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कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया Question Answers

 

 

CBSE Class 11 Hindi Core Abhivyakti Aur Madhyam Book Chapter 14 कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया Question Answers

 

Karyalayi Lekhan Aur Prakriya Class 11 – CBSE Class 11 Hindi Core Abhivyakti Aur Madhyam Book Chapter 14 Karyalayi Lekhan Aur Prakriya Question Answers. The questions listed below are based on the latest CBSE exam pattern, wherein we have given NCERT solutions of the chapter,  extract based questions, multiple choice questions, short and long answer questions. 

 

सीबीएसई कक्षा 11 हिंदी अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक पाठ 14 कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया प्रश्न उत्तर | इस लेख में NCERT की पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर  तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों का व्यापक संकलन किया है। 

 

 

Karyalayi Lekhan Aur Prakriya Question and Answers (कार्यालयी लेखन और प्रक्रिया प्रश्न-अभ्यास ) 

 

 

प्रश्न 1 – नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। इनमें आप पत्राचार के किस रूप का प्रयोग करेंगे ? लिखिए-

(क) किसी सरकारी-पत्र की कार्रवाई के रूप में फाइल शुरू करके विषय का निपटान करना।

(ख) विचाराधीन मामलों को निपटाने के लिए लिखित सुझाव देना।

(ग) जब सरकार को जन-सामान्य तक कोई सूचना पहुँचानी हो।

(घ) किसी विभाग को कोई सूचना अपने विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों को देनी हो।

(घ) विभाग द्वारा श्रीमती रूपाली को अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान का डिप्लोमा करने संबंधी अनुमति प्रदान करना।

(च) मंत्रालय द्वारा श्रीमती सुलेखा को शिक्षा-शिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने संबंधी सूचना देना।

(छ) किसी कार्य का अनुपालन न होने की स्थिति में उसके बारे में पुनः स्मरण कराना।

(ज) अपने समकक्ष अधिकारी से किसी संदर्भ में परामर्श लेना।

 

उत्तर –

(क) किसी सरकारी-पत्र की कार्रवाई के रूप में फाइल शुरू करके विषय का निपटान करना।

उत्तर – सरकारी पत्र का।

(ख) विचाराधीन मामलों को निपटाने के लिए लिखित सुझाव देना।

उत्तर – टिप्पण।

(ग) जब सरकार को जन-सामान्य तक कोई सूचना पहुँचानी हो।

उत्तर – प्रेस विज्ञाप्ति।

(घ) किसी विभाग को कोई सूचना अपने विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों को देनी हो।

उत्तर – सुचना।

(ड़) विभाग द्वारा श्रीमती रूपाली को अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान का डिप्लोमा करने संबंधी अनुमति प्रदान करना।

उत्तर – सरकारी आदेश।

(च) मंत्रालय द्वारा श्रीमती सुलेखा को शिक्षा-शिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने संबंधी सूचना देना।

उत्तर – सुचना।

(छ) किसी कार्य का अनुपालन न होने की स्थिति में उसके बारे में पुनः स्मरण कराना।

उत्तर – अनुस्मारक पत्र।

(ज) अपने समकक्ष अधिकारी से किसी संदर्भ में परामर्श लेना।

उत्तर – अर्ध सरकारी पत्र।

 

प्रश्न 2 – आप राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय में हिंदी के शिक्षक हैं और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.फिल करना चाहते हैं। विभाग से एम.फिल करने की अनुमति प्राप्त करने के लिए पत्र लिखिए।

 

उत्तर –

दिनांक –  23, दिसंबर 20…….

