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कविता के बहाने, बात सीधी थी पर Question Answers

 

 

CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag 2 Book Chapter 3 Kavita ke Bahaane, Baat Seedhi Thi Par Question Answers

  

Kavita ke Bahaane, Baat Seedhi Thi Par Class 12 – CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag-2 Chapter 3 Kavita ke Bahaane, Baat Seedhi Thi Par Question Answers. The questions listed below are based on the latest CBSE exam pattern, wherein we have given NCERT solutions of the chapter, extract based questions, multiple choice questions, short and long answer questions.

 

सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी आरोह भाग-2 पुस्तक पाठ 3 में कुँवर नारायण द्वारा रचित  दो  कविताएँ कविता के बहाने, बात सीधी थी पर प्रश्न उत्तर | इस लेख में NCERT की पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों का व्यापक संकलन किया है।

 

सार-आधारित प्रश्न Extract Based Questions

सारआधारित प्रश्न बहुविकल्पीय किस्म के होते हैं, और छात्रों को पैसेज को ध्यान से पढ़कर प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प का चयन करना चाहिए। (Extract-based questions are of the multiple-choice variety, and students must select the correct option for each question by carefully reading the passage.)

 

कविता के बहाने आधारित पठित पद्यांश –

1 –
कविता एक उड़ान हैं चिड़िया के बहाने
कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने
बाहर भीतर
इस घर, उस घर
कविता के पंख लगा उड़ने के माने
चिडिया क्या जाने ?

प्रश्न 1 – कविता की उड़ान को कौन नहीं जान सकता?
(क) कवि
(ख) चिड़िया
(ग) पंख
(घ) पाठक
उत्तर – (ख) चिड़िया

प्रश्न 2 – ‘बाहर भीतर, इस घर, उस घर’ में कौन सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) रूपक अलंकार
(ग) प्रश्न अलंकार
(घ) पुनःरुक्ति अलंकार
उत्तर – (क) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 3 – ‘चिडिया क्या जाने?’ में कौन सा अलंकार है?
(क) उत्प्रेक्षा अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) प्रश्न अलंकार
(घ) पुनःरुक्ति अलंकार
उत्तर – (ग) प्रश्न अलंकार

प्रश्न 4 – कविता के पंख लगाकर कौन उड़ता है?
(क) कवि
(ख) चिड़िया
(ग) पाठक
(घ) कविता स्वयं
उत्तर – (क) कवि

प्रश्न 5 – कविता की उड़ान को चिड़िया क्यों नहीं जान सकती?
(क) क्योंकि चिड़िया छोटी होती है
(ख) क्योंकि चिड़िया प्रभाव नहीं दिखाती
(ग) क्योंकि चिड़िया कविता को नहीं जानती
(घ) क्योंकि कविता की उड़ान असीमित होती है
उत्तर – (घ) क्योंकि कविता की उड़ान असीमित होती है

2 –
कविता एक खिलना है फूलों के बहाने
कविता का खिलना भला फूल क्या जाने!
बाहर भीतर
इस घर, उस घर
बिना मुरझाए महकने के माने
फूल क्या जाने?
कविता एक खेल है बच्चों के बहाने
बाहर भीतर
यह घर, वह घर
सब घर एक कर देने के माने
बच्चा ही जाने!

प्रश्न 1 – कविता के विकसित होने को कौन नहीं जान सकता?
(क) कवि
(ख) चिड़िया
(ग) फूल
(घ) पाठक
उत्तर – (ग) फूल

प्रश्न 2 – बिना मुरझाए खुशबू कौन फैला सकता है?
(क) कविता
(ख) फूल
(ग) कवि
(घ) बच्चे
उत्तर – (क) कविता

प्रश्न 3 – ‘मुरझाए महकने’ में कौन सा अलंकार है?
(क) उत्प्रेक्षा अलंकार
(ख) उपमा अलंकार
(ग) प्रश्न अलंकार
(घ) अनुप्रास अलंकार
उत्तर – (घ) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 4 – पद्यांश में कविता की क्या विशेषताएँ कही गई है?
(क) यह सर्वव्यापक होती है
(ख) इसमें रचनात्मक ऊर्जा होती है
(ग) यह खेल के समान होती है
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5 – कविता को किसके सामान बताया गया है?
(क) फूल
(ख) कवि
(ग) बच्चों
(घ) संसार
उत्तर – (ग) बच्चों

