contact से मिलकर बना होता है जिसमें Input तथा Output terminals होते हैं। Input terminals को Metal Plate से कनेक्ट किया जाता है जो P – n जंक्शन के बिम में होती है P – type तथा N – type मटेरियल के बिम एक Intrinsic Region का उपयोग किया जाता है जो active Region को ज्यादा Volume Provide करता है

ज्यादा मात्रा में होल्स एवं इलेक्ट्रॉन्स जंक्शन पर संचय या मिश्रण कर सके। इस प्रकार ज्यादा मात्रा में होल्स तथा इलेक्ट्रॉन्स के recombine होने से ज्यादा Output Power generate होती है तथा इस प्रकार एक ज्यादा Power का Leam प्राप्त होता है जिसे किसी Optical Lens (लैंस) की सहायता से फोकस किया जाता है तथा पूरी P.N Junction को एक Metal के अन्दर फिट किया जाता हैं।

लेजर डायोड की Property :-

(1) Brightness (चमक) :- लेजर डायोड से Produce Light High intensity तथा ज्यादा Power वाली Light होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लेजर डायोड में लगातार reflections होते हैं। जिससे High intensity तथा ज्यादा Power वाली Light Produce होती है।

(2) Coherence (एकजुटता) :- किसी Source से Provide Light की wavelength same Phase में नहीं होती है लेकिन लेजर डायोड से emitted सभी Light wave की wavelength same Phase में होती है जिससे यह एक same Phase वाली wavelength की beam Produce करता है।

(3) Monochromaticity (एकवर्णिता) :- लेजर डायोड द्वारा emitted Light monochrome nature की होती है। इसका मतलब है कि emitted Light की Single wavelength होती है। जो कि यह denote करती है कि emitted radiation single Colour की है।

(4) Directionality (दिशात्मक) :- लेजर डायोड द्वारा emitted Radiation एक ही दिशा में आने वाली है अर्थात उन्हें जहाँ फोकस किया जाता है उसी दिशा में बड़ती है कोई Divergenic show नहीं करती हैं।

लेजर डायोड के लाभ :-

  1. लेजर डायोड High efficiency वाली Light generate करता है।
  2. यह size में छोटा होता है इसलिए बेटर handling provide करता है।
  3. लेजर डायोड की Operational power दूसरे Light emitting instrument से कम होती है।

लेजर डायोड की हानियाँ :-

  1. यह आंखों की सुरक्षा के लिए खतरनाक होता है क्योंकि High density Light provide करता है।
  2. यह ज्यादा Costly होता है।

लेजर डायोड के उपयोग :-

  1. Telecommunication में।
  2. Defence Industries में।
  3. Optical fibre Communication में लेजर beam का उपयोग होता है क्योंकि इसमें Highly focused beam का उपयोग होता है।
  4. इसका उपयोग लेजर प्रिंटर में भी किया जाता है।

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