सेवा में

प्राचार्य,

राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय,

चंडीगढ़।

विषय – जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.फिल करने की अनुमति हेतु पत्र।

महोदय,

मैं आपके विद्यालय में हिंदी के शिक्षक पद पर कार्यरत हूँ। मुझे इस पद पर हिंदी एम. ए. शैक्षणिक योग्यता के साथ चुना गया था। इस पद पर रहते हुए मैंने अपने कार्य को पूरी लगन और अनुशासन में रहते हुए निभाया है। मुझे पढ़ना बहुत पसंद है और मैं हमेशा पढ़ाई करता रहता हूँ। अब मैं अपनी शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाना चाहता हूँ। इसलिए मैं  जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.फिल करना चाहता हूँ। अतः आप से निवेदन है कि आप मुझे इस विश्वविद्यालय से एम.फिल करने की अनुमति प्रदान करे। मैं आपका जीवनोपरांत आभारी रहूँगा।

सधन्यवाद।

भवदीय

रमेश कुमार

हिंदी प्राध्यापक

राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय।

 

प्रश्न 3 – विद्यालय में हुए पुरस्कार वितरण समारोह का कार्यवृत्त तैयार कीजिए।

उत्तर – दिनांक …….. को राजकीय कन्या विद्यालय में पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन बड़े धूम-धाम से किया गया।  विद्यालय के प्रिंसिपल व सभी अध्यापक और विद्यार्थी उस समारोह की तैयारी में जी-जान से जुट गए थे। विद्यालय की इमारत की खूब सफाई और धुलाई की गई और उसमें सफेदी कराई गई। विद्यालय के सभी कमरे चित्रों और नीति-वाक्यों से सजाये गए। विद्यालय के सभी कोनों में फूलों के गमले रखे गए। विद्यालय के मैदान में एक विशाल शामियाना लगाया गया। इस दिन के लिए एक विशेष मच का निर्माण हुआ। ठीक दस बजे समारोह के मुख्य अतिति माननीय शिक्षा मंत्री विद्याके के फाटक पर पहुँच गए जहाँ उनका स्वागत प्रिंसिपल तथा प्रेसीडेण्ट ने किया । एन.सी.सी. के कैडटों ने उन्हें गार्ड ऑफ आर्डर दिया। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों को देख कर मुख्य अतिथि बड़े प्रसन्न हुए। जैसे ही वे मच पर आए, विद्यार्थियों और मेहमानों ने हर्षध्वनि करके उनका स्वागत किया। प्रिंसिपल ने उन्हें फूलों का हार पहनाया। समारोह का कार्यक्रम बड़ी सहजता से सम्पन्न हुआ। समारोह में, छठी कक्षा के विद्यार्थियों की सामूहिक ड्रिल, फेमनी ड्रेस प्रदर्शन, चुटकुले, कहानियों, गानों और कविताओं ने दर्शकों को बड़ा प्रभावित किया।

इसके बाद प्रिंसिपल ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उनकी रिपोर्ट में विद्यालय की लगातार प्रगति का शानदार वर्णन था। विद्यालय की सभी कक्षाओं के परिणाम बड़े शानदार रहे थे। खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय ने खूब कमाल दिखाया था। सभी मेधावी छात्रों को पुरस्कृत करके अंत में प्राचार्य ने मुख्य अतिथि और मेहमानों का धन्यवाद किया।

 

प्रश्न 4 – निम्नलिखित पत्र को ध्यानपूर्वक पढ़िए।

भारतीय रिज़र्व बैंक

नयी दिल्ली

कार्यपालक निदेशक

आर.बी.आई./2006/136

फा.सं. 118/11/37.01/2005-06

6 अप्रैल, 2006

अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक

सभी सार्वजनिक और निजी बैंक

नयी दिल्ली

विषय: सिक्के की स्वीकृति और वितरण संबंधी

महोदय/महोदया,

आप अपनी शाखाओं को तत्काल आदेश दें कि वे जनता के किसी भी सदस्य से बिना किसी प्रतिबंध् के सभी मूल्यवर्गों के सिक्के स्वीकार करें। यदि कोई उपभोक्ता सिक्कों की माँग करता है तो उसे सभी मूल्यवर्गों के सिक्के भी उपलब्ध् करवाने होंगे।

हालाँकि 5, 10 और 20 पैसे मूल्यवर्गों के छोटे सिक्के बनाना बंद कर दिया गया है जबकि पहले जारी सिक्के जो अब भी प्रचलन में हैं। वे वैध मुद्रा बने रहेंगे। कृपया इसकी पावती भेजें तथा अपनी कार्यवाही से अवगत करवाएँ।