 

बात सीधी थी पर आधारित पठित पद्यांश –

1 –
बात सीधी थी पर एक बार
भाषा के चक्कर में
ज़रा टेढ़ी फंस गई।
उसे पाने की कोशिश में
भाषा को उलटा-पलटा
तोड़ा-मरोड़ा
घुमाया-फिराया
कि बात या तो बने
या फिर भाषा से बाहर आए –
लेकिन इससे भाषा के साथ साथ
बात और भी पेचीदा होती चली गई।

प्रश्न 1 – कवि की बात किसके चक्कर में बुरी फसी?
(क) पाठकों
(ख) लेखन
(ग) भाषा
(घ) लिपि
उत्तर – (ग) भाषा

प्रश्न 2 – उल्टा-पुल्टा , तोड़ा -मरोड़ा , घुमाया-फिराया में कौन सा अलंकार हैं?
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) अभिव्यक्ति अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (क) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 3 – भाव समझाने के लिए कवि ने क्या किया?
(क) भाषा को उल्टा-पुल्टा
(ख) भाषा को तोड़ा -मरोड़ा
(ग) भाषा को घुमाया-फिराया
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 4 – ‘साथ-साथ’ में कौन सा अलंकार है।
(क) पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार
(ख) अनुप्रास अलंकार
(ग) अभिव्यक्ति अलंकार
(घ) रूपक अलंकार
उत्तर – (क) पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

प्रश्न 5 – कवि के भाव किसी को समझ में क्यों नहीं आए?
(क) कविता के अच्छे न होने के कारण
(ख) भाषा के जटिल होने के कारण
(ग) भाषा के सरल होने के कारण
(घ) भाषा में अत्यधिक मुहावरे होने के कारण
उत्तर – (ख) भाषा के जटिल होने के कारण

2 –
सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना
मैं पेंच को खोलने के बजाए
उसे बेतरह कसता चला जा रहा था
क्योंकि इस करतब पर मुझे
साफ़ सुनाई दे रही थी
तमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह।
आखिरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था
ज़ोर जबरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी!

प्रश्न 1 – पद्यांश में कवि क्या सलाह दे रहा है?
(क) सरलतापूर्वक काम करने की
(ख) लोगों के अनुसार काम करने की
(ग) धैर्यपूर्वक सरलता से काम करने की
(घ) सरलता से काम करने की
उत्तर – (ग) धैर्यपूर्वक सरलता से काम करने की

प्रश्न 2 – ‘वाह वाह’ में कौन सा अलंकार हैं?
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
(ग) रूपक अलंकार
(घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (ख) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार

प्रश्न 3 – ‘पेंच को खोलने की बजाय कसना’ – से क्या आशय है?
(क) कवि बात को स्पष्ट न करके, शब्दजाल में उलझता गया
(ख) कवि ने बात को स्पष्ट नहीं किया
(ग) कवि ने भाषा को घुमाया-फिराया
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) कवि बात को स्पष्ट न करके, शब्दजाल में उलझता गया

प्रश्न 4 – “साफ़ सुनाई”, “जोर-जबर्दस्ती” में कौन सा अलंकार है।
(क) पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार
(ख) अनुप्रास अलंकार
(ग) अभिव्यक्ति अलंकार
(घ) रूपक अलंकार
उत्तर – (ख) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 5 – पद्यांशानुसार कवि के करतब का क्या परिणाम हुआ?
(क) कवि ने भाषा को बनावटी ढंग और शब्दों के जाल में उलझा दिया
(ख) सुनने वालों द्वारा कवि को शाबाशी मिली
(ग) कवि ने लाग-लपेट करने वाले शब्दों का प्रयोग किया
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) सुनने वालों द्वारा कवि को शाबाशी मिली

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर – (Important Question Answers)

कविता के बहाने कविता पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न –

प्रश्न 1 – कविता की उड़ान और चिड़िया की उड़ान में क्या अंतर् है?
उत्तर – कविता की उड़ान और चिड़िया की उड़ान एक ही तरह की होती है। मगर दोनों की उड़ान में फर्क केवल इतना हैं कि चिड़िया की उड़ान की एक सीमा होती है। मगर कवि की उड़ान अर्थात भावनाओं व कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं होती। कहने का तात्पर्य यह है कि कवि अपनी कल्पनाओं के सहारे कहीं भी अर्थात देश और समय की सीमाओं के परे भी अपनी सोच को उड़ा सकता है।

