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काले मेघा पानी दे Question Answers

 

 

CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag 2 Book Chapter 12 Kaale Megha Paani De Question Answers

  

Kaale Megha Paani De Class 12 – CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag-2 Chapter 12 Kaale Megha Paani De Question Answers. The questions listed below are based on the latest CBSE exam pattern, wherein we have given NCERT solutions of the chapter, extract based questions, multiple choice questions, short and long answer questions.

 

सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी आरोह भाग-2 पुस्तक पाठ 12 काले मेघा पानी दे प्रश्न उत्तर | इस लेख में NCERT की पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों का व्यापक संकलन किया है।

 

काले मेघा पानी दे पाठ के पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्न – Textbook Based Questions

 

प्रश्न 1 – लोगों ने लड़कों की टोली को मेढक-मंडली नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आपको इंदर सेना कहकर क्यों बुलाती थी?

उत्तर – गाँव में बच्चों की एक मंडली हुआ करती थी जिसमें 10-12 से लेकर 16-18 साल के लड़के होते थे। ये बच्चे अपने शरीर पर सिर्फ एक लंगोटी या जांगिया पहने रहते थे। लोगों ने इस मंडली के दो बिलकुल विपरीत नाम रखे हुए थे – इन्द्रसेना और मेंढक मंडली। जो लोग उनके नग्नस्वरूप शरीर, उनकी उछलकूद, उनके शोर-शराबे और उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे, वे उन्हें अक्सर मेढक-मंडली कहते थे। और जो लोग यह मानते थे कि इस मंडली पर पानी फेंकने से बारिश हो जाएगी। वो इस मंडली को “इंद्र सेना” कहा करते थे। ये बच्चे इकट्ठे होकर भगवान इंद्र से वर्षा करने की गुहार लगाते थे। बच्चों का मानना था कि वे इंद्र की सेना के सैनिक हैं तथा उसी के लिए लोगों से पानी माँगते हैं ताकि इंद्र बादलों के रूप में बरसकर सबको पानी दें।

 

प्रश्न 2 – जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया?

उत्तर – लेखक बच्चों की टोली पर पानी फेंके जाने के विरुद्ध था लेकिन उसकी जीजी इस बात को सही मानती है। जीजी ने जब इंद्रसेना के ऊपर पानी फेंका, तो लेखक नाराज हो गए। लेखक को मनाते हुए जीजी ने उन्हें बड़े प्यार से समझाया कि यह पानी की बर्बादी नहीं है। बल्कि यह तो पानी का अर्क है जो हम इंद्रसेना के माध्यम से इंद्रदेव पर चढ़ाते हैं। ताकि वे प्रसन्न हो कर हम पर पानी की बरसात करें। जो चीज इंसान पाना चाहता है, यदि पहले उस चीज़ को देगा नहीं तो पाएगा कैसे। इसके लिए जीजी ऋषि-मुनियों के दान को सबसे ऊंचा स्थान दिए जाने को प्रमाणस्वरूप बताती है। जीजी फिर लेखक को समझाते हुए कहती हैं कि सब ऋषि मुनि कह गए, पहले खुद दो, तब देवता तुम्हें चौगुना-आठगुना कर लौटाऐंगे। 

 

प्रश्न 3 – पानी दे, गुड़धानी दे मेघों से पानी के साथ-साथ गुड़धानी की माँग क्यों की जा रही है?

उत्तर – यहाँ ‘गुड़धानी’ से आशय अनाज से है। गुड़धानी गुड़ व अनाज के मिश्रण से बने खाद्य पदार्थ को कहते हैं। मेघों से पानी के साथ-साथ गुड़धानी की माँग इसलिए की जा रही हैं क्योंकि पानी से प्यास बुझती है और साथ ही अच्छी वर्षा से ईख व धान भी उत्पन्न होता है,  गाँव की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर होती है और कृषि वर्षा पर निर्भर है। अच्छी वर्षा होगी तभी अच्छी फसल भी होगी।

 

प्रश्न 4 – गगरी फूटी बैल पियासा इंदर सेना के इस खेलगीत में बैलों के प्यासा रहने की बात क्यों मुखरित हुई है?

उत्तर – इस खेलगीत में बैलों के प्यासा रहने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि जब बारिश नहीं होगी तो पानी के कोई भी स्त्रोत पानी से नहीं भर पाएंगे। और पानी न होने से जानवरों या बैलों को पीने के लिए पानी नहीं मिल पाएगा और बिना पानी के बैल प्यासे रह जाएंगे। इस खेलगीत के अनुसार जो थोड़ा बहुत पानी गगरी (घड़े) में बचा था। वह भी घड़े के टूटने से गिर गया इसलिए बैल प्यासे रह गए। बैल तभी खेत-जोत सकेंगे जब उनकी प्यास बुझेगी और तभी फसल होगी जब पानी बरसेगा। कहने का आशय यह है कि पानी, बैल, फसल और खुशहाली, इन सब का आपस में गहरा संबंध है। इसलिए मेघ से प्रार्थना की जाती है कि हे मेघा! पानी बरसा ताकि बैलों और धरती दोनों की प्यास बुझ जाए और चारों ओर खुशी छा जाए।

 

प्रश्न 5 – इंदर सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय क्यों बोलती है? नदियों का भारतीय सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश में क्या महत्त्व है?