 भवदीया

(डॉ रश्मि सिन्हा)

कार्यपालक निदेशक

 

(1)

(क) पंजाब नेशनल बैंक द्वारा इसकी पावती रिशर्व बैंक को भेजिए।

उत्तर –

पंजाब नेशनल बैंक

मुख्य शाखा, नई दिल्ली

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक

पंजाब नेशनल बैंक/2006/140 

फा० सं० 130/11/20.5/2005-06

 

8 अप्रैल, 2006

कार्यपालक निदेशक,

भारतीय रिज़र्व बैंक,

नई दिल्ली।

 

विषय – पावती पत्र।

महोदय/महोदया,

 

आप द्वारा भेजा गया पत्र क्रमांक 118/11/37.01/2005-06 हमारे कार्यालय में 7 अप्रैल, 2006 को पहुँच चूका है। हम पंजाब नेशनल बैंक की और से आपका हार्दिक स्वागत करते हैं कि आपने हमें यह सूचना भेजी।

भवदीय

राकेश कुमार

प्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक

नई दिल्ली।

 

 

(ख) इस पत्र की विषय-वस्तु के आधार पर रिज़र्व बैंक द्वारा प्रेस विज्ञप्ति तैयार कीजिए।

उत्तर –

भारतीय रिज़र्व बैंक, नई दिल्ली

सिक्के की स्वीकृति और वितरण संबंधी सुचना

 

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सभी बैंकों को यह निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी सदस्य से बिना किसी प्रतिबंध् के सभी मूल्यवर्गों के सिक्के स्वीकार करें। यदि कोई उपभोक्ता सिक्कों की माँग करता है तो उसे सभी मूल्यवर्गों के सिक्के भी उपलब्ध् करवाने होंगे। हालाँकि 5, 10 और 20 पैसे मूल्यवर्गों के छोटे सिक्के बनाना बंद कर दिया गया है जबकि पहले जारी सिक्के जो अब भी प्रचलन में हैं। इसलिए वे वैध मुद्रा बने रहेंगे।

 

(ग) रिज़र्व बैंक को अभी भी उपभोक्ताओं द्वारा शिकायतें मिल रही हैं। अतः रिजर्व बैंक के महाप्रबंध्क को दूसरे बैंकों को अनुस्मारक भेजना है, अतः इस अनुस्मारक को तैयार करने में उनकी मदद कीजिए।

उत्तर –

अनुस्मारक

भारतीय रिज़र्व बैंक, नई दिल्ली।

फा.सं. 118/11/37.01/2005-06

नई दिल्ली 18 अप्रैल 2006

 

सेवा में,

प्रबंधक महोदय,

सभी सार्वजनिक व् निजी बैंक।

नई दिल्ली।

 

विषय – सिक्के की स्वीकृति और वितरण संबंधी निर्देश।

महोदय,

कृपया उपर्युक्त विषय ‘सिक्के की स्वीकृति और वितरण’ पर इस कार्यालय द्वारा भेजे गए पत्र 118/11/37.01/2005-06 को याद करें जो 6 अप्रैल, 2006 को भेजा गया था। निवेदन यह है कि सिक्के की स्वीकृति और वितरण सम्बन्धी कार्यालयों के दिए गए निर्देशों पर विचार कर शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए।

भवदीय,

राम चरण यादव

निदेशक,

भारतीय रिज़र्व बैंक,

नई दिल्ली।

 

(घ) पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी सभी शाखाओं को कार्यालय आदेश भेजा। उपर्युक्त पत्र के आधार पर आप कार्यालय आदेश तैयार कीजिए।

उत्तर –

पंजाब नेशनल बैंक

मुख्य शाखा, नई दिल्ली

निदेशक

पंजाब नेशनल बैंक

फा० सं० 150/11/20.5/2005-06

 

