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कैसे बनता है रेडियो नाटक Question Answers

 

 

CBSE Class 12 Hindi Core Abhivyakti Aur Madhyam Book Chapter 12 कैसे बनता है रेडियो नाटक Question Answers

Kaise Banta Hai Radio Natak Class 12 – CBSE Class 12 Hindi Core Abhivyakti Aur Madhyam Book Chapter 12 Kaise Banta Hai Radio Natak Question Answers. The questions listed below are based on the latest CBSE exam pattern, wherein we have given NCERT solutions of the chapter, extract based questions, multiple choice questions, short and long answer questions. 

सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक पाठ 12 कैसे बनता है रेडियो नाटक प्रश्न उत्तर | इस लेख में NCERT की पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर  तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों का व्यापक संकलन किया है।

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कैसे बनता है रेडियो नाटक पाठ पर आधारित प्रश्नोत्तर (Question and Answers)

प्रश्न 1 – दृश्य श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम की क्या सीमाएं हैं? इन सीमाओं को किस तरह पूरा किया जा सकता है?
उत्तर – दृश्य श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम की निम्नलिखित सीमाएं हैं –
दृश्य श्रव्य माध्यम में हम नाटक को अपनी आंखों से देख भी सकते हैं और पात्रों के संवादों को सुन भी सकते हैं परन्तु केवल श्रव्य माध्यम में हम सुन सकते हैं उसे देख नहीं सकते।
दृश्य श्रव्य माध्यम में हम पत्रों के हाव भाव देखकर उनकी दशा का अनुमान लगा सकते हैं परन्तु श्रव्य माध्यम में ऐसा कर पाना कठिन होता है।
दृश्य श्रव्य माध्यम में पात्रों के सुंदर वस्त्रों को देखा जा सकता है और पात्रों के सौंदर्य को देख सकते हैं परन्तु श्रव्य माध्यम में हम इनकी केवल कल्पना ही कर सकते हैं।
दृश्य श्रव्य माध्यम में किसी भी दृश्य तथा वातावरण को देखकर उस जगह का आनंद उठा सकते हैं परन्तु श्रव्य माध्यम में हर दृश्य को प्रस्तुत करने के लिए ध्वनि व् संगीत की सहायता ली जाती है।
दृश्य श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम में समय की सूचना तथा पात्रों के चरित्र का उद्घाटन भी संवादों के माध्यम से ही होता है।
दृश्य श्रव्य माध्यमों की तुलना में श्रव्य माध्यम की सभी सीमाओं को ध्वनि व् संगीत के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है।

प्रश्न 2 – निचे कुछ दृश्य दिए गए हैं। रेडियो नाटक में इन दृश्यों को किस-किस तरह से प्रस्तुत करेंगे। विवरण कीजिए।
(क) घनी अंधेरी रात
उत्तर – सांय-सांय की आवाज, बीच-बीच में चौकीदार की सीटी और लाठी की आवाज, जागते रहो का स्वर, किसी के संवाद द्वारा जैसे – कितनी घनी रात है हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा।

(ख) सुबह का समय
उत्तर – चिड़ियों के चहचहाने की आवाज, मुर्गे की बांग का स्वर, प्रभाती गाते हुए किसी का स्वर, माँ का अपने बच्चों को उठाने का संवाद

(ग) बच्चों की खुशी
उत्तर – बच्चों के शोर-गुल का स्वर, बच्चों की किलकारियां, मिली जुली अनेक हंसी की ध्वनियां।

(घ) नदी का किनारा
उत्तर – किनारे से टकराते हुए पानी की आवाज, हवा का स्वर, पक्षियों का कलरव, नदी पार कराने के लिए नाविक का स्वर

(ड़) वर्षा का दिन
उत्तर – लगातार वर्षा होने की आवाज, किसी का किसी को से संवाद – ‘बाहर छतरी लेकर जाना’ दूसरा स्वर ‘लगता है आज वर्षा ने रुकना ही नहीं है’