उत्तर – वर्षा न होने पर इंदर सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय बोलती है। इसका कारण यह है कि गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसकी पूजा एक माँ के रूप में की जाती है। हर शुभ कार्य में इसके जल का प्रयोग किया जाता है। गंगा नदी पानी का वह भंडार है जो हर किसी की प्यास बुझाती है। इसीलिए बच्चों की टोली सबसे पहले “गंगा मैया की जय” का जयकारा लगाती थी।

भारत के सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश में नदियों का बहुत महत्त्व है। प्राचीन काल से ही भारत में नदियों को पूजा जाता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने अपनी बुद्धि का प्रमाण देते हुए नदियों को हमारे धर्म व संस्कृति से जोड़ा ताकि नदियों का संरक्षण व इनका रखरखाव हो सके। साथ ही साथ लगभग सभी सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे ही हुआ। देश के लगभग सभी प्रमुख बड़े नगर नदियों के किनारे बसे हुए हैं। धर्म से भी नदियों का प्रत्यक्ष संबंध है। कुछ पवित्रधाम जैसे बनारस, काशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, उज्जैन इन्ही पवित्र नदियों के तट पर ही बसे हैं। नदियों को मोक्षदायिनी माना जाता है। जिस कारण अस्थियों को जल में बहा कर मोक्ष दिलवाया जाता है।

 

प्रश्न 6 –  रिश्तों में हमारी भावना-शक्ति बँट जाना विश्वासों के जंगल में सत्य की राह खोजती हमारी बुधि की शक्ति को कमज़ोर करती है। पाठ में जीजी के प्रति लेखक की भावना के संदर्भ में इस कथन के औचित्य की समीक्षा कीजिए।

उत्तर – लेखक हमेशा अपनी वैज्ञानिक सोच के आधार पर अंधविश्वासों के तर्क ढूंढते रहते थे। फिर भी वो इस बात को स्वीकार करते हैं कि उन्होंने भी  ऐसे कई रीति-रिवाजों को अपनाया जो उन्हें उनकी जीजी ने अपनाने को कहा था। लेखक को सबसे अधिक प्यार उनकी जीजी से ही मिला। वह अपनी जीजी को बहुत मानता था। दोनों में भावनात्मक संबंध बहुत गहरा था। धीरे-धीरे लेखक और उसकी जीजी के बीच की भावनात्मक शक्ति बँटती चली जाती हैं। लेखक की बुद्धि पर जीजी का स्नेह भारी होने लगता है। इसलिए लेखक चाहकर भी उनकी किसी बात का विरोध नहीं कर पाता। वह विरोध जताने का प्रयास करता है लेकिन अंत में उसे जीजी के तर्कों के आगे समर्पण करना पड़ता है। उन तर्कों और जीजी के स्नेह के कारण ना चाहते हुए भी लेखक उन परंपराओं का निर्वहन करते चले गए जो उनकी जीजी उनसे करने के लिए कहती थी। इस सन्दर्भ में विज्ञान के तर्कों के ऊपर स्नेह की जीत को दिखाया गया है।

 

 

काले मेघा पानी दे पाठ पर आधारित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर – (Important Question Answers)

 

 

प्रश्न 1 – ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण में किसका वर्णन किया गया है?

उत्तर –  ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण में लोक-प्रचलित विश्वास और विज्ञान के संघर्ष का सुंदर चित्रण है। एक तरफ विज्ञान का अपना तर्क है और विश्वास का अपना सामर्थ्य। इसमें कौन कितना सार्थक है, यह प्रश्न पढ़े-लिखे समाज को अशांत करता रहता है। कहने है आशय यह है कि पढ़े-लिखे समाज में भी अक्सर इस बात पर चर्चा होती रहती है कि कौन अधिक सार्थक है। इसी दुविधा को लेकर लेखक ने पानी के संदर्भ में इस प्रसंग को रचा है। आषाढ़ के पहले दस दिन बीत जाने के बाद भी यदि खेती और अन्य आवश्यक प्रयोग के लिए पानी न हो तो जीवन चुनौतियों से भर जाता है और अगर उन चुनौतियों का हल विज्ञान के द्वारा भी न हो पाए तो उत्सवधर्मी भारतीय समाज अर्थात धार्मिक लोग चुप नहीं बैठते। वह किसी न किसी तरह जुगाड़ लगाने लग जाता है, वह सभी ऐसे कार्य या बात जो वास्तविक या सत्य न होने पर भी सत्य और ठीक लगे, बिना सोचे-समझे करता है और हर कीमत पर जीवित रहने के लिए अशिक्षा और बेबसी के भीतर से उपाय और कठिनाइयों की काट की खोज करता है।

 

प्रश्न 2 – गाँव में बच्चों की मंडली के कौन-कौन होते थे और उस मंडली का क्या नाम था?

उत्तर – गाँव में बच्चों की एक मंडली हुआ करती थी जिसमें 10-12 से लेकर 16-18 साल के लड़के होते थे। ये बच्चे अपने शरीर पर सिर्फ एक लंगोटी या जांगिया पहने रहते थे। लोगों ने इस मंडली के दो बिलकुल विपरीत नाम रखे हुए थे – इन्द्रसेना और मेंढक मंडली। जो लोग उनके नग्नस्वरूप शरीर, उनकी उछलकूद, उनके शोर-शराबे और उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे, वे उन्हें अक्सर मेढक-मंडली कहते थे। और जो लोग यह मानते थे कि इस मंडली पर पानी फेंकने से बारिश हो जाएगी। वो इस मंडली को “इंद्र सेना” कहा करते थे।

 

प्रश्न 3 – “इंद्र सेना” क्या किया करती थी?

उत्तर – जब गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती थी और पानी की कमी हर जगह होने लगती थी और आसमान में दूर-दूर तक कही बादल दिखाई नहीं देते थे। तब ये बच्चे एक जगह इकट्ठा होकर जयकारा लगाते थे “बोल गंगा मैया की जय।” जयकारा सुनते ही लोग सावधान हो जाते थे। “काले मेघा पानी दे, गगरी फूटी बैल पियासा, पानी दे, गुड़धानी दे, काले मेघा पानी दे।” लोकगीत गाते हुए गाँव की गलियों में धूमा करते थे। इस लोकगीत को सुनकर महिलाएं व लड़कियाँ घरों की खिड़कियों से झांकने लगती थी। यह मंडली “पानी दे मैया , इंदर सेना आयी हैं….” कहते हुए अचानक गली के किसी मकान के सामने रुक जाती, तो उस घर के लोग बाल्टी भर पानी उस मंडली के ऊपर फेंका देते थे।

 

प्रश्न 4 – बारिश न होने से क्या हालात होते थे और हार कर क्या किया जाता था?