12 अप्रैल, 2006

प्रबंधक महोदय,

सभी सम्बंधित शाखाएँ

भारतीय रिज़र्व बैंक,

नई दिल्ली।

विषय – सिक्के की स्वीकृति और वितरण संबंधी निर्देश।

महोदय/महोदया,

पंजाब नेशनल बैंक की सभी शाखाओं को तत्काल आदेश दिया जाता है कि वे अपनी सभी शाखाओं में  सिक्के की स्वीकृति और वितरण संबंधी निर्देशों का नियमानुसार पालन करें। जनता के किसी भी सदस्य से बिना किसी प्रतिबंध् के सभी मूल्यवर्गों के सिक्के स्वीकार करें और उपभोक्ता को सभी मूल्यवर्गों के सिक्के भी उपलब्ध् करवाए जाएँ। 5, 10 और 20 पैसे मूल्यवर्गों के छोटे सिक्के बनाना बंद कर दिया गया है परन्तु जो पहले जारी सिक्के हैं वो अब भी प्रचलन में हैं। वे वैध मुद्रा बने रहेंगे। आपसे अनुरोध है कि निर्देशों को स्वीकार कर सभी शाखाओं में लागू किया जाए।

भवदीय,

सौरभ जोशी

निदेशक,

भारतीय रिज़र्व बैंक,

नई दिल्ली।

 

(2)

(क) पंजाब नेशनल बैंक की भीकाजी कामा प्लेस और सफदरजंग एंक्लेव की शाखाओं से अभी भी रिज़र्व बैंक को शिकायतें मिल रहीं हैं कि इन शाखाओं में सिक्कों को स्वीकार नहीं किया जाता, इसलिए कार्यपालक निदेशक को पंजाब नेशनल बैंक के अध्यक्ष को एक अर्ध-सरकारी पत्र लिखना है, जिसे आप तैयार कीजिए।

उत्तर –

भारतीय रिज़र्व बैंक,

नई दिल्ली।

फा.सं. 110/11/15 /2006

रजत कुमार,

कार्यपालक निदेशक।

प्रिय कुलदीप शर्मा,

निदेशक, पंजाब नेशनल बैंक,

नई दिल्ली।

 

कृपया विषय ‘सिक्के की स्वीकृति और वितरण’ पर 6 अप्रैल, 2006 और 14 अप्रैल 2006 को भेजे गए पत्रों का स्मरण करें। आपकी भीकाजी कामा प्लेस और सफदरजंग एंक्लेव की शाखाओं से अभी भी शिकायतें मिल रहीं हैं। निवेदन है कि सिक्के की स्वीकृति और वितरण सम्बन्धी कार्यालयों के दिए गए निर्देशों का नियमानुसार पालन करें।

सधन्यवाद

आपका

रजत कुमार

 

 

 

(ख) पंजाब नेशनल बैंक के महाप्रबंध्क को जब यह पत्र मिलता है तब वह अपने अधिकारी से इसका जवाब माँगता है। इस विषय-वस्तु को ध्यान में रखते हुए सहायक और अधिकारी की टिप्पणी लिखिए।

(संकेत-सहायक बैंक की शाखा में पिछले छह महीनों का ब्योरा देगा कि कितने सिक्के उन्होंने स्वीकार किए और कितने सिक्के जारी किए। अधिकारी अपनी टिप्पणी में इसे निराधार बताएगा।)

उत्तर –

यह टिप्पणी भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशक द्वारा भेजे गए पत्र क्रमांक 118/11/37.01/2005-06 से सम्बंधित है जिसमें सिक्के की स्वीकृति और वितरण संबंधी निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया गया था। यह भी विचार करने योग्य बात है कि हमारी शाखा ने इस पत्र के निर्देशानुसार अपनी सभी शाखाओं में निर्देशों को स्वीकार कर उनका पालन किया है। पिछले छः महीनों में हमारी शाखा ने 5, 10 और 20 मूल्य वर्गों के लगभग 80000 सिक्के स्वीकार किए हैं और लगभग 2 लाख सिक्के जारी किए हैं।

हमारी शाखा ने इन निर्देशों का पालन किया है, अतः ये शिकायतें बिलकुल निराधार हैं।

विचारार्थ प्रस्तुत

गणेश कुमार

सहायक

प्रमुख अधिकारी।

 

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर – (Important Question Answers)

 

 

