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कैमरे में बंद अपाहिज पाठ सार, व्याख्या Class 12 Chapter 4

 

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CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag 2 Book Chapter 4 कैमरे में बंद अपाहिज Summary, Explanation 

 
इस पोस्ट में हम आपके लिए CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag 2 Book के Chapter 4 में रघुवीर सहाय द्वारा रचित कविता कैमरे में बंद अपाहिज का पाठ सार, व्याख्या और  कठिन शब्दों के अर्थ लेकर आए हैं। यह सारांश और व्याख्या आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आप जान सकते हैं कि इस कविता का विषय क्या है। इसे पढ़कर आपको मदद मिलेगी ताकि आप इस कविता के बारे में अच्छी तरह से समझ सकें। Raghuveer Sahay Poem Camere Mein Band Apahij Summary, Explanation, Difficult word meanings of CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag-2 Chapter 4.

 

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कैमरे में बंद अपाहिज कविता का सार (Camere Mein Band Apahij Summary) 

 
“कैमरे में बंद अपाहिज” कविता के कवि ‘रघुवीर सहाय जी’ हैं। “कैमरे में बंद अपाहिज” कविता को उनके काव्य संग्रह “लोग भूल गए हैं” से लिया गया है। यह एक व्यंग्यात्मक कविता है। दूरदर्शन के संचालक जिस तरीके से अपाहिज लोगों से बार-बार बेतुके प्रश्न करके उनके दुख का मजाक उड़ाते हैं। यह कविता इन्हीं सब बातों को दर्शाती है। इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि एक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए और उससे लाभ कमाने के लिए मीडिया किसी भी हद तक जा सकती हैं। मीडिया वाले दूसरों के दुख को अपने व्यापार का माध्यम बनाने से बिलकुल नहीं कतराते, उन्हें सिर्फ पैसे कमाने से मतलब होता है और इसी बात पर व्यंग्य कसते हुए कवि ने इस कविता को लिखा है। दूरदर्शन के कार्यक्रम के संचालक अपने आप को बहुत सक्षम और शक्तिशाली समझता है। इसीलिए दूरदर्शन के स्टूडियो के एक बंद कमरे में उस साक्षात्कार में उस अपाहिज व्यक्ति से बहुत ही बेतुके प्रश्न पूछे जाते हैं जैसे “क्या वह अपाहिज हैं?” “यदि हाँ तो वह क्यों अपाहिज हैं?” “उसका अपाहिजपन तो उसे दु:ख देता होगा?”। इन बेतुके सवालों का वह व्यक्ति कोई जवाब नहीं दे पायेगा क्योंकि उसका मन पहले से ही इन सबसे दुखी होगा और इन सवालों को सुनकर वह और अधिक दुखी हो जायेगा। कार्यक्रम का संचालक को उस अपाहिज व्यक्ति के दुःख व् दर्द से कोई मतलब नहीं है वह केवल अपना फायदा देख  रहा है। उस अपंग व्यक्ति के चेहरे व आँखों में पीड़ा को साफ़-साफ़ देखने के बाबजूद भी उससे और बेतुका सवाल पूछा जाएगा कि “वह कैमरे पर बताए कि उसका दु:ख क्या है?” ऐसे प्रश्न विकलांग लोगों को और भी कमजोर बना देते हैं। मीडिया के अधिकारी इतने क्रूर होते हैं कि वह जानबूझकर अपाहिज लोगों से बेतुके सवाल पूछते हैं ताकि वे सवालों का उत्तर ही ना दे पाए। आप सोच कर देखिए कि उस व्यक्ति को कैसा लग रहा होगा जिससे पूछा जा रहा हो कि उसे अपाहिज होकर कैसा लग रहा है। जब वह अपाहिज व्यक्ति नहीं रोता हैं तो संचालक कैमरा मैन से कैमरा बंद करने को कहता है क्योंकि वह उस अपाहिज व्यक्ति को रुलाने में नाकामयाब रहा और कैमरा बंद होने से पहले वह यह घोषणा करता हैं कि आप सभी दर्शक समाज के जिस उद्देश्य के लिए यह कार्यक्रम देख रहे थे वह कार्यक्रम अब समाप्त हो चुका है। लेकिन संचालक को ऐसा लगता हैं कि थोड़ी सी कसर रह गई थी वरना उसने उस व्यक्ति को लगभग रुला ही दिया था। कहने का अभिप्राय यह है कि मीडिया अपना टीआरपी बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