प्रश्न 2 – कविता और कवि की उड़ान को चिड़िया कभी नहीं जान सकती, क्यों?
उत्तर – कविता और कवि की उड़ान को चिड़िया कभी नहीं जान सकती क्योंकि चिड़िया एक घर से दूसरे घर के आंगन, छत, पेड़ की डालियों और आसमान में थोड़ी दूर तक अपनी सीमा पर ही उड़ सकती है लेकिन कवि अपनी कविता में कल्पनाओं के पंख लगाकर देश और काल में जहाँ तक जाना चाहे वहाँ तक जा सकता है। क्योंकि कविता की उड़ान विस्तृत होती है। अर्थात उसकी कोई सीमा नहीं होती। इसीलिए कवि कहते हैं कि चिड़िया कविता की इस उड़ान को नहीं जान सकती क्योंकि कविता कल्पनाओं के पंख लगाकर दूर तक उड़ान भर सकती हैं। और कविता की उड़ान चिड़िया की उड़ान की तरह सीमित न होकर वस्तृत होती है।

प्रश्न 3 – कविता के बिना मुरझाये खिले रहने व खुशबू बिखेरते रहने के राज़ फूल क्यों नहीं समझ सकता हैं?
उत्तर – कविता के विकसित होने का अर्थ फूल कभी नहीं समझ सकता, क्योंकि फूल घर-आंगन, बाग़-बगीचों में खिलते हैं और चारों और खुशबू बिखेरते हैं। लेकिन कुछ समय बाद वे मुरझा जाते हैं। परन्तु इसके विपरीत जब एक कविता विकसित होती है तो वह अपने भावों की खुशबू से हमेशा लोगों के दिलों में खुशबू बिखेरती रहती हैं। कविता का प्रभाव हमेशा बना रहता है। जो कविता में सदैव एक नए पन को बनाये रखता हैं। इसीलिए कवि कहते हैं कि फूल कभी भी कविता के बिना मुरझाये खिले रहने व खुशबू बिखेरते रहने के राज़ को नहीं समझ सकता हैं।

प्रश्न 4 – कविता के खिलने और फूल के खिलने में क्या भेद है?
उत्तर – कविता भी ठीक उसी प्रकार से विकसित होती है, महक बिखेरती हैं, जिस प्रकार एक फूल विकसित होता है अथवा चारों ओर खुशबू बिखेरता हैं। लेकिन फूलों का विकसित होना और खुशबू बिखेरना कुछ ही समय के लिए होता हैं क्योंकि कुछ समय बाद वो मुरझा जाते हैं। परन्तु इसके विपरीत कविता के भावों का प्रभाव अत्यधिक लम्बे समय के लिए होता है जो हमेशा लोगों को प्रभावित करता रहता हैं।

प्रश्न 5 – कवि ने बच्चों के खेल और कविता को किस तरह समान बताया है?
उत्तर – कवि ने बच्चों को और उनके खेल को कविता के समान बताया है। जिस प्रकार खेल खेलते समय बच्चों की कल्पनायें असीमित होते हैं। ठीक उसी प्रकार कवि की कल्पनाऐं भी असीमित होती हैं। जिस प्रकार बच्चे खेल खेलने के लिए किसी के भी घर में चले जाते हैं। यानि उस वक्त वो सब कुछ भूलकर सबको एक कर देते हैं। ठीक उसी प्रकार कविता भी किसी तरह की सीमाओं या बंधन को नहीं जानती। वह भी सभी पर अपना प्रभाव समान रूप से डालती है। यही कारण है की कवि ने बच्चों और कविता की तुलना की है और दोनों को एक समान बताया हैं। क्योंकि दोनों की कल्पनायें असीमित होती हैं और दोनों ही अपने-पराये का भेद नही जानते।

बात सीधी थी पर कविता पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न –

प्रश्न 1 – ‘बात सीधी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फंस गई।’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – उपरोक्त पंक्ति में कवि कहते हैं कि उनकी कविता के भाव बिलकुल सीधे थे जो श्रोताओं और पाठकों को सीधे समझ में आ जाने चाहिए थे। परन्तु भाषा को प्रभावी बनाने के कारण श्रोता व् पाठक कोई भी उन भावों को अच्छी तरह से समझ नहीं पाये। और कवि ने पाया कि उनकी कविता में भाषा की जटिलता होने के कारण कविता में एक टेढ़ापन आ गया है। कहने का अभिप्राय यह है कि कवि जो बात कविता के माध्यम से कहना चाहते थे , वो बात स्पष्ट नहीं हो पायी जिस कारण लोग कविता के भावों को अच्छी तरह से समझ नहीं पाये।