प्रश्न 1 – औपचारिक पत्र की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर – सरकारी पत्र औपचारिक पत्र की श्रेणी में आते हैं। ज्यादातर ये पत्र एक कार्यालय, विभाग अथवा मंत्रालय से दूसरे कार्यालय, विभाग या मंत्रालय को लिखे जाते हैं। इन पत्रों की निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं –

  • पत्र के शीर्ष पर कार्यालय, विभाग या मंत्रालय का नाम व पता लिखा जाता है।
  • पत्र के बाईं तरफ फाइल संख्या लिखी जाती है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पत्र किस विभाग द्वारा किस विषय के तहत कब लिखा जा रहा है।
  • जिसे पत्र लिखा जा रहा है उसका नाम, पता आदि बाईं तरफ लिखा जाता है। आवश्यक हो तो कई बार अधिकारी का नाम भी दिया जाता है।
  • विषय’ शीर्षक के अंतर्गत संक्षेप में यह लिखा जाता है कि पत्र लिखने का क्या प्रयोजन है या किस संदर्भ में लिखा जा रहा है।
  • विषय के बाद बाईं तरफ ‘महोदय’ संबोधन लिखा जाता है।
  • पत्र की भाषा सरल एवं सहज होनी चाहिए। अत्यधिक कठिन शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए।
  • इस पत्र के बाईं ओर प्रेषक का पता और तारीख दी जाती है।
  • पत्र के अंत में ‘भवदीय’ शब्द का प्रयोग अधोलेख के रूप में होता है।
  • भवदीय के नीचे पत्र भेजने वाले के हस्ताक्षर होते हैं। हस्ताक्षर के नीचे कोष्ठक में पत्र लिखने वाले का नाम लिखा होता है। नाम के नीचे पदनाम लिखा जाता है।

 

प्रश्न 2 – मुख्य टिप्पण (नोटिग) किसे कहते हैं?
उत्तर – किसी भी ऐसे पत्र जिस पर किसी विषय पर विचार किया जा रहा है, उस पर जो राय, मंतव्य, आदेश अथवा निर्देश दिया जाता है वह टिप्पणी कहलाती है। टिप्पणी शब्द अंग्रेजी के नोटिग शब्द के अर्थ में प्रयुक्त होता है। टिप्पणी लिखने की प्रक्रिया को हम टिप्पण यानी नोटिग कहते हैं। टिप्पणी का उद्देश्य उन तथ्यों को स्पष्ट तथा तर्कसंगत रूप से प्रस्तुत करना है जिन पर कोई निर्णय लिया जाना है और किसी भी मामले को नियमानुसार निपटाना है। साथ ही उन बातों की ओर भी संकेत करना है जिनके आधार पर उस निर्णय को स्वीकार किया जा सकता है।

 

प्रश्न 3 – सहायक स्तर पर टिप्पण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – कार्यालय में टिप्पण कार्य अधिकतर सहायक स्तर पर होता है। इसे आरंभिक टिप्पण या मुख्य टिप्पण भी कहते हैं, जिसमें सहायक किसी  मामले का संक्षिप्त ब्योरा देते हुए अपने विचार रखता है। उसका इस प्रकार के टिप्पण में सबसे पहले मुख्य पत्र या आवती में दिए गए विवरण या तथ्य का सार दिया जाता है। फिर उसमें उल्लेखित प्रस्ताव की व्याख्या की जाती है और उस विषय से संबंधित नियमों-विनियमों को ध्यान में रखते हुए अपनी राय दी जाती है। यह आवश्यक है कि टिप्पणी अपने आप में पूर्ण एवं स्पष्ट होनी चाहिए। इसमें असली मुद्दे पर अधिक बल देना चाहिए और साथ ही साथ टिप्पणी संक्षिप्त, विषय-संगत, तर्कसंगत और क्रमबद्ध होनी चाहिए। टिप्पण करने वाले को अपने विचार संतुलित एवं शिष्ट भाषा में देने चाहिए। इसमें व्यक्तिगत आक्षेप, उपदेश या पूर्वाग्रहों के लिए कोई स्थान नहीं होता। और सबसे महत्वपूर्ण बात टिप्पणी सदैव अन्य पुरुष में लिखी जाती है।

