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अल्टरनेटर क्या होता है ? संरचना | वर्किंग | प्रकार

अल्टरनेटर क्या होता है ? संरचना | वर्किंग | प्रकार

अल्टरनेटर

आज के इस Topic में हम अल्टरनेटर ( Alternator ) के बारे में समझेंगे जिसमे हम सबसे पहले यह समझेंगे की अल्टरनेटर क्या होता है और इसे हिंदी में क्या कहा जाता है इसके बाद हम यह समझेंगे की इसकी संरचना किस प्रकार की होती है अर्थात इसकी संरचना में कोन – कोन से Parts  होते है और इसके बाद हम अल्टरनेटर की वर्किंग ( Working ) को समझेंगे और इसके बाद हम इसके प्रकार ( Types ) को समझेंगे तो चलिए समझना Start करते है की अल्टरनेटर क्या होता है –

अल्टरनेटर ( Alternator )

अल्टरनेटर ( Alternator ) एक ऐसा Instrument होता है जिसे हिंदी में प्रत्यावर्तक कहा जाता है और इसे प्रत्यावर्तक इसलिए कहा जाता है क्योंकि इससे जो Output के Form में Current प्राप्त होती है वह  प्रत्यावर्ती धारा ( Alternating Current ) होती  है इसलिए इसे Alternator या हिंदी में प्रत्यावर्तक कहा जाता है |

लेकिन अब हमें यह पता होना चाहिए की आखिर किस प्रकार से यह प्रत्यावर्ती धारा ( Alternating Current ) प्राप्त होती है इसके लिए हम समझते है की जब अल्टरनेटर ( Alternator ) में लगी हुई Shaft को Input की Form में Mechanical Energy ( यांत्रिक ऊर्जा )  दी जात्ती है तो इसके अन्दर लगे Rotor की वाइंडिंग पर Output  हमें Electrical Energy ( विद्युत ऊर्जा )  की Form में प्राप्त होती है |

और इस प्रकार जब Alternator की Help से Mechanical Energy को Electrical Energy में Convert किया जाता है तब प्रत्यावर्ती धारा ( Alternating Current ) प्राप्त होती है और इसीलिए इसे प्रत्यावर्तक (Alternator ) या फिर AC जनरेटर भी कहा जाता है | अब आगे हम इसकी संरचना किस प्रकार की होती है यह समझेंगे |

अल्टरनेटर की संरचना

अगर हम इसकी संरचना की बात करे तो मुख्य रूप से चार Parts से मिलकर बना होता है जिसमे से सबसे पहला होता है रोटर ( Rotor ) दूसरा होता है स्टेटर ( Stator ) तीसरा Part होता है एक्साइटर और चौथा Part होता है प्राइम मूवर ( Prime Mover ) इस प्रकार इसके चार Main Parts होते है अब हम इनको Detail में समझेंगे |

रोटर ( Rotor )

यह एक ऐसा Part होता है जो हमेशा घूमता है और इसी में एक वाइंडिंग लगी होती है जिसे Rotor Winding कहा जाता है Rotor Winding एक थ्री फेज वाइंडिंग होती है और इसके हर एक फेज के बीच 120 डिग्री का Electrical Angle होता है और इन्ही की Help से मैग्नेटिक फील्ड भी Produce किया जाया है जो की इसकी शाफ्ट पर लगे Slip Ring से Induce होता है इस प्रकार यह Rotor लगा होता है और यह रोटर भी दो प्रकार के होते है |

1 . Salient Pole रोटर

2 . Cylindrical रोटर

स्टेटर ( Stator )

इसे स्टेटर ( Stator ) या फिर Stationary Part भी कहा जाता है क्योंकि यह हमेशा स्थिर रहता है किसी भी प्रकार की Motion नही करता है और इसमें भी एक वाइंडिंग को कनेक्ट किया जाता है जिसे Stator Winding कहा जाता है | जब Stator Winding को Supply से Connect किया जाता है तो इसमें लगे हुए Poles की मदद से इसमें मैग्नेटिक फील्ड Procuce होता है इस प्रकार स्टेटर ( Stator ) लगा होता है |

एक्साइटर

एक्साइटर एक प्रकार का DC शंट होता है जो की DC Supply Provide करता है इसका मतलब यह है की स्टेटर के अन्दर लगे हुए Poles को मैग्नेटिक फील्ड Generate करने एवं Poles को Magnetise करने के लिए DC सप्लाई की जरुरत पड़ती है जो की एक्साइटर के द्वारा ही Provide की जाती है |

प्राइम मूवर ( Prime Mover )

किसी भी Alternator के लिए प्राइम मूवर ( Prime Mover ) एक Important Part होता है क्योंकि प्राइम मूवर ( Prime Mover ) वह Part होता है जिसकी Help से ही Alternator की Shaft को घुमाया जाता है किसी भी अल्टरनेटर के लिए अलग – अलग Type के Prime Mover हो सकते है जैसे की टरबाइन , डीजल इंजन , या फिर किसी मोटर का Use भी कर सकते है और इनका  चयन Alternator की RPM क्षमता कितनी है इस बात पर निर्भर करता है |

अब हम इसकी वर्किंग को समझते है |

वर्किंग

इसकी वर्किंग फैराडे के Electromagnetic Induction के सिद्धांत पर आधारित होती है जिसका कथन यह होता है की जब किसी कंडक्टर को किसी Magnetic Field में रखा जाता है तथा यह कंडक्टर जब Move करता है तो इस कंडक्टर के Across एक EMF Induce हो जाता है और अगर इसके Path को Close रखा जाए तो यह EMF करंट को सर्किट में Flow करवाता है |

जब इसी नियम का Use अल्टरनेटर में किया जाता है और जब किसी भी Prime Mover की सहायता से शाफ्ट को घुमाया जाता है तो इसमें रोटर से उत्पन्न होने वाली चुम्बकीय बल रेखाएं Stator के चालक का भेदन करती है और फिर फैराडे के Electromagnetic Induction के सिद्धांत के आधार पर हमें Rotor की वाइंडिंग पर Output  हमें Electrical Energy ( विद्युत ऊर्जा )  की Form में प्राप्त होती है | और इस प्रकार प्रत्यावर्ती धारा ( Alternating Current ) प्राप्त होती है |

अब हम यह समझेंगे की इसके कितने प्रकार होते है |

प्रकार

अगर हम अल्टरनेटर के प्रकार की बात करे तो इसके कई प्रकार होते है जो की इनकी शाफ्ट को घुमाने के लिए Use किये गए Prime Mover के आधार पर होते है जेसे की –

1 . Water Turbine Alternator

2 . Diesel Engine Alternator

3 . Single Phase Alternator

4 . Three Phase Alternator

5 . Rotating Field Alternator

6 . Rotating Armature Alternator

etc.

ऐसे कई प्रकार के Alternator होते है जिनका Use आजकल किया जाता है |

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