प्रश्न 3 – रेडियो नाटक लेखन का प्रारूप बनाइए और अपनी पुस्तक को किसी कहानी के एक अंश को रेडियो नाटक में रूपांतरित कीजिए।
उत्तर – ईदगाह कहानी के एक दृश्य जिसमें सभी बच्चे ईद के मेले पर जाने के लिए तैयार होकर हामिद को बुलाने उसके घर आते हैं। हामिद भी मेले में जाने के लिए तैयार है। परन्तु हामिद की दादी हामिद को मेले पर जाने से पहले कुछ समझाने लगती है। रेडियो नाटक के इस दृश्य का लेखन कुछ इस प्रकार से होगा –
(बहुत सारे बच्चों का शोर, मिली-जुली आवाजें, पदचाप का स्वर, दरवाजा खटखटाने की आवाज)
एक स्वर – हामिद! ओ हामिद! मेले नहीं चलना है क्या!
हामिद – (दूर से आती हुई आवाज) आ रहा हूँ।
(तेज कदमों की आवाज)
दादी – रुको, हामिद।
हामिद – (जोर से) क्या है?
दादी – (धीरे से) मेले में ध्यान से चलना। और……
हामिद – (बीच में ही रोककर बोलता है) मुझे पता है।
दादी – फिर भी बेटे अपना ख्याल रखना और गंदी चीजें ना खाना।
(बाहर से बच्चों का शोर तीव्र हो जाता है) (दरवाजा खोलने की आवाज)
हामिद – चलो, आ गया हूँ!
(धीरे धीरे शोर कम होता जाता है और पदचाप भी धीमी हो जाती हैं।)

कैसे बनता है रेडियो नाटक पाठ पर आधारित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर – (Important Question Answers)

प्रश्न 1 – रेडियो को परिभाषित कीजिए।
उत्तर – आज से कुछ दशक पहले एक ज़माना ऐसा भी था, जब दुनिया में न टेलीविज़न था, न कंप्यूटर। सिनेमा हॉल और थिएटर तो थे, लेकिन उनकी संख्या आज के मुकाबले काफी कम होती थी और एक आदमी के लिए वे आसानी से उपलब्ध भी नहीं थे। ऐसे समय में घर में बैठे मनोरंजन का जो सबसे सस्ता और सहजता से प्राप्त साधन था, वो था-रेडियो। रेडियो पर खबरें आती थीं, ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आते थे, खेलों का आँखों देखा हाल प्रसारित होता था, एफ.एम चैनलों की तरह गीत-संगीत की भरमार रहती थी। टी.वी. धारावाहिकों और टेलीफिल्मों की कमी को रेडियो पर आने वाले नाटक पूरा करते थे।

प्रश्न 2 – रेडियो नाटक लिखे कैसे जाते हैं?
उत्तर – सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो नाटक में भी चरित्र होते हैं उन चरित्रों के आपसी संवाद होते हैं और इन्हीं संवादों के ज़रिये आगे बढ़ती है कहानी। बस सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो नाटक में विजुअल्स अर्थात दृश्य नहीं होते। यही सबसे बड़ा अंतर है, रेडियो नाटक तथा सिनेमा या रंगमंच के माध्यम में। रेडियो पूरी तरह से श्रव्य माध्यम है इसीलिए रेडियो नाटक का लेखन सिनेमा व रंगमंच के लेखन से थोड़ा भिन्न भी है और थोड़ा मुश्किल भी। आपको सब कुछ संवादों और ध्वनि प्रभावों के माध्यम से संप्रेषित करना होता है। यहाँ आपकी सहायता के लिए न मंच सज्जा तथा वस्त्र सज्जा है और न ही अभिनेता के चेहरे की भाव-भंगिमाएँ। वरना बाकी सब कुछ वैसा ही है। एक कहानी, कहानी का वही ढाँचा, शुरुआत-मध्य-अंत, इसे यूँ भी कह सकते हैं, परिचय-द्वंद्व-समाधान। बस ये सब होगा आवाज़ के माध्यम से।

प्रश्न 3 – रेडियो के बारे में कुछ महत्पूर्ण बातें लिखिए।
उत्तर – रेडियो के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें –
नाट्य आंदोलन के विकास में रेडियो नाटक की अहम भूमिका रही है!
सिनेमा और रंगमंच की तरह रेडियो एक दृश्य माध्यम नहीं, श्रव्य माध्यम है।
रेडियो की प्रस्तुति संवादों और ध्वनि प्रभावों के माध्यम से होती है।
फिल्म की तरह रेडियो में एक्शन की गुंजाइश नहीं होती।
चूँकि रेडियो नाटक की अवधि सीमित होती है इसलिए पात्रों की संख्या भी सीमित होती है क्योंकि सिर्फ आवाज़ के सहारे पात्रों को याद रख पाना मुश्किल होता है।
पात्र संबंधी विविध जानकारी संवाद एवं ध्वनि संकेतों से उजागर होती है।

