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भस्म आरती: शिवजी अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते है, शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है – Hindi Fact News

शिवजी जो कि भारत के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक है जिन्हें भारत में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है जिन्हें सृष्टि के पालनहार भी बोलते हैं वैसे तो शिवजी के बहुत सारे रूप हैं और शिव जी को समझना नामुमकिन है क्योंकि हमारे हिंदू धर्म के सभी देवताओं में शिवजी का रूप सबसे ज्यादा अलग है जहां अलग-अलग देवता अपने तन पर अनेकों प्रकार के सुंदर-सुंदर आभूषण और सुंदर कपड़े पहने रखते हैं वही शिवजी महाराज सबसे अलग अपने शरीर पर हिरण या फिर बाघ की छाल पहने रखते हैं.

वहीं उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे कि यह सन्यासी का रूप हो लेकिन जितने शिवाजी महाराज दिखने में सरल और सीधे लगते हैं लेकिन उनके रहस्य और भी ज्यादा खतरनाक और गहरे हैं ऐसा बोला जाता है कि शिवजी को बहुत ही जल्द गुस्सा आ जाता है और वह बहुत ही जल्दी खुश भी हो जाती हैं लेकिन दोस्तों अपने अक्सर सुना होगा या फिर देख भी होगा कि जो हमारा उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर है वहां पर हमेशा भस्म आरती होती है मतलब कि वहां के जो शिवजी महाराज को भस्म से नहलाया जाता है.

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वही आप यह भी पढ़ने आ रहे हैं कि शिव जी को राख बहुत ही ज्यादा प्रिय है वह हमेशा भस्म से ही स्नान करते हैं और आपने अनेकों साधु संतों को भी आपने भस्म ने नहाते हुए तो जरूर देखा होगा लेकिन अब यहां पर सवाल ये उठता है कि शिवजी को भस्म इतनी ज्यादा प्रिया क्यों है और उन्हें भस्म से ही क्यों नहलाया जाता है क्या कारण है इसके पीछे का तो.

चलिए आज की इस छोटी सी पोस्ट( शिवजी अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते है ) में जानते हैं कि शिवजी महाराज को भस्म से क्यों नहलाया जाता है और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में जब शिवजी को भस्म से नहलाया जाता है तो वहां पर महिलाओं को जाने की इजाजत क्यों नहीं होती है इन सभी की बात करते हैं आज की इस पोस्ट में |

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शिवजी अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते है: शिवजी को भस्म से क्यों नहलाया जाता है और शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है

Table of Contents

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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्यों और कैसे की जाती है

दोस्तों उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में हर सुबह 4:00 बजे भस्म आरती की जाती है मतलब की शिवजी को भस्म से नहलाया जाता है हालांकि पहले उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्मशान घाट से किसी व्यक्ति की चिता की राख को शिवजी महाराज को नहलाने के लिए लाया जाता था और ऐसा माना जाता था कि जिस व्यक्ति की चिता की राख से शिवजी महाराज को नहलाया जाता है उस व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है और उस व्यक्ति की मुक्ति शिवजी महाराज तुरंत कर देते हैं.

लेकिन दोस्तों अब इस परंपरा को पूरी तरह से बदल दिया गया है पहले तो किसी व्यक्ति की चिता की लाश की राख से शिवाजी महाराज को नहलाया जाता था लेकिन आजकल उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिव जी महाराज का भस्म अभिषेक करने के लिए अलग-अलग प्रकार की लड़कियों और गाय के गोबर से बने हुए कण्डो से और भी बहुत सारी अलग-अलग चीज डालकर भस्म तैयार की जाती है.

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जो कि इतनी ज्यादा लाभदायक होती है कि जो कि शरीर के लिए भी काफी ज्यादा लाभदायक होती है और जिसे खाने पर भी ये काफी ज्याद स्वादिष्ट लगती है और उस भस्म को कपड़े से छानकर रोज सुबह 4:00 शिवजी महाराज का भस्म अभिषेक किया जाता है और उस समय महिलाओं को अंदर जाने की इजाजत नहीं होती है ।

भस्म आरती के दौरान महिलाएं अंदर क्यों नहीं जा सकती है 

दोस्तों जब उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रोज सुबह 4:00 बजे महाकालेश्वर महाराज की भस्म आरती होती है तब वहां पर महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं होती है क्योंकि हमारे पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शिव का भस्म अभिषेक होता है तो वह बिना कपड़ों के रहते हैं और वह पूरी तरह से नंगन हालत में रहते हैं ऐसे में महिलाएं उनके आसपास भी नहीं भटक सकती हैं.