प्रश्न 2 – अपनी बात को श्रोताओं और पाठकों तक आसानी से पहुँचाने के लिए कवि ने क्या किया?
उत्तर – अपनी बात को श्रोताओं और पाठकों तक आसानी से पहुँचाने के लिए कवि ने कविता में थोड़ा बदलाव किया। उन्होंने भाषा के शब्दों, वाक्यांशों, वाक्यों आदि को बदल कर आसान किया और तथा शब्दों को उलट-पुलट कर प्रयोग किया। उन्होंने अपनी भाषा में इस तरह का बदलाव किया जिससे कविता का भाव लोगों की समझ में सही तरीके से आ सके।

प्रश्न 3 – क्या भाषा के बदलाव से कवि को सफलता मिली और क्यों?
उत्तर – कवि ने पूरी कोशिश की कि या तो इस भाषा के बदलाव से उनके भाव लोगों तक पहुँच जाएं या फिर वह भाषा के इस उलट-फेर के जंजाल से मुक्त हो जाएं, परंतु कवि को इससे कोई भी सफलता नहीं मिली। उसकी भाषा के बदलाव के साथ-साथ उनकी बात अथवा भाव और भी अधिक जटिल हो गए। अर्थात उन्हें समझना और भी मुश्किल हो गया।

प्रश्न 4 – धैर्य से काम न लेने पर कवि को क्या नुकसान हुआ, कवि के दिए उदाहरण के साथ समझाइए।
उत्तर – कवि अपनी सारी समस्या को धीरज से समझे बिना ही, हल ढूँढ़ने की बजाय और अधिक शब्दों के जाल में फैस गया। बात का पेंच खुलने के स्थान पर और टेढ़ा होता गया और कवि उस पेंच को बुरी तरह कसता चला गया। इससे कवि की भाषा और अधिक जटिल हो गई। इसके लिए कवि ने पेंच का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह दो वस्तुओं को जोड़ने के लिए पेंच में खाँचे होते हैं ताकि वस्तुओं पर पेंच की पकड़ मजबूत हो सके और पेंच को अच्छी तरह से कसने के लिए उसे सही दिशा में धूमाना पढता है क्योंकि गलत दिशा में धुमाने से पेंच कसने के बजाय खुलने लगता है और जबरदस्ती कसने की कोशिश करने पर पेंच के खाँचे खत्म होकर टूट जाते हैं।

प्रश्न 5 – कवि का कौन सा डर सच साबित हुआ?
उत्तर – जटिल भाषा का प्रयोग करने से दिखने व् सुनने में तो कवि की कविता सुंदर तो दिखने लगी परन्तु उसके भाव किसी को भी समझ में नहीं आ रहे थे। और भाव स्पष्ट करने के लिए जब कवि ने जोर-जबरदस्ती भाषा में बदलाव किए तो कविता प्रभावहीन व उद्देश्यहीन हो गई और कविता केवल शब्दों के आसपास घूमती नज़र आने लगी। कवि का यही डर सच साबित हो गया।

प्रश्न 6 – “क्या तुमने भाषा को
सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा?”
पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – जब कवि अपनी बात स्पष्ट न कर सका तो बात ने एक शरारती बच्चे के समान, पसीना पोंछते कवि से पूछा कि क्या तुमने कभी भाषा को सरलता, सहजता और सुविधा से प्रयोग करना नहीं सीखा है। कहने का अभिप्राय यह है कि अच्छी बात को कहने के लिए और अच्छी कविता को बनाने के लिए सही भाषा व सही शब्दों का, सही बात अथवा भाव से जुड़ना आवश्यक है। तभी उसे समझने में आसानी होगी।

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर (Multiple Choice Questions)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) एक प्रकार का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन है जिसमें एक व्यक्ति को उपलब्ध विकल्पों की सूची में से एक या अधिक सही उत्तर चुनने के लिए कहा जाता है। एक एमसीक्यू कई संभावित उत्तरों के साथ एक प्रश्न प्रस्तुत करता है।