उत्तर – जब जेठ का महीना बीत जाता और आषाढ़ भी आधा गुजर जाता मगर फिर भी बारिश नहीं होती तब गांवों व शहरों में सूखे के से हालत हो जाते हैं। मिट्टी इतनी सुखी हो जाती है कि जमीन भी फटने लगती है। इंसान व जानवर पानी के बैगर तड़प-तड़प कर मरने लगते मगर फिर भी आसमान में बादलों का कही कोई निशान तक दिखाई नहीं देता। और विज्ञान भी उनकी इसमें कोई मदद नहीं कर पाता तब ऐसे मुश्किल हालातों में लोग अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचलित लोक विश्वासों जैसे पूजा पाठ, हवन-यज्ञ आदि के सहारे भगवान इंद्र से प्रार्थना कर वर्षा की उम्मीद लगाने लगाते थे। जब यह सब कुछ करने के बाद भी केवल हार ही नसीब होती हैं तो फिर अंत में इंदर सेना को बुलाया जाता था।

 

प्रश्न 5 – इंद्र सेना क्या करती थी और लेखक की क्या प्रतिक्रिया होती थी?

उत्तर – इंद्र सेना, भगवान इंद्र से वर्षा की प्रार्थना करती हुई, गीत गाती हुई पूरे गांव में निकलती थी। उस समय लेखक को भी पानी मिलने की आशा में यह सब कुछ करना ठीक लगता था। परंतु एक बात लेखक की समझ में नहीं आती थी कि जब चारों ओर पानी की इतनी अधिक कमी है कि जानवर और इंसान, दोनों ही पानी के लिए परेशान हो रहे हैं तो फिर भी मुश्किल से इकट्ठा किया हुआ पानी लोग इंद्रसेना पर डाल कर उसे क्यों बर्बाद करते हैं। लेखक को यह सब सरासर अंधविश्वास लगता था और उनको लगता था कि इस तरह के अन्धविश्वास देश को न जाने कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। लेखक के अनुसार तो यह इंद्र सेना नही बल्कि पाखंड हैं। ऐसा लेखक इसलिए कहते हैं क्योंकि अगर यह इंद्र सेना, सच में इंद्र महाराज से पानी दिलवा सकती तो, क्या वो पहले अपने लिए पानी नहीं मांग लेती। लेखक मानते हैं कि इस तरह के अंधविश्वास के कारण ही तो हम अंग्रेजों से पिछड़ गए और उनके गुलाम हो गये।

 

प्रश्न 6 – लेखक बचपन से ही किससे प्रभावित था और क्या कार्य करता था?

उत्तर – लेखक भी बचपन में उस समय लगभग इंद्र सेना में शामिल होने वाले बच्चों की ही उम्र के थे। वे बचपन से ही आर्य समाजी संस्कार से प्रभावित थे। वो उस समय “कुमार सुधार सभा” के उपमंत्री भी थे। जिसका कार्य समाज में सुधार करना व अंधविश्वास को दूर करना था।

 

प्रश्न 7 – लेखक वैज्ञानिक सोच होने पर भी जीजी के कार्यों को क्यों मान लेते थे?

उत्तर – हालाँकि लेखक हमेशा अपनी वैज्ञानिक सोच के आधार पर अंधविश्वासों के तर्क ढूंढते रहते थे। फिर भी वो इस बात को स्वीकार करते हैं कि उन्होंने भी  ऐसे कई रीति-रिवाजों को अपनाया जो उन्हें उनकी जीजी ने अपनाने को कहा था। लेखक को सबसे अधिक प्यार उनकी जीजी से ही मिला। वो रिश्ते में लेखक की कुछ भी नहीं लगती थी। और वो उम्र में लेखक की माँ से भी बड़ी थी लेकिन वो अपने परिवार वालों से पहले लेखक को मानती थी और हर  पूजा-पाठ, तीज त्यौहार आदि में बुलाया करती थी और सारा काम लेखक के हाथों से ही करवाया करती थी। ताकि लेखक को उसका पुण्य मिल सके। और लेखक भी उनके अपार स्नेह के कारण उनकी हर बात मानते थे।

 

प्रश्न 8 – इंद्रसेना पर पानी फेंकने और नाराज हुए लेखक को जीजी ने कैसे समझाया?

उत्तर – जब जीजी ने लेखक से इंद्रसेना पर पानी फेंकने को कहा तो, लेखक ने बिलकुल साफ मना कर दिया। लेकिन जीजी ने खुद ही बाल्टी भर पानी ले कर आई जिसे उठाने में उन्हें बहुत दिक्क्त भी आ रही थी परन्तु फिर भी लेखक ने उनकी मदद नहीं की और जीजी ने खुद ही इंद्रसेना के ऊपर पानी फेंक दिया जिसे देखकर लेखक नाराज हो गए। लेखक को मनाते हुए जीजी ने उन्हें बड़े प्यार से समझाया कि यह पानी की बर्बादी नहीं है। बल्कि यह तो पानी का अर्क है जो हम इंद्रसेना के माध्यम से इंद्रदेव पर चढ़ाते हैं। ताकि वे प्रसन्न हो कर हम पर पानी की बरसात करें। जो चीज इंसान पाना चाहता है, यदि पहले उस चीज़ को देगा नहीं तो पाएगा कैसे। इसके लिए जीजी ऋषि-मुनियों के दान को सबसे ऊंचा स्थान दिए जाने को प्रमाणस्वरूप बताती है।

 

प्रश्न 9 – जीजी ने अपने आप को सही ठहराने के लिए लेखक को क्या तर्क दिए?