शिवजी अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते है: शिवजी को भस्म से क्यों नहलाया जाता है और शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है

और ऐसा भी माना जाता है कि जब शिवजी महाराज का भस्म अभिषेक होता है तो उनका स्वरूप विशाल होता है और उनका असली महाकालेश्वर स्वरूप देखने को मिलता है जो की देखने में बहुत ही ज्यादा खतरनाक और डरावना लगता है जिसे महिलाओं के लिए देखना डर का एहसास करा सकता है इसीलिए महिलाओं को भस्म आरती के दौरान उज्जैन महाकालेश्वर के दर्शन करने की इजाजत नहीं होती है।

लेकिन दोस्तों अब सवाल यह उठता है कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में और बाकी बहुत सारे साधु संतों को भी अपने राख से नहाते हुए देखा होगा लेकिन अब यहां पर सवाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार महाकालेश्वर मंदिर में भस्म अभिषेक क्यों किया जाता है और क्यों साधु संत जो की शिवाजी महाराज के उपासक होते हैं वह भस्म से नहाते हैं क्या कारण है इसके पीछे ?

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इसके पीछे दो कारण दिए जाते हैं:-

पहला कारण 

दोस्तों ऐसा माना जाता है कि इस सृष्टि को भगवान ब्रह्मा जी ने बनाया है और इस सृष्टि के पालनहार पालन करता भगवान विष्णु है और शिवाजी महाराज को इस सृष्टि के विनाश करता भी बोला जाता है और दोस्तों ऐसा मानना जाता है कि जब यह सृष्टि के चार युगों से गुजर जाएगी तब इस सृष्टि का अंत हो जाएगा और यह पूरी सृष्टि राख में बदल जाएगी और वह पूरी राख भगवान शिव में समा जाएगी

मतलब कि जब इस सृष्टि का अंत होगा तब यह सृष्टि राख में बदल जाएगी और वह भगवान शिव में समा जाएगी इसके बाद दोबारा भगवान ब्रह्मा जी एक बार फिर सृष्टि का सृष्टि की रचना करेंगे और फिर भगवान विष्णु सृष्टि का पालन करेंगे और जब चार युग फिर से खत्म हो जाएंगे तब यह दूसरी सृष्टि भी भगवान शिवजी में समा जाएगी

यह प्रक्रिया ऐसी ही चलती रहेगी इसीलिए भगवान शिव हमेशा राख में स्नान करे हुए रहते हैं या फिर उज्जैन के महाकालेश्वर के मंदिर में उन्हें भस्म से नहलाया जाता है क्योंकि जब इस सृष्टि का अंत हो जाएगा तो यह पूरी सृष्टि राख में बदलकर भगवान शिव में समा जाएगी तो ऐसा भी बोला जाता है की राख से नहाने से राख हमारे शरीर के सभी रोम छिद्रों को बंद कर देती है जिससे कि ना तो शरीर की गर्मी बाहर निकाल पाती है और ना ही शरीर की सर्दी बाहर निकाल पाती है जिससे व्यक्ति को गर्मियों के दिनों में गर्मी नहीं लगती है और सर्दियों के दिनों में सर्दी नहीं लगती है |

और आप जानते हैं कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर वास करते हैं इसीलिए उन्हें भस्म से नहलाया जाता है ताकि उन्हें गर्मी के दिनों में गर्मी ना लगे और सर्दी के दिनों में सर्दी ना लगे और उनका शरीर का तापमान हमेशा नियंत्रित रहे और उन्हें गुस्सा ना आए और वह हमेशा शांत रहें और अपने भक्तों की हमेशा मदद करते रहे इसीलिए उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की जाती है शिवाजी महाराज को खुश रखने के लिए और उनका गुस्सा शांत करने के लिए |

शिवजी अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते है, शिवजी को भस्म से क्यों नहलाया जाता है

दूसरा कारण

दोस्तों उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रोज भस्म आरती होने के पीछे का दूसरा सबसे बड़ा कारण ये भी है कि जब माता सती के पिता द्वारा शिवजी महाराज का अपमान किया गया तब माता सती उस अपमान को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने गुस्से में आकर अपने आप को हवन कुंड की जलती हुई अग्नि में समा लिया और जलने से उनकी अकाल मृत्यु हो गई.

जब ये सब बातें भगवान शिव को पता चली तो वह बहुत ज्यादा क्रोधित होगये और वह गुस्से में वहां पर आए और अपनी सती माता के शरीर को उठाकर ब्रह्मांड के हर कोने में भटकने लगे उस समय गुस्से में उनकी आखे लाल थी.

उस समय शिवजी महाराज से सृष्टि को खतरा हो सकता था क्योंकि उनका गुस्सा उस समय चरम पर था इसीलिए सृष्टि के पालन कर्ता विष्णु भगवान ने कहानियों के अनुसार माता सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से 52 टुकड़ों में बांट दिया और जहां-जहां पर माता सती के शरीर के टुकड़े गिरे वह-वहां पर ही शिवपीठ बन गए.