 

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कैमरे में बंद अपाहिज कविता की व्याख्या (Camere Mein Band Apahij Explanation)

 

काव्यांश 1 –

हम दूरदर्शन पर बोलेंगे
हम समर्थ शक्तिवान
हम एक दुर्बल को लाएँगे
एक बंद कमरे में
उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं?
तो आप क्यों अपाहिज हैं?
आपका अपाहिजपन तो दु:ख देता होगा
देता है?
(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा-बड़ा)
हाँ तो बताइए आपका दु:ख क्या है
जल्दी बताइए वह दु:ख बताइए
बता नहीं पाएगा।

कठिन शब्द –
दूरदर्शन – विद्युत तरंगों की मदद से बहुत दूर के दृश्य को प्रत्यक्ष रूप से देखने की प्रणाली, (टेलीविज़न), दूर की चीज़ देखना
समर्थ – सक्षम, बलवान, शक्तिशाली
शक्तिवान – जिसमें बल या शक्ति हो या जोरदार
दुर्बल – कमज़ोरी, दुबलापन
अपाहिज – लुला लँगडा, काम करने के अयोग्य, जो काम न कर सके

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह’ कविता ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ से ली गई हैं। मीडिया वाले दूसरों के दुख को अपने व्यापार का माध्यम बनाने से बिलकुल नहीं कतराते, उन्हें सिर्फ पैसे कमाने से मतलब होता है और इसी बात पर व्यंग्य कसते हुए कवि ने इस कविता को लिखा है। उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि दूरदर्शन के कार्यक्रम के संचालक अपने आप को बहुत सक्षम और शक्तिशाली समझता है। इसीलिए वह अपने दर्शकों से कहता है कि वह उनके लिए एक व्यक्ति को दूरदर्शन के स्टूडियो के एक बंद कमरे में लाएंगें और उससे प्रश्न पूछेंगे? कहने का तात्पर्य यह है कि दूरदर्शन के कार्यक्रम के संचालक असल में अपनी लोकप्रियता और व्यापार को बढ़ाने के लिए एक अपाहिज व्यक्ति का साक्षात्कार दर्शकों को दिखाना चाह रहे हैं।
दूरदर्शन के स्टूडियो के एक बंद कमरे में उस साक्षात्कार में उस अपाहिज व्यक्ति से बहुत ही बेतुके प्रश्न पूछे जाते हैं जैसे “क्या वह अपाहिज हैं?” “यदि हाँ तो वह क्यों अपाहिज हैं?” “उसका अपाहिजपन तो उसे दु:ख देता होगा?”। इन बेतुके सवालों का वह व्यक्ति कोई जवाब नहीं दे पायेगा क्योंकि उसका मन पहले से ही इन सबसे दुखी होगा और इन सवालों को सुनकर वह और अधिक दुखी हो जायेगा। उसके चेहरे पर उसकी लाचारी व दर्द को दर्शकों को दिखाने के लिए कार्यक्रम का संचालक कैमरामैन से कहेगा कि इसे बड़ा कर के दर्शकों को दिखाओ। कहने का अभिप्राय यह है कि कार्यक्रम का संचालक को उस अपाहिज व्यक्ति के दुःख व् दर्द से कोई मतलब नहीं है वह केवल अपना फायदा देख रहा है। उस अपंग व्यक्ति के चेहरे व आँखों में पीड़ा को साफ़-साफ़ देखने के बाबजूद भी उससे और बेतुका सवाल पूछा जाएगा कि “वह कैमरे पर बताए कि उसका दु:ख क्या है?” उससे जल्दी कहने के लिए कहा जाएगा कि “वह जल्दी बताए कि उसका दु:ख क्या है?” कहने का अभिप्राय यह है कि टेलीविजन वालों के पास हर कार्यक्रम के लिए एक निश्चित समय होता हैं। उन्हें किसी के दुःख से कोई मतलब नहीं होता। इसी कारण वे उस अपाहिज व्यक्ति से उसका दुःख जल्दी-जल्दी बताने के लिए कहते हैं क्योंकि उनके पास सीमित समय हैं। परन्तु वह अपंग व्यक्ति इन बेतुके प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं बता पाएगा।