उत्तर – जीजी लेखक से कहती है कि बिना त्याग के दान नहीं होता। अगर तुम्हारे पास करोड़ो रुपए हैं और तुमने उसमें से कुछ रूपये दान कर दिए तो, वो दान नहीं हैं। दान तो वह है जब किसी के पास कोई चीज बहुत कम है और उसे उसकी जरुरत भी है। फिर भी वह उस वस्तु का दान कर रहा है। तो उसको उस दान का फल मिलता है। 

तू पढ़ा-लिखा है मगर वह पढ़ी-लिखी नहीं हूँ। लेकिन वह इस बात को अपने अनुभव से जानती है कि जब किसान 30-40 मन गेहूँ उगना चाहता हैं तो वह 5-6 सेर अच्छा गेहूं जमीन में क्यारियाँ बनाकर उसमें फेंक देता है। और वह इस तरह गेहूँ की बुवाई करता है। बस हम भी तो इन्द्रसेना पर पानी फ़ेंक कर पानी की बुवाई ही कर रहे हैं।

जब हम यह पानी गली में बोयेंगे, तब तो शहर, कस्बे और गाँव में पानी वाले बादलों की फसल आएगी। हम बीज बनाकर पानी देते हैं फिर काले मेघा से पानी मांगते हैं।

सब ऋषि मुनि कह गए, पहले खुद दो, तब देवता तुम्हें चौगुना-आठगुना कर लौटाऐंगे।

 

प्रश्न 10 –  “बादल आते हैं पानी बरसता है लेकिन बैल प्यासे के प्यासे और गगरी फूटी की फूटी रहती हैं। आखिर यह स्थिति कब बदलेगी ”। से लेखक का लय अभिप्राय है?

उत्तर – “बादल आते हैं पानी बरसता है लेकिन बैल प्यासे के प्यासे और गगरी फूटी की फूटी रहती हैं। आखिर यह स्थिति कब बदलेगी ”। लेखक की यह पंक्ति हमारी समाजिक व्यवस्था पर एक व्यंग्य है। हम अपने देश के लिए करते क्या हैं ? क्योंकि हमारी मांगें तो हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी है पर त्याग का कहीं कोई नाम भी नहीं है। अपना स्वार्थ साधना ही एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम खूब मज़े ले लेकर लोगों की भ्रष्टाचार की बातें तो खूब करते हैं लेकिन क्या हम खुद उसी भ्रष्टाचार के अंग तो नहीं बन रहे है। हमारे देश में हर वर्ष हजारों योजनाएं बनाती हैं। लेकिन इन योजनाओं का लाभ उस वर्ग को कभी नहीं मिलता जो उसके हकदार हैं। हर समय विकास की बातें तो बहुत की जाती हैं मगर यह विकास सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाता हैं। इसीलिए लेखक कहते हैं कि “बरसात होने के बाद भी बैल प्यासा रह जाता हैं और गगरी फूट जाती हैं।”

 

 

काले मेघा पानी दे पाठ पर आधारित कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर (Multiple Choice Questions)

 

प्रश्न 1 – “काले मेघा पानी दे”, में किसके बीच संघर्ष दिखाया गया है?

(क) प्रचलित आत्मकथाओं और विशवास के बीच

(ख) लोगों और इंद्र भगवान् के बीच

(ग) प्रचलित विश्वास और विज्ञान के बीच

(घ) लेखक और साधारण लोगों के बीच

उत्तर – (ग) प्रचलित विश्वास और विज्ञान के बीच

 

प्रश्न 2 – यह पाठ किस संदर्भ में हैं?

(क) इंद्र भगवान्

(ख) वर्षा

(ग) कीचड़

(घ) मेंढक मंडली  

उत्तर – (ख) वर्षा

 

प्रश्न 3  – आषाढ़ महीने में किसानों को किसका इंतजार रहता है?

(क) बरसात का

(ख) बादलों का

(ग) फसल का

(घ) सूरज का

उत्तर – (क) बरसात का

 

प्रश्न 4 – गाँव के लोगों क्यों परेशान थे?

(क) बारिश का न होने के कारण

(ख) कुओं का पानी सूख जाने के कारण

(ग) नलों में पानी का न आने अथवा बेहद गर्म आने के कारण

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 5 – इंद्र सेना किस महीने में निकलती थी?

(क) आषाढ़

(ख) जेठ

(ग) माघ

(घ) सावन

उत्तर – (क) आषाढ़

 

प्रश्न 6 – लड़कों ने अपनी टोली का नाम “इंद्रसेना” क्यों रखा था?

(क) बादलों को प्रसन्न करने के लिए

(ख) लोगों को प्रसन्न करने के लिए

(ग) इंद्र को प्रसन्न करने के लिए

(घ) सेना को प्रसन्न करने के लिए

उत्तर – (ग) इंद्र को प्रसन्न करने के लिए

 

प्रश्न 7 – इंद्रसेना क्या करती है?

(क) कीचड़ में लथपथ होकर लोगों से पानी मांगती थी

(ख) कीचड़ में लथपथ होकर मेघों से पानी मांगती थी

(ग) कीचड़ में लथपथ होकर लेखक से पानी मांगती थी

(घ) कीचड़ में लथपथ होकर जीजी से पानी मांगती थी

उत्तर – (ख) कीचड़ में लथपथ होकर मेघों से पानी मांगती थी

 

प्रश्न 8 – लड़कों की टोली के क्या-क्या नाम थे?

(क) इंद्र मंडली और इंद्रसेना

(ख) मेढक मंडली और मेढक सेना

(ग) मेढक मंडली और आषाढ़ सेना

(घ) मेढक मंडली और इंद्रसेना

उत्तर – (घ) मेढक मंडली और इंद्रसेना

 

प्रश्न 9 – इंद्रसेना जब जयकारा लगाती थी तो लोगों की क्या प्रतिक्रिया होती थी?

(क) सभी लोग घबरा जाते थे

(ख) सभी लोग सावधान हो जाते थे

(ग) सभी लोग भाग जाते थे

(घ) सभी लोग घरों में बंद हो जाते थे

उत्तर – (ख) सभी लोग सावधान हो जाते थे

 

प्रश्न 10 – इंद्रसेना को “मेढक मंडली” नाम क्यों दिया गया था?