 

प्रश्न 4 –  आनुषंगिक टिप्पण को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर – सहायक, आरंभिक या मुख्य टिप्पणी को जब उस विषय से सम्बन्ध रखने वाले अधिकारी के पास भेजता है तो वह अधिकारी टिप्पणी पढ़ने के बाद नीचे मंतव्य लिखता है। इसे आनुषंगिक टिप्पणी कहते हैं और यह क्रिया आनुषंगिक टिप्पण कहलाती है। अगर अधिकारी अपने सहायक की भेजी गई टिप्पणी से पूरी तरह सहमत है तो इस प्रकार की टिप्पणी की आवश्यकता नहीं होती। अधिकारी अधीनस्थ की टिप्पणी के नीचे या तो केवल हस्ताक्षर कर लेता है या ‘मैं उपर्युक्त टिप्पणी से सहमत हूँ’, यह लिखता है। परन्तु अधिकारी अगर उस भेजी गई टिपण्णी को और सशक्त एवं तर्कसंगत बनाने के लिए अपनी ओर से कुछ जोड़ना चाहता है तो वह अपना मत या अपने विचार आनुषंगिक टिप्पणी के रूप में लिख सकता है। एक बात याद रखने योग्य यह है कि अधिकारी को अधीनस्थ की टिप्पणी को काटने, बदलने या हटाने का अधिकार नहीं है। वह केवल अपनी सहमति, आंशिक सहमति या असहमति व्यक्त कर सकता है। साथ ही साथ आनुषंगिक टिप्पणी प्रायः संक्षिप्त होती है लेकिन असहमति की स्थिति में कई बार इस प्रकार की टिप्पणी बड़ी भी हो सकती है।

 

प्रश्न 5 – अधिकारी कब आनुषंगिक टिप्पणी करता है?
उत्तर – यदि अधिकारी अपने अधीनस्थ की टिप्पणी से पूरी तरह सहमत है मगर उसे और सशक्त एवं तर्कसंगत बनाने के लिए अपनी ओर से भी कुछ जोड़ना चाहता है तो वह अपना मंतव्य आनुषंगिक टिप्पणी के रूप में दर्ज कर देता है। और यदि अधिकारी पूर्णतः असहमत है या आंशिक रूप से सहमत है तो वह अपने तर्क और कारणों के साथ अपनी आनुषंगिक टिप्पणी करता है। परन्तु अधिकारी को अधीनस्थ की टिप्पणी को काटने, बदलने या हटाने का अधिकार नहीं है। वह केवल अपनी सहमति, आंशिक सहमति या असहमति व्यक्त कर सकता है।

 

प्रश्न 6 – अनुस्मारक या स्मरण पत्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर –  जब पहले से किसी भेजे गए पत्र या  ज्ञापन इत्यादि का उत्तर समय पर प्राप्त नहीं होता तो याद दिलाने के लिए ‘अनुस्मारक’ भेजा जाता है। इसे ‘स्मरण पत्र’ भी कहते हैं। इसका प्रारूप औपचारिक पत्र की तरह ही होता है मगर इसका आकार उससे छोटा होता है। अनुस्मारक के शुरू में पहले भेजे गए पत्र का हवाला दिया जाता है। और जब एक से अधिक अनुस्मारक भेजे जाते हैं, तो पहले अनुस्मारक को ‘अनुस्मारक-1’, दूसरे को ‘अनुस्मारक-2’, तीसरे को ‘अनुस्मारक-3’ इत्यादि लिखते हैं।

 

प्रश्न 7 – अर्धसरकारी पत्र क्या है और कब लिखा जाता है?
उत्तर – औपचारिक-पत्र के विपरीत अर्ध-सरकारी पत्र में अनौपचारिकता का अंश देखने को मिलता है। इसमें एक मैत्री भाव होता है। अर्ध-सरकारी पत्र तब लिखे जाते हैं जब लिखने वाला अधिकारी संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत स्तर पर जानता है। इस प्रकार का पत्र ऐसी स्थिति में भी लिखा जाता है जब किसी खास मसले पर संबोधित अधिकारी का ध्यान व्यक्तिगत रूप से आकर्षित कराया जाता है या उसका व्यक्तिगत परामर्श लिया जाए।

 

प्रश्न 8 – अर्धसरकारी पत्र का प्रारूप कैसा होता है?