कविता के बहाने कविता पर आधारित कुछ बहुविकल्पात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1 – “कविता के बहाने” कविता में किसके बारे में बात की गई है?
(क) कवि के
(ख) कविता के
(ग) कविता के लेखन के
(घ) कविता और बच्चों के
उत्तर – (ख) कविता के

प्रश्न 2 – कविता की उड़ान और चिड़िया की उड़ान में क्या फर्क होता हैं?
(क) चिड़िया की उड़ान की एक सीमा होती है, मगर कविता की उड़ान की कोई सीमा नहीं होती
(ख) चिड़िया की उड़ान की एक सीमा नहीं होती, मगर कविता की उड़ान की कोई सीमा होती है
(ग) चिड़िया की उड़ान और कविता की उड़ान एक समान होती है
(घ) चिड़िया की उड़ान की ऊंचाई कविता की उड़ान से अधिक होती है
उत्तर – (क) चिड़िया की उड़ान की एक सीमा होती है, मगर कविता की उड़ान की कोई सीमा नहीं होती

प्रश्न 3 – कवि किसके सहारे देश और समय की सीमाओं के परे भी अपनी सोच को उड़ा सकता है?
(क) अपनी कविताओं के
(ख) अपनी रचनाओं के
(ग) अपनी कृतियों के
(घ) अपनी कल्पनाओं के
उत्तर – (घ) अपनी कल्पनाओं के

प्रश्न 4 – कविता किसकी तरह विकसित होती है और महक बिखेरती हैं?
(क) कवि
(ख) फूल
(ग) बच्चों
(घ) खेल
उत्तर – (ख) फूल

प्रश्न 5 – कविता की शक्ति दिखाने के लिए कवि ने किन उदाहरणों का सहारा लिया?
(क) चिड़िया का उड़ना
(ख) बच्चों का खेलना
(ग) फूलों का खिलना
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 6 – ‘कविता के बहाने’ कविता में कवि ने किसकी उड़ान को असीमित बताया हैं?
(क) कविता
(ख) कवि
(ग) चिड़िया
(घ) पतंग
उत्तर – (क) कविता

प्रश्न 7 – “कविता के पंख” किसका प्रतीक है?
(क) चिड़िया की उड़ान के
(ख) कवि की कल्पनाओं के
(ग) कवि की आशाओं के
(घ) कवि की रचनाओं के
उत्तर – (ख) कवि की कल्पनाओं के

प्रश्न 8 – कविता के बिना मुरझाये विकसित होने और खुशबू फैलाने के रहस्य को कौन नहीं समझ सकता हैं?
(क) पाठक
(ख) चिड़िया
(ग) कवि
(घ) फूल
उत्तर – (घ) फूल

प्रश्न 9 – “बिना मुरझाए महकने के माने” इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है?
(क) प्रश्न अलंकार
(ख) रूपक अलंकार
(ग) उत्प्रेक्षा अलंकार
(घ) अनुप्रास अलंकार
उत्तर – (घ) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 10 – किसका प्रभाव हमेशा बना रहता है?
(क) कविता
(ख) कवि
(ग) फूल की खुशबू
(घ) कवि की लोकप्रियता
उत्तर – (क) कविता

प्रश्न 11 – कविता किसके बहाने खेल रही है?
(क) कवि के
(ख) फूल के
(ग) बच्चे के
(घ) चिड़िया के
उत्तर – (ग) बच्चे के

प्रश्न 12 – “सब घर एक कर देने” से कवि का क्या आशय है?
(क) भेदभाव भुला देना
(ख) भेदभाव रखना
(ग) सब घर एक करना
(घ) सबके घर जाना
उत्तर – (क) भेदभाव भुला देना

बात सीधी थी पर कविता पर आधारित कुछ बहुविकल्पात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1 – बात सीधी थी पर कविता के अनुसार एक अच्छी कविता बनाने के लिए क्या जरूरी हैं?सही जगह पर सही भाषा या शब्दों का प्रयोग
(क) सही जगह पर कविता का प्रदर्शन
(ख) सही भाषा का प्रयोग
(ग) सही शब्दों का प्रयोग
(घ) सही जगह पर सही भाषा या शब्दों का प्रयोग
उत्तर – (घ) सही जगह पर सही भाषा या शब्दों का प्रयोग