प्रश्न 4 – रेडियो नाटक की अवधि कितनी होती है?
उत्तर – आमतौर पर रेडियो नाटक की अवधि 15 मिनट से 30 मिनट होती है। इसलिए अमूमन रेडियो नाटक की अवधि छोटी होती है और अगर आपकी कहानी लंबी है तो फिर वह एक धारावाहिक के रूप में पेश की जा सकती है, जिसकी हर कड़ी 15 या 30 मिनट की होगी। रेडियो पर निश्चित समय पर निश्चित कार्यक्रम आते हैं, इसलिए उनकी अवधि भी निश्चित होती है 15 मिनट, 30 मिनट, 45 मिनट, 60 मिनट वगैरह।

प्रश्न 5 – रेडियो नाटक की अवधि का 15 मिनट से 30 मिनट के होने के क्या कारण हैं?
उत्तर – रेडियो नाटक की अवधि का 15 मिनट से 30 मिनट के होने के दो कारण हैं, श्रव्य माध्यम में नाटक या वार्ता जैसे कार्यक्रमों के लिए मनुष्य की एकाग्रता की अवधि 15-30 मिनट ही होती है, इससे ज़्यादा नहीं। दूसरे, सिनेमा या नाटक में दर्शक अपने घरों से बाहर निकल कर किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर एकत्रित होते हैं इसका मतलब वो इन आयोजनों के लिए एक प्रयास करते हैं और अनजाने लोगों के एक समूह का हिस्सा बनकर प्रेक्षागृह में बैठते हैं।

प्रश्न 6 – रेडियो नाटक में पात्रों की संख्या कितनी होती है।
उत्तर – रेडियो नाटक की अवधि ही सीमित है, तो फिर अपने-आप ही पात्रों की संख्या भी सीमित हो जाएगी। क्योंकि श्रोता सिर्फ आवाज़ के सहारे चरित्रों को याद रख पाता है, ऐसी स्थिति में रेडियो नाटक में यदि बहुत ज़्यादा किरदार हैं तो उनके साथ एक रिश्ता बनाए रखने में श्रोता को दिक्कत होगी। 15 मिनट की अवधि वाले रेडियो नाटक में पात्रों की अधिकतम संख्या 5-6 हो सकती है। 30-40 मिनट की अवधि के नाटक में 8 से 12 पात्र। अगर एक घंटे या उससे ज़्यादा अवधि का रेडियो नाटक लिखना ही पड़ जाए, तो उसमें 15 से 20 भूमिकाएँ गढ़ी जा सकती हैं। पात्रों की संख्या के मामले में बताई गईं संख्याएँ एक अंदाजा मात्र हैं। ये प्रमुख और सहायक भूमिकाओं की संख्या है। छोटे-मोटे किरदारों की गिनती इसमें नहीं की गई है। मतलब, फेरीवाले की एक आवाज़ या पोस्टमैन का एक संवाद या न्यायालय में जज का सिर्फ ‘ऑर्डर-ऑर्डर’ कहना आदि।

प्रश्न 7 – रेडियो नाटक में संवाद की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर – रेडियो नाटक में संवाद की विशेषताएँ –
रेडियो नाटक में पात्रों संबधी तमाम जानकारी हमें संवादों के माध्यम से ही मिलती हैं। उनके नाम, आपसी संबंध, चारित्रिक विशेषताएँ, ये सभी हमें संवादों द्वारा ही उजागर करना होता है।
भाषा पर भी विशेष ध्यान रखना होगा। वो पढ़ा-लिखा है कि अनपढ़, शहर का है कि गाँव का, क्या वो किसी विशेष प्रांत का है, उसकी उम्र क्या है, वो क्या रोज़गार-धंधा करता है। इस तरह की तमाम जानकारियाँ उस चरित्र की भाषा को निर्धारित करेंगी।
फिर पात्रों का आपसी संबंध भी संवाद की बनावट पर असर डालता है। एक ही व्यक्ति अपनी पत्नी से अलग ढंग से बात करेगा, अपने नौकर से अलग ढंग से, आपने बॉस के प्रति सम्मानपूर्वक रवैया अपनाएगा, तो अपने मित्र के प्रति उसका बराबरी और गरम-जोशी का व्यवहार होगा।
रेडियो क्योंकि मूलतः संवाद प्रधान माध्यम है, इसलिए यहाँ इसका खास ध्यान रखना होता है।
रेडियो में कौन किससे बात कर रहा है, हम देख नहीं पाते इसलिए संवाद जिस चरित्र को संबोधित है, उसका नाम लेना ज़रूरी होता है, खासतौर पर जब दृश्यों में दो से अधिक पात्र हों। इसके अलावा रेडियो नाटक में कई बार कोई पात्र विशेष जब कोई हरकत, कोई एक्शन करता है तो उसे भी संवाद का हिस्सा बनाना पड़ता है।