उत्तर – प्रारूप में बाईं ओर शीर्ष पर प्रेषक का नाम होता है। इसके नीचे उसका पदनाम होता है। पत्र के प्रारंभ में संबोधन के रूप में महोदय या प्रिय महोदय का प्रयोग नहीं होता। ऐसे पत्र में आमतौर पर प्रयोग किया जाने वाला संबोधन ‘प्रिय श्री…’ या ‘प्रियवर श्री…, हो सकता है। पत्र के अंत में अधोलेख के रूप में दाहिनी ओर ‘भवदीय’ के स्थान पर ‘आपका’ का प्रयोग किया जाता है। अंत में बाईं ओर सम्बोधित अधिकारी का नाम, पदनाम और पूरा पता दिया जाता है।

 

प्रश्न 9 – कार्यसूची (एजेंडा) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर – किसी भी संस्था की औपचारिक बैठक की कार्यसूची उस बैठक में चर्चा के लिए निर्धारित विषयों की पहले से प्राप्त जानकारी देती है। इससे बैठक के अनुशासित संचालन में सहायता मिलती है। निर्धरित विषयों से सम्बंधित या उससे जुड़ी हुई स्पष्ट टिप्पणियाँ सदस्यों को कार्यसूची के साथ पहले ही भेजी जाती हैं ताकि वे बैठक में पूरी तैयारी से आ सकें।

 

प्रश्न 10 – प्रेस विज्ञप्ति (प्रेस रिलीज़) क्या है?
उत्तर – कोई संस्थान या व्यक्ति किसी विषय या किसी बैठक में जो निर्णय लेता है, उसे प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाया जाता है। निर्णय में हुई देरी का कारण भी बताया जाता है और उस निर्णय से होने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी दी जाती है।

 

 

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर (Multiple Choice Questions)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) एक प्रकार का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन है जिसमें एक व्यक्ति को उपलब्ध विकल्पों की सूची में से एक या अधिक सही उत्तर चुनने के लिए कहा जाता है। एक एमसीक्यू कई संभावित उत्तरों के साथ एक प्रश्न प्रस्तुत करता है।

 

प्रश्न 1 – सरकारी पत्र किस श्रेणी के पत्रों में आते हैं?
(क) औपचारिक पत्र
(ख) अनौपचारिक पत्र
(ग) अर्ध औपचारिक पत्र
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) औपचारिक पत्र

प्रश्न 2 – सरकारी पत्र के शीर्ष पर क्या लिखा जाता है?
(क) प्रेषक का पता और तारीख
(ख) अधिकारी का नाम, पता और फाइल संख्या लिखी जाती है
(ग) कार्यालय, विभाग या मंत्रालय का नाम व पता
(घ) पत्र भेजने वाले के हस्ताक्षर
उत्तर – (ग) कार्यालय, विभाग या मंत्रालय का नाम व पता

प्रश्न 3 – किसी भी ऐसे पत्र जिस पर किसी विषय पर विचार किया जा रहा है, उस पर जो राय, मंतव्य, आदेश अथवा निर्देश दिया जाता है वह क्या कहलाती है।
(क) टिप्पण
(ख) टिप्पणी
(ग) आनुषंगिक टिप्पण
(घ) अनुस्मारक
उत्तर – (ख) टिप्पणी

प्रश्न 4 – टिप्पणी लिखने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(क) आनुषंगिक टिप्पणी
(ख) आनुषंगिक टिप्पण
(ग) टिप्पणी लेखन
(घ) टिप्पण
उत्तर – (घ) टिप्पण