और माता सती के टुकड़े होने के बाद शिव जी महाराज के हाथ में केवल माता सती की भस्म बच्ची जिसे उन्होंने अपने शरीर पर लगा लिया और उन्होंने कहा कि सती सदा मेरे साथ रहेगी और उनके साथ है और जैसे ही शिवजी महाराज से राख को अपने शरीर से लगाया तो भस्म लगाने के बाद उनका गुस्सा शांत हो गया और उन्हें दुबारा याद आया की इस सृष्टि के रचयिता वही है इसीलिए जो भी धरती पर आया है उसकी मृत्यु होनी निश्चित है.

दोस्तों बहुत सी हमारी धार्मिक कथाओं के अनुसार यह भी बोला जाता है कि जब शिवाजी महाराज को बहुत ज्यादा गुस्सा आया और वह ब्रह्मांड में इधर-उधर माता सती को लेकर भटक रहे थे तब विष्णु भगवान ने इस सृष्टि को बचाने के लिए माता सती के शरीर को राख में बदल दिया और जब गुस्से में आकर शिवाजी महाराज ने देखा की माता सती के शरीर को विष्णु भगवान ने राख में बदल दिया है

तभ वो और भी ज्यादा गुस्सा हो गए और गुस्से में और माता सती की याद में उन्होंने उस राख को अपने शरीर पर लगा लिया और जैसे ही उन्होंने अपनी शरीर पर राख को लगाया तो उनका मन बहुत ही ज्यादा शांत हो गया और उनका गुस्सा भी शांत हो गया और वह बाद में सृष्टि के नियम को भी दोबारा समझ गए इसीलिए शिव जी महाराज के गुस्से को शांत करने के लिए और उन्हें हमेशा प्रसन्न रखने के लिए उन्हें भस्म से नहलाया जाता है और आरती की जाती है |

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शिवजी /शिवलिंग को जल क्यों चढ़ाया जाता है 

दोस्तों आपने सुना भी होगा कि हमे रोज शिवजी को जल समर्पित करना चाहिए लेकिन अब यहां पर सवाल यह उठता है कि शिवजी महाराज को जल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई और उन्हें रोज जल से नहलाना जाता है और क्यों शिवलिंग को रोज जल से नहलाया जाता है तो दोस्तों इसका पीछे का कारण यह है कि.

जब पुरानी कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन चल रहा था तब उस समय समुद्रमंथन से जहर और अमृत दो निकले थे और उसे जहर को पीकर ही अमृत को पिया जा सकता था और अगर इस जहर की एक बूंद भी धरती पर गिरती तो इस धरती का समय नाश हो सकता था.

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इसीलिए सभी देवताओं ने मिलकर शिवजी महाराज से गुजारिश की कि वह इस विष को पी लें ताकि सृष्टि का अंत होने से बच जाए इसीलिए जब शिव जी महाराज ने उस विष को पिया तो उनके शरीर का तापमान काफी ज्यादा बढ़ने लगा और उन्हें कैलाश पर्वत की बर्फीली वादियों में भी बहुत ज्यादा गर्मी लगने लगी और पूरा कैलाश शिवजी महाराज के पसीने से तरों तार हो गया.

तब देवताओं ने शिवाजी महाराज की गर्मी को दूर करने के लिए उन्हें सभी देवताओं ने मिलकर उन्हें जल से अभिषेक करवाया जिससे शिव जी महाराज को शांति मिली और तभी से शिवाजी महाराज को जल से नहलाना और उनके ऊपर जल समर्पित करने की परंपरा शुरू हो गई और इसी वजह से आज भी हम शिवाजी महाराज को रोज जल समर्पित करते हैं |

दोस्तों यही कुछ ऐसे कारण है जिसकी वजह से रोज उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह 4:00 बजे भस्म आरती होती है और भस्म आरती के दौरान महिलाओं को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जाती है और इसके पीछे की पूरी क्या कहानी है मैंने आपको इस पोस्ट के ऊपर बता दी है |

निष्कर्ष

दोस्तों में आशा करता हूं कि आपको यह मजेदार जानकारी जरूर पसंद आई होगी मैंने आपको इस पोस्ट के अंदर बड़ी ही आसान और सरल भाषा में हमारे धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शिवाजी महाराज को भस्म से क्यों नहीं लाया जाता है यह बताया है और मैंने आपको इस पोस्ट के अंदर आसान भाषा में यह भी बताया है कि हम शिवजी को रोज जल समर्पित क्यों करते हैं इसीलिए अगर आपको इस पोस्ट से थोड़ा बहुत भी कुछ सीखने को मिला हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों से शेयर जरूर करें और कमेंट में एक बार ओम नमः शिवाय भी जरूर लिखें |

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