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ओवर वोल्टेज क्या है ? इसके कारण

ओवर वोल्टेज क्या है ? इसके कारण बताइये

ओवर वोल्टेज क्या है ? इसके कारण

ओवर वोल्टेज

जब हम ओवर वोल्टेज के बारे में बात करते है तो हम या तो किसी  electric परिपथ के बारे में बात करते है या फिर किसी ट्रांसमिशन लाइन के बारे में बात करते है या फिर किसी इलेक्ट्रिकल device के बारे में बात करते है  | हम एसा इसलिए करते है क्योकि इन सभी का design या फिर जब इनको बनाया जाता है तो इन्हें वोल्टेज की किसी फिक्स value के लिए बनाया जाता है या फिर वोल्टेज की किसी फिक्स रेंज के लिए  ही इनको बनाया जाता है  जब तक सप्लाई वोल्टेज इनकी फिक्स value या फिर उसी रेंज में रहे जिनके लिए उन device या ट्रांसमिशन लाइन को डिजाईन किया गया है तो वे सही से वर्किंग करते है लेकिन जब किसी कारण से यह voltage इनकी वर्किंग रेंज से या तो अधिक हो जाए या फिर उसकी रेंज के  अधिकतम मान तक पहुँच जाए या फिर ऐसे कहे की उस परिपथ या device के operating voltage से भी अधिक हो जाए इस स्थति को ओवर वोल्टेज घटना कहते है  |

ओवर वोल्टेज किसी भी परिपथ , device , या transmission लाइन के लिए सही नहीं होता है क्योकि ये उस परिपथ या सिस्टम के जो sensitive पार्ट होते है उनको नुकसान पहुचाता है तथा इनके जलने या ख़राब होने का खतरा बड जाता है ये  device किसी परिपथ में लगे  सर्किट बोर्ड , मदर बोर्ड , नेटवर्क adapter, electronic devices, communication devices तथा अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाता है  | ओवर वोल्टेज का होना कई कारणों से हो सकता है जेसे लाइटनिंग की वजह से , किसी सर्किट breaker के ओपन होने की वजह से , या फिर किसी कंडक्टर की grounding होने की वजह से एसे कई कारण हो सकते है |

ओवर वोल्टेज के कारण

अगर हम ओवर वोल्टेज के कारण की बात करे तो भले ही ये कारण बहुत कम समय के लिए घटित हो तथा temporary nature के हो पर ये बहुत ज्यादा नुकसान पहुचाने की क्षमता रखते है तथा ये devices , या ट्रांसमिशन परिपथ को जलाने या खराब करने के लिए उतरदायी हो सकते है | ये   कारण दो तरह के हो सकते है   

1.आतंरिक कारण

2. बाहरी कारण

आतंरिक कारण

आतंरिक कारण ऐसे कारण  होते है जो  पॉवर सिस्टम के internal operation mode के बदलने के कारण ओवर voltage generate करते करते है इन्हें internal over voltage के नाम से भी जाना जाता  है इनमे voltage ज्यादा नहीं बड़ता है केवल नार्मल वोल्टेज दो गुने के पास तक बड़ता है  जिनमे से कुछ इस प्रकार है

1 . स्विचिंग सर्ज

2. इंसुलेशन failure

3. ओपनिंग of  loaded लाइन

4. आर्किंग ग्राउंड

5. रेजोनेंस

स्विचिंग सर्ज

स्विचिंग  ऑपरेशन  किसी circuit की condition को अचानक से change कर देता है जब ओवर voltage स्विचिंग operation से होता है तब उसे स्विचिंग सर्ज कहते हे  ये कई कारणों से हो सकता हे जेसे की जब किसी वोल्टेज source को unloded लाइन से जोड़ा जाता हे तो इसमें travelling wave इस लाइन को rapidly  चार्ज करती हे  और जब ये wave ओपन end पर पहुचती हे तो बिना sign को बदले ये waves वापस reflected हो जाती हे  जिससे ये voltage को इस end पर  डबल कर देती हे इसके बाद ये जो reflected waves होती हे ये supply end पर पहुचती हे और वहा  और voltage rise हो जाता हे | इसके अलावा जब loaded लाइन को supply source से जोड़ा जाए तब भी ओवर voltage हो सकता हे जब लोड suddenly interrupted हो जाए | या फिर स्विचिंग सर्ज में current chopping हो जाए तब भी high voltage produce होता हे जो की circuit breaker के पास होता हे और  circuit breaker को नुकसान पहुंचाता हे  |