प्रश्न 2 – सीधी सी बात किसके चक्कर में फँस गई?
(क) भाषा के
(ख) कवि के
(ग) कविता के
(घ) पाठकों के
उत्तर – (क) भाषा के

प्रश्न 3 – बात को सही करने व भाषा को सरल बनाने के चक्कर में कवि ने कविता में क्या किया?
(क) कविता में थोड़ा बदलाव
(ख) कविता के शब्दों में थोड़ा बदलाव
(ग) कविता के अर्थ में थोड़ा बदलाव
(घ) कविता के वाक्यों में थोड़ा बदलाव
उत्तर – (ख) कविता के शब्दों में थोड़ा बदलाव

प्रश्न 4 – शब्दों में थोड़ा बदलाव कर कविता को ठीक करने के चक्कर में भाषा कैसी हो गई?
(क) और अधिक सरल
(ख) और अधिक सीधी
(ग) और अधिक जटिल
(घ) और अधिक शुद्ध
उत्तर – (ग) और अधिक जटिल

प्रश्न 5 – “बात की पेंच खोलने” से कवि का क्या आशय है?
(क) बात को स्पष्ट करना
(ख) बात को बिगाड़ना
(ग) बात को उल्टा-पुल्टा करना
(घ) बात को तोड़ना-मरोड़ना
उत्तर – (क) बात को स्पष्ट करना

प्रश्न 6 – कविता में कवि के करतब किसे कहा हैं?
(क) बनावटी भाषा के प्रयोग को
(ख) भाषा के सुंदर प्रयोग को
(ग) भाषा के उलट-पुलट करने को
(घ) भाषा के गलत प्रयोग को
उत्तर – (क) बनावटी भाषा के प्रयोग को

प्रश्न 7 – कवि के करतबों को देख कर तमाशबीनों क्या करते हैं?
(क) उसकी सच्ची तारीफ
(ख) उसकी झूठी तारीफ
(ग) उसकी बुराई
(घ) उसकी कविता की बुराई
उत्तर – (ख) उसकी झूठी तारीफ

प्रश्न 8 – बनावटी भाषा के कारण कविता कैसी हो गई?
(क) प्रभावशाली व उद्देश्यहीन
(ख) प्रभावहीन व उद्देश्यहीन
(ग) आकर्षक व उद्देश्यपरक
(घ) आकर्षक व उद्देश्यहीन
उत्तर – (ख) प्रभावहीन व उद्देश्यहीन

प्रश्न 9 – बात कवि के साथ किसके समान खेल रही थी?
(क) किसी शरारती बच्चे के समान
(ख) किसी शरारती व्यस्क के समान
(ग) किसी शरारती वृद्ध के समान
(घ) किसी शरारती शब्द के समान
उत्तर – (क) किसी शरारती बच्चे के समान

प्रश्न 10 – अंत में कविता क्या बनकर रह गई?
(क) प्रशंसा का एक समूह मात्र
(ख) वाक्यों का एक समूह मात्र
(ग) शब्दों का एक समूह मात्र
(घ) अर्थ का एक समूह मात्र
उत्तर – (ग) शब्दों का एक समूह मात्र

 

‘कविता के बहाने’, ‘बात सीधी थी पर’ पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्न – Textbook Based Questions

प्रश्न 1 – इस कविता के बहाने बताएँ कि ‘सब घर एक कर देने के माने’ क्या है?
उत्तर – ‘कविता के बहाने’ कविता में ‘सब घर एक कर देने के माने’ का अर्थ है – सीमा अथवा भेदभाव का बंधन समाप्त हो जाना। जिस प्रकार बच्चे अपने खेल में किसी भी प्रकार की सीमा का ध्यान रखते, उसी प्रकार कविता में भी किसी सीमा, स्थान या समय की कोई सीमा नहीं होती। जिस तरह बच्चे खेलते समय हर प्रकार के भेदभावों को भूलकर सभी घरों को अपना समझ कर उनमें खेलने चले जाते हैं और सभी घरों के मन मुटावों को मिटा कर एक कर देते हैं। ठीक उसी प्रकार कविता भी बिना किसी के साथ भेदभाव किए समाज के हर वर्ग के श्रोता व् पाठक को एक समान रूप से प्रभावित करती हैं। कवि भी बच्चों की ही भांति पूरे समाज को एक समान समझता है। वह बिना किसी भेदभाव के कविता की रचना करता है।