काव्यांश 2-

सोचिए
बताइए
आपको अपाहिज होकर कैसा लगता है
कैसा
यानी कैसा लगता है
( हम खुद इशारे से बताएँगे कि क्या ऐसा ? )
सोचिए
बताइए
थोड़ी कोशिश करिए
(यह अवसर खो देंगे ? )
आप जानते हैं कि कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते
हम पूछ-पूछकर उसको रुला देंगे
इंतजार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का
करते हैं ?
(यह प्रश्न नही पूछा जायेगा )

कठिन शब्द –
इशारा – संकेत, इंगित
अवसर – मौका, समय, सुयोग
रोचक – मनोरंजक, दिलचस्प
वास्ते – कारण, हेतु, लिए

व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि कार्यक्रम का संचालक उस अपाहिज व्यक्ति से फिर से सवाल करता हैं कि वह सोचे और बताए कि उसको अपाहिज होकर कैसा महसूस होता है। कहने का आशय यह है कि मीडिया के अधिकारी इतने क्रूर होते हैं कि वह जानबूझकर अपाहिज लोगों से बेतुके सवाल पूछते हैं ताकि वे सवालों का उत्तर ही ना दे पाए। आप सोच कर देखिए कि उस व्यक्ति को कैसा लग रहा होगा जिससे पूछा जा रहा हो कि उसे अपाहिज होकर कैसा लग रहा है। संचालक उस व्यक्ति को और अधिक जोर देकर पूछता है कि वह आखिर कैसा महसूस करता है? मिडिया के अमानवीय व्यवहार का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि कार्यक्रम का संचालक उस अपाहिज व्यक्ति से कहता है कि वह इशारा करके उसे बताएगा कि उसे अपने आप को दर्शकों के सामने कैसा दिखाना हैं कि वह आखिर कैसा महसूस करता है। संचालक अपाहिज व्यक्ति को उत्तर देने के लिए उकसाते हुए फिर से पूछता है कि वह थोड़ी कोशिश करके सोच कर बताए कि वह कैसा महसूस करता है? कहने का अभिप्राय यह है कि संचालक चाहता है कि वह अपाहिज व्यक्ति कैमरे के सामने वैसा ही व्यवहार करके दिखाए जैसा उसने उससे कहा है। ताकि उसके दर्शक अपनी दिलचस्पी उसके साथ बनाए रखें।
आगे संचालक अपाहिज व्यक्ति को उकसाता हुआ कहता है कि इस वक्त वो नही बोलेगा तो अपना दुःख दुनिया के समक्ष रखने का सुनहरा अवसर उसके हाथ से निकल जाएगा। वह उसे समझा रहा है कि अपनी अपंगता व अपने दुख को दुनिया के सामने लाने का इससे बेहतर मौका उसे नहीं मिल सकता है। कवि कहते है कि उस अपाहिज व्यक्ति से उसकी शाररिक दुर्बलता से सम्बंधित प्रश्न पूछ-पूछ कर, उसे बार-बार उसकी अपंगता का एहसास दिलाकर उसे रोने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा। और दर्शक भी उसके रोने का ही इंतजार कर रहे होंगे क्योंकि कार्यक्रम का संचालक यही तो चाहता हैं कि वह रोये , अपना दुःख लोगों के सामने प्रदर्शित करे ताकि उसका कार्यक्रम और अधिक रोचक बन सके, सफल हो सके। और दर्शकों से कोई यह प्रश्न नहीं पूछेगा कि वे क्यों उस अपाहिज व्यक्ति के रोने का इन्तजार कर रहे थे।