(क) क्योंकि इस मंडली के बच्चे मेंढक की तरह उछल-कूद करते थे

(ख) क्योंकि इस मंडली के बच्चे मेंढक की तरह शोर-शराबा करते थे

(ग) क्योंकि इस मंडली के बच्चे नंग-धड़ंग शरीर के साथ कीचड़ में लोटते थे

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 11 – लोकगीत गाते हुए इंद्र सेना पर गाँव के लोग क्या फेंका करते थे?

(क) चुलु भर पानी

(ख) बाल्टी भर पानी

(ग) कीचड़ से भर पानी

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (ख) बाल्टी भर पानी

 

प्रश्न 12 – जीजी ने “पानी की बुवाई” किसे कहा है?

(क) खेतों पर पानी फेंके जाने को

(ख) कीचड़ पर पानी फेंके जाने को

(ग) इंद्रसेना पर पानी फेंके जाने को

(घ) आषाढ़ में फसलों पर पानी फेंके जाने को

उत्तर – (ग) इंद्रसेना पर पानी फेंके जाने को

 

प्रश्न 13 – लेखक को क्या बात बुरी लगती थी?

(क) पानी की बर्बादी

(ख) सूखे में पानी की बर्बादी

(ग) सूखे में भोजन की बर्बादी

(घ) फसलों की बर्बादी

उत्तर – (ख) सूखे में पानी की बर्बादी

 

प्रश्न 14 – लेखक बचपन से ही किससे प्रभावित थे?

(क) सांस्कृतिक समाज से

(ख) शिक्षित समाज से

(ग) अपने आस-पास के समाज से

(घ) आर्य समाज से

उत्तर – (घ) आर्य समाज से

 

प्रश्न 15 – लेखक के हाथों जीजी पूजाअनुष्ठान क्यों कराती थी?

(क) लेखक को भगवान् पर विश्वास दिलाने के लिए

(ख) लेखक के कल्याण के लिए

(ग) लेखक के भविष्य के लिए

(घ) लेखक को उन पर विश्वास कराने के लिए

उत्तर – (ख) लेखक के कल्याण के लिए

 

प्रश्न 16 – जीजी के अनुसार, ऋषि-मुनि क्या कह कर गए हैं?

(क) जितना दान करोगे, देवता तुम्हें उसका चौगुना-आठगुना करके लौटायेंगे

(ख) जितना धन इकठ्ठा करोगे, देवता तुम्हें उसका चौगुना-आठगुना करके लौटायेंगे

(ग) केवल (ख)

(घ) (क) और (ख) दोनों

उत्तर – (क) जितना दान करोगे, देवता तुम्हें उसका चौगुना-आठगुना करके लौटायेंगे

 

प्रश्न 17 – जीजी के अनुसार किस वस्तु का दान अधिक महत्वपूर्ण होता है?

(क) जो वस्तु हमारे पास बहुत कम है और जिसकी हमें भी जरुरत है

(ख) जो वस्तु हमारे पास अधिक है और जिसकी हमें जरुरत है

(ग) जो वस्तु हमारे पास अधिक है और जिसकी हमें जरुरत नहीं है

(घ) जो वस्तु हमारे पास नहीं है और न ही हमें उसकी जरुरत है

उत्तर – (क) जो वस्तु हमारे पास बहुत कम है और जिसकी हमें भी जरुरत है

 

प्रश्न 18 – जेठ महीने के सबसे गर्म समय को क्या पुकारा जाता है?

(क) जेठतपा

(ख) गर्मतपा

(ग) बसतपा

(घ) दसतपा

उत्तर – (घ) दसतपा

 

प्रश्न 19 – लेखक और जीजी की बातों को कितने वर्ष पूरे हो रहे हैं?

(क) 10 वर्ष

(ख) 20 वर्ष

(ग) 50 वर्ष

(घ) 40 वर्ष

उत्तर – (ग) 50 वर्ष

 

प्रश्न 20 – आजकल हम लोग अधिकतर मज़े लेकर किसकी बातें करते हैं?

(क) भ्रष्टाचार की

(ख) अंधविश्वास की

(ग) विज्ञान की

(घ) पारम्परिक विश्वास की

उत्तर – (क) भ्रष्टाचार की

 

 

काले मेघा पानी दे पाठ के सार-आधारित प्रश्न Extract Based Questions

सारआधारित प्रश्न बहुविकल्पीय किस्म के होते हैं, और छात्रों को पैसेज को ध्यान से पढ़कर प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प का चयन करना चाहिए। (Extract-based questions are of the multiple-choice variety, and students must select the correct option for each question by carefully reading the passage.)

 

1 –

उन लोगों के दो नाम थे-इंदर सेना या मेढक-मंडली। बिलकुल एक-दूसरे के विपरीत। जो लोग उनके नग्नस्वरूप शरीर, उनकी उछल-कूद, उनके शोर-शराब और उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ कांदो से चिढ़ते थे, वे उन्हें कहते थे मेढ़क-मंडली। उनकी अगवानी गालियों से होती थी। वे होते थे दस-बारह बरस से सोलह-अठारह बरस के लड़के, साँवला नंगा बदन सिर्फ एक जांघिया या कभी-कभी सिर्फ लंगोटी। एक जगह इक्कट्ठा होते थे। पहला जयकारा लगता था, ‘बोल गंगा मैया की जय। जयकारा सुनते ही लोग सावधान हो जाते थे। स्त्रियाँ और लड़कियाँ बारजे से झाँकने लगती थीं और यह विचित्र नंग-धडंग टोली उछलती-कूदती समवेत पुकार लगाती थी।

काले मेघा पानी दे

गगरी फूटी बैल पियासा

पानी दे, गुड़धानी दे

काले मेघा पानी दे।

 

प्रश्न 1 – मंडली को इन्द्रसेना कौन पुकारते थे?

(क) जो मानते थे इस मंडली पर पानी फेंकने से बारिश हो जाएगी

(ख) जो उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे

(ग) जो इंद्र भगवान् को मानते थे

(घ) जो जीजी के कहे अनुसार काम करते थे  

उत्तर – (क) जो मानते थे इस मंडली पर पानी फेंकने से बारिश हो जाएगी

 

प्रश्न 2 – मंडली को मेंढक मंडली कौन पुकारते थे?