इंसुलेशन failure

इंसुलेशन failure किसी लाइन के किसी केबल और  earth के बिच हो सकता हे और ये बहुत ही frequent operation होता हे जब भी इंसुलेशन failure होता हे तो जिस स्थान पर fault होता हे वहा का potential एकदम से बदलता हे और ये इसके अधिकतम मान से सीधा जीरो हो जाता हे या बहुत ही कम हो जाता हे जिससे एक नेगेटिव वोल्टेज wave generate होती हे जो की सर्ज की form में होती हे और fault वाले स्थान से दोनों दिशाओ में आगे बडती हे  जिससे fault वाले स्थान की energy dissipated हो जाती हे और energy loss होता हे | इंसुलेशन failure कई तरह से हो सकता हे जो किसी overhead  ट्रांसमिशन लाइन के कंडक्टर या फिर केबल के core तथा किसी अन्य कंडक्टर या केबल core के साथ या फिर earth के साथ भी हो सकता हे |

ओपनिंग of  loaded लाइन

जब कोई ट्रांसमिशन लाइन जिस पर लोड लगा हो तथा जब उसको suddenly ओपन किया जाता हे तो उसमे एक sudden transient voltage सेट उप हो जाता हे जिसके कारण जो low वोल्टेज ट्रांसमिशन सिस्टम होते हे उनको ओवर वोल्टेज की स्थति को face करना पड़ता हे | और उनके लिए हायर safety फैक्टर को  justified करना पड़ता हे  |

आर्किंग  ग्राउंड

यह तब होता हे जब न्यूट्रल को earth से कनेक्ट नही किया जाता हे जब transmission  लाइन के सभी तारो को  insulated किया गया हो  लेकिन जब किसी तार में flashover होने से इंसुलेशन material पंक्चर हो जाता हे तो तब लाइन के किसी कमजोर पॉइंट पर ब्रेकडाउन हो जाता हे जिससे कंडक्टर discharged होता हे उस पॉइंट पर झा ब्रेकडाउन हुआ हे और ये डिस्चार्ज high frequency oscillation के साथ होता हे | अब three फेज सिस्टम में से एक कंडक्टर discharge होता हे और बाकि दोनों कंडक्टर में वोल्टेज जो की फेज तो लाइन voltage होता हे वो बड जाता हे | इसके कारण बाकि कंडक्टर में वोल्टेज बड़ने से दुसरे पॉइंट पर fault होने का खतरा बड जाता हे | इस प्रकार ये  dangerous fault होते हे और ये serius डैमेज कर सकते हे power सिस्टम को जो की इंसुलेशन failure से होते हे | इनसे बचने के लिए लाइन की न्यूट्रल की  earthing की जाती हे |

रेजोनेंस  

रेजोनेंस एसी कंडीशन होती हे जिसमे किसी इलेक्ट्रिकल circuit की impedance purely resistive हो जाती हे इस condition में circuit का power फैक्टर unity हो जाता हे तथा साथ ही   इस कंडीशन में inductive reactance तथा capacitive reactance बराबर हो जाती हे जिसके कारण ट्रांसमिशन लाइन में high voltage produce हो जाता हे  | जब standing waves का amplitude बहुत ज्यादा या मैक्सिमम हो जाता हे तो ये ट्रांसमिशन लाइन को डैमेज कर देती हे |

बाहरी कारण

बाहरी कारण एसे होते हे जो या तो thundestorm या फिर lightning के कारण ओवर वोल्टेज की कंडीशन generate कर  देते हे इनके होने के कुछ कारण इस प्रकार हे

1.जब किसी कंडक्टर , मेटल ,केबल या किसी device पर या तो डायरेक्ट या फिर इसके क्लोज lightning strike हो जाए

2.किसी lightning चैनल के द्वारा lightning strike को डायरेक्ट ग्राउंड पर diverted कर  दिया जाए

3.ओवरहेड लाइन पर cloud-cloud  डिस्चार्ज होने से lightning strike हो जाए

4. लाइन की length के along atmospheric changes के कारण voltage induce हो जाए |  

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