कैसे बनता है रेडियो नाटक पाठ पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1 – पहले ज़माने में घर में बैठे मनोरंजन का सबसे सस्ता और सहजता से प्राप्त होने वाला साधन कौन सा था?
(क) टी.वी.
(ख) इंटरनेट
(ग) रेडियो
(घ) फ़ोन
उत्तर – (ग) रेडियो

प्रश्न 2 – रेडियो किस तरह मनोरंजन करता था?
(क) रेडियो पर खबरें आती थीं, ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आते थे
(ख) रेडियो पर खेलों का आँखों देखा हाल प्रसारित होता था
(ग) रेडियो पर एफ.एम चैनलों की तरह गीत-संगीत की भरमार रहती थी
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3 – किसके ज़रिये कहानी आगे बढ़ती है?
(क) सिनेमा के रंगमंच
(ख) संवादों के
(ग) रंगमंच के
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) संवादों के

प्रश्न 4 – रेडियो पूरी तरह से कैसा माध्यम है?
(क) श्रव्य
(ख) दृश्य
(ग) श्रव्य व् दृश्य
(घ) मनोरंजनात्मक
उत्तर – (क) श्रव्य

प्रश्न 5 – आमतौर पर रेडियो नाटक की अवधि कितनी होती है?
(क) 30 मिनट से 40 मिनट
(ख) 45 मिनट से 1 घंटे
(ग) 15 मिनट से 30 मिनट
(घ) 20 मिनट से 40 मिनट
उत्तर – (ग) 15 मिनट से 30 मिनट

प्रश्न 6 – कैपटिव ऑडिएंस किसे कहते हैं?
(क) एक स्थान पर कैद किए गए दर्शक
(ख) एक स्थान से दूसरे स्थान पर सफ़र करने वाले दर्शक
(ग) फ़िल्म को प्रत्यक्ष देखने वाले दर्शक
(घ) रेडियो सुनने वाले दर्शक
उत्तर – (क) एक स्थान पर कैद किए गए दर्शक

प्रश्न 7 – रेडियो नाटक में पात्रों संबधी तमाम जानकारी हमें किसके माध्यम से मिलती हैं?
(क) कहानी के
(ख) पात्रों के
(ग) संवादों के
(घ) कथावस्तु के
उत्तर – (ग) संवादों के

प्रश्न 8 – किस तरह की तमाम जानकारियाँ चरित्र की भाषा को निर्धारित करेंगी?
(क) वो पढ़ा-लिखा है कि अनपढ़, शहर का है कि गाँव का
(ख) क्या वो किसी विशेष प्रांत का है, उसकी उम्र क्या है
(ग) वो क्या रोज़गार-धंधा करता है
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9 – रेडियो नाटक में अंग्रेज़ी शब्द ‘कट’ लिखने की परिपाटी क्यों है?
(क) क्योंकि रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होता
(ख) क्योंकि रेडियो नाटक में दृश्य होते हैं
(ग) क्योंकि रेडियो नाटक में पात्र नहीं होता
(घ) क्योंकि रेडियो नाटक में कथावस्तु नहीं होता
उत्तर – (क) क्योंकि रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होता

प्रश्न 10 – रेडियो नाटक में कहानी पूरी तरह से एक्शन अर्थात हरकत पर निर्भर क्यों नहीं होनी चाहिए?
(क) क्योंकि रेडियो पर बहुत ज़्यादा एक्शन सुनाना रुचिकर हो सकता है
(ख) क्योंकि रेडियो पर बहुत ज़्यादा एक्शन सुनाना उबाऊ हो सकता है
(ग) क्योंकि रेडियो पर बहुत ज़्यादा एक्शन सुनाना मज़ेदार हो सकता है
(घ) क्योंकि रेडियो पर बहुत ज़्यादा एक्शन सुनाना सुकून दे सकता है
उत्तर – (ख) क्योंकि रेडियो पर बहुत ज़्यादा एक्शन सुनाना उबाऊ हो सकता है

 

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