(क) जो मानते थे इस मंडली पर पानी फेंकने से बारिश हो जाएगी

(ख) जो उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे

(ग) जो इंद्र भगवान् को मानते थे

(घ) जो जीजी के कहे अनुसार काम करते थे

उत्तर – (ख) जो उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे

 

प्रश्न 3 – मंडली को मेंढक मंडली क्यों पुकारा जाता था?

(क) उनके नग्नस्वरूप शरीर के कारण

(ख) उनके शोर-शराब के कारण

(ग) उनकी उछल-कूद के कारण

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 4 – मेढ़क-मंडली में कैसे लड़के होते थे?

(क) दस-बारह वर्ष से सौलह अठारह वर्ष के

(ख) जिनका रंग साँवला होता था

(ग) जो वस्त्र के नाम पर सिर्फ एक जांघिया या कभी-कभी सिर्फ लंगोटी पहनते थे

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 5 – गुड़धानी से क्या आशय है?

(क) गुड़

(ख) ईख

(ग) अनाज

(घ)  पानी

उत्तर – (ग) अनाज

 

2 –

हाथ, पाँव, बदन, मुँह, पेट सब पर गंदा कीचड़ मल कर फिर हाँक लगाते ” बोल गंगा मैया की जय ” और फिर मंडली बाँध कर उछलते-कूदते अगले घर की ओर चल पड़ते बादलों को टेरते, ” काले मेघा पानी दे।” वे सचमुच ऐसे दिन होते जब गली-मुहल्ला, गाँव-शहर हर जगह लोग गरमी में भुन-भुन कर त्राहिमाम कर रहे होते, जेठ के दसतपा बीतकर आषाढ़ का पहला पखवारा भी बीत चुका होता, पर क्षितिज पर कहीं बादल की रेख भी नहीं दिखती होती, कुएँ सूखने लगते, नलों में एक तो बहुत कम पानी आता और आता भी तो आधी रात को, मानो खौलता हुआ पानी हो। शहरों की तुलना में गाँव में और भी हालत खराब होती थी। जहाँ जुताई होनी चाहिए वहाँ खेतों की मिट्टी सूख कर पत्थर हो जाती, फिर उसमें पपड़ी पड़कर जमीन फटने लगती, लू ऐसी कि चलते चलते आदमी आधे रास्ते में लू खाकर गिर पड़े। ढोर ढंगर प्यास के मारे मरने लगते लेकिन बारिश का कहीं नाम निशान नहीं, ऐसे में पूजा-पाठ कथा-विधान सब करके लोग जब हार जाते तब अंतिम उपाय के रूप में निकलती यह इंदर सेना। वर्षा के बादलों के स्वामी हैं इंद्र और इंद्र की सेना टोली बाँधकर कीचड़ में लथपथ निकलती, पुकारते हुए मेघों को, पानी माँगते हुए प्यासे गलों और सूखे खेतों के लिए। पानी की आशा पर जैसे सारा जीवन आकर टिक गया हो।

 

 

प्रश्न 1 – बच्चों का झुंड बादलों से क्या प्रार्थना करते थे?

(क) छाया करने की

(ख) पानी बरसाने की

(ग) बिजली गिराने की

(घ) वहाँ से चले जाने की

उत्तर – (ख) पानी बरसाने की

 

प्रश्न 2 – बारिश न होने से क्या परेशानियाँ आ खड़ी हुई थी?

(क) हर जगह लोग गरमी में भुन-भुन कर त्राहिमाम कर रहे होते

(ख) कुएँ सूखने लगते

(ग) खेतों की मिट्टी सूख कर पत्थर हो जाती

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 3 – गाँव के लोग क्यों परेशान थे?

(क) जब आषाढ़ के पंद्रह दिन बीत चुके होते थे तथा बादलों का नामोनिशान नहीं दिखाई देता था

(ख) जब आषाढ़ के पंद्रह दिन बीत चुकने पर भी बारिश नहीं रूकती थी

(ग) जब बादल लगातार पंद्रह दिनों तक बरसते रहते थे

(घ)  जब बारिश के कारण गाँव के लोगों की फसलें खराब हो जाया करती थी

उत्तर – (क) जब आषाढ़ के पंद्रह दिन बीत चुके होते थे तथा बादलों का नामोनिशान नहीं दिखाई देता था

 

प्रश्न 4 – गाँव वाले बारिश न होने पर हार कर क्या उपाय करते थे?

(क) बारिश के देवता इंद्र से प्रार्थना करते थे

(ख) वे कहीं पूजा-पाठ करते थे तो कहीं कथा-कीर्तन करते थे

(ग) इंद्र सेना से कीचड़ व पानी में लथपथ होकर वर्षा के लिए गुहार लगवाते थे

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (ग) इंद्र सेना से कीचड़ व पानी में लथपथ होकर वर्षा के लिए गुहार लगवाते थे

 

प्रश्न 5 – लेखक को सब कुछ देख कर सारा जीवन किस पर आकर टिक गया लगता था?

(क) इंद्र सेना पर

(ख) पानी की आशा पर

(ग) बादलों पर

(घ)  इंद्र भगवान् के प्रसन्न होने पर

उत्तर – (ख) पानी की आशा पर

 

 

3 –

बस एक बात मेरे समझ में नहीं आतीं थी कि जब चारों ओर पानी की इतनी कमी है तो लोग घर में इतनी कठिनाई से इकट्ठा करके रखा हुआ पानी बाल्टी भर-भरकर इन पर क्यों फेंकते हैं। कैसी निर्मम बरबादी है पानी की। देश की कितनी क्षति होती है इस तरह के अंधविश्वासों से। कौन कहता है इन्हें इंद्र की सेना? अगर इंद्र महाराज से ये पानी दिलवा सकते हैं। तो खुद अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेते? क्यों मुहल्ले भर का पानी नष्ट करवाते घूमते हैं? नहीं यह सब पाखंड है। अंधविश्वास है। ऐसे ही अंधविश्वासों के कारण हम अंग्रेजों से पिछड़ गए और गुलाम बन गए।