प्रश्न 5 – टिप्पण का क्या उद्देश्य है?
(क) तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना
(ख) तथ्यों को तर्कसंगत रूप से प्रस्तुत करना
(ग) किसी भी मामले को नियमानुसार निपटाना
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 6 – इनमें से टिप्पण की विशेषता कौन सी है?
(क) इसमें असली मुद्दे पर अधिक बल देना चाहिए और साथ ही साथ टिप्पणी संक्षिप्त, विषय-संगत, तर्कसंगत और क्रमबद्ध होनी चाहिए
(ख) टिप्पण करने वाले को अपने विचार संतुलित एवं शिष्ट भाषा में देने चाहिए। इसमें व्यक्तिगत आक्षेप, उपदेश या पूर्वाग्रहों के लिए कोई स्थान नहीं होता
(ग) टिप्पणी सदैव अन्य पुरुष में लिखी जाती है।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 7 – सहायक, आरंभिक या मुख्य टिप्पणी को जब उस विषय से सम्बन्ध रखने वाले अधिकारी के पास भेजता है तो वह अधिकारी टिप्पणी पढ़ने के बाद नीचे मंतव्य लिखता है। इसे क्या कहते हैं?
(क) आनुषंगिक टिप्पणी
(ख) आनुषंगिक टिप्पण
(ग) टिप्पणी लेखन
(घ) टिप्पण
उत्तर – (क) आनुषंगिक टिप्पणी

प्रश्न 8 – अधिकारी अगर उस भेजी गई टिपण्णी को और सशक्त एवं तर्कसंगत बनाने के लिए अपनी ओर से कुछ जोड़ना चाहता है तो वह अपना मत या अपने विचार ————- के रूप में लिख सकता है।
(क) टिप्पण
(ख) टिप्पणी
(ग) आनुषंगिक टिप्पण
(घ) अनुस्मारक
उत्तर – (ग) आनुषंगिक टिप्पण

प्रश्न 9 – जब पहले से किसी भेजे गए पत्र या ज्ञापन इत्यादि का उत्तर समय पर प्राप्त नहीं होता तो याद दिलाने के लिए क्या भेजा जाता है?
(क) दूसरा पत्र
(ख) अनुस्मारक
(ग) अनुरोध पत्र
(घ) टिप्पणी पत्र
उत्तर – (ख) अनुस्मारक

प्रश्न 10 – अनुस्मारक को और क्या कहा जाता है?
(क) स्मरण पत्र
(ख) औपचारिक पत्र
(ग) स्मारक पत्र
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) स्मरण पत्र

प्रश्न 11 – किस पत्र को तब लिखा जाता है जब किसी खास मसले पर संबोधित अधिकारी का ध्यान व्यक्तिगत रूप से आकर्षित कराया जाता है या उसका व्यक्तिगत परामर्श लिया जाए –
(क) सरकारी पत्र
(ख) अर्ध सरकारी पत्र
(ग) औपचारिक पत्र
(घ) अनौपचारिक पत्र
उत्तर – (ख) अर्ध सरकारी पत्र

प्रश्न 12 – अर्ध सरकारी पत्र में ‘भवदीय’ के स्थान पर ————– का प्रयोग किया जाता है।
(क) आपका
(ख) आज्ञाकारी
(ग) प्रिय श्री
(घ) प्रिय वर
उत्तर – (क) आपका

प्रश्न 13 – कोई संस्थान या व्यक्ति किसी विषय या किसी बैठक में जो निर्णय लेता है, उसे किसके माध्यम से आम जनता तक पहुँचाया जाता है?
(क) समाचार विज्ञप्ति
(ख) दूरदर्शन विज्ञप्ति
(ग) रेडियो विज्ञप्ति
(घ) प्रेस विज्ञप्ति
उत्तर – (घ) प्रेस विज्ञप्ति

प्रश्न 14 – प्रेस विज्ञप्ति में मुख्यतः क्या बताया जाता है?
(क) निर्णय में हुई देरी का कारण
(ख) निर्णय से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी
(ग) केवल (क)
(घ) (क) और (ख)
उत्तर – (घ) (क) और (ख)

प्रश्न 15 – बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के क्रियान्वन के लिए क्या जारी किया जाता है?
(क) आदेश पत्र
(ख) परिपत्र
(ग) स्मरण पत्र
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) परिपत्र

 

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