काव्यांश 3 –

फिर हम परदे पर दिखलाएंगे
फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर
बहुत बड़ी तसवीर
और उसके होंठों पर एक कसमसाहट भी
( आशा हैं आप उसे उसकी अपंगता की पीड़ा मानेंगे )
एक और कोशिश
दर्शक
धीरज रखिए
देखिए
हमें दोनों एक संग रुलाने हैं
आप और वह दोनों
( कैमरा
बस करो
नहीं हुआ
रहने दो
परदे पर वक्त की कीमत है )
अब मुसकुराएँगे हम
आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम
( बस थोड़ी ही कसर रह गई )
धन्यवाद !

कठिन शब्द –
परदा – ओट, आवरण अभिनय, खेल-तमाशों आदि में, वह लंबा-चौड़ा कपड़ा जो दर्शकों के सामने लटका रहता और जिस पर या तो कुछ दृश्य अंकित होते हैं
कसमसाहट – कुलबुलाहट, जुंबिश, बेचैनी, व्याकुलता, घबराहट
धीरज – धैर्य, संतोष, सब्र
संग – साथ
उद्देश्य – प्रयोजन, लक्ष्य, अभिप्राय
युक्त – संयुक्त, मिश्रित, सम्मिलित
कसर – मेहनत, परिश्रम

व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में कवि कहते हैं कि कार्यक्रम के संचालक ने सारी हदे पार करते हुए उस अपाहिज व्यक्ति से तरह-तरह के प्रश्न पूछ कर उसे रुलाने का प्रयास कर रहा था ताकि उस अपाहिज व्यक्ति का दर्द और बैचैनी उसकी आंखों व उसके होठों पर दिखाई पड़े और फिर कार्यक्रम का संचालक उस अपंग व्यक्ति की फूली हुई आंखों व उसके होठों की बैचेनी की बड़ी-बड़ी तस्वीर को टेलीविजन के पर्दे पर बड़ा करके दर्शकों को दिखा सके और फिर दर्शकों से कह सके कि इसी दर्द और बैचैनी को वे उस अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा समझें। कहने का आशय यह है कि जब कार्यक्रम का संचालक उस अपाहिज व्यक्ति को रुलाने में नाकामयाब हो गया तब उस अपाहिज व्यक्ति की दर्द भरी आँखों और बैचैनी भरे होंठों को ही बड़ा करके पर्दे पर दिखाकर दर्शकों को भावुक करने का प्रयास कर रहा हैं।
कवि आगे कहते हैं कि उस अपाहिज व्यक्ति को रुलाने की एक और कोशिश करते हुए कार्यक्रम का संचालक दर्शकों से कहता हैं कि आप लोग धीरज बनाए रखिए। देखिए उनका कार्यक्रम दोनों को एक साथ रुलाने वाला हैं यानि उस अपाहिज व्यक्ति को और दर्शकों को।
लेकिन कार्यक्रम के संचालक के अनेक प्रयास करने के बाद भी जब वह अपाहिज व्यक्ति नहीं रोता हैं तो संचालक कैमरा मैन से कैमरा बंद करने को कहता है क्योंकि वह उस अपाहिज व्यक्ति को रुलाने में नाकामयाब रहा और साथ ही साथ वह उस अपाहिज व्यक्ति को पर्दे पर वक्त की कीमत का एहसास भी करा देते है कि उस व्यक्ति को अपनी पीड़ा एक निर्धारित समय के अंदर ही व्यक्त करनी थी। और कैमरा बंद होने से पहले वह यह घोषणा करता हैं कि आप सभी दर्शक समाज के जिस उद्देश्य के लिए यह कार्यक्रम देख रहे थे वह कार्यक्रम अब समाप्त हो चुका है। लेकिन संचालक को ऐसा लगता हैं कि थोड़ी सी कसर रह गई थी वरना उसने उस व्यक्ति को लगभग रुला ही दिया था। कहने का अभिप्राय यह है कि मीडिया अपना टीआरपी बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

 

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