प्रश्न 2 – “उड़ने’ और “खिलने” का कविता से क्या सबंध बनता हैं?
उत्तर – “उड़ने’ और “खिलने” का कविता से गहरा सबंध हैं। चिड़िया एक स्थान से दूसरे स्थान तक की दूरी को उड़कर पार करती है, परंतु कविता कल्पना के पंख लगाकर सीमा और समय तक को पार कर जाती है। फर्क सिर्फ इतना हैं कि चिड़िया की उड़ान सीमित होती है जबकि कविता की उड़ान विस्तृत होती है। इसी तरह कविता फूल की तरह विकसित होती है। जिस तरह फूल अपनी सुंदरता व सुगंध से हर तरफ प्रसन्नता फैलाता है, उसी तरह कविता भी मन के भावों से विकसित होकर लम्बे समय तक मनुष्य को आनंद देती रहती है। फर्क सिर्फ इतना हैं कि फूल के खिलने की भी एक निश्चित सीमा होती हैं। लेकिन कविता बिना मुरझाये हमेशा खिलती रहती है।

प्रश्न 3 – कविता और बच्चे को समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर – कवि ने बच्चे और कविता को समानांतर बताया है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –
बच्चों में रचनात्मक ऊर्जा होती है। कविता भी रचनात्मक तत्वों से युक्त होती है।
बच्चों के खेलने की कोई निश्चित सीमा नहीं होती। इसी तरह कविता का क्षेत्र भी विस्तृत होता है।
बच्चों के सपने असीम होते हैं। इसी तरह कविता की कल्पना शक्ति अद्भुत होती है।
दोनों ही अपने-पराये का भेद नही जानते हैं।

प्रश्न 4 – कविता के संदर्भ में ‘बिना मुरझाए महकने के माने’ क्या होते हैं?
उत्तर – ‘बिना मुरझाए महकने के माने’ से कवि का मानना है कि कविता बिना मुरझाए महकती रहती है। फूल खिलने के एक निश्चित समय के बाद वे मुरझा जाते हैं। लेकिन कविता अपने भावों के कारण हमेशा खिली रहती है। उसमें हमेशा एक ताजगी बनी रहती हैं। इसकी महक हमेशा बरकरार रहती है। क्योंकि एक अच्छी कविता का भाव पीढ़ीदर-पीढ़ी चलता रहता है जो सदैव लोगों को प्रभावित करता रहता हैं। इसीलिए वह बिना मुरझाये सदैव खिली रहती हैं।

प्रश्न 5 – भाषा को ‘सहूलियत’ से बरतने से क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर –“भाषा को सहूलियत से बरतने” का अर्थ है कि अच्छी बात को कहने के लिए और अच्छी कविता को बनाने के लिए सही भाषा व सही शब्दों का, सही बात अथवा भाव से जुड़ना आवश्यक है। तभी उसे समझने में आसानी होगी।

प्रश्न 6 – बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ‘सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती हैं? कैसे?
उत्तर – बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, परंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है। इसका कारण जटिल शब्दों का प्रयोग हो सकता है। कवि व् लेखक अपनी भाषा को कठिन बना देते है तथा आडंबरपूर्ण या चमत्कारपूर्ण शब्दों से अपनी बात को कहने में स्वयं को श्रेष्ठ समझता है। इससे वह अपनी बात के भाव को कहने में असफल हो जाते है। असल में भाषा कविता के भावों को प्रकट करने का एक माध्यम है। लेकिन जब कवि द्वारा कविता में प्रभावशाली व बनावटी भाषा का प्रयोग किया जाता हैं तो कविता बाहर से दिखने में तो बहुत सुंदर लगती हैं मगर उसके भाव स्पष्ट न होने के कारण वह लोगों की समझ में नहीं आ पाती हैं।

प्रश्न 7 – बात (कथ्य) के लिए नीचे दी गई विशेषताओं का उचित बिंबों/मुहावरों से मिलान करें।
(क) बात की चूड़ी मर जाना।
विशेषता – बात में कसावट का ना होना।

(ख) बात की पैंच खोलना।
विशेषता – बात को सहरज और स्पष्ट करना।

(ग) बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना।
विशेषता – बात का पकड़ में ना आना।

(घ) पैंच को कील की तरह ठोक देना।
विशेषता – बात का प्रभावहीन हो जाना।

(ड) बात का बन जाना।
विशेषता – कथ्य और भाषा का सही सामंजस्य बनाना।

 

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