मैं असल में था तो इन्हीं मेढक-मंडली वालों की उमर का, पर कुछ तो बचपन के आर्यसमाजी संस्कार थे और एक कुमारसुधार सभा कायम हुई थी उसका उपमंत्री बना दिया गया था-सो समाज-सुधार का जोश कुछ ज्यादा ही था। अंधविश्वासों के खिलाफ तो तरकस में तीर रखकर घूमता रहता था। मगर मुश्किल यह थी कि मुझे अपने बचपन में जिससे सबसे ज्यादा प्यार मिला वे थीं जीजी। यूँ मेरी रिश्ते में कोई नहीं थीं। उम्र में मेरी माँ से भी बड़ी थीं, पर अपने लड़के-बहू सबको छोड़कर उनके प्राण मुझी में बसते थे। और वे थीं उन तमाम रीति-रिवाजों, तीज- त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों की खान जिन्हें कुमारसुधार सभा का यह उपमंत्री अंधविश्वास कहता था, और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता था। पर मुश्किल यह थी कि उनका कोई पूजा-विधान, कोई त्योहार अनुष्ठान मेरे बिना पूरा नहीं होता था।

 

प्रश्न 1 – लेखक को कौन-सी बात समझ में नहीं आती थी?

(क) कठिनाई से इकट्टे किए हुए पानी को लोग बाल्टी भर-भरकर इंद्र सेना पर क्यों फेंकते हैं

(ख) कठिनाई से इकट्टे किए हुए पानी को इंद्र सेना पर फेंकने से क्या लाभ होगा

(ग) कठिनाई से इकट्टे किए हुए पानी को इंद्र सेना पर फेंकने से क्या बारिश हो जाएगी

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर – (क) कठिनाई से इकट्टे किए हुए पानी को लोग बाल्टी भर-भरकर इंद्र सेना पर क्यों फेंकते हैं

 

प्रश्न 2 – लेखक इंद्र सेना को न मानने के लिए क्या तर्क देता है?

(क) ये कोई इंद्र सेना नहीं पाखण्ड है

(ख) अगर इंद्र महाराज से ये पानी दिलवा सकते हैं, तो खुद अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेते

(ग) यह पानी की बर्बादी है

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (ख) अगर इंद्र महाराज से ये पानी दिलवा सकते हैं, तो खुद अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेते

 

प्रश्न 3 – लेखक बचपन में क्या काम करता था?

(क) लेखक बचपन में आर्यसमाजी संस्कारों से प्रभावित था

(ख) लेखक कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री था

(ग) लेखक अंधविश्वासों के खिलाफ़ प्रचार करता था

(घ)  उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ)  उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 4 – लेखक अंधविश्वासों के विरोध में होने पर भी उनको मानने के लिए क्यों विवश होता था?

(क) पिता के डर के कारण

(ख) जीजी के स्नेह के कारण

(ग) इंद्र सेना के कारण

(घ) लोगों के कहने के कारण

उत्तर – (ख) जीजी के स्नेह के कारण

 

प्रश्न 5 – अंधविश्वासों के खिलाफ तरकस में तीर रखकर घूमने से क्या अभिप्राय है?

(क) अंधविश्वासों फैलाने वालों को समाप्त करने का प्रयास करना

(ख) अंधविश्वासों के खिलाफ़ जन-जागृति फैलाना

(ग) अंधविश्वासों को समाप्त करने का प्रयास करना

(घ)  अंधविश्वासों के खिलाफ़ जन-जागृति फैलाते हुए उन्हें समाप्त करने का प्रयास करना

उत्तर – (घ)  अंधविश्वासों के खिलाफ़ जन-जागृति फैलाते हुए उन्हें समाप्त करने का प्रयास करना

 

 

4 –

दीवाली है तो गोबर और कौड़ियों से गोवर्धन और सतिया बनाने में लगा हूँ, जन्माष्टमी है तो रोज़ आठ दिन की झाँकी तक को सजाने और पँजीरी बाँटने में लगा हूँ, हर-छठ है तो छोटी रंगीन कुल्हियों में भूजा भर रहा हूँ। किसी में भुना चना, किसी में भुनी मटर, किसी में भुने अरवा चावल, किसी में भुना गेहूँ। जीजी यह सब मेरे हाथों से करातीं, ताकि उनका पुण्य मुझे मिले। केवल मुझे। लेकिन इस बार मैंने साफ़ इन्कार कर दिया। नहीं फेंकना है मुझे बाल्टी भर-भरकर पानी इस गंदी मेढक-मंडली पर। जब जीजी बाल्टी भरकर पानी ले गईं-उनके बूढे पाँव डगमगा रहे थे, हाथ काँप रहे थे, तब भी मैं अलग मुँह फुलाए खड़ा रहा। शाम को उन्होंने लडू-मठरी खाने को दिए तो मैंने उन्हें हाथ से अलग खिसका दिया। मुँह फेरकर बैठ गया, जीजी से बोला भी नहीं। पहले वे भी तमतमाई, लेकिन ज्यादा देर तक उनसे गुस्सा नहीं रहा गया। पास आकर मेरा सर अपनी गोद में लेकर बोलीं, ‘देख भइया, रूठ मत। मेरी बात सुन। यह सब अंधविश्वास नहीं है। हम इन्हें पानी नहीं देंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी कैसे देंगे?” मैं कुछ नहीं बोला। फिर जीजी बोली, “तू इसे पानी की बरबादी समझता है पर यह बरबादी नहीं है। यह पानी का अर्घ्य चढ़ाते हैं, जो चीज मनुष्य पाना चाहता है उसे पहले देगा नहीं तो पाएगा कैसे? इसीलिए ऋषि-मुनियों ने दान को सबसे ऊँचा स्थान दिया है।”

 

प्रश्न 1 – जीजी लेखक से क्या काम करवाती थी?

(क) दीवाली है तो गोबर और कौड़ियों से गोवर्धन और सतिया बनाना

(ख) जन्माष्टमी है तो रोज़ आठ दिन की झाँकी तक को सजाने और पँजीरी बाँटना

(ग) हर-छठ है तो छोटी रंगीन कुल्हियों में भूजा भरना

(घ) उपरोक्त सभी  

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 2 – जीजी लेखक से सभी धार्मिक काम क्यों करवाती थी?

(क) ताकि लेखक का विश्वास बड़े

(ख) ताकि लेखक को पुण्य मिल सके

(ग) ताकि लेखक और उनका स्नेह और बढ़ता रहे

(घ) ताकि लेखक को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो

उत्तर – (ख) ताकि लेखक को पुण्य मिल सके

 

प्रश्न 3 – पानी डालते समय जीजी की क्या हालत थी?

(क) जीजी लेखक को मदद के लिए पुकार रही थी

(ख) जीजी जल्दी से दौड़ते हुए पानी लाई थी

(ग) जीजी की आँखों में ख़ुशी थी

(घ) जीजी के हाथ काँप रहे थे तथा उसके बूढ़े पाँव डगमगा रहे थे

उत्तर – (घ) जीजी के हाथ काँप रहे थे तथा उसके बूढ़े पाँव डगमगा रहे थे

 

प्रश्न 4 – जीजी ने नाराज लेखक को मनाने के लिए क्या कहा?

(क) यह सब अंधविश्वास नहीं है

(ख) हम इन्हें पानी नहीं देंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी कैसे देंगे

(ग) तू इसे पानी की बरबादी समझता है पर यह बरबादी नहीं है। यह पानी का अर्घ्य चढ़ाते हैं

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 5 – जीजी ने लेखक को दान के पक्ष में क्या तर्क दिया?

(क) जो चीज मनुष्य पाना चाहता है उसे पहले देगा नहीं तो पाएगा कैसे

(ख) ऋषि-मुनियों ने दान को सबसे ऊँचा स्थान दिया है

(ग) यदि हम इंदर सेना को पानी नहीं देंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी कैसे देगा

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

5 –

फिर जीजी बोलीं, “देख तू तो अभी से पढ़-लिख गया है। मैंने तो गाँव के मदरसे का भी मुँह नहीं देखा। पर एक बात देखी है कि अगर तीस-चालीस मन गेहूं उगाना है तो किसान पाँच-छह से अच्छा गेहूं अपने पास से लेकर जमीन में क्यारियाँ बनाकर फेंक देता है। उसे बुवाई कहते हैं। यह जो सूखे के समय हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह भी बुवाई है। यह पानी गली में बोएँगे तो सारे शहर, कस्बा, गाँव पर पानी वाले बादलों की फसल आ जाएगी। हम बीज बनाकर पानी देते हैं, फिर काले मेघा से पानी माँगते हैं। सब ऋषि-मुनि कह गए हैं कि पहले खुद दो तब देवता तुम्हें चौगुना-अठगुना करके लौटाएँगे। भइया, यह तो हर आदमी का आचरण है, जिससे सबका आचरण बनता है। ‘यथा राजा तथा प्रजा’ सिर्फ यही सच नहीं है। सच यह भी है कि ‘यथा प्रजा तथा राजा’। यही तो गाँधी जी महाराज कहते हैं।” जीजी का एक लड़का राष्ट्रीय आंदोलन में पुलिस की लाठी खा चुका था, तब से जीजी गाँधी महाराज की बात अकसर करने लगी थीं। इन बातों को आज पचास से ज्यादा बरस होने को आए पर ज्यों की त्यों मन पर दर्ज हैं।

कभी-कभी कैसे-कैसे संदर्भो में ये बातें मन को कचोट जाती हैं, हम आज देश के लिए करते क्या हैं? माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है। अपना स्वार्थ आज एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम चटखारे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं। पर क्या कभी हमने जाँचा है कि अपने स्तर पर अपने दायरे में हम उसी भ्रष्टाचार के अंग तो नहीं बन रहे हैं? काले मेघा दल के दल उमड़ते हैं, पानी झमाझम बरसता है, पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रह जाते हैं? आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?

 

प्रश्न 1 – जीजी अपनी बात के सही साबित करने के लिए लेखक को क्या तर्क देती है?

(क) खेत की बुवाई का

(ख) पानी की बुवाई का

(ग) कीचड़ की बुवाई का

(घ) आचरण की बुवाई का

उत्तर – (क) खेत की बुवाई का

 

प्रश्न 2 – लेखक को समझाने के लिए जीजी पानी की बुवाई के संबंध में क्या बात बताती है?

(क) यह जो सूखे के समय हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह पानी की बुवाई है

(ख) यह पानी गली में बोएँगे तो सारे शहर, कस्बा, गाँव पर पानी वाले बादलों की फसल आ जाएगी

(ग) हम बीज बनाकर पानी देते हैं, फिर काले मेघा से पानी माँगते हैं

(घ)  उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ)  उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 3 – लेखक के मन को कौन सी बातें कचोट जाती हैं?

(क) हम आज देश के लिए करते क्या हैं

(ख) माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं है

(ग) अपना स्वार्थ आज एकमात्र लक्ष्य रह गया है

(घ)  उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ)  उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 4 – हम चटखारे लेकर किसकी बातें करते हैं?

(क) धर्म

(ख) भ्र्ष्टाचार

(ग) अंधविश्वास

(घ) संस्कृति

उत्तर – (ख) भ्र्ष्टाचार

 

प्रश्न 5 – ‘आखिर कब बदलेगी यह स्थिति’ आपके विचार से यह स्थिति कब बदल सकती है?

(क) जब समाज और सरकार में इसे बदलने की दृढ़ इच्छा शक्ति जाग्रत हो जाए

(ख) जब समाज और सरकार में स्वार्थ समाप्त हो जाए

(ग) जब समाज और सरकार भ्रष्टाचार से दूरी बना लें

(घ) उपरोक्त